झूठ बोला, सबूत छिपाए, गलत जानकारी दी: ‘धर्मस्थल’ मामले में दाखिल 3900 पन्नों की चार्जशीट में SIT ने डाला 6 लोगों का नाम, शिकायतकर्ता से लेकर गवाह बनाए गए आरोपित

कर्नाटक के धर्मस्थल में हुए कथित सामूहिक दफन मामले की जाँच ने अब एक नया मोड़ ले लिया है। इस हाई-प्रोफाइल केस की जाँच कर रही स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (SIT) ने बेलटांगडी की न्यायिक कोर्ट में 3900 पन्नों का आरोप पत्र (चार्जशीट) दाखिल किया है। खास बात यह है कि SIT ने इस मामले के मूल गवाह-शिकायतकर्ता समेत छह लोगों को ही झूठी जानकारी देने और जाँच को गुमराह करने का आरोपित बनाया है।

शिकायतकर्ताओं पर ही उल्टा पड़ा मामला

SIT ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि उनके पास इस बात के पर्याप्त सबूत हैं कि मूल गवाह-शिकायतकर्ता और उनके साथियों ने कथित सामूहिक दफन की जानकारी या तो गलत दी थी, उसे बहुत बढ़ा-चढ़ाकर पेश किया, या फिर जाँच को भटकाने की कोशिश की।

यही वे लोग थे, जिन्होंने सबसे पहले यह दावा किया था कि धर्मस्थल में कई शवों को गैर-कानूनी तरीके से दफनाया गया है और यह किसी गैर-न्यायिक गतिविधि से जुड़ा हो सकता है।

जाँच के बाद बदली कहानी की दिशा

इन शुरूआती दावों के बाद SIT ने बड़े पैमाने पर खुदाई, परीक्षण और फॉरेंसिक विश्लेषण किया था। लेकिन अब SIT की रिपोर्ट बताती है कि जाँच के दौरान कहानी की दिशा पूरी तरह बदल गई। अब आरोप उन्हीं लोगों पर आ गए हैं, जिन्होंने सबसे पहले यह मामला उठाया था।

SIT ने BNSS (भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता) की धारा 215 के तहत यह रिपोर्ट दायर की है। यह धारा झूठी जानकारी देने, सबूत छिपाने या जाँच को गुमराह करने जैसे अपराधों से संबंधित है।

कोर्ट में अब आगे क्या होगा?

आरोप पत्र में जिन 6 लोगों को आरोपित बनाया गया है, उनके नाम महेश शेट्टी टिमरोडी, गिरीश मट्टननवर, विट्टल गौड़ा, जयंथ टी और सुजाता गौड़ा हैं। अब इन छह लोगों पर यह साबित करने का दबाव है कि उनके शुरुआती दावे सही थे।

वहीं, SIT को कोर्ट को यह समझाना होगा कि किन सबूतों के आधार पर उन्होंने इन्हीं लोगों को आरोपी बनाया है। यह पूरा मामला अब बेलटांगडी की न्यायिक कोर्ट में है, जो रिपोर्ट की समीक्षा करेगी और आगे की कानूनी कार्रवाई तय करेगी।