#WATCH | Union Minister of Road Transport & Highways Nitin Gadkari triggers the Zoji-La tunnel final breakthrough. The strategically significant 13.15-kilometre Zoji-La Tunnel will link Jammu and Kashmir with Ladakh
— ANI (@ANI) June 9, 2026
This marks a major milestone in India's infrastructure history… pic.twitter.com/dbd9KzO4vF
11600 फीट से अधिक की ऊँचाई पर यह दुनिया की सबसे ऊँची सुरंग है, जिसमें एक ही मार्ग में आने-जाने की सुविधा होगी। यह क्षेत्र हर साल भीषण सर्दी के कारण कई महीनों तक कटा रहता है। इस दृष्टि से यह सुरंग रणनीतिक रूप से काफी अहम है।
यह पाकिस्तान और चीन के साथ लगी सीमा पर सैनिकों के आवाजाही को सुगम, तेज और सुरक्षित बनाएगी। 2020 में भारतीय सेना और चीनी सैनिकों के बीच गलवान में आमने-सामने की लड़ाई हुई थी। उस वक्त ऐसी सुरंग की जरूरत को महसूस किया गया और क्षेत्र में तेजी से बुनियादी ढाँचे के विकास को बढ़ावा दिया गया।
Tomorrow, the 13.15-km Zojila Tunnel will achieve breakthrough, marking a milestone in India's infrastructure journey. Once completed, Asia's longest bi-directional road tunnel will provide all-weather connectivity between Kashmir and Ladakh, strengthening mobility and logistics. pic.twitter.com/GFyd3DYjrn
— infoindata (@infoindata) June 8, 2026
पहाड़ों के रास्ते कश्मीर और लद्दाख को जोड़ा गया
जम्मू और कश्मीर के सोनमर्ग के पास बाल्टल और लद्दाख के द्रास क्षेत्र में मीनामर्ग के बीच जोजिला सुरंग का निर्माण किया जा रहा है । इस परियोजना का उद्देश्य श्रीनगर-कारगिल-लेह राजमार्ग पर हर मौसम में कनेक्टिविटी को बनाए रखना है। यह कश्मीर और लद्दाख के बीच अहम रोड कनक्टिविटी भी है।
The Zojila Tunnel is shaping up as one of India’s most remarkable infrastructure feats — a 13.153 km single-tube bi-directional road tunnel built at about 11,578 feet in the Himalayas. Once complete, it will provide all-weather connectivity between Srinagar and Ladakh,… pic.twitter.com/qC2uzZNU1L
— Megha Engineering and Infrastructures Ltd (@MEIL_Group) June 7, 2026
साल के करीब 4 महीने भारी हिमपात, बर्फीले तूफान और हिमस्खलन के कारण यह दर्रा बंद हो जाता है। इससे नागरिकों की आवाजाही, व्यापार, पर्यटन और आवश्यक वस्तुओं के परिवहन में बाधा उत्पन्न होती है।
#InPics | A landmark moment for #India's infrastructure sector as the 13.153-km #Zojila Tunnel achieves its final breakthrough. Set to become the world's longest single-tube bi-directional road #tunnel at the highest altitude, the project will provide all-weather connectivity… pic.twitter.com/55quFdhqS6
— The Times Of India (@timesofindia) June 7, 2026
इस सुरंग को इस तरह से डिजाइन किया गया है कि मौसम की मार का असर आवाजाही पर न पड़े। सालभर सुरक्षित यात्रा सुनिश्चित हो।
परियोजना के मुख्य सुरंग की लंबाई 13.153 किलोमीटर है। इसके अलावा सहायक सड़कों, पुलों और दूसरे बुनियादी ढाँचे को जोड़ने पर इसकी लंबाई करीब 30.9 किलोमीटर हो जाती है। इसमें 457 मीटर और 1953 मीटर लंबी नीलग्रार जुड़वां सुरंगें, 2.35 किलोमीटर में फैली सात कट-एंड-कवर संरचना, 450 मीटर लंबी स्नो गैलरी और 460 मीटर की तीन अहम पुल भी शामिल हैं।
पहाड़ों में इंजीनियरिंग का अद्भुत नमूना
जोजिला सुरंग महज एक सड़क परियोजना नहीं है। यह हिमालय में अब तक किए गए सबसे जटिल इंजीनियरिंग कारनामों में से एक है।
यह परियोजना मेघा इंजीनियरिंग एंड इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड (एमईआईएल) ने राष्ट्रीय राजमार्ग और अवसंरचना विकास निगम लिमिटेड (एनएचआईडीसीएल) के साथ मिलकर कर रही है, जो दुर्गम भूभागों में राजमार्ग विकास के लिए केंद्र सरकार की विशेष एजेंसी है।
एशिया की सबसे लंबी सुरंग और 🇮🇳 भारत की तकनीकी दक्षता, इंजीनियरिंग क्षमता और अदम्य संकल्प का प्रतीक जोजिला मुख्य सुरंग का ऐतिहासिक ब्रेक-थ्रू!#ZojilaTunnel #AllWeatherRoad #TunnelBreakthrough #PragatiKaHighway #GatiShakti #BuildingTheNation pic.twitter.com/HZN4uwgHt3
— Nitin Gadkari (@nitin_gadkari) June 9, 2026
इसकी खासियत वेंटिलेशन और सुरक्षा तंत्र है। चूँकि यहाँ कोई अलग से बचाव सुरंग नहीं है, इसलिए इंजीनियरों ने वेंटिलेशन और आपातकालीन स्थिति में यहाँ पहुँचने के लिए तीन विशाल शाफ्ट का निर्माण किया है। सबसे बड़ा शाफ्ट पहाड़ में 474.3 मीटर की गहराई तक जाता है और वर्तमान में भारत का सबसे लंबा शाफ्ट है। अन्य दो शाफ्ट की लंबाई क्रमशः 367.38 मीटर और 213.5 मीटर है।
यह सुरंग न्यू ऑस्ट्रियन टनलिंग तरीका (NATM) का उपयोग करके बनाई गई है, जो हिमालय जैसे पर्वतीय क्षेत्र के लिए सबसे आधुनिक निर्माण तकनीक है। पारंपरिक सुरंग निर्माण के तरीकों से अलग, NATM इंजीनियरों को खुदाई, तत्काल मजबूती और भूवैज्ञानिक निगरानी के माध्यम से चट्टान की बदलती स्थितियों के अनुरूप लगातार ढलने की सुविधा प्रदान करती है।
यह तरीका काफी अहम रहा, क्योंकि जोजिला अलाइनमेंट के साथ की भूविज्ञान संरचना अत्यधिक अप्रत्याशित निकली। इंजीनियरों ने 13 किलोमीटर के इस भूभाग में चट्टान में 67 तरह के परिवर्तन दर्ज किए, जिसके कारण खुदाई और दूसरी रणनीतियों में बार-बार बदलाव करना पड़ा।
इस चुनौती को और भी जटिल बना रहा था यहाँ का जलवायु और मौसम। इस क्षेत्र में तापमान अक्सर -20 डिग्री सेल्सियस से नीचे चला जाता है और सर्दियों में -30 डिग्री सेल्सियस तक गिर सकता है। निर्माण दल वर्षों से भारी हिमपात, बर्फीले तूफान और कई हिमस्खलन जैसी घटनाओं के बीच काम करते रहे।
करीब 1200 से अधिक श्रमिकों ने निर्माण कार्य दिनरात जारी रखा। परियोजना को पूरा करने में 10 मिलियन से अधिक घंटे तक श्रमिकों ने काम किया।
सुरंग बुनियादी ढाँचे के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि क्यों है?
जोजिला सुरंग दुनिया के कुछ सबसे दुर्गम भूभागों में बने सुरंगों में एक है। यह परियोजना उन्नत सुरंग निर्माण तकनीक, इंजीनियरिंग विशेषज्ञता और पर्वतीय क्षेत्रों में बुनियादी ढाँचे के निर्माण की देश की बढ़ती क्षमता को प्रदर्शित करता है। हिमस्खलन-संभावित हिमालयी पहाड़ों के नीचे इतनी बड़ी सुरंग की सफल खुदाई को अपने आप में एक बड़ी उपलब्धि माना जाता है।
इस सुरंग से आर्थिक लाभ भी मिलने की उम्मीद है। चालू होने के बाद, इससे बाल्टल और मीनामर्ग के बीच यात्रा का समय कम हो जाएगा। जोजिला दर्रे से होकर यात्रा करने में अब समय मात्र 15 मिनट लगेगा, जो पहले साढ़े तीन घंटे लगते थे।
पूरे साल अब कश्मीर और लद्दाख के बीच लोगों, सामान और सेवाओं की आवाजाही बनी रहेगी। सड़कों के बंद होने के कारण व्यवसाय ठप पड़ जाते थे, लेकिन अब दिक्कत नहीं होगी। सामानों के भंडारण करने की आवश्यकता नहीं होगी। किसानों, व्यापारियों को बाजारों तक पहुँच का लाभ मिलेगा।
पर्यटन के क्षेत्र को भी बढ़ावा मिलने की उम्मीद है। सोनमर्ग, द्रास, कारगिल, लेह जैसे पर्यटन स्थल अब केवल गर्मी में नहीं बल्कि पूरे साल पर्यटकों को आकर्षित करेंगे। इससे लोगों की आमदनी बढ़ेगी और रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे। पूरे साल स्वास्थ्य सेवा, शिक्षा और आवश्यक सेवाएँ लोगों को मिलती रहेगी।
राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए अहम सुरंग
श्रीनगर-लेह राजमार्ग भारतीय सशस्त्र बलों के लिए एक महत्वपूर्ण रसद गलियारा है। यह लद्दाख में सैनिकों, उपकरणों, ईंधन की आपूर्ति के लिए सबसे अहम मार्ग है, जो चीन के साथ वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) पर तनाव के बाद और भी महत्वपूर्ण हो गया है।
हाल के वर्षों में, भारत ने लद्दाख के ज्यादा ऊँचाई वाले सीमावर्ती क्षेत्र में सैनिकों की आवाजाही को बढ़ाने के लिए बुनियादी ढाँचे को मजबूत किया है। जोजिला सुरंग इसी व्यापक प्रयास का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है।
सैन्य विशेषज्ञों का मानना है कि यह परियोजना जरूरत पड़ने पर सैनिकों और उपकरणों की तेजी से तैनाती की सुविधा देकर परिचालन लचीलेपन में काफी सुधार लाएगी। इससे मौसम के अनुकूल परिस्थितियों और अक्सर लंबे और जोखिम भरे वैकल्पिक मार्गों पर निर्भरता भी कम होगी।
चीन और पाकिस्तान के साथ भारत की सीमाओं पर बढ़ती सैन्य गतिविधियों के संदर्भ में इस सुरंग का रणनीतिक महत्व और भी बढ़ जाता है। विश्वसनीय, हर मौसम में काम करने वाली कनेक्टिविटी भारत की रसद संबंधी तैयारियों को मजबूत करती है और संवेदनशील सीमावर्ती क्षेत्रों में मजबूत उपस्थिति बनाए रखने की उसकी क्षमता को बढ़ाती है।
इस तरह के बुनियादी ढाँचे की आवश्यकता 1999 के कारगिल युद्ध के समय महसूस किया गया। इसके बाद भारत-चीन सीमा पर तनाव और गलवान झड़प ने लद्दाख तक सड़क संपर्क की सोच को अमली जामा पहनाया।


