प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सोमवार (19 जनवरी 2026) को जब पालम एयरपोर्ट पर संयुक्त अरब अमीरात (UAE) के राष्ट्रपति शेख मोहम्मद बिन जायद अल नहयान का स्वागत करने पहुँचे तो इसमें औपचारिकता से कहीं ज्यादा आत्मीयता दिख रही थी। भले ही UAE के राष्ट्रपति का यह दौरा 2 घंटे से भी कम का हो लेकिन इसका मायने कहीं ज्यादा बड़े हैं। प्रधानमंत्री ने राष्ट्रपति नहयान के स्वागत में जो पोस्ट लिखा उसमें उन्हें ‘भाई’ कहकर संबोधित किया गया था।
PM मोदी ने नहयान के समर्थन में अंग्रेजी के साथ-साथ अरबी में भी ‘X’ पर पोस्ट किया। PM मोदी ने लिखा, “मैं अपने भाई, संयुक्त अरब अमीरात के राष्ट्रपति शेख मोहम्मद बिन जायद अल नहयान का स्वागत करने एयरपोर्ट गया। उनका यह दौरा दिखताा है कि वह भारत-UAE की मजबूत दोस्ती को कितनी अहमियत देते हैं। हमारी बातचीत का मुझे बेसब्री से इंतजार है।”
Went to the airport to welcome my brother, His Highness Sheikh Mohamed bin Zayed Al Nahyan, President of the UAE. His visit illustrates the importance he attaches to a strong India-UAE friendship. Looking forward to our discussions.@MohamedBinZayed pic.twitter.com/Os3FRvVrBc
— Narendra Modi (@narendramodi) January 19, 2026
PM मोदी ने झूला और पश्मीना शॉल किया गिफ्ट
PM मोदी ने लोक कल्याण मार्ग स्थित अपने आवास पर UAE के अल नहयान और उनके परिवार का गर्मजोशी से स्वागत किया। उन्होंने UAE के राष्ट्रपति को गुजरात का पारंपरिक लकड़ी की नक्काशीदार झूला भेंट किया। यह झूला गुजरात के कई घरों का अहम हिस्सा होता है।
इसे सुंदर फूलों और पारंपरिक डिजाइनों से हाथ से तराशा गया है। गुजराती संस्कृति में झूला परिवार के साथ बैठकर बातचीत, अपनापन और पीढ़ियों के बीच जुड़ाव का प्रतीक माना जाता है। यह उपहार UAE द्वारा 2026 को ‘परिवार वर्ष’ घोषित किए जाने से भी गहराई से जुड़ता है।
इसके अलावा प्रधानमंत्री मोदी ने शेखा फातिमा बिंत मुबारक अल केतबी को चाँदी के डिब्बे में रखा हुआ पश्मीना शॉल भेंट किया है। यह पश्मीना शॉल बहुत ही बारीक ऊन से हाथ से बनाया जाता है, इसलिए यह हल्का, मुलायम और गर्म होता है। इसके साथ ही उन्हें कश्मीरी केसर भी दिया गया। कश्मीर घाटी में उगने वाला यह केसर अपने गहरे लाल रंग और खुशबू के लिए प्रसिद्ध है।
#WATCH | Delhi: Prime Minister Narendra Modi welcomed the President of the United Arab Emirates, Sheikh Mohamed bin Zayed Al Nahyan and his family at his residence at Lok Kalyan Marg.
— ANI (@ANI) January 19, 2026
PM Modi gifted the President of the UAE a Royal Carved Wooden Jhula (swing), a beautifully… pic.twitter.com/KGePrFmaMh
कितना अहम है यह दौरा?
विदेश मंत्रालय ने अल नहयान के इस दौरे को लेकर बताया है कि UAE के राष्ट्रपति बनने के बाद यह उनकी भारत की तीसरी आधिकारिक यात्रा होगी जबकि पिछले दस वर्षों में यह उनका कुल पाँचवाँ भारत दौरा है। यह यात्रा हाल के वर्षों में दोनों देशों के बीच हुए संपर्कों से बने सकारात्मक माहौल को आगे बढ़ाएगी।
विदेश मंत्रालय ने कहा कि भारत और UAE के बीच रिश्ते बेहद सौहार्दपूर्ण, घनिष्ठ और बहुआयामी हैं। दोनों देशों के राजनीतिक, सांस्कृतिक और आर्थिक संबंध काफी मजबूत हैं। भारत और UAE एक-दूसरे के प्रमुख व्यापार और निवेश साझेदारों में शामिल हैं।
इन संबंधों को व्यापक आर्थिक साझेदारी समझौता (CEPA), स्थानीय मुद्रा में लेन-देन की व्यवस्था (LCS) और द्विपक्षीय निवेश संधि से और मजबूती मिली है। इसके अलावा, ऊर्जा के क्षेत्र में भी दोनों देशों के बीच मजबूत सहयोग है, जिसमें लंबे समय के ऊर्जा आपूर्ति समझौते शामिल हैं।
इस दौरे पर क्या हुई चर्चा?
विदेश सचिव विक्रम मिसरी ने बताया कि व्यापार के मोर्चे पर, वर्ष 2022 में दोनों देशों के बीच समग्र आर्थिक साझेदारी समझौते (CEPA) पर हस्ताक्षर होने के बाद से द्विपक्षीय व्यापार 100 अरब डॉलर को पार कर चुका है। इसे देखते हुए दोनों नेताओं ने अपने लक्ष्य और बढ़ाने का फैसला किया है और अब वर्ष 2032 तक द्विपक्षीय व्यापार को 200 अरब डॉलर तक दोगुना करने का लक्ष्य रखा गया है।
विदेश सचिव ने कहा कि दोनों पक्षों ने उन्नत परमाणु तकनीकों में साझेदारी की संभावनाओं को तलाशने का निर्णय लिया है। इसमें बड़े परमाणु रिएक्टरों और स्मॉल मॉड्यूलर रिएक्टर्स (SMR) का विकास और तैनाती शामिल है। इसके अलावा उन्नत रिएक्टर प्रणालियों, परमाणु बिजली संयंत्रों के संचालन और रखरखाव तथा परमाणु सुरक्षा के क्षेत्र में भी सहयोग किया जाएगा।
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) को दोनों देशों के बीच सहयोग का एक प्रमुख क्षेत्र माना गया है। यह तय किया गया कि UAE की साझेदारी से भारत में एक सुपरकंप्यूटिंग क्लस्टर स्थापित किया जाएगा। साथ ही UAE भारत में डेटा सेंटर क्षमता बढ़ाने के लिए निवेश की संभावनाओं पर भी विचार करेगा।
यूएई फरवरी 2026 में भारत द्वारा आयोजित किए जाने वाले आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस समिट में उच्च स्तर पर भाग लेगा। दोनों देश डिजिटल या डेटा एम्बेसी (डिजिटल दूतावास) की स्थापना की संभावना पर भी विचार करेंगे। विदेश सचिव ने कहा कि इतनी कम अवधि की यात्रा के बावजूद यह एक बेहद शक्तिशाली और वरिष्ठ स्तर का प्रतिनिधिमंडल था।
इसके बाद दोनों नेता साथ-साथ प्रधानमंत्री आवास पहुँचे, जहाँ पहले सीमित और फिर विस्तृत स्तर पर बातचीत हुई। प्रतिनिधिमंडल के सदस्यों ने भी आपस में चर्चा की। इस दौरान नेताओं की मौजूदगी में कई दस्तावेजों का आदान-प्रदान भी किया गया। इस यात्रा के महत्व को इस बात से समझा जा सकता है कि राष्ट्रपति के साथ जो प्रतिनिधिमंडल आया, उसमें अबू धाबी और दुबई दोनों शाही परिवारों के सदस्य और कई वरिष्ठ मंत्री व अधिकारी शामिल थे।
दौरे की टाइमिंग को लेकर चर्चा
इस दौरे को लेकर सबसे ज्यादा चर्चा इसकी टाइमिंग की है। अल नहयान का यह दौरा भले ही कुछ घंटों का हो लेकिन इसकी अहमियत बहुत ज्यादा है। इसकी वजह यह है कि इस समय दुनिया की राजनीति काफी अस्थिर दौर से गुजर रही है। अमेरिका, चीन और रूस के बीच तनाव लगातार बढ़ रहा है जिससे अंतरराष्ट्रीय माहौल प्रभावित हो रहा है। वेनेजुएला और ग्रीनलैंड जैसे मुद्दों ने भी बड़ी ताकतों के बीच खींचतान को और तेज कर दिया है। वहीं, ईरान में हालात खराब हैं और इसका असर पूरे पश्चिम एशिया पर पड़ रहा है।
यूएई और सऊदी अरब के रिश्तों में तनाव की खबरें सामने आ रही हैं और इससे क्षेत्रीय संतुलन पर असर पड़ सकता है। ऐसे माहौल में शेख मोहम्मद बिन जायद का भारत आना एक अहम संदेश देता है। यह दिखाता है कि यूएई भारत को एक भरोसेमंद और स्थिर साझेदार मानता है और बदलते वैश्विक हालात के बीच भारत के साथ अपने रिश्तों को और मजबूत करना चाहता है।
भारत के लिए क्यों खास है UAE?
UAE आज भारत का सिर्फ एक मित्र देश नहीं बल्कि सबसे भरोसेमंद रणनीतिक साझेदारों में से एक है। खाड़ी क्षेत्र में भारत के हितों की रक्षा हो या वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति की स्थिरता हर जगह UAE की भूमिका निर्णायक है। लाखों भारतीय प्रवासी UAE में काम करते हैं और वहाँ से आने वाला रेमिटेंस भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए एक मजबूत आधार है। ऐसे में दोनों देशों के बीच विश्वास का गहरा होना भारत की आर्थिक और सामाजिक स्थिरता से सीधे जुड़ा हुआ है।
गल्फ देशों में सबसे बड़ा व्यापार साझीदार
गल्फ देशों में भारत सबसे ज्यादा निर्यात UAE को करता है और यही वजह है कि UAE भारत का तीसरा सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार बन चुका है। भारत और UAE के बीच सालाना कारोबार 6 लाख करोड़ रुपए से भी ज्यादा का है। वित्त वर्ष 2022–23 में भारत ने यूएई से करीब 4 लाख करोड़ रुपए का आयात किया था, जबकि यूएई ने भारत से लगभग 2 लाख करोड़ रुपए का सामान खरीदा।
दोनों देशों के बीच एक व्यापार समझौता भी हो चुका है। इसके तहत भारत यूएई को पेट्रोलियम उत्पाद, धातुएँ, कीमती पत्थर और आभूषण, खनिज, खाद्य पदार्थ जैसे अनाज, चीनी, फल-सब्जियां, चाय, मांस और सीफूड, साथ ही टेक्सटाइल, इंजीनियरिंग मशीनरी और केमिकल्स का निर्यात करता है।
व्यापार और निवेश: रिश्तों की रीढ़
भारत और UAE के बीच व्यापक आर्थिक साझेदारी समझौता (CEPA) पहले ही दोनों देशों के व्यापार को नई रफ्तार दे चुका है। इस संक्षिप्त दौरे के दौरान होने वाली बातचीत का एक बड़ा फोकस निवेश बढ़ाने पर रहा है। भारत के इंफ्रास्ट्रक्चर, डिजिटल टेक्नोलॉजी, ग्रीन एनर्जी और मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में UAE का निवेश भारत के विकास लक्ष्यों को गति दे सकता है। यह निवेश सिर्फ पैसे का लेन-देन नहीं बल्कि भरोसे का संकेत भी है।
ऊर्जा सुरक्षा और भविष्य की तैयारी
भारत जैसे देश के लिए ऊर्जा सुरक्षा सबसे बड़ा रणनीतिक मुद्दा है। तेल और गैस के पारंपरिक स्रोतों के साथ-साथ अब रिन्यूएबल एनर्जी और ग्रीन हाइड्रोजन जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाना भारत की प्राथमिकता है। UAE इस बदलाव में भारत का अहम भागीदार बन सकता है। शेख मोहम्मद का दौरा इसी दिशा में भविष्य की साझेदारी की नींव मजबूत करने वाला माना जा रहा है।


