भारत ने मंगलवार (30 दिसंबर 2025) को चीन के सरकारी अखबार ग्लोबल टाइम्स द्वारा बॉलीवुड फिल्म ‘बैटल ऑफ गलवान’ की आलोचना पर कड़ा जवाब दिया। भारत ने साफ कहा कि भारतीय सिनेमा में रचनात्मक स्वतंत्रता (क्रिएटिव फ्रीडम) सबसे जरूरी चीज है और इसे किसी विदेशी राजनीतिक संवेदनशीलता के हिसाब से नियंत्रित नहीं किया जा सकता।
सरकारी सूत्रों ने कहा कि भारत-चीन सैन्य टकराव पर आधारित फिल्में कोई नई बात नहीं हैं। 1962 के युद्ध पर बनी ‘हकीकत’ और ‘121: बैटल ऑफ रेजांग ला’ जैसी फिल्में पहले भी संवेदनशील सैन्य इतिहास को दिखा चुकी हैं। कहानीकारों को यह आजादी है कि वे जिन विषयों को जरूरी समझें, उन पर काम करें और ऐसे क्रिएटिव प्रयासों को राजनीतिक चश्मे से नहीं देखा जाना चाहिए।
दरअसल, ग्लोबल टाइम्स ने ‘बैटल ऑफ गलवान’ के टीजर पर हमला करते हुए दावा किया था कि फिल्म जून 2020 में पूर्वी लद्दाख की गलवान घाटी में हुई झड़प की घटनाओं को तोड़-मरोड़ कर पेश करती है। रिपोर्ट में भारतीय सेना के अधिकारी कर्नल बिक्कुमल्ला संतोष बाबू की भूमिका को कमतर दिखाया गया जो इस झड़प में वीरगति को प्राप्त हुए थे। अखबार ने यह भी कहा कि चीनी सोशल मीडिया यूजर्स फिल्म को बढ़ा-चढ़ाकर दिखाया गया मानते हैं।
रिपोर्ट में चीन के आधिकारिक रुख को दोहराते हुए आरोप लगाया गया कि भारत ने वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) पार कर टकराव शुरू किया, भारत ने हताहतों की संख्या बढ़ा-चढ़ाकर बताई और यह फिल्म पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (PLA) की छवि खराब करने की कोशिश है। यह भी उल्लेख किया गया कि चीन ने अपनी तरफ हुई मौतों को काफी समय बाद स्वीकार किया था।
भारतीय सूत्रों ने इन सभी दावों को सिरे से खारिज कर दिया। उन्होंने दोहराया कि इस फिल्म के निर्माण में सरकार की कोई भूमिका नहीं है और भारत अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का पूरा सम्मान करता है। अगर किसी को तथ्यों को लेकर कोई स्पष्टता चाहिए तो वे रक्षा मंत्रालय से संपर्क कर सकते हैं। ‘बैटल ऑफ गलवान’ भारतीय सेना की 16 बिहार रेजिमेंट से जुड़े टकराव पर आधारित है और यह पत्रकार शिव अरूर और राहुल सिंह की किताब ‘इंडियाज मोस्ट फियरलेस-3’ से प्रेरित है। फिल्म में सलमान खान कर्नल संतोष बाबू की भूमिका निभा रहे हैं।

