अयोध्या गैंगरेप में छूटा सपा नेता मोईद खान तो पीड़ित परिवार भड़का: कहा- हमें नहीं मिला न्याय, DNA रिपोर्ट बदली गई

अयोध्या के चर्चित भदरसा गैंगरेप मामले में विशेष पॉक्सो कोर्ट ने अपना फैसला सुना दिया है। कोर्ट ने मुख्य आरोपित बनाए गए सपा नेता मोईद खान को सबूतों की कमी के चलते बरी कर दिया, जबकि उनके नौकर राजू खान को दोषी करार देते हुए 20 साल की जेल और 50 हजार रुपए जुर्माने की सजा सुनाई है। विशेष जज निरुपमा विक्रम की बेंच ने यह फैसला मुख्य रूप से DNA रिपोर्ट और तकनीकी साक्ष्यों को आधार मानकर दिया है।

DNA रिपोर्ट ने बदला केस का रुख

अदालत में सुनवाई के दौरान सबसे अहम कड़ी भ्रूण (पेट का बच्चा) की DNA रिपोर्ट रही। 7 अगस्त 2024 को पीड़िता के गर्भपात के बाद भ्रूण का DNA टेस्ट कराया गया था। रिपोर्ट में सामने आया कि भ्रूण का DNA राजू खान से मैच कर गया, जिसके चलते उसे दोषी माना गया। वहीं, मोईद खान का DNA मैच नहीं हुआ, जिसे कोर्ट ने उन्हें बरी करने का सबसे बड़ा आधार माना।

मोईद खान क्यों हुए बरी?

सपा नेता मोईद खान के पक्ष में कोर्ट ने चार मुख्य बिंदुओं को ध्यान में रखा। भ्रूण का DNA मोईद खान से मेल नहीं खाया। अभियोजन पक्ष वारदात की सही जगह (क्राइम सीन) साबित करने में नाकाम रहा। केस से जुड़ा कोई भी वीडियो सबूत के तौर पर कोर्ट में पेश नहीं किया जा सका। पुलिस की जाँच में घटना स्थल को लेकर आपसी विरोधाभास पाए गए।

पीड़िता की माँ का गंभीर आरोप: ‘न्याय नहीं मिला, रिपोर्ट बदली गई’

कोर्ट के इस फैसले से पीड़िता का परिवार बेहद आहत है। पीड़िता की माँ ने सीधे तौर पर जाँच प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए कहा कि उन्हें DNA रिपोर्ट पर बिल्कुल भरोसा नहीं है। उनका आरोप है कि राजनीतिक दबाव और मोईद खान के रसूख के कारण रिपोर्ट के साथ छेड़छाड़ की गई है। उन्होंने दावा किया कि समाजवादी पार्टी के बड़े नेता मोईद खान को बचाने में लगे थे, जिसके कारण उन्हें पूरा न्याय नहीं मिल पाया।

पीड़िता के परिवार ने बताया कि वे आज भी खौफ के माहौल में जी रहे हैं। माँ का कहना है कि घर के बाहर CCTV तो लगे हैं, लेकिन पुलिस की सुरक्षा अब वैसी नहीं रही जैसी शुरुआत में थी। परिवार ने साफ कर दिया है कि वे इस फैसले को चुपचाप स्वीकार नहीं करेंगे और न्याय के लिए हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाएँगे। सरकारी वकील ने भी संकेत दिए हैं कि वे इस फैसले के खिलाफ ऊपरी अदालत में अपील करेंगे।