फिल्म अभिनेता पीयूष मिश्रा ने एक बार फिर भारत में उस दौर को याद किया, जब कम्युनिस्ट और लेफ्टिस्ट ने हिंदुओं की आवाज दबाकर रखी। पीयूष मिश्रा कहते हैं कि उस वक्त हिंदू वीरों को सराहा नहीं गया, इतिहास के साथ छेड़छाड़ किया गया। यहाँ तक कि माहौल ऐसा बना दिया गया कि खुद को हिंदू बताने भी शर्म आने लग गई थी।
Piyush Mishra on his leftist ideology
— Shubhankar Mishra (@shubhankrmishra) April 2, 2026
– Hindu heroes were sidelined.
– Hindu stories were pushed into the shadows.
– An entire generation was subtly conditioned to feel ashamed of their own identity of being Hindu, of being Brahmin.
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मीडिया पर्सनलिटी शुभांकर मिश्रा के पोडकास्ट में पीयूष मिश्रा ने पीड़ा साझा करते हुए कहा,”इतिहास बहुत अजीब लगता है। लगता है चंद राजाओं या लोगों या कुछ पंथों के दृष्टिकोण से लिखा हुआ लगता है। हमारे हीरोज आए ही नहीं कभी सामने। बड़े-बड़े हीरोज रहे हैं। महाराणा प्रताप हो गए, राणा सांगा हो गए। इनको हाइलाइट ही नहीं किया गया। पता नहीं क्यों? शायद लेफ्ट और कम्युनिस्ट का ओवरटेक था इसीलिए या पता नहीं किसलिए।”
उन्होंने सालों से दबी हिंदुओं की आवाज पर चिंतन करते हुए कहा, “भारत में हिंदू धर्म को दबाया गया है। तो अब जब उठी है तो शोर सुनाई देगा ही। अब वही लोग इल्जाम लगाते हैं कि आप लोग कट्टरपंथी हो गए हो। पहले तो कुछ भी नहीं थे। जब कम्युनिस्म था तो हिंदू… ब्राह्मण होने पर शर्म थी। मेरे लेफ्टिस्ट साथी, बहुत इंजॉय करते थे इस बात को।”
कॉमरेड रहे पीयूष मिश्रा सुना चुके आपबीती
यह पहली बार नहीं है जब पीयूष मिश्रा ने हिंदुओं के मुद्दे पर बात की हो या कम्युनिस्टों की विचारधारा की पोल खोली हो। पीयूष मिश्रा बता चुके हैं कि वह पहले कॉमरेड हुआ करते थे और कम्युनिस्टों ने उनकी जिंदगी के 20 साल बर्बाद कर दिए।
"कम्युनिस्टों ने मुझे बर्बाद कर दिया "
— Nehra Ji (@nehraji779) September 11, 2025
—पीयूष मिश्रा,एक्टर
👉कन्हैया कुमार ,उमर खालिद और शरजील इमाम जेसे जिहाड़ी कम्युनिस्ट ही है
इन्होंने हमेशा देश को कमजोर किया है pic.twitter.com/1v62b8RFFi
लल्लनटॉप के साथ इंटरव्यू में पीयूष मिश्रा ने कहा था, “कम्युनिस्टों ने 20 साल मेरी जिंदगी के बर्बाद कर दिए।” उन्होंने यह भी कहा था, कम्युनिस्ट लगातार 20 साल तक मुझसे काम करवाते रहे। वे कहते- पैसा कमाना पाप है। जो पैसा कमाता है, वो पूँजीपति कहलाता है, कैपिटलिस्ट हो जाता है। पैसा कभी मत कमाना। फिर मैंने कहा- नहीं कमाऊँगा सर।”
पीयूष मिश्रा कॉमरेड रह चुके हैं। और वही इस पर अफसोस कई बार कर चुके हैं। वह जान चुके हैं कि पहले कम्युनिस्ट के बोलबाले में हिंदुओं की आवाज दबाई जाती थी। जीवन में तरक्की नहीं की जाने दी जाती थी। इसी गम को कई बार पीयूष मिश्रा अलग-अलग इंटरव्यू और प्लैटफॉर्म पर शेयर कर चुके हैं।

