असम में मातृ मृत्यु दर में ऐतिहासिक गिरावट पर भावुक हुए CM हिमंता बिस्वा सरमा, राष्ट्रीय औसत से नीचे पहुँचा आँकड़ा: स्वास्थ्य कर्मियों के संघर्ष-समर्पण को दिया श्रेय

असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने राज्य में मातृ मृत्यु दर (MMR) में आई ऐतिहासिक गिरावट पर गहरी खुशी और भावुकता व्यक्त की है। मुख्यमंत्री ने सोशल मीडिया पर एक विशेष पोस्ट साझा करते हुए इसे अपने सार्वजनिक जीवन का सबसे बेहद भावुक करने वाला क्षण बताया। राज्य में पहली बार मातृ मृत्यु दर का आँकड़ा गिरकर राष्ट्रीय औसत से भी नीचे आ गया है, जिसे असम के स्वास्थ्य क्षेत्र में एक बड़े मील के पत्थर के रूप में देखा जा रहा है।

मुख्यमंत्री सरमा ने आँकड़ों का हवाला देते हुए बताया कि असम में मातृ मृत्यु दर अब घटकर 84 पर आ गई है। इतिहास में यह पहली बार हुआ है जब असम का यह आँकड़ा 88 के राष्ट्रीय औसत से भी कम दर्ज किया गया है। उन्होंने याद किया कि जब साल 2006 में उन्होंने पहली बार स्वास्थ्य विभाग की जिम्मेदारी संभाली थी, तब राज्य में मातृ मृत्यु दर 480 थी। उस समय इस स्थिति को सुधारना और इस मुकाम तक पहुँचना लगभग असंभव दिखाई देता था।

हिमंता बिस्वा सरमा ने इस बड़ी सफलता का पूरा श्रेय राज्य के जमीनी स्वास्थ्य कर्मियों को दिया है। उन्होंने कहा कि असम भर के हजारों डॉक्टरों, नर्सों, आशा (ASHA) कार्यकर्ताओं, स्वास्थ्य अधिकारियों और फ्रंटलाइन वर्कर्स ने साल दर साल बिना थके, पूरी करुणा और खामोशी के साथ काम किया। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि यह ऐतिहासिक उपलब्धि पूरी तरह से उन्हीं स्वास्थ्य कर्मियों की मेहनत का परिणाम है।

इस सफलता के मानवीय पहलू को रेखांकित करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि इस संख्या के पीछे उन अनगिनत माताओं की सुरक्षित जिंदगी है, जो स्वस्थ होकर अपने परिवारों के पास घर लौटीं। इस कामयाबी के पीछे सालों का त्याग, बिना सोए बिताई गई रातें और लोगों की जान बचाने का एक अटूट संकल्प छिपा हुआ है। असम ने आज सामूहिक प्रयासों और जनता के आशीर्वाद से वह कर दिखाया है जो कभी नामुमकिन लगता था।

अपने ट्वीट में मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने स्वास्थ्य क्षेत्र से जुड़े हर एक कर्मचारी के प्रति अपना आभार और सम्मान प्रकट करते हुए लिखा, “सार्वजनिक जीवन में कुछ ऐसे क्षण आते हैं जो आपको बहुत गहराई से छू जाते हैं। आज मेरे लिए ऐसा ही एक पल है। असम की मातृ मृत्यु दर घटकर 84 पर आ गई है। हमारे इतिहास में पहली बार, असम अब 88 के राष्ट्रीय औसत से नीचे है। जब मैंने 2006 में स्वास्थ्य विभाग संभाला था, तब हमारा MMR 480 था। उस समय यह सफर लगभग असंभव लग रहा था। लेकिन पूरे असम में हजारों डॉक्टरों, नर्सों, आशा कार्यकर्ताओं, स्वास्थ्य अधिकारियों और फ्रंटलाइन वर्कर साल दर साल चुपचाप, अथक रूप से और करुणा के साथ काम करते रहे। यह उपलब्धि उन्हीं की है।”

उन्होंने आगे लिखा, “इस संख्या के पीछे अनगिनत माताएँ हैं जो सुरक्षित रूप से अपने परिवारों के पास घर लौटीं। इस सफलता के पीछे सालों का बलिदान, बिना सोए बिताई रातें और जान बचाने की एक अटूट प्रतिबद्धता है। असम ने आज वास्तव में कुछ ऐतिहासिक हासिल किया है। जो कभी असंभव लगता था, वह सामूहिक प्रयास और असम के लोगों के आशीर्वाद से वास्तविकता बन गया है। मैं इस काम को संभव बनाने वाले हर स्वास्थ्य कार्यकर्ता के आगे आभार से सिर झुकाता हूँ।”