अमेरिका के साथ ट्रेड डील के बीच भारत द्वारा रूस से तेल खरीद को लेकर लगातार तरह-तरह के दावे किए जा रहे थे। कुछ रिपोर्ट्स में यह तक कहा गया कि भारत ने अमेरिका के दबाव में रूस से तेल खरीद कम करने या रोकने पर सहमति जता दी है। लेकिन अब इन अटकलों पर विराम लग गया है।
म्यूनिख सिक्योरिटी कॉन्फ्रेंस के दौरान दिए गए उनके बयान ने यह स्पष्ट कर दिया कि भारत ने रूस से तेल खरीद बंद करने का कोई वादा नहीं किया है, बल्कि केवल ‘अतिरिक्त रूसी तेल’ की खरीद को लेकर प्रतिबद्धता जताई है। भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर के बाद अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो के बयान से स्थिति पूरी तरह साफ हो गई है।
VIDEO | Germany: “US does not know if Russia is 'serious' about Ukraine peace; has got commitment from India to stop buying additional Russian oil”, says US Secretary of State Marco Rubio (@SecRubio) in Munich.
— Press Trust of India (@PTI_News) February 14, 2026
(Source: Third Party)
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‘अतिरिक्त रूसी तेल’ पर रुबियो ने क्या कहा?
म्यूनिख सिक्योरिटी कॉन्फ्रेंस के दौरान मार्को रूबियो ने कहा कि अमेरिका की भारत के साथ बातचीत चल रही है और भारत ने ‘अतिरिक्त रूसी तेल’ नहीं खरीदने की बात कही है। उन्होंने यह भी कहा कि अमेरिका नहीं जानता कि रूस यूक्रेन युद्ध खत्म करने को लेकर कितना गंभीर है, लेकिन बातचीत और दबाव दोनों जारी रहेंगे।
रूस पर नए प्रतिबंध लगाए गए हैं और यूक्रेन को सैन्य सहायता दी जा रही है। रुबियो के बयान में ‘अतिरिक्त’ शब्द सबसे अहम है। इसका अर्थ है कि भारत मौजूदा स्तर पर जितना रूसी तेल खरीद रहा है, वह जारी रहेगा, केवल अतिरिक्त मात्रा में वृद्धि नहीं होगी। इससे यह पूरी तरह साफ हो गया कि भारत ने रूस से तेल आयात रोकने जैसी कोई प्रतिबद्धता नहीं की है।
भारत का स्पष्ट रुख: ऊर्जा सुरक्षा सर्वोपरि
भारत पहले ही यह साफ कर चुका है कि उसकी ऊर्जा नीति लागत, उपलब्धता और जोखिम के आँकलन पर आधारित है किसी राजनीतिक दबाव पर नहीं। विदेश मंत्री एस जयशंकर ने दो टूक कहा है कि भारत अपनी रणनीतिक स्वायत्तता और ऊर्जा सुरक्षा से कोई समझौता नहीं करेगा।
रूस से सस्ता तेल भारत के लिए न केवल आर्थिक रूप से फायदेमंद है, बल्कि महँगाई को काबू में रखने और ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने में भी अहम भूमिका निभाता है। आँकड़ों की माने तो हाल के महीनों में रूसी तेल आयात में कुछ कमी आई है, लेकिन यह बाजार की स्थितियों, कीमतों और आपूर्ति विविधीकरण की वजह से है, न कि किसी बाहरी दबाव के कारण।

