कुछ दिन पहले कर्नाटक की कॉन्ग्रेस सरकार ने सरकारी जमीन पर अतिक्रमण कर रह रहे इन मुस्लिमों के घरों को तोड़ा था। अब इन्हें बसाया जा रहा है और वह भी सरकारी कर्मचारियों का घर देकर।
Karnataka Congress government is set to allot 1,000+ government flats,
— Mahesh Vikram Hegde ?? (@mvmeet) December 31, 2025
Originally meant for government employees
Now to the illegal immigrants evicted from Fakir Colony & Wasim Layout near Kogilu, Bengaluru
Karnataka taxpayers who struggle for years to build a legal home are… pic.twitter.com/BwS8Iuh7Sd
कर्नाटक सरकार जानती है कि ये उनके वोट बैंक हैं। इनके अवैध घरों को तोड़ने से वोट पर असर पड़ेगा। इसलिए इन्हें खुश करने के लिए सरकारी कर्मचारियों के लिए बने आवास को ही अलॉट कर दिया।
विपक्ष ने इसका विरोध किया है। यहाँ तक कि जिन लोगों के घर को नहीं दिया जा रहा, वे भी दबी जुबान कह रहे हैं कि घर उनका अधिकार है। सरकारी सुविधाओं में इसे शामिल किया जाता है। लेकिन सालों से नौकरी करने के बावजूद सरकार उन्हें घर नहीं दे पा रही है। यहाँ मुश्किल से एक आशियाना अलॉट किया गया था। वह भी सरकार ने छीन लिया।
कर्नाटक सरकार की तुष्टिकरण की पराकाष्ठा देखिए
— ??Jitendra pratap singh?? (@jpsin1) December 31, 2025
कर्नाटक कांग्रेस सरकार 1,000 से अधिक सरकारी आवास, जो मूल रूप से सरकारी कर्मचारियों के लिए थे, अब बेंगलुरु के फकीर कॉलोनी और वसीम लेआउट से बेदखल किए गए अवैध प्रवासियों को देने जा रही है।
आप लोगों को याद होगा कुछ दिन पहले कर्नाटक… pic.twitter.com/enff7M7BhD
लोगों का सवाल है कि टैक्सपेयर के पैसे से समाज कल्याण होना चाहिए। लेकिन अवैध रूप से रह रहे मुस्लिमों को खुश करने की कोशिश नहीं की जानी चाहिए। लोगों का मानना है कि इनमें ज्यादातर बांग्लादेशी और रोहिंग्या हैं, जिन्हें घर देने के बजाए राज्य से बाहर निकाला जाना चाहिए था। कर्नाटक के करदाताओं के पैसे से उनका घर बसाना लोगों के साथ अन्याय है।

