BBC के ‘इस्लामोफोबिया’ को ऑपइंडिया ने दिया करारा जवाब तो फेसबुक बिलबिलाया, वीडियो किया बैन: दिल्ली में मुस्लिमों को घर ना मिलने का प्रोपेगेंडा फैला रही थी कश्मीरी ‘पत्रकार’

मेटा और फेसबुक के वामपंथी प्रोपेगेंडा से जुड़ी खबरें तो अक्सर आपने सुनी ही होंगी। अब मेटा ने कश्मीरी पत्रकार गाफिरा कादिर के बीबीसी के वीडियो पर की गई कमेंट्री को लेकर ऑपइंडिया का एक वीडियो हटा दिया है। गाफिरा कादिर ने अपने वीडियो में दावा किया था कि दिल्ली में कश्मीरी छात्र और नौकरी पेशा लोगों को किराए पर मकान नहीं मिल रहा है और इसके लिए उन्होंने इस्लामोफोबिया को जिम्मेदार ठहराया था। इसी वीडियो पर कमेंट्री करते हुए बनाया गया ऑपइंडिया का वीडियो मेटा ने अपने प्लेटफॉर्म से हटा दिया।

यह वीडियो 9 मार्च की सुबह 7 बजे यूट्यूब पर अपलोड किया गया था। इसके बाद सुबह करीब 10 बजकर 30 मिनट पर उसी वीडियो को मेटा के फेसबुक प्लेटफॉर्म पर साझा किया गया। लेकिन ‘पब्लिश’ करने के कुछ ही सेकेंड बाद मेटा की ओर से एक नोटिफिकेशन भेजकर बताया गया कि इस वीडियो को बैन कर दिया गया है।

मेटा ने इस वीडियो को हटाने के लिए जो कारण बताया वह काफी अजीब है। कंपनी ने कहा कि यह वीडियो उसके ‘कम्युनिटी स्टैंडर्ड्स’ का उल्लंघन करता है। मेटा के मुताबिक, यह वीडियो ‘डेंजरस ऑर्गनाइजेशन या इंडिविजुअल’ से जुड़ी श्रेणी में आता है। इसका उदाहरण देते हुए मेटा ने कहा कि उनके प्लेटफॉर्म पर ‘आतंकी हमले का महिमामंडन’, ‘किसी विशेष समूह के खिलाफ हिंसा का समर्थन’ या ‘मानव तस्करी जैसी हानिकारक आपराधिक गतिविधियों को बढ़ावा देने’ वाली सामग्री की अनुमति नहीं है।

हालाँकि, ऑपइंडिया के वीडियो में ऐसा कुछ भी नहीं था। यह वीडियो केवल बीबीसी के उस वीडियो में किए गए इस्लामोफोबिया के दावे पर सवाल उठाने और उसके ‘फोबिया’ पहलू को समझाने की कोशिश करता था जिसका गाफिरा कादिर को दिखाया गया था।

हमने वीडियो में यह सवाल उठाया था कि कादिर या बीबीसी ने यह जानने की कोशिश क्यों नहीं की कि आखिर दिल्ली के लोग कुछ व्यक्तियों को किराए पर मकान देने में हिचकिचाते ‘क्यों’ हैं। वीडियो में यह भी पूछा गया था कि क्या बीबीसी यह भूल गया कि कुछ ही महीने पहले अल-फलाह यूनिवर्सिटी से जुड़े एक डॉक्टर ने दिल्ली के लाल किले के पास खुद को विस्फोट से उड़ा लिया था। इस हमले में एक दर्जन से ज्यादा लोगों की मौत हुई थी और 50 से अधिक लोग घायल हो गए थे।

वीडियो में यह भी बताया गया था कि इस साजिश में शामिल लोग, जो बम धमाकों की योजना बना रहे थे, वे भी किराए के मकानों में रह रहे थे और उनकी गतिविधियाँ दिल्ली से ज्यादा दूर नहीं थीं। हमने वीडियो में यह बताने की कोशिश की कि संभव है कि दिल्ली के मकान मालिकों के पास अपनी संपत्ति किराए पर देने को लेकर सतर्क रहने के कुछ वैध कारण हों।

हमारे वीडियो में यह कहा गया कि ‘इस्लामोफोबिया’ के नाम पर एकतरफा पीड़ित होने की कहानी पेश की जा रही है जबकि यह खोजने की कोशिश ही नहीं की जाती कि आखिर यह ‘फोबिया’ क्यों पैदा हुआ। वीडियो में यह भी सवाल उठाया गया कि हाल की उन घटनाओं को जानबूझकर नजरअंदाज किया गया, जिनसे लोगों के मन में डर पैदा हुआ था।

इस वीडियो को यूट्यूब पर यहाँ और X पर यहाँ देखा जा सकता है।

ऑपइंडिया के इस वीडियो में न तो मुसलमानों के खिलाफ नफरत फैलाने की कोशिश की गई थी और न ही यह संकेत दिया गया था कि कश्मीरियों को दिल्ली में किराए पर मकान नहीं दिया जाना चाहिए। वीडियो में सिर्फ उस एकतरफा नैरेटिव पर सवाल उठाए गए थे जिसमें एक समुदाय को पीड़ित के रूप में दिखाया जाता है और कहानी के दूसरे पक्ष को पूरी तरह नजरअंदाज कर दिया जाता है।