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जब इलाके में मुस्लिम हैं ही नहीं तो वोटर लिस्ट में कैसे जुड़े उनके नाम?: गुजरात के बापूनगर में स्थानीयों ने उठाए सवाल, ऑपइंडिया से बोले- SIR होना बहुत जरूरी

ऑपइंडिया ने जब इलाके के एक 18-19 साल के युवक से बात की, तो उसने बताया कि वह जन्म से ही इसी सोसाइटी में रह रहा है। उसके अनुसार, इस चाली और सोसाइटी में सिर्फ हिंदू परिवार रहते हैं, कोई मुस्लिम नहीं। उसने कहा कि अगर वोटर लिस्ट में मुस्लिम नाम आए हैं, तो यह गलत है और ऐसे नामों के खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए।

बिहार में विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) प्रक्रिया सफलतापूर्वक पूरी होने के बाद, चुनाव आयोग ने अब दूसरे चरण में देश के 12 राज्यों में यह प्रक्रिया शुरू की है, जिसमें गुजरात भी शामिल है।

यह प्रक्रिया मंगलवार (4 नवंबर 2025) से शुरू हुई है। इसी दौरान अहमदाबाद के बापूनगर विधानसभा क्षेत्र से एक गंभीर शिकायत सामने आई है। स्थानीय लोगों का कहना है कि हिंदू बहुल इलाकों की मतदाता सूची में मुस्लिम नाम दर्ज किए गए हैं, जबकि वहाँ मुस्लिम आबादी नहीं रहती।

यह मामला बापूनगर के राखियाल इलाके की प्रेरणा सोसाइटी और नरोत्तमदासनी चाली से जुड़ा है। स्थानीय निवासियों ने बताया कि उनके इलाके में कुछ ईसाई परिवार तो रहते हैं, लेकिन मुस्लिम नहीं। फिर भी मतदाता सूची में मुस्लिम नाम दर्ज मिल रहे हैं।

लोगों ने यह भी बताया कि मतदाता सूची में उनके मकान नंबर तक गलत लिखे गए हैं। उन्होंने इस पर सवाल उठाते हुए कहा कि ऐसी त्रुटियों को सुधारने के लिए SIR प्रक्रिया जरूरी है ताकि फर्जी या डुप्लिकेट नाम हटाए जा सकें।

ऑपइंडिया की टीम जब मौके पर पहुँची और स्थानीय लोगों से बात की, तो उन्होंने इस प्रक्रिया का समर्थन किया और कहा कि मतदाता सूची को पारदर्शी और सही बनाए रखना बेहद जरूरी है।

(फोटो: ऑपइंडिया)

जब ऑपइंडिया की टीम अहमदाबाद के बापूनगर स्थित राखियाल इलाके की प्रेरणा सोसाइटी पहुँची, तो वहाँ के लोगों ने बताया कि इस सोसाइटी में सालों से सिर्फ हिंदू और ईसाई लोग ही रहते आए हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि यहाँ कभी कोई मुस्लिम परिवार नहीं रहा, फिर भी मतदाता सूची में कुछ मुस्लिम नाम दर्ज हो गए हैं।

सोसाइटी में लंबे समय से रह रहे एक व्यक्ति ने बताया कि वोटर लिस्ट में कुछ नाम गलत हैं और इन्हें हटाने के लिए SIR प्रक्रिया जरूरी है। वहीं, कनुभाई क्रिश्चियन नाम के निवासी ने बताया कि वह बचपन से यहीं रह रहे हैं और उन्होंने कहा, “हमारी सोसाइटी में न तो अक्षबानू नाम की कोई महिला रहती हैं, न ही कोई और मुस्लिम परिवार।” उनका मानना है कि मतदाता सूची में सिर्फ उन्हीं लोगों के नाम होने चाहिए जो वास्तव में यहाँ रहते हैं।

एक बुज़ुर्ग महिला ने भी यही बात दोहराई। उन्होंने बताया कि वह लगभग 40 सालों से इस सोसाइटी में रह रही हैं और उनकी चाली में सिर्फ हिंदू परिवार हैं। उन्होंने कहा कि मतदाता सूची में कुछ गलत नाम जोड़ दिए गए हैं जिन्हें हटाया जाना चाहिए।

ऑपइंडिया ने जब इलाके के एक 18-19 साल के युवक से बात की, तो उसने बताया कि वह जन्म से ही इसी सोसाइटी में रह रहा है। उसके अनुसार, इस चाली और सोसाइटी में सिर्फ हिंदू परिवार रहते हैं, कोई मुस्लिम नहीं। उसने कहा कि अगर वोटर लिस्ट में मुस्लिम नाम आए हैं, तो यह गलत है और ऐसे नामों के खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए। युवक ने कहा कि ऐसी गड़बड़ियों को दूर करने के लिए SIR प्रक्रिया बहुत जरूरी है।

महेशभाई नाम के एक और स्थानीय निवासी ने बताया कि वह पिछले 53 सालों से इस इलाके में रह रहे हैं। उन्होंने कहा, “मैंने कभी नहीं सुना कि इस सोसाइटी या चाली में किसी मुस्लिम व्यक्ति ने घर खरीदा हो या किराए पर लिया हो।” उन्होंने शक जताया कि यह किसी साजिश का हिस्सा हो सकता है और इसकी पूरी जाँच होनी चाहिए कि हिंदू बहुल इलाके की मतदाता सूची में मुस्लिम नाम कैसे शामिल हो गए।

SIR प्रक्रिया को लेकर महेशभाई ने कहा कि मतदाता पंजीकरण का सत्यापन बिल्कुल सही कदम है। उन्होंने कहा, “ऐसी गड़बड़ियों को अभी ही ठीक करना जरूरी है, क्योंकि अगर बाद में मामला बढ़ गया तो इसे संभालना मुश्किल होगा। अभी जो जाँच चल रही है, वह बिल्कुल सही दिशा में है।”

आमतौर पर हर चुनाव से पहले मतदाता सूची में केवल छोटे-मोटे संशोधन किए जाते हैं, लेकिन पूरी तरह से समीक्षा नहीं होती। इसी वजह से कई गलतियाँ और फर्जी नाम सूची में बने रह जाते हैं। ऐसे में SIR (विशेष गहन पुनरीक्षण) जैसी प्रक्रिया बेहद जरूरी है ताकि मतदाता सूची को पूरी तरह सही किया जा सके।

बापूनगर से आई शिकायतें यह दिखाती हैं कि गुजरात समेत पूरे देश में SIR क्यों जरूरी है। पिछली बार यह प्रक्रिया कई दशक पहले हुई थी और अब चुनाव आयोग फिर से पूरी मतदाता सूची का सत्यापन और संशोधन कर रहा है ताकि डुप्लिकेट नाम हट सकें और सही मतदाता सूची में शामिल रहें।

बिहार में यह प्रक्रिया सफल रही थी और अब इसे गुजरात, पश्चिम बंगाल, उत्तर प्रदेश समेत 12 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में शुरू किया गया है। SIR के तहत बीएलओ (बूथ लेवल अधिकारी) घर-घर जाकर दस्तावेज़ों की जाँच करेंगे और मतदाता सूची को नए सिरे से तैयार करेंगे। इससे फर्जी या गलत नाम हटाए जा सकेंगे।

यह प्रक्रिया करीब एक महीने तक चलेगी। इसके बाद जिनके नाम हटाए जाएँगे, उन्हें अपील करने का मौका दिया जाएगा। अंतिम मतदाता सूची फरवरी में जारी होने की संभावना है।

गुजरात में पहले भी कई बार ऐसे मामले सामने आए हैं, जहाँ बांग्लादेशी घुसपैठियों द्वारा जाली दस्तावेज बनाकर मतदाता सूची में नाम जोड़े गए। SIR प्रक्रिया से ऐसे अवैध मतदाताओं की पहचान कर उनके नाम हटाए जा सकेंगे, जिससे चुनाव प्रक्रिया और अधिक पारदर्शी बनेगी।

(यह रिपोर्ट मूल रूप से गुजराती में लिंकन सोखाडिया ने लिखी है जिसको पढ़ने के लिए इस लिंक पर क्लिक करें)

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લિંકન સોખડિયા
લિંકન સોખડિયા
Journalist | Editor | Multimedia Producer Bridging the gap between ground reality and digital storytelling. Specializing in hard-hitting regional news, investigative reports, and high-impact digital media production.

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