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सख्त नीति, साफ नीयतः ‘जीरो टॉलरेंस’ से UP में स्थापित हुआ कानून का राज, CM योगी आदित्यनाथ ने पूरा किया संकल्प

उत्तर प्रदेश में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में जीरो टॉलरेंस की नीति को शासन की मूल कार्यशैली के रूप में अपनाया गया, जिसमें अपराध और अपराधियों के प्रति किसी भी प्रकार की नरमी के लिए कोई जगह नहीं रही।

उत्तर प्रदेश में कानून व्यवस्था को लेकर जो बदलाव पिछले कुछ वर्षों में देखने को मिला है, वह किसी एक फैसले का परिणाम नहीं बल्कि एक स्पष्ट सोच, सख्त नीति और निरंतर क्रियान्वयन का नतीजा है।

प्रदेश में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में जीरो टॉलरेंस की नीति को शासन की मूल कार्यशैली के रूप में अपनाया गया, जिसमें अपराध और अपराधियों के प्रति किसी भी प्रकार की नरमी के लिए कोई जगह नहीं रही। यही कारण है कि आज उत्तर प्रदेश में कानून का राज केवल व्यवस्था का हिस्सा नहीं, बल्कि जन-विश्वास का आधार बन चुका है।

जीरो टॉलरेंस: धरातल पर प्रभाव

योगी सरकार ने यह साफ किया कि कानून व्यवस्था केवल नियंत्रण का विषय नहीं, बल्कि राज्य की पहचान का आधार है। इसी सोच के तहत अपराधियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई को प्राथमिकता दी गई।

पिछले 9 वर्षों में पुलिस मुठभेड़ों में 267 दुर्दांत अपराधी ढेर हो गए। इसके अलावा 10 हजार 990 अपराधियों का घायल होना और 22 हजार 306 इनामी अपराधियों की गिरफ्तारी यह दिखाती है कि कानून व्यवस्था सक्रिय और निर्णायक रूप से लागू है।

इसके साथ ही गैंगस्टर एक्ट के तहत 85,118 अपराधियों पर कार्रवाई और 977 अपराधियों पर राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (NSA) के तहत कार्रवाई ने यह स्पष्ट किया कि संगठित अपराध को जड़ से खत्म करने का प्रयास किया गया है।

अपराध की जड़ों पर प्रहार

प्रदेश में जीरो टॉलरेंस का प्रभाव केवल गिरफ्तारी तक ही सीमित नहीं रहा। उत्तर प्रदेश में माफियाओं और अपराधियों द्वारा अर्जित अवैध संपत्तियों पर व्यापक कार्रवाई करते हुए ₹14,580 करोड़ से अधिक की संपत्तियों का जब्तीकरण और ₹4,137 करोड़ से अधिक की संपत्तियों को ध्वस्त या जब्त किया गया।

इसके अलावा, चिन्हित माफियाओं के खिलाफ 1,459 मामलों में कार्रवाई, 875 अभियोग और 638 गिरफ्तारियाँ इस बात का प्रमाण हैं कि अपराध के संगठित ढाँचे को उसकी जड़ों से उखाड़ने में सफलता मिली है।

केवल धरपकड़ नहीं, न्यायिक सक्रियता भी

कानून व्यवस्था की सफलता का पैमाना केवल कार्रवाई नहीं, बल्कि न्यायिक परिणाम होता है। प्रदेश में 9 वर्षों ऑपरेशन कन्विक्शन के तहत 1,25,985 अभियुक्तों को सजा दिलाई गई, जिसमें 79 को मृत्युदंड और 10,414 को आजीवन कारावास मिला।

यह दिखाता है कि अब कानून की कार्यप्रणाली केवल अपराधियों के धरपकड़ तक सीमित नहीं रही, बल्कि उन्हें न्यायिक प्रक्रिया के अंतर्गत अंजाम तक भी पहुँचाता है, जिससे अपराध के प्रति निरोधात्मक प्रभाव मजबूत हुआ है।

आंकड़ों में दिखा बदलाव

पिछले 9 वर्षों में अपराध नियंत्रण के प्रयासों का असर आँकड़ों में भी दिखाई देता है। डकैती के मामलों में लगभग 90 प्रतिशत, लूट में 85 प्रतिशत, हत्या में 47 प्रतिशत और दंगों में 70 प्रतिशत तक कमी दर्ज की गई है।

इसके अलावा फिरौती के लिए अपहरण और महिलाओं के खिलाफ अपराधों में भी उल्लेखनीय गिरावट आई। ये यह दर्शाती है कि कानून व्यवस्था का सुधार व्यापक और बहु-स्तरीय रहा है।

त्वरित और तकनीक आधारित आधुनिक पुलिसिंग

इस बदलाव का एक महत्वपूर्ण पहलू पुलिस व्यवस्था का आधुनिकीकरण रहा है। यूपी-112 सेवा के माध्यम से 9 वर्षों में 3 करोड़ 10 लाख से अधिक कॉल अटेंड की गईं और रिस्पॉन्स टाइम को 1 घंटा 5 मिनट से घटाकर 6 मिनट 41 सेकंड कर दिया गया।

वहीं, साइबर हेल्पलाइन और तकनीक आधारित मॉनिटरिंग ने पुलिस को अधिक प्रभावी और त्वरित बनाया है, जिससे नागरिकों को तत्काल सहायता मिलना सुनिश्चित हुआ।

प्राथमिकता के केंद्र में महिलाओं की सुरक्षा

जीरो टॉलरेंस नीति का एक महत्वपूर्ण पहलू महिलाओं की सुरक्षा को लेकर दिखाई देता है। मिशन शक्ति के तहत महिलाओं से जुड़े अपराधों में उल्लेखनीय कमी दर्ज की गई है, जिससे यह स्पष्ट होता है कि सुरक्षा और सशक्तिकरण दोनों को समान महत्व दिया गया है।

वहीं, महिला हेल्पलाइन, एंटी-रोमियो स्क्वाड और विशेष महिला पुलिस बल की तैनाती ने इस दिशा में ठोस बदलाव सुनिश्चित किया है।

व्यापक और सुदृढ़ सुरक्षा तंत्र

उत्तर प्रदेश में STF और ATS की सक्रियता बढ़ाते हुए संगठित अपराध, साइबर अपराध और आतंकवाद के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई की गई। STF द्वारा 7,627 अपराधियों की गिरफ्तारी और ATS द्वारा आतंकवादियों व अवैध विदेशी नागरिकों की गिरफ्तारी यह दिखाती है कि सुरक्षा को व्यापक दृष्टिकोण से देखा गया है।

ये कहा जा सकता है कि उत्तर प्रदेश में कानून व्यवस्था का यह परिवर्तन केवल प्रशासनिक सुधार नहीं, बल्कि शासन की विश्वसनीयता का पुनर्निर्माण है। ऐसे में यह कहना गलत नहीं होगा कि जीरो टॉलरेंस अब केवल एक नीति नहीं, बल्कि उत्तर प्रदेश की पहचान बन चुका है, जहाँ अपराधियों में भय और आम नागरिक में सुरक्षा का विश्वास स्थापित हुआ है।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में वर्तमान उत्तर प्रदेश सरकार की कार्यप्रणाली ने यह साबित कर दिखाया है कि जब नीति सख्त हो, नीयत साफ हो और क्रियान्वयन निरंतर हो, तो परिणाम भी स्थायी और दीर्घकालिक होते हैं।

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