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नेगेटिव मार्क्स से भी PG मेडिकल सीट पर क्वॉलिफाई? जानें PG-NEET की नई कट-ऑफ पर क्यों भड़के लोग

NEET PG 2025 में कट-ऑफ घटाने से नेगेटिव अंकों वाले उम्मीदवार भी काउंसलिंग के पात्र बने, सीटें भरने के फैसले पर योग्यता और शैक्षणिक मानकों को लेकर बहस तेज हुई।

राष्ट्रीय चिकित्सा परीक्षा बोर्ड (NBEMS) ने मंगलवार (13 जनवरी 2026) को स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के निर्देश पर NEET PG 2025–26 की क्वालिफाइंग कट-ऑफ में संशोधन किया।

कट-ऑफ प्रतिशत घटाए जाने के बाद SC, ST और OBC वर्ग के ऐसे अभ्यर्थी भी काउंसलिंग के लिए पात्र हो गए हैं, जिनके अंक शून्य से कम (नेगेटिव मार्क्स) हैं। इस फैसले के सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर इसे लेकर तीखी बहस शुरू हो गई है।

NBEMS की आधिकारिक अधिसूचना के अनुसार, NEET PG 2025–26 की तीसरी काउंसलिंग के लिए सभी श्रेणियों में न्यूनतम क्वालिफाइंग परसेंटाइल कम किए गए हैं, जो केंद्र सरकार के स्वास्थ्य मंत्रालय के निर्देशों के अनुसार है।

रिवाइज्ड क्वालिफाइंग क्राइटेरिया क्या कहता है

संशोधित मानदंडों के अनुसार, सामान्य (General) और EWS वर्ग के उम्मीदवारों के लिए क्वालिफाइंग परसेंटाइल को 50वें परसेंटाइल से घटाकर 7वाँ परसेंटाइल कर दिया गया है, जिसके तहत कट-ऑफ स्कोर 800 में से 103 अंक तय किया गया है।

वहीं, बेंचमार्क दिव्यांगता (PwBD) वाले सामान्य वर्ग के अभ्यर्थियों के लिए क्वालिफाइंग परसेंटाइल 45वें से घटाकर 5वाँ कर दिया गया है, जिसके बाद कट-ऑफ स्कोर 90 अंक तय किया गया है।

स्रोत: NBEMS

SC, ST और OBC वर्ग के उम्मीदवारों के लिए, जिनमें इन वर्गों के बेंचमार्क दिव्यांग (PwBD) अभ्यर्थी भी शामिल हैं, क्वालिफाइंग परसेंटाइल को 40वें से घटाकर 0वाँ परसेंटाइल कर दिया गया है। इसके तहत कट-ऑफ स्कोर 800 में से माइनस 40 अंक तय किया गया है, क्योंकि परीक्षा में नेगेटिव मार्किंग की व्यवस्था लागू है।

NBEMS ने यह भी स्पष्ट किया है कि 19 अगस्त 2025 को जारी की गई NEET PG 2025 की रैंक में कोई बदलाव नहीं किया गया है। यह संशोधन केवल काउंसलिंग में भाग लेने की पात्रता तय करने के लिए है, रैंक या मेरिट सूची पर इसका कोई असर नहीं पड़ेगा।

अस्थाई व्यवस्था के तहत उठाया गया कदम, ये तय प्रक्रिया नहीं

नोटिस में आगे कहा गया है कि उम्मीदवारों की उम्मीदवारी पूरी तरह अस्थायी (प्रोविजनल) रहेगी और यह NEET PG 2025 सूचना पुस्तिका में तय सभी पात्रता शर्तों को पूरा करने पर निर्भर करेगी। आवेदन फॉर्म में अभ्यर्थियों द्वारा बताए गए MBBS प्रोफेशनल परीक्षाओं या विदेशी मेडिकल ग्रेजुएट परीक्षा (FMGE) में प्राप्त कुल अंकों की जाँच प्रवेश के समय मूल दस्तावेजों से की जाएगी।

NBEMS ने यह भी चेतावनी दी है कि यदि रैंक में टाई तोड़ने के लिए किसी उम्मीदवार ने गलत जानकारी दी होगी तो उसकी उम्मीदवारी रद्द कर दी जाएगी। इसके अलावा, परीक्षा के दौरान किसी भी तरह के अनुचित साधनों (अनफेयर मीन्स) के इस्तेमाल पर NBEMS, मेडिकल काउंसलिंग कमेटी या संबंधित प्रवेश प्राधिकरण द्वारा सख्त कार्रवाई की जाएगी।

कट-ऑफ क्यों कम किए गए?

सरकार ने पोस्टग्रेजुएट मेडिकल की बड़ी संख्या में सीटें खाली रहने की आशंका को देखते हुए क्वालिफाइंग कट-ऑफ घटाने का फैसला लिया। अधिकारियों के मुताबिक, NEET PG 2025 में करीब 2.4 लाख उम्मीदवार शामिल हुए थे, लेकिन हाई कट-ऑफ के कारण काउंसलिंग के कई दौर पूरे होने के बाद भी हजारों सीटें खाली रह गई थीं।

भारत में करीब 65,000 से 70,000 पोस्टग्रेजुएट मेडिकल सीटें हैं। अधिकारियों ने बताया कि अगर बड़ी संख्या में सीटें खाली रहती हैं, तो इसका सीधा असर टीचिंग हॉस्पिटल्स के कामकाज पर पड़ेगा, खासकर सरकारी अस्पतालों पर, जहाँ रेजिडेंट डॉक्टरों पर इलाज और शैक्षणिक जिम्मेदारियों का बड़ा भार होता है।

यह संशोधन ऐसे समय में किया गया जब इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (IMA) ने भी केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा को पत्र लिखकर कट-ऑफ में तार्किक संशोधन की माँग की थी, ताकि मेडिकल प्रशिक्षण क्षमता की बड़े पैमाने पर बर्बादी को रोका जा सके।

सोशल मीडिया पर क्या कह रहे हैं लोग

संशोधित कट-ऑफ को लेकर सोशल मीडिया पर मिली-जुली प्रतिक्रियाएँ सामने आई हैं। कई यूजर्स इस बात पर बहस कर रहे हैं कि क्या यह फैसला केवल एक प्रशासनिक कदम है या फिर इससे शैक्षणिक मानकों में ढील का संकेत मिलता है।

कुछ यूजर्स ने इस फैसले को संदर्भ के साथ समझने की कोशिश की है। उनका कहना है कि कट-ऑफ में बदलाव से केवल काउंसलिंग में भाग लेने की पात्रता बढ़ी है, इससे एडमिशन की गारंटी नहीं मिलती।

टेक पॉलिसी विश्लेषक हिमांशु जैन ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट में कहा कि यह बात सही है कि अब माइनस 40 अंक वाले उम्मीदवार भी काउंसलिंग में शामिल हो सकते हैं, लेकिन ऑनलाइन बहस में अक्सर इसका पूरा संदर्भ सामने नहीं रखा जा रहा है।

हिमांशु जैन ने बताया कि NBEMS ने यह फैसला मुख्य रूप से करीब 9,000 पीजी मेडिकल सीटें खाली रहने से बचाने के लिए लिया। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि काउंसलिंग की पात्रता को एडमिशन की गारंटी नहीं माना जाना चाहिए। इतने कम कट-ऑफ पर क्वालिफाई करने वाले उम्मीदवारों को आमतौर पर नॉन-क्लिनिकल या कम माँग वाली ब्राँचें मिलती हैं, या फिर हाई फीस वाले प्राइवेट मेडिकल कॉलेज, जहाँ ऊँची रैंक वाले उम्मीदवार अक्सर सीटें छोड़ देते हैं।

हिमांशु के अनुसार, यह नीतिगत फैसला सीटों के बेहतर उपयोग (कैपेसिटी यूटिलाइजेशन) के लिए लिया गया है, न कि पासिंग स्टैंडर्ड बदलने के लिए। उन्होंने यह भी कहा कि NEET PG एक रैंकिंग परीक्षा है, जिसे वे उम्मीदवार देते हैं जो पहले ही MBBS पूरी कर चुके हैं और विश्वविद्यालय स्तर की परीक्षाएँ पास कर चुके हैं।

हालाँकि, कई अन्य यूजर्स ने नेगेटिव स्कोर वाले उम्मीदवारों को काउंसलिंग में शामिल करने के फैसले पर चिंता जताई है।

इंडियन मेडिकल एसोसिएशन-JDN के राष्ट्रीय प्रवक्ता डॉ ध्रुव चौहान ने कहा, “मुझे समझ नहीं आ रहा कि इस पर कैसे प्रतिक्रिया दूँ, लेकिन अब माइनस 40 अंक लाने वाले उम्मीदवार भी NEET PG की सीट पाने के लिए पात्र हो गए हैं। आसान शब्दों में कहें तो अगर आपके पास पैसा है या आप किसी खास कैटेगरी से आते हैं, तो परीक्षा में सो जाने और नेगेटिव नंबर लाने के बावजूद आप उस उम्मीदवार के बराबर हो जाते हैं, जिसने टॉप किया या कड़ी मेहनत की।”

सोशल मीडिया टिप्पणीकार अमित किलहोर ने काउंसलिंग के लिए परसेंटाइल घटाने पर सवाल उठाए और मेडिकल दाखिलों के लिए न्यूनतम मानक तय करने की माँग की। उन्होंने यह बात केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा को टैग करते हुए सोशल मीडिया पर उठाई।

पॉलिसी टिप्पणीकार अंशुल सक्सेना ने लिखा,”NEET PG 2025 में 800 में से माइनस 40 अंक लाने वाले उम्मीदवारों को भी पीजी काउंसलिंग में शामिल होने की अनुमति दी जा रही है। मेरिट कट-ऑफ इतना नीचे गिर गया है कि अब नेगेटिव स्कोर को भी क्वालिफाइंग माना जा रहा है। यह शैक्षणिक मानकों में एक गंभीर संकट है।”

सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर DAMS-Alpha के संस्थापक डॉ सुमेर सेठी ने लिखा, “मेरिट का नेगेटिव मूल्य नहीं होना चाहिए। NEET PG का कट-ऑफ माइनस 40 कोई राहत नहीं, बल्कि मानकों में गिरावट है। सिर्फ सीटें भरना ही गुणवत्ता नहीं होता। नेगेटिव कट-ऑफ ‘क्वालिफाइंग’ शब्द को ही बेमानी बना देता है।”

NEET PG के संशोधित कट-ऑफ ने पोस्टग्रेजुएट मेडिकल सीटों को भरने को लेकर चल रही बहस को और तेज कर दिया है। एक तरफ प्रशासन का कहना है कि यह फैसला सीटें खाली रहने से बचाने और खासकर सरकारी अस्पतालों में पर्याप्त रेजिडेंट डॉक्टर सुनिश्चित करने के लिए लिया गया, ताकि अस्पतालों का कामकाज और पढ़ाई प्रभावित न हो।

वहीं दूसरी ओर, बहुत कम या नेगेटिव अंक लाने वाले उम्मीदवारों को तीसरे दौर की काउंसलिंग में शामिल करने की अनुमति ने डॉक्टरों और आम लोगों के बीच गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

यह मामला पोस्टग्रेजुएट मेडिकल शिक्षा में सीटों के बेहतर उपयोग और न्यूनतम शैक्षणिक मानकों के बीच संतुलन बनाने की चुनौती को सामने लाता है। काउंसलिंग प्रक्रिया शुरू होने के साथ आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर बहस जारी रहने की संभावना है।

(मूल रूप से ये रिपोर्ट अंग्रेजी में अनुराग ने लिखी है। मूल रिपोर्ट पढ़ने के लिए इस लिंक पर क्लिक करें।)

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Anurag
Anuraghttps://lekhakanurag.com
Anurag is a Chief Sub Editor at OpIndia with over twenty one years of professional experience, including more than five years in journalism. He is known for deep dive, research driven reporting on national security, terrorism cases, judiciary and governance, backed by RTIs, court records and on-ground evidence. He also writes hard hitting op-eds that challenge distorted narratives. Beyond investigations, he explores history, fiction and visual storytelling. Email: [email protected]

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