कुछ रातें ऐसी होती हैं जब किसी स्टेडियम में बैठे हजारों दर्शक सिर्फ एक मैच नहीं देखते, वे अपने सामने एक किंवदंती को समय के विरुद्ध लड़ते हुए देखते हैं। और फिर ऐसी ही रातों की कहानियाँ पीढ़ियों तक सुनाई जाती हैं।
अमेरिका के कन्सास सिटी स्टेडियम में बीती रात कुछ ऐसा ही हुआ। 76,000 दर्शकों से खचाखच भरे इस मैदान पर विश्वविजेता अर्जेंटीना का सामना ग्रुप जे में अल्जीरिया से था। वह अल्जीरिया जो पिछले पच्चीस मैचों से अजेय चली आ रही थी। कागज पर यह एक कठिन मुकाबला था। लेकिन कभी-कभी फुटबॉल कागजों पर नहीं खेला जाता। क्योंकि जब मैदान पर लियोनेल मेसी मौजूद हों, तब हर आँकड़ा, हर संभावना और हर भविष्यवाणी अचानक छोटी पड़ जाती है।
और फिर, उस रात, दुनिया ने एक बार फिर जादू देखा।
पिछले विश्व कप की विजेता अर्जेंटीनी टीम का सामना ग्रुप जे की अपनी विरोधी टीम अल्जीरिया से था। वह अल्जीरिया जो अपने पिछले पच्चीस मैचों में अविजित थी। इस टूर्नामेंट में सदैव अमूमन धीमी रफ्तार से शुरुआत करने के लिए जाने जानी वाली ‘ला अल्बीसेलेस्त’ अपनी पारंपरिक सफेद-नीली धारियों वाली जर्सी में 4-3-3 की फॉर्मेशन के संग मैदान पर उतरी। गोलपोस्ट पर पिछले विश्व कप के नायक रहे एमिलियानो मार्तिनेज मौजूद थे। डिफेंस का नेतृत्व कर रहे थे रोमेरो। मिडफील्ड में, रौड्रिगो दी पॉल, मैक एलिस्टर व एंज़ो फरनान्देज़ की, पिछले विश्व कप की ही तिकड़ी थी। अटैकिंग लाइन में शुरुआती लाइन अप में थे कप्तान मेसी, लाऊतूरो मार्टीनेज़ व थिआगो अल्माडा। स्टार्टिंग लाइन अप में जगह पाते ही मेसी लगातार छह विश्व कप में अपने वतन के लिए मैदान में उतरने वाले पहले खिलाड़ी बन गए। यह राष्ट्रीय टीम के लिए उनका 200वाँ मैच भी होने जा रहा था।
यह मैच पूरी तरह से एक विशेष खिलाड़ी पर केंद्रित रहा। 39 वर्षीय विश्वविजेता लियोनेल आंद्रेस मेसी कूकुतीनी। यह उनके खेल के जादू का ही तो असर था कि गेंद पर 53% नियंत्रण रखने के पश्चात भी, पिछले पच्चीस मैचों से अविजित, अल्जीरिया की टीम आज मैदान पर कुछ भी न कर सकी। मेसी ने अपनी टीम के लिए तीन जरूरी गोल स्कोर किए। उनके तीन गोलों की ही बदौलत, अर्जेंटीना ग्रुप जे का यह मैच 3-0 से जीत गई।
यह बेहद काव्यात्मक ही तो था कि इस मैच से ठीक-ठीक बीस वर्ष पूर्व रोसारियो के कस्बे से निकले नन्हें जादूगर ‘ला पुल्गा’ ने, अठारह वर्ष की उम्र में, 2006 विश्व कप में अर्जेंटीना के लिए अपने सफर की शुरुआत की थी।
यह वही विश्व कप था जिसमें आज अल्जीरिया के लिए गोलपोस्ट पर खड़े लुका जिदान के पिता जिनेदिन जिदान ने अपने खेल से संपूर्ण विश्व को अपना दीवाना बना लिया था। इस हैट्रिक के साथ ही मेसी विश्व कप में हैट्रिक लगाने वाले सबसे उम्रदराज खिलाड़ी भी बन गए। साथ ही साथ मेसी विश्व कप के लगातार पांच मैचों में गोल स्कोर करने वाले पहले, और इकलौते, खिलाड़ी भी बन गए। क्रिस्टियानो रोनाल्डो के बाद वो दूसरे ऐसे खिलाड़ी भी बन गए जिन्होंने विश्व कप के पांच भिन्न-भिन्न संस्करणों में गोल स्कोर किया है।
फ्रांस का दबदबा और सेनेगल का प्रतिरोध
वहीं, पिछले संस्करण की उपविजेता, फ्रेंच टीम, का सामना अपने चिर प्रतिद्वंद्वी सेनेगल से था। फ्रेंच टीम के पास बेहतरीन युवा खिलाड़ियों का इतना बड़ा पूल है कि वो एक साथ विश्व कप में दो से तीन टीमों को उतार सकता है। ‘लेस ब्ल्यूज’ (फ्रांस) को इस मैच में कुछ पुराने हिसाब भी चुकाने थे।
फ्रेंच टीम कितनी घातक है इसका पता इसी बात से चल जाता है कि उसकी शुरूआती लाइन अप में अटैक की जिम्मेदारी ओलीसे, एमबाप्पे, डेंबेले व देस़िरे दोऊ पर थी। साथ ही साथ चेर्की, बार्कोला व थुर्रम जैसे घातक अटैकिंग खिलाड़ी बेंच पर अपनी बारी का इंतजार कर रहे थे। हालाँकि, सेनेगल के पास गोलपोस्ट पर एदुआर्द मेंडी, डिफेंस में कूलिबाली, अटैकिंग लाइन में सादियो माने व निकोलस जैक्सन मौजूद थे। यह सभी खिलाड़ी कई वर्षों तक इंग्लिश प्रीमियर लीग में खेलने का अनुभव रखते हैं।
न्यूयॉर्क के न्यूजर्सी स्टेडियम में मैच की शुरुआत होती है। दोनों ही टीमें जीत कर जरूरी अंक बटोरने की फिराक में थीं। फ्रेंच टीम शुरू से ही सेनेगल के गोलपोस्ट पर हमले करने के प्रयास कर रही थी। राबियो व डेंबेले बार-बार मिडफील्ड से गेंद को एमबाप्पे तक पहुंचाने के लिए प्रयासरत थे। हांलांकि, सेनेगल फ्रेंच टीम को गोल करने से रोके हुए थी। फलस्वरूप, मैच का पहला हाफ गोलरहित रहा।
लेकिन आगे कहानी बदलने वाली थी। मैच के छियासठवें मिनट में रियाल मैड्रिड के स्टार फुटबॉलर कीलियन एमबाप्पे गोल लगा कर फ्रांस को बढ़त दिला देते हैं। लेकिन सेनेगल संयम नहीं गंवाती और कैसे भी एक अंक लेने के प्रयास में रहती है। परन्तु अस्सीवें मिनट में फ्रेंच कोच देश्चैंप्स ओसमान डेंबेले को सब्स्टीट्यूट कर बारकोला को मैदान में भेजते हैं। कोच का बारकोला को अंदर भेजना तुरंत रंग लाता है। अपने पहले ही टच से बारकोला एक गोल स्कोर कर स्कोर को 2-0 कर देते हैं। आगे, हांलांकि, अंतिम क्षणों में दोनों ही टीमें एक-एक गोल दागती हैं। मैच का अंत 3-1 से फ्रांस के पक्ष में होता है।
अन्य मुकाबले: नॉर्वे और कोलंबिया की शानदार जीत
वहीं, अपनी वाइकिंग फोटोशूट को लेकर चर्चा में रही नॉर्वे का मुकाबला इराक़ से था। नॉर्वे इक ऐसी टीम है जो विश्व कप के इस संस्करण में एक डार्क हॉर्स साबित हो सकती है। उनकी अटैकिंग लाइन बेहद ही घातक है। नॉर्वे की अटैकिंग लाइन में एंटोनियो नूसा, अर्लिंग हालांड व सोरलोथ मौजूद हैं। वहीं मिडफील्ड में हैं चपल खिलाड़ी ओदेगार्द। ग्रुप आई के इस मुकाबले में अर्लिंग हालांड के दो गोलों की बदौलत नॉर्वे ने 4-1 से इराक को धो दिया। वहीं ग्रुप जे के एक अन्य मुकाबले में ऑस्ट्रिया ने 2-1 से जॉर्डन पर बढ़त बनाई।
मेसी के बाद अब निगाहें रोनाल्डो पर थीं
फिर, बीती रात, क्रिस्टियानो रोनाल्डो के नेतृत्व में एक टाइटल कंटेंडर के तौर पर पुर्तगाल कॉन्गो के विरुद्ध अपने अभियान की शुरुआत करने उतरी। निश्चित तौर पर मेसी की हैट्रिक के बाद क्रिस्टियानो भी जरूर कुछ बड़ा करना चाहते होंगे।
इस विश्व कप के सबसे घातक स्क्वाड के संग पुर्तगाल की टीम मैदान में उतरी। मैच शुरू हुआ। पुर्तगाल की रक्षापंक्ति में कैंसेलो व नूनो मेंडेस मौजूद थे। पुर्तगाल का मिडफील्ड तो खैर, फिलहाल, संपूर्ण जगत में सब से खास है। मिडफील्ड में मौजूद थे ब्रुनो फर्नानदेज़, विटिन्हा व चौबीस वर्षीय सनसनीखेज खिलाड़ी ज़ाओ नेवेज़। अटैक का दारोमदार था बर्नार्डो सिल्वा, क्रिस्टियानो व पेड्रो नेटो पर। वहीं बेंच पर लियाओ, फैलिक्स, दालो, ट्रिंकाओ, नूनेस व नेवेज़ जैसे अनुभवी खिलाड़ी मौजूद थे, जो जीत के लिए भूखे हैं।
कॉन्गो की टीम के पास यूं कोई बड़ा नाम तो नहीं था मगर वो एकजुट होकर इस दैत्य से लड़ने जा रहे थे। कोच देसाब्रे ने 5-3-2 की अति-रक्षात्मक फॉर्मेशन के साथ अपनी टीम को मैदान पर उतारा। एक अपेक्षाकृत छोटी टीम ऐसे टूर्नामेंट में अगर इतनी बड़ी टीम के विरुद्ध मुकाबला ड्रॉ कर के एक अंक भी ले ले तो वह जीत सरीखा ही है। जैसा हमने काबो-वर्दे को स्पेन के विरुद्ध करते देखा था।
लेकिन, मैच के छठवें ही मिनट में मैदान की बांई फ्लैंक से पेड्रो नेटो एक खूबसूरत क्रॉस विपक्षी गोलपोस्ट की ओर बढ़ाते हैं जिसको युवा ज़ाओ नेवेज़, पिछले दो वर्षो से सारी दुनिया में जिनकी तूती बोल रही है, एक बेहद शानदार हेडर लगा कर गोल में तब्दील कर देते हैं। पुर्तगाल को बढ़त मिल जाती है। लेकिन फिर, मैच के पहले हाफ के अंतिम क्षणों में, योआन विस्सा एक अच्छी जंप लेकर दाएं छोर से आए क्रॉस को हेडर से गोलपोस्ट के भीतर भेज ह्यूस्टन स्टेडियम में मौजूद तमाम पुर्तगाली समर्थकों का दिल तोड़ देते हैं। इस गोल के साथ ही पहले हाफ की समाप्ति पर स्कोर हो जाता है 1-1।
दूसरे हाफ में पुर्तगाल गोल लगाने के कई प्रयास करती है मगर मैच में पिचहत्तर प्रतिशत समय गेंद अपने काबू में रखने के बावजूद पुर्तगाल गेंद के संग कुछ चमत्कारी नहीं कर पाते। काबो-वर्दे की ही भांति, कॉन्गो अपने से काफी मजबूत टीम को जीत से वंचित रखने में सफल हो जाती है। तमाम चाहने वालों की आशाओं के उलट, क्रिस्टियानो कुछ खास नहीं कर पाते। 5.9 की रेटिंग के साथ वो इस मैच में बेअसर रहते हैं। खैर, वह बड़े खिलाड़ी हैं और आगे उनके दल को फिलहाल ग्रुप में और भी मैच खेलने हैं। लेकिन कॉन्गो ने जो किया, वो ऐतिहासिक है।
इंग्लैंड का ‘थ्री लायंस’ अवतार
उधर, डल्लास स्टेडियम में थॉमस टुकेल की इंग्लिश टीम का सामना था लुका मॉद्रिच की क्रोएशियाई टीम से। यह एक बेहद ही रोमांचक मैच था जो टूर्नामेंट के शुरुआती चरण में ही खेल प्रेमियों को देखने को मिलने वाला था। दोनों ही टीमें काफी अच्छी हैं। ज्ञात रहे कि दोनों ही टीमें रशिया में खेले गए 2018 विश्व कप के सेमीफाइनल में भी आमने सामने थीं, जहां क्रोएशिया ने इंग्लैंड को हराकर फाइनल में जगह बना ली थी। परन्तु उसके बाद भी चार दफा दोनों टीमें आपस में भिड़ चुकी हैं जहां इंग्लैंड कभी हारी नहीं।
इस दफा इंग्लैंड जहां टाइटल कंटेंडर हैं तो क्रोएशियाई टीम इक ऐसे दौर में है जब उसके कई महत्वपूर्ण खिलाड़ी या तो रिटायर हो चुके हैं या अपने करियर का सूर्यास्त देख रहे हैं। फ्रांस की ही भांति इंग्लैंड की टीम भी इतने खिलाड़ियों से लैस है कि टूर्नामेंट में आराम से दो टीमों को एकसाथ मैदान में उतारने का माद्दा रखती है।
खैर, रेफरी व्हिस्ल बजाते हैं। 4-2-3-1 की फॉर्मेशन के साथ मैदान में उतरी इंग्लिश टीम खेल के शुरुआती क्षणों से ही अटैक शुरू कर देती है। बारहवें मिनट में ही इंग्लैंड को एक पेनाल्टी मिलती है जिसपर थोड़ी कंट्रोवर्सी भी हुई। खैर, उसे गोल में तब्दील कर हैरी केन इंग्लैंड को मैच में बढ़त दिला देते हैं। क्रोएशियाई टीम अपना संयम नहीं खोते और मैच आगे बढ़ता है। फिर होता है एक कमाल। मैच के छत्तीसवें मिनट में क्रोएशियाई राइट आऊट बातूरीना एक झन्नाटेदार गोल लगाकर स्कोर बराबर कर देते हैं। लेकिन जवाबी हमला कर एक दफा फिर हैरी केन बयालिसवें मिनट में मिले कॉर्नर पर एक हेडर द्वारा गोल मार कर स्कोर 2-1 कर देते हैं।
इंग्लैंड के समर्थकों के जश्न पर तब ब्रेक लग जाता है जब साथी खिलाड़ी के संग बेहतरीन तालमेल के जरिए सेंट्रल फॉरवर्ड मूसा पहले हाफ का अंतिम अटैक कर एक गोल जड़ क्रोएशिया की एक दफा फिर मैच में वापसी करवा देते हैं। स्कोर हो जाता है 2-2। इसके साथ ही पहला हाफ समाप्त हो जाता है।
परन्तु, दूसरे हाफ के शुरू होते ही स्टार इंग्लिश मिडफील्डर ज्यूड बेलिंघम एक बेहतरीन अंदाज में अकेले ही गेंद को लेकर विपक्षी गोलपोस्ट की ओर बढ़ते हैं। बेहद करिश्माई अंदाज में गोल लगाकर वो स्कोर 3-1 कर देते हैं। फिर बेंच से मैदान पर आए सब्स्टीट्यूट मार्कस रैशफॉर्ड मैच के पिच्चासीवें मिनट में इंग्लैंड के लिए एक और बेहद खूबसूरत गोल स्कोर कर स्कोर को 4-1 कर देते हैं। ‘द थ्री लायन्स’ ने एक बेहद ही शानदार तरीके से सभी को बता दिया कि वो आ चुके हैं और कोई भी इस दफा उन्हें हल्के में लेने की ग़लती न करे। ‘दे आर गोइंग टू बी अ फोर्स, नो वन वुड लाइक टु मेस विद’।
आगे, टोरंटो में, ग्रुप एल में घाना के सामने थी पनामा की टीम, जहां यैरेंक्ई ने मैच के बिल्कुल ही अंतिम क्षणों में एक गोल स्कोर कर घाना को 1-0 से जीत दिलाई। वहीं उज़्बेकिस्तान बायर्न म्यूनिख के स्टार विंगर लूइस डियाज़ की कोलंबिया से मेक्सिको में टक्कर लेते नजर आई। कोलंबिया ने यह मुकाबला 3-1 से जीत कर ग्रुप में अपनी पकड़ मजबूत कर ली।
आगे, रात साढ़े नौ बजे दक्षिण अफ्रीका का सामना चेक रिपब्लिक से होगा। फिर भारतीय समयानुसार रात साढ़े बारह बजे लॉस एंजेलिस स्टेडियम में स्विट्जरलैंड की टक्कर बोस्निया एवं हर्ज़ेगोविना से होगी। वहीं वैंकूवर में कनाडा अपने घरेलू दर्शकों के सामने कतर के विरुद्ध मैदान में उतरेगा। और कल सुबह साढ़े छह बजे मैक्सिको का सामना दक्षिण कोरिया से होगा।
लेकिन इन तमाम मैचों और परिणामों के बीच, बीती रात की सबसे बड़ी कहानी एक बार फिर उसी खिलाड़ी के नाम रही, जिसने दो दशकों से इस खेल की कल्पना को जीवित रखा है। बीस वर्ष पहले जर्मनी में खेले गए विश्व कप में एक दुबला-पतला किशोर अर्जेंटीना की जर्सी पहनकर पहली बार दुनिया के सामने आया था। तब शायद किसी ने नहीं सोचा होगा कि वही खिलाड़ी आने वाले वर्षों में फुटबॉल के इतिहास की सबसे महान कथाओं में से एक लिखेगा।
आज, उनतालीस वर्ष की उम्र में, लियोनेल मेसी ने विश्व कप में अपने करियर की पहली हैट्रिक लगाई है। समय बदल गया। पीढ़ियाँ बदल गईं। उनके साथ खेलने वाले अधिकांश खिलाड़ी रिटायर हो चुके हैं। लेकिन जब गेंद उनके पैरों में आती है, तो दुनिया अब भी कुछ क्षणों के लिए रुक जाती है।
शायद यही महानता है। कुछ खिलाड़ी ट्रॉफियाँ जीतते हैं। कुछ रिकॉर्ड बनाते हैं। और कुछ ऐसे होते हैं जो खेल से कहीं बड़े हो जाते हैं। लियोनेल मेसी उन्हीं में से एक हैं। और शायद यही कारण है कि फुटबॉल सिर्फ एक खेल नहीं है। यह सपनों की वह भाषा है, जिसे दुनिया का हर बच्चा समझता है। यही इस खेल का जादू है।


