पश्चिम बंगाल में भारतीय जनता पार्टी (BJP) की सरकार बनते ही बांग्लादेशी घुसपैठियों को बाहर निकालने की कवायद शुरू हो गई है। सीएम शुभेंदु अधिकारी की सरकार ने ‘डिटेक्ट, डिलीट एंड डिपोर्ट’ अभियान के तहत होल्डिंग सेंटर (हिरासत केंद्र) बनाने का ऐलान किया था। इसके तहत अब तक 11 जिलों में 13 होल्डिंग सेंटर बनाए जा चुके हैं, जिनमें 386 बांग्लादेशी और रोहिंग्या को रखा गया है। वहीं BSF को बाड़बंदी के लिए 9 जिलों में 142.79 एकड़ जमीन दी जा चुकी है।
सामने आए आधिकारिक आँकड़ों के मुताबिक, सबसे ज्यादा बसीरहाट जिले में तीन होल्डिंग सेंटर में 335 घुसपैठियों को रखा गया है। यह जिला बांग्लादेश की सीमा से बेहद करीब है। यहाँ 148 पुरुष, 99 महिलाएँ और 88 बच्चे हैं। इसके बाद मुर्शिदाबाद में 19 घुसपैठियों को रखा गया है।
इसके अलावा माल्दा में 9, दक्षिण दिनाजपुर में 8, बारुईपुर में 5, बारासात में 3, कूचबिहार और जांगीपुर में 2, सुंदरबन, बोनगाँव और कृष्णानगर में 1 घुसपैठियों को रखा गया है। डिटेक्ट, डिलीट और डिपोर्ट की नीति के अनुसार, इन घुसपैठियों की अवैध पहचान हटाने के लिए इन्हें यहाँ रखा गया है। इसके बाद इन घुसपैठियों को BSF को सौंप दिया जाएगा।
वहीं शुभेंदु सरकार ने बंगाल को घुसपैठियों से मुक्त बनाने के लिए BSF को अब तक 142.79 एकड़ जमीन दे दी है। इस जमीन पर BSF चौकियाँ बनाएगी और बाड़बंदी की जाएगी। यही जमीन सीमावर्ती जिलों में BSF को सौंपी गई है। इनमें सबसे ज्यादा मुर्शिदाबाद में 38,805 एकड़ और जलपाईगुड़ी में 35.265 एकड़ जमीन दी गई है। इसके अलावा कूच बिहार में 22.95 एकड़, दक्षिण दिनाजपुर में 20.17 एकड़, मालदा में 10.90 एकड़, दार्जीलिंग में 8.9 एकड़, उत्तर दिनाजपुर में 2.84 एकड़, नादिया में 0.55 एकड़ा और उत्तर 24 परगना में 2.6 एकड़ जमीन BSF को दी जा चुकी है।

