‘अरुणाचल प्रदेश में कोई चीनी घुसपैठ नहीं’ : भारतीय सेना ने मीडिया में चल रही खबरों का किया खंडन, कहा- सारे दावे निराधार

इंडियन आर्मी ने उन मीडिया रिपोर्टों को सिरे से खारिज कर दिया है, जिसमें कहा गया है कि अरुणाचल प्रदेश में अतिक्रमण कर चीनी सैनिकों ने अपने मिलिट्री कैंप बना लिए हैं। आर्मी का कहना है कि ये गलत और आधारहीन खबरें है।

सेना ने कहा है कि कुछ मीडिया रिपोर्ट्स में ये दावा किया गया है कि चीनी सेना यानी पीएलए ने अरुणाचल प्रदेश में घुस कर जमीन पर कब्जा कर लिया है और वहाँ सैन्य शिविर बना लिए हैं, लेकिन ये रिपोर्ट गलत और निराधार है।

यह सफाई भारत और चीन की पिछले महीने बीजिंग में भारत-चीन बॉर्डर मामलों पर वर्किंग मैकेनिज्म फॉर कंसल्टेशन एंड कोऑर्डिनेशन (WMCC) की 35वीं बैठक के बाद सामने आई है।

विदेश मंत्रालय के मुताबिक, बातचीत कंस्ट्रक्टिव और आगे की सोच वाली थी। दोनों पक्षों ने भारत-चीन बॉर्डर पर हालात का जायजा किया और शांति बनाए रखने की दिशा में प्रोग्रेस पर खुशी जताई। उन्होंने कहा कि इससे दोनों देशों के रिश्ते धीरे-धीरे नॉर्मल हो पाए हैं…

सेना को क्यों देना पड़ा स्पष्टीकरण

दरअसल अरुणाचल प्रदेश के ऊपरी सुबनसिरी जिले के नाह जनजातीय समुदाय की कमेटी नाह वेलफेयर सोसाइटी ने स्थानीय उपायुक्त को एक ज्ञापन सौंपा, जिसमें कहा गया था कि पीएलए ने धीरे धीरे क्षेत्र को अपने कब्जे में ले रहा है। इसमें कहा गया कि पिछले 6 साल में नाह जनजातीय समुदाय जिन जगहों पर शिकार करते हैं या पशुओं को चराते हैं और खेती करते हैं, उनके बड़े हिस्से पर चीनी सेना ने कब्जा कर लिया है।

इस पर स्थानीय विधायक नकाप नालो ने कहा कि इस दावे के वेरिफिकेशन किए जाने की जरूरत है क्योंकि ये राष्ट्रीय सुरक्षा का विषय है। उन्होंने कहा कि उन्हें भारतीय सेना पर पूरा भरोसा है, लेकिन इस क्षेत्र में चीनी गतिविधियों की बढ़ती रफ्तार से भी वे चिंतित हैं। उन्होंने समुदाय का इस गंभीर विषय पर ध्यान दिलाने के लिए आभार भी जताया।

भारत-चीनी सीमा को लेकर अलग-अलग राय

अरुणाचल में सीमा को लेकर भारत और चीन की राय अलग है। साथ ही जनजातीय समुदाय की राय में भी अंतर है। भारत-चीन सीमा विवाद पर नजर रखने वाले नेचर देसाई ने एक्स पर लिखा कि विवाद की वजह एलएसी को लेकर भारत और चीन की समझ, सर्वे ऑफ इंडिया द्वारा निर्धारित बॉर्डर और वहाँ रहने वाले स्थानीय जनजातीय लोगों की सोच में अंतर है।

उन्होंने कहा कि नाह तागिन जनजातीय लोग तिब्बत में अपने संबंधियों से मिलने जाते रहते हैं। 2020 में इस पर रोक लग गई। उन्होंने कहा कि चीनी सेना जिस जगह पर मिलिट्री गतिविधियाँ चला रही हैं, वह पूरी तरह चीनी कब्जे वाला क्षेत्र है।

उन्होंने चीनी इंटरनेट यूजर के बनाए एक वीडियो को शेयर करते हुए कहा कि इसमें रिजलाइन जो दिखाई दे रहा है वही सीमा है और झील तिब्बत में हैं, जहाँ भारतीय तीर्थयात्रा के लिए आते हैं।