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‘भारत में मुस्लिम अल्पसंख्यकों पर अत्याचार की उदाहरण सहित व्याख्या करें?’: जामिया मिलिया इस्लामिया ने BA की परीक्षा में पूछा सवाल, ऑपइंडिया से बोले रजिस्ट्रार- कार्रवाई करेंगे

यह कोई पहली बार नहीं है जब गैर-मुस्लिमों का इस तरह उत्पीड़न किया गया है या उनके साथ भेदभाव की रिपोर्ट सामने आई है। पिछले वर्ष दिल्ली की जामिया मिलिया इस्लामिया में गैर-मुसलमानों के साथ होने वाले भेदभाव और उनपर डाले जाने वाले धर्मांतरण के दबाव को लेकर ‘कॉल फॉर जस्टिस’ ट्रस्ट की एक रिपोर्ट सामने आई थी।

दिल्ली की जामिया मिलिया इस्लामिया में अब पढ़ाई के नाम पर प्रोपेगेंडा फैलाने की साजिशें शुरू हो गई हैं। प्रोपेगेंडा भी ऐसा कि भारत की छवि को ‘मुस्लिम विरोधी’ बताने की कोशिशें शुरू कर दी गई हैं। जामिया यूनिवर्सिटी के प्रशासन ने खुद तो मान लिया है कि देश में मुस्लिमों के खिलाफ हिंसा होती है और यही बात छात्रों से जबरन कहलवाई जा रही है।

जामिया के मुस्लिमों से जुड़े सवाल पर विवाद

दरअसल, यह विवाद परीक्षा में पूछे गए एक सवाल से शुरू हुआ है। जामिया मिलिया इस्लामिया में BA (Honours) Social Work के सेमस्टर एग्जाम में सवाल पूछा गया है कि ‘Discuss the atrocities against Muslim Minorities in India giving suitable examples’ यानी ‘भारत में मुस्लिम अल्पसंख्यकों के खिलाफ अत्याचारों पर उचित उदाहरणों के साथ चर्चा करें’। इस सवाल के बाद सोशल मीडिया पर जामिया को लेकर एक बार फिर चर्चा शुरू हो गई।

सोशल मीडिया पर शुरू हुई आलोचना

जैसे ही एग्जाम से जुड़ी यह खबर सामने आई, सोशल मीडिया पर इसे लेकर जामिया पर सवाल उठने शुरू हो गए। कहीं लोगों ने इसे बांग्लादेश की हिंसा से जोड़ा तो कहीं इसे जामिया का पुराना पैटर्न बताया गया है।

VHP के राष्ट्रीय प्रवक्ता डा. प्रवेश कुमार चौधरी ने X पर एक पोस्ट में इसे चिंता जनक बताया है। उन्होंने X पर लिखा, “…विषय पर उदाहरण सहित चर्चा का प्रश्न पूछा जाना अत्यंत चिंताजनक है।” उन्होंने कहा, “आज जब बांग्लादेश में हिंदुओं पर बर्बर अत्याचार हो रहे हैं। ऐसे समय में भारत के एक केंद्रीय विश्वविद्यालय की परीक्षा में इस प्रकार का प्रश्न पूछा जाना देश और हिंदू समाज के विरुद्ध है।”

एक X यूजर ने लिखा, “जामिया में बच्चे को हिन्दुओं एवं अन्य धर्म के प्रति कट्टर बनाया जा रहा है। सरकार संज्ञान ले।” एक अन्य ने लिखा, “जामिया करके एक यूनिवर्सिटी है भारत में, जो अपने स्टूडेंट्स को एग्जाम के नाम पर कैसे रैडिकलाइज कर रही है।” इसी तरह सैकड़ों लोगों ने जामिया पर सवाल उठाते हुए इस मामले में कार्रवाई करने की बात कही है।

रजिस्ट्रार ने कहा- कार्रवाई करेंगे

इस मामले में जामिया मिलिया इस्लामिया का प्रशासन बात करने से बच रहा है। हमने इस मामले में सोशल वर्क विभाग के प्रमुख रवींद्र रमेश पाटिल से बातचीत करने की कोशिश की लेकिन उनसे बात नहीं हो पाई। उनके अलावा हमने परीक्षा विभाग से जुड़े एहतशाम उल हक से भी बातचीत करने की कोशिश की लेकिन उनसे भी संपर्क नहीं हो सका। इस मामले में हमने विश्वविद्यालय के रजिस्ट्रार मोहम्मद मेहताब आलम रिजवी से बात की है।

मेहताब आलम रिजवी ने ‘ऑपइंडिया’ से बातचीत में कहा है कि इस तरह के प्रश्न पूछा जाना पूरी तरह से गलत है। रिजवी ने इसे प्रश्न-पत्र सेट करने वालों पर टाल दिया है। हालाँकि, उन्होंने ऑपइंडिया से बातचीत में इस बात का आश्वासन दिया है कि इस तरह के सवाल पूछने वालों की जाँच की जाएगी और जो जरूरी होगा वो कार्रवाई भी की जाएगी।

जामिया की मीडिया संयोजक साईमा सईद ने ‘ऑपइंडिया’ से बातचीत में कहा है कि मामले की जाँच शुरू कर दी गई है और इसे बनाने वाले टीचर को ब्लैकलिस्ट कर दिया जाएगा। उन्होंने इस तरह के सवाल पूछे जाने को पूरी तरह गलत बताया है।

पहले भी हिंदुओं के साथ भेदभाव का सामने आया है मामला

यह कोई पहली बार नहीं है जब गैर-मुस्लिमों का इस तरह उत्पीड़न किया गया है या उनके साथ भेदभाव की रिपोर्ट सामने आई है। पिछले वर्ष दिल्ली की जामिया मिलिया इस्लामिया में गैर-मुसलमानों के साथ होने वाले भेदभाव और उनपर डाले जाने वाले धर्मांतरण के दबाव को लेकर ‘कॉल फॉर जस्टिस’ ट्रस्ट की एक रिपोर्ट सामने आई थी।

इस रिपोर्ट में दावा किया गया कि गैर-मुस्लिम महिला सहायक प्रोफेसर ने बताया कि उन्होंने यूनिवर्सिटी में शुरू से ही भेदभाव महसूस किया जहाँ मुस्लिम कर्मचारी गैर मुसलमानों के साथ दु‌र्व्यवहार और भेदभाव करते थे। इस रिपोर्ट में दावा किया गया कि गैर-मुस्लिम महिला सहायक प्रोफेसर ने बताया कि उन्होंने यूनिवर्सिटी में शुरू से ही भेदभाव महसूस किया जहाँ मुस्लिम कर्मचारी गैर मुसलमानों के साथ दु‌र्व्यवहार और भेदभाव करते थे।

रिपोर्ट में कहा गया था कि एक अनुसूचित जनजाति के एक पूर्व छात्र ने बताया था कि कैसे Med पूरा करने के दौरान एक मुस्लिम शिक्षक ने उनसे क्लास में कहा था कि जब तक वह इस्लाम का पालन नहीं करते, उसकी MED पूरी नहीं होगी। 

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शिव
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7 वर्षों से खबरों की तलाश में भटकता पत्रकार...

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