केंद्र सरकार ने देश में आबादी के बदलते स्वरूप और अवैध घुसपैठ जैसे मामलों की जाँच के लिए एक उच्च स्तरीय समिति बनाई है। गृह मंत्रालय ने 26 मई 2026 को इसकी घोषणा की। सरकार का कहना है कि देश के कुछ हिस्सों में आबादी तेजी से बदल रही है और यह बदलाव सिर्फ जन्म और मृत्यु दर की वजह से नहीं हो रहे हैं।
सरकार के अनुसार, इसके पीछे अवैध घुसपैठ, लोगों का असामान्य तरीके से एक जगह से दूसरी जगह जाना और प्रशासन की लापरवाही जैसे कारण हो सकते हैं। सरकार ने कहा कि पहले यह समस्या सिर्फ सीमा वाले इलाकों में ज्यादा दिख रही थी, लेकिन अब इसका असर शहरों, औद्योगिक इलाकों, जनजातीय क्षेत्रों और दूसरे संवेदनशील इलाकों में भी दिखाई दे रहा है। इससे सरकारी सुविधाओं, स्थानीय प्रशासन, संसाधनों के बँटवारे और सामाजिक संतुलन पर असर पड़ रहा है।
Ministry of Home Affairs has issued a Resolution on Constitution of a High Level Committee on Demographic Changes (HLCDC) to undertake scientific study of the nature, causes and consequences of such demographic changes occurring across the country and to recommend appropriate… pic.twitter.com/MwD00FUZBF
— ANI (@ANI) May 27, 2026
डेमोग्राफिक चेंज के कारणों पर अध्ययन करेगी हाई लेवल कमेटी
इसी को देखते हुए गृह मंत्रालय ने ‘हाई लेवल कमेटी ऑन डेमोग्राफिक चेंजेज’ यानी HLCDC बनाई है। इस समिति के अध्यक्ष सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज जस्टिस प्रकाश प्रभाकर नाओलेकर होंगे। गृह मंत्रालय के संयुक्त सचिव को समिति का सदस्य सचिव बनाया गया है। समिति में जनगणना आयुक्त, पूर्व IPS अधिकारी दुर्गा शंकर मिश्रा, पूर्व IPS अधिकारी बालाजी श्रीवास्तव और अर्थशास्त्री डॉ. शामिका रवि को सदस्य बनाया गया है। जरूरत पड़ने पर समिति दूसरे विशेषज्ञों और एजेंसियों की मदद भी ले सकेगी। साथ ही राज्य सरकारों, सुरक्षा एजेंसियों, सामाजिक संगठनों और शैक्षणिक संस्थानों से भी राय ली जाएगी।
समिति देश में हो रहे जनसंख्या बदलावों और उनके कारणों का अध्ययन करेगी। इसमें अवैध घुसपैठ, सीमा पार लोगों की आवाजाही, रोजगार के लिए पलायन और दूसरे सामाजिक व पर्यावरणीय कारणों की जाँच शामिल होगी। समिति यह भी देखेगी कि किन इलाकों में असामान्य तरीके से बसावट हो रही है और कहाँ योजनाबद्ध तरीके से लोगों को बसाया जा रहा है। इसके अलावा अलग-अलग धार्मिक और सामाजिक समुदायों की आबादी में हो रहे बदलावों का भी अध्ययन किया जाएगा।
कमेटी की सलाह पर सरकार उठाएगी जरूरी कदम
समिति सरकार को यह भी बताएगी कि देश में रह रहे अवैध प्रवासियों की पहचान कैसे की जाए, उन्हें कानूनी तरीके से कैसे हिरासत में लिया जाए और समय पर कैसे वापस भेजा जाए। इसके साथ ही सीमा सुरक्षा मजबूत करने, पहचान प्रणाली बेहतर बनाने और आबादी से जुड़े बदलावों पर लगातार नजर रखने के लिए स्थायी व्यवस्था बनाने की सिफारिश भी समिति करेगी। केंद्र और राज्य सरकारों के बीच बेहतर तालमेल के लिए भी नीति तैयार करने का सुझाव दिया जाएगा।
एक साल के भीतर सरकार को सौंपेगी रिपोर्ट
गृह मंत्रालय ने कहा है कि समिति जरूरत पड़ने पर किसी भी मंत्रालय, विभाग, राज्य सरकार या सरकारी संस्था से जरूरी जानकारी और दस्तावेज माँग सकेगी। समिति अपने काम करने का तरीका खुद तय करेगी और जरूरत होने पर अलग उप-समितियाँ भी बना सकेगी। समिति का मुख्यालय नई दिल्ली में होगा और गृह मंत्रालय उसे हर तरह की प्रशासनिक सहायता देगा। समिति को अपनी अंतिम रिपोर्ट एक साल के भीतर सरकार को सौंपनी होगी।

