मध्य प्रदेश के भोपाल एम्स (AIIMS) में एक हिंदू महिला डॉक्टर की आत्महत्या के मामले ने तूल पकड़ लिया है। आरोप है कि संस्थान के विभागाध्यक्ष (HOD) डॉ परवेज द्वारा लगातार किए जा रहे मानसिक उत्पीड़न और अपमान से तंग आकर असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ सृष्टि ने बेहोश करने वाली दवा का ओवरडोज लेकर अपनी जान दे दी। इस गंभीर मामले पर राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) ने कड़ा रुख अपनाते हुए भोपाल पुलिस, एम्स प्रबंधन और स्वास्थ्य मंत्रालय को नोटिस जारी कर विस्तृत रिपोर्ट तलब की है।
तीन बार शिकायत, पर नहीं हुई कार्रवाई
राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग के सदस्य प्रियंक कानूनगो ने सोशल मीडिया के जरिए इस घटना की जानकारी साझा की। उन्होंने बताया कि डॉ सृष्टि ने आत्महत्या से पहले तीन बार डॉ परवेज के खिलाफ अस्पताल प्रबंधन से शिकायत की थी। आरोप है कि प्रबंधन ने आरोपित डॉक्टर पर कार्रवाई करने के बजाय मामले को दबाने की कोशिश की। इसी प्रताड़ना और प्रशासनिक अनदेखी के कारण महिला डॉक्टर मानसिक रूप से टूट गईं और उन्होंने यह आत्मघाती कदम उठाया।
भोपाल के AIIMS में महिला असिस्टेंट प्रोफेसर सृष्टि द्वारा HOD डॉक्टर परवेज़ की प्रताड़ना और हुमिलियेशन से तंग आ कर स्वयं बेहोश करने वाली दवाई के ओवरडोज से आत्महत्या करने वाली घटना की शिकायत प्राप्त हुई है कि महिला द्वारा तीन बार प्रताड़ना देने वाले डॉक्टर परवेज़ के विरुद्ध शिकायत… pic.twitter.com/f2iojSXVlb
— प्रियंक कानूनगो Priyank Kanoongo (@KanoongoPriyank) March 5, 2026
NHRC ने लिया सख्त संज्ञान
आयोग को मिली शिकायत के अनुसार, डॉ परवेज डॉक्टर सृष्टि को लगातार अपमानित करते थे। मामले की गंभीरता को देखते हुए प्रियंक कानूनगो ने कहा कि एक डॉक्टर का इस तरह आत्महत्या करना व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करता है। आयोग ने अब भोपाल पुलिस और एम्स प्रशासन से पूछा है कि शिकायतों के बावजूद आरोपित पर एक्शन क्यों नहीं लिया गया।
क्या है पूरा मामला?
डॉ सृष्टि एम्स भोपाल में असिस्टेंट प्रोफेसर के पद पर तैनात थीं। बताया जा रहा है कि विभागाध्यक्ष डॉ परवेज के साथ उनके पेशेवर संबंध तनावपूर्ण थे और उन्हें बार-बार नीचा दिखाया जा रहा था। मानसिक दबाव इतना बढ़ गया कि उन्होंने मेडिकल स्टोर से मिलने वाली बेहोश करने वाली दवा के ओवरडोज का सहारा लिया, जिससे उनकी मौत हो गई। अब इस मामले में निष्पक्ष जाँच और आरोपित की जवाबदेही तय करने की माँग उठ रही है।

