अहमदाबाद में शुरू हुए अडानी ग्लोबल इंडोलॉजी कॉन्क्लेव में अडानी ग्रुप के चेयरमैन गौतम अडानी ने भारत के पारंपरिक और सभ्यतागत ज्ञान को डिजिटल रूप में सुरक्षित रखने के लिए 100 करोड़ रुपए देने की घोषणा की। यह पैसा ‘भारत नॉलेज ग्राफ’ तैयार करने, इंडोलॉजी मिशन को आगे बढ़ाने और इससे जुड़े शोधकर्ताओं व विशेषज्ञों को सहायता देने में लगाया जाएगा।
यह तीन दिवसीय कॉन्क्लेव 20 से 22 नवंबर तक अडानी कॉरपोरेट हाउस (ACH) में हो रहा है। इसे अडानी ग्रुप ने शिक्षा मंत्रालय की इंडियन नॉलेज सिस्टम (IKS) पहल के साथ मिलकर आयोजित किया है। कार्यक्रम का मकसद है, भारत की सभ्यता, भाषा, दर्शन, विज्ञान और संस्कृति से जुड़े वैश्विक अध्ययन को फिर से मजबूत करना।
कॉन्क्लेव में ज्योतिर मठ के 46वें शंकराचार्य, जगद्गुरु स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती मुख्य अतिथि के रूप में मौजूद थे। उन्होंने कहा कि भारत को विश्वगुरु बनाने का उनका सपना इस पहल से और मजबूत होगा।
गौतम अडानी ने कहा कि आज के AI के दौर में अगर कोई सभ्यता अपने सांस्कृतिक और भावनात्मक ढाँचे को सुरक्षित नहीं रखती, तो वह मशीनों के एल्गोरिद्म के असर में खोने लगती है। भारत नॉलेज ग्राफ इसी खतरे से बचाने और भारत की सांस्कृतिक स्मृति को भविष्य के लिए सुरक्षित करने का एक बड़ा कदम है।
क्या है अडानी ग्रुप का लक्ष्य
इंडोलॉजी के अध्ययन को बढ़ावा देने के लिए अडानी ग्रुप और IKS ने पाँच साल का एक कार्यक्रम भी शुरू किया है। इसमें देश के बड़े संस्थानों के 14 PHD छात्रों को सहयोग दिया जाएगा। ये शोध पाणिनीय व्याकरण, कम्प्यूटेशनल लिंग्विस्टिक्स, प्राचीन खगोल विज्ञान, स्वदेशी स्वास्थ्य प्रणाली, राजनीतिक दर्शन और शास्त्रीय साहित्य जैसे विषयों पर होगा।
इन छात्रों का चयन IIT, IIM और विभिन्न विश्वविद्यालयों के विशेषज्ञों की सलाह के बाद किया गया है। लक्ष्य है कि पारंपरिक भारतीय ज्ञान को डेटा साइंस और डिजिटल आर्काइविंग जैसे आधुनिक तरीकों से जोड़कर इसे आज की पीढ़ी और दुनियाभर की रिसर्च में फिर से प्रासंगिक बनाया जा सके।
यह पूरी पहल ‘वसुधैव कुटुंबकम्’ की भावना पर आधारित है और भारत की सॉफ्ट पावर को और मजबूत बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम मानी जा रही है।

