बिहार में अपनी खोई सियासी जमीन तलाशने में जुटी कॉन्ग्रेस को इस बार के विधानसभा चुनाव में और भी बड़ा झटका लगा है। बिहार विधानसभा चुनाव में पार्टी को बेहतर प्रदर्शन की उम्मीद थी लेकिन नतीजों ने बता दिया कि बिहार में कॉन्ग्रेस कितने पानी में है। पार्टी दहाई का आँकड़ा भी नहीं छू पाई और 6 सीटों पर ही सिमट गई।
इस नतीजे के बाद जहाँ एक ओर कॉन्ग्रेस पार्टी के कई नेता चुनाव आयोग पर दोष मढ़ने पर तुले हैं तो वहीं कई नेताओं ने पार्टी के को लेकर रणनीतिक चूकों की ओर इशारा किया है। नेताओं ने संगठन की कार्यशैली पर प्रश्नचिह्न खड़े किए हैं।
चुनावी नतीजों के बाद कॉन्ग्रेस के कई नेताओं ने कहा कि स्थिति बेहद गंभीर है और पार्टी को कथित आत्मनिरीक्षण से आगे बढ़कर कुछ कड़े कदम उठाने होंगे। कुछ नेताओं ने यह भी कहा कि सिर्फ आत्मनिरीक्षण नहीं, अब सच स्वीकार करने और वास्तविकता का सामना करने का समय आ गया है।
वरिष्ठ नेता मणिशंकर अय्यर ने तो स्पष्ट शब्दों में कहा कि पार्टी ने उन्हें लंबे समय से दरकिनार कर दिया है। दूसरी ओर, कई पूर्व नेताओं और कार्यकर्ताओं ने भी संगठन की कमजोरियों को उजागर किया है। उनका कहना है कि पार्टी की हार के पीछे बूथ-स्तर पर पार्टी की ढीली पकड़, गलत टिकट वितरण, स्थानीय नेतृत्व की कमी और शीर्ष नेतृत्व से दूरी जैसे गंभीर कारण जिम्मेदार हैं।
कॉन्ग्रेस के बड़े नेताओं जैसे शशि थरूर, मणिशंकर अय्यर, कृपानाथ पाठक, मुमताज पटेल और कई नेताओं के हालिया बयानों से साफ समझा जा सकता है कि वे अपनी ही पार्टी की नीतियों से खुद खुश नहीं है।
बिहार के जिम्मेदार लोगों ने सही जानकारी नहीं दी: कॉन्ग्रेस नेता कृपानाथ पाठक
कॉन्ग्रेस नेता कृपानाथ पाठक ने मीडिया से बातचीत में कहा, “हमारा मानना है कि राज्य में जिम्मेदार लोगों ने सही जानकारी नहीं दी। उन्होंने सही लोगों के बारे में सही जानकारी नहीं जुटाई। चाहे यह गलती से हुआ हो या चूक से, इतनी बड़ी चूक कैसे हो गई? लोग हमसे लगातार शिकायत कर रहे हैं लेकिन हमें लगता है कि जो बातें उच्च अधिकारियों तक पहुँचनी चाहिए थीं, वे ठीक से नहीं पहुँचीं। अब उन्हें इस पर ध्यान देना होगा, वरना यह एक गंभीर संकट का कारण बन सकता है।”
Patna, Bihar: On the #BiharAssemblyElections, Congress leader Kripananth Pathak says, "We believe that those in the state who were responsible did not convey the correct information. They did not gather accurate details about the right people. Whether it was by mistake or… pic.twitter.com/iGCtAdAiFy
— IANS (@ians_india) November 14, 2025
विश्लेषण करना चाहिए कि कहाँ गलतियाँ हुईं: कॉन्ग्रेस सांसद शशि थरूर
वहीं कॉन्ग्रेस सांसद शशि थरूर ने बिहार चुनाव के परिणाम जानने के बाद मीडिया से बात करते हुए कहा, “यह बिल्कुल साफ है कि एनडीए की बढ़त जबरदस्त है। यह स्पष्ट रूप से बेहद निराशाजनक है और अगर यही अंतिम परिणाम निकलता है, तो मुझे लगता है कि बहुत गंभीर आत्मनिरीक्षण की जरूरत होगी और मेरा मतलब सिर्फ आत्मनिरीक्षण, बैठकर सोचना नहीं है बल्कि यह भी अध्ययन करना है कि क्या गलतियाँ हुईं, क्या रणनीतिक, संदेशात्मक या संगठनात्मक गलतियाँ रहीं।”
#WATCH | Thiruvananthapuram, Kerala: On #BiharElections, Congress MP Shashi Tharoor says, "… it's very clear that the lead is overwhelmingly with the NDA. It's obviously seriously disappointing, and if that turns out to be the final result, then I think there will have to be… pic.twitter.com/10rnFhMEs1
— ANI (@ANI) November 14, 2025
थरूर ने आगे कहा, “मैं बिहार में प्रचार करने वाला व्यक्ति नहीं हूँ। मुझे बिहार में प्रचार के लिए आमंत्रित नहीं किया गया था, इसलिए मैं आपको कोई प्रत्यक्ष जानकारी नहीं दे सकता। लेकिन मैं लोगों से बात कर रहा हूँ…हमारी पार्टी के नेताओं को इस बात का गंभीर विश्लेषण करना चाहिए कि कहाँ गलतियाँ हुईं।”
मणिशंकर अय्यर: मेरी ही पार्टी ने मुझको निकाल दिया है
कॉन्ग्रेस के वरिष्ठ नेता मणिशंकर अय्यर ने तो सीधे कहा, “एक जमाने में मैं बहुत सीनियर था लेकिन हाल में मुझको एकतरफा किया गया है। मैंने शुरू में ही मैंने स्पष्टीकरण दिया था कि मैं कॉन्ग्रेस के जानिब से यहाँ नहीं आया हूँ, व्यक्तिगत रुप से यहाँ पहुँचा हूँ।” उन्होंने आगे कहा, “मैं बहुत छोटा आदमी हूँ, मेरी ही पार्टी ने मुझको निकाल दिया है। मोदी जी मेरे बारे में गलत-गलत बातों करते हैं और मेरी ही पार्टी उसे स्वीकार करती है।
कांग्रेस ने मुझे उस लायक नहीं समझा -मणिशंकर अय्यर #BiharElection2025 #BiharResult #ResultsWithNews18 @KishoreAjwani | @RubikaLiyaquat pic.twitter.com/HR4yyKL2EJ
— News18 India (@News18India) November 14, 2025
यह हमारे संगठन की कमजोरी को दर्शाता है: कॉन्ग्रेस नेता और पूर्व राज्यपाल निखिल कुमार
कॉन्ग्रेस नेता और पूर्व राज्यपाल निखिल कुमार ने स्पष्ट रुप से पार्टी की गलती निकाली और कहा, “यह हमारे संगठन की कमजोरी को दर्शाता है। किसी भी चुनाव में, एक राजनीतिक दल अपनी संगठनात्मक शक्ति पर निर्भर करता है। अगर संगठन कमजोर है और प्रभावी ढंग से काम नहीं कर सकता, तो कुल मिलाकर परिणाम प्रभावित होते हैं।”
Patna, Bihar: On state Assembly elections, Congress leader and former Governor Nikhil Kumar says, "This reflects the weakness of our organization. In any election, a political party relies on its organizational strength. If the organization is weak and cannot function… pic.twitter.com/s0FMnjTytd
— IANS (@ians_india) November 14, 2025
उन्होंने कहा, “हमारे सभी उम्मीदवार बहुत सक्षम हैं लेकिन और भी बेहतर उम्मीदवार चुने जा सकते थे। संगठन को रणनीतिक और समझदारी से काम करना चाहिए था और सभी निर्वाचन क्षेत्रों में अपनी मजबूत उपस्थिति बनाए रखनी चाहिए थी।”
#WATCH | Patna, Bihar: As the NDA leads the Bihar election results, Congress leader Nikhil Kumar says, "We are very upset about it. We know that the Congress Party's principles, its ideology, and its policies have shaped this country for 47 years, shows that it is the party that… pic.twitter.com/SNaHBQtffu
— ANI (@ANI) November 14, 2025
कॉन्ग्रेस नेता निखिल कुमार ने कहा, “हमारे उम्मीदवारों के चयन में कुछ मतभेद थे और शायद हमने सर्वश्रेष्ठ उम्मीदवारों का चयन नहीं किया लेकिन हाँ, यह एक संभावना है। संभावना यह थी कि चुने गए कुछ उम्मीदवार सर्वोत्तम गुणवत्ता वाले नहीं रहे होंगे। और शायद इसी वजह से यह परिणाम हुआ।”
आत्ममंथन करेंगे कि कॉन्ग्रेस कहाँ पिछड़ी: कॉन्ग्रेस सांसद अखिलेश प्रसाद
चुनाव नतीजों पर कॉन्ग्रेस सांसद अखिलेश प्रसाद सिंह ने कहा, “हम आत्ममंथन करेंगे कि कॉन्ग्रेस कहाँ पिछड़ गई। हालाँकि, मैं नीतीश कुमार और NDA को बधाई देता हूँ। दोस्ताना मुकाबला नहीं होना चाहिए था- राजद के संजय यादव और हमारी पार्टी के कृष्णा अलावरु बेहतर बताएँगे कि चुनावों में हमारा प्रदर्शन इतना खराब क्यों रहा।”
VIDEO | Patna: Congress MP Akhilesh Prasad Singh on election results says, “We will introspect where Congress lagged. However, I congratulate Nitish Kumar and the NDA. There shouldn’t have been friendly fights – RJD’s Sanjay Yadav and our party’s Krishna Alavarru will better… pic.twitter.com/STL2FCxvx4
— Press Trust of India (@PTI_News) November 14, 2025
कब तक सफलता का इंतजार करेंगे?: मुमताज पटेल
कॉन्ग्रेस के वरिष्ठ नेता रहे अहमद पटेल की बेटी मुमताज पटेल ने भयंकर नाराजगी जताते हुए कहा, “कोई बहाना नहीं, कोई दोषारोपण नहीं, कोई आत्मनिरीक्षण नहीं, अब समय है अपने भीतर झाँककर सच्चाई को स्वीकार करने का।”
No excuses ,No blame game No introspection , it’s time to look within and accept reality. Till when will countless loyal ground workers who have stayed with the party through thick and thin …wait to see success … instead it’s failure after failure due to power concentrated in…
— Mumtaz Patel (@mumtazpatels) November 14, 2025
उन्होंने एक्स पर पोस्ट करते हुए लिखा, “अनगिनत वफादार जमीनी कार्यकर्ता, जो हर मुश्किल हालात में पार्टी के साथ रहे हैं…कब तक सफलता का इंतजार करेंगे…बल्कि सत्ता कुछ ऐसे लोगों के हाथों में केंद्रित होने के कारण, जो जमीनी हकीकत से पूरी तरह कटे हुए हैं और बार-बार इस महान पुरानी पार्टी की दुर्गति और पराजय के लिए जिम्मेदार हैं, उन्हें लगातार असफलता ही हाथ लगेगी। और मेरी बात याद रखना, इन्हीं लोगों को बार-बार पुरस्कृत किया जाएगा क्योंकि उन्होंने अपने नियंत्रण और शक्ति से खुद को अपरिहार्य बना लिया है।”
कॉन्ग्रेस नेता शकील अहमद: मैं कॉन्ग्रेस में नहीं, मुझे बोलने का कोई अधिकार नहीं
बिहार के पूर्व मंत्री और कॉन्ग्रेस नेता शकील अहमद ने मीडिया से बात करते हुए कहा, “मैं कॉन्ग्रेस में नहीं हूँ। मुझे बोलने का कोई अधिकार नहीं है। लेकिन टिकट वितरण के तुरंत बाद कॉन्ग्रेस के कई वरिष्ठ नेताओं ने प्रेस कॉन्फ्रेंस की और कहा कि फलां व्यक्ति ने गलत कारणों से टिकट बाँटे हैं, वित्तीय अनियमितताओं और अन्य मुद्दों का आरोप लगाया है… हमें उम्मीद है कि जाँच होगी और अगर आरोप सही हैं और टिकट किसी और कारण से दिए गए हैं, तो जाहिर है उनके खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए।”
#WATCH | Delhi: Regarding the shortcomings of the Congress in the Bihar elections, Former Bihar Minister and Congress leader Shakeel Ahmad says, "I am not in the Congress. I have no right to speak. But immediately after the ticket distribution, several senior Congress leaders… pic.twitter.com/DcURDQS6t6
— ANI (@ANI) November 14, 2025
करारी हार ने कॉन्ग्रेस के भीतर गहरे संकट और आत्ममंथन की माँगों को किया तेज
कॉन्ग्रेस के नेताओं के प्रतिक्रियाओं को देखकर साफ लगता है कि पार्टी के भीतर गहरी बेचैनी, असंतोष और आत्मविश्वास की कमी है। बयान भले अलग-अलग नेताओं के हों लेकिन इन सबके पीछे एक ही भावना दिखाई देती है कि हार का असली कारण संगठन के भीतर की कमजोरी, गलत आकलन, गलत उम्मीदवार चयन और शीर्ष नेतृत्व का जमीनी सच्चाइयों से दूर रहना।
नेताओं के मन में यह भी चल रहा है कि इतने वर्षों से लगातार मिल रही नाकामियों पर भी पार्टी की ऊपरी परत में कोई बड़ा बदलाव नहीं होता। जो लोग हार के लिए जिम्मेदार हैं, वही आगे भी फैसले ले रहे हैं और जमीनी स्तर पर मेहनत करने वाले कार्यकर्ताओं की आवाज लगातार अनसुनी हो रही है।
कई नेताओं के वक्तव्यों से यह भी साफ है कि पार्टी की आंतरिक लोकतांत्रिक संरचना कमजोर पड़ चुकी है। नेताओं को लगता है कि शीर्ष नेतृत्व अपने चार-पाँच सलाहकारों पर ही निर्भर रहता है और ये लोग जमीनी जानकारी तक नहीं पहुँचते या जानबूझकर असल हालत को दबा देते हैं।
हालात इतने खराब हैं कि कुछ वरिष्ठ नेता खुद स्वीकार कर रहे हैं कि उन्हें पार्टी से दूर कर दिया गया है, उनकी सलाह या अनुभव की कोई अहमियत नहीं बची है। इससे यह संकेत मिलता है कि पार्टी में संवादहीनता और अविश्वास का माहौल बढ़ रहा है।
गौरतलब है कि बिहार विधानसभा चुनाव 2025 में राज्य की सत्ता में एक बार फिर NDA की जोरदार वापसी हुई है। गठबंधन ने 200 से अधिक सीटों पर जीत दर्ज कर प्रचंड बहुमत हासिल किया है।
इन चुनावों में बीजेपी सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी, जिसे 89 सीटों का जनादेश मिला। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की पार्टी जनता दल (यूनाइटेड) 85 सीटों के साथ दूसरे स्थान पर रही। खास बात यह है कि 243 सीटों वाली विधानसभा में बीजेपी और JDU दोनों ने 101–101 सीटों पर मुकाबला किया था।
विपक्ष में आरजेडी तीसरी सबसे बड़ी पार्टी बनी है और उसे 26 सीटों पर सफलता मिली। वहीं चिराग पासवान की लोक जनशक्ति पार्टी (राम विलास) ने 28 सीटों पर किस्मत आजमाई और 19 सीटों पर जीत हासिल की।
वहीं चुनाव में कॉन्ग्रेस का प्रदर्शन बेहद निराशाजनक रहा। 60 से अधिक सीटों पर चुनाव लड़ने के बावजूद पार्टी केवल 6 सीटें ही जीत पाई और दहाई का आँकड़ा भी पार नहीं कर सकी। इसे लेकर अब कॉन्ग्रेस पार्टी के नेताओं में भी अपनी ही पार्टी के प्रदर्शन को लेकर गहरी नाराजगी देखने को मिल रही है।
बिहार की करारी हार ने कॉन्ग्रेस के भीतर गहरे संकट और आत्ममंथन की माँगों को और तेज कर दिया है और संकेत साफ हैं कि पार्टी में निकट भविष्य में बड़ा आंतरिक मंथन देखने को मिल सकता है।


