मध्य प्रदेश के महू में कैंटोनमेंट बोर्ड ने अल फलाह यूनिवर्सिटी के चेयरमैन मोहम्मद जवाद अहमद सिद्दीकी के परिवार से जुड़ी एक प्रसिद्ध 4 मंजिला इमारत को तोड़ने का निर्देश जारी किया है।
यह कार्रवाई ऐसे समय में हुई है जब सिद्दीकी परिवार दिल्ली के लाल किला ब्लास्ट से जुड़े आतंकी मॉड्यूल और कई पुरानी धोखाधड़ी जाँचों के कारण सुर्खियों में है। बोर्ड ने संपत्ति के अधिकार पत्र ट्राँसफर न होने के कारण इसे अनाधिकृत (Unauthorized) मानते हुए यह नोटिस जारी किया है।
महू में ‘मौलाना की बिल्डिंग’ पर हथौड़ा
महू कैंटोनमेंट बोर्ड ने स्थानीय तौर पर ‘मौलाना की बिल्डिंग‘ के नाम से जानी जाने वाली प्रसिद्ध चार मंजिला इमारत को तोड़ने का निर्देश दिया है। कैंटोनमेंट इंजीनियर हरीशंकर कलोया ने इस कार्रवाई की पुष्टि की है।
यह संपत्ति जवाद अहमद सिद्दीकी के अब्बू मोहम्मद हामिद सिद्दीकी के नाम पर दर्ज है, लेकिन इसका अधिकार पत्र कभी ट्रांसफर नहीं किया गया। इस कारण पूरी जगह को अनाधिकृत माना गया है। नियमों के अनुसार, किसी भी मरम्मत या नवीनीकरण की अनुमति केवल पंजीकृत मालिक को ही दी जा सकती है।
1990 के दशक में बनी यह इमारत, जिसमें 25 से अधिक खिड़कियाँ और एक बड़ा बेसमेंट है, सिद्दीकी परिवार के 2000 के दशक की शुरुआत में इलाका छोड़ने के बावजूद स्थानीय पहचान का मुख्य हिस्सा रही है।
आतंकी लिंक और धोखाधड़ी के बीच कार्रवाई
इमारत पर यह कार्रवाई तब हो रही है जब सिद्दीकी परिवार कई गंभीर जाँचों के कारण सुर्खियों में है। हाल ही में 10 नवंबर 2025 को दिल्ली के लाल किले के पास हुए ब्लास्ट के संदिग्ध आतंकी मॉड्यूल से अल फलाह मेडिकल कॉलेज के दो डॉक्टरों के कथित जुड़ाव के बाद जाँचें तेज हुई हैं।
इसी सप्ताह जवाद के छोटे भाई हमूद अहमद सिद्दीकी को हैदराबाद में गिरफ्तार किया गया है। उस पर आरोप है कि उसने साल 2000 में महू में कई निवेश ठगी मामलों में सेना और MES के रिटायर्ड कर्मियों से पैसे लेकर धोखाधड़ी की थी। पुलिस के अनुसार, हमूद बदली हुई पहचान के साथ हैदराबाद में रह रहा था और वहाँ एक निवेश फर्म चला रहा था। अब यह मामला स्थानीय प्रशासन और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ी जाँचों के बीच फँस गया है।

