पंजाब में भीषण गर्मी और धान की बुआई के बीच बिजली का बड़ा संकट खड़ा हो गया है। सूबे में बिजली की डिमांड रिकॉर्ड 17,000 मेगावाट के करीब पहुँच चुकी है। इसी के विरोध में 28 जून को किसान मजदूर मोर्चा (KMM) ने पंजाब स्टेट पावर कॉरपोरेशन लिमिटेड (PSPCL) के खिलाफ पूरे राज्य में मोर्चा खोल दिया है।
किसानों ने कई जिलों में बिजली दफ्तरों के बाहर पक्के डेरे डाल दिए हैं। किसानों का कहना है कि सरकार ने खेती के लिए रोजाना 8 घंटे बिजली देने का वादा किया था। जमीनी हकीकत यह है कि खेतों को सिर्फ ढाई से चार घंटे ही बिजली मिल पा रही है। किसान मजदूर मोर्चा के कन्वीनर सरवन सिंह पंधेर ने बताया कि बिजली न मिलने से धान की फसल सूख रही है।
किसान अपनी जमापूंजी फूँककर और कर्ज लेकर महँगे डीजल से ट्यूबवेल चलाने को मजबूर हैं। इसी गुस्से में किसान ढोला, गोइंदवाल साहिब, टापा, पटियाला और मुक्तसर जैसे इलाकों में ग्रिड के बाहर धरने पर बैठ गए हैं।
पुलिसिया एक्शन से बढ़ा गुस्सा, अब चक्का जाम की तैयारी
मोगा में मुख्यमंत्री भगवंत मान के ‘लोक मिलनी’ कार्यक्रम में जा रहे किसानों को पुलिस ने हिरासत में ले लिया। इस कार्रवाई से किसानों का गुस्सा सातवें आसमान पर पहुँच गया है। किसान नेताओं ने इसे लोकतंत्र की जगह तानाशाही बताया है।
किसानों ने चेतावनी दी है कि अगर किसानों की आवाज को दबाया गया, तो पूरे पंजाब में चक्का जाम कर दिया जाएगा। किसान अब मुख्यमंत्री के हर सार्वजनिक कार्यक्रम में पहुँचकर बिजली संकट पर सीधे सवाल पूछेंगे।
फैक्ट्रियाँ भी बेहाल, बिजली की माँग ने तोड़े सारे रिकॉर्ड
इस समय पंजाब को अपनी खेती और घरों के लिए करीब 16,940 मेगावाट बिजली की जरूरत है। पंजाब के अपने बिजली घर सिर्फ 5,744 मेगावाट का उत्पादन कर पा रहे हैं। बाकी की भारी-भरकम बिजली केंद्र सरकार के कोटे और बाहर से खरीदनी पड़ रही है।
इस खींचतान के कारण सिर्फ किसान ही नहीं, बल्कि उद्योग-धंधे भी परेशान हैं। फैक्ट्रियों में अघोषित कट लग रहे हैं, जिससे मैन्युफैक्चरिंग का काम पूरी तरह ठप हो रहा है। किसान अब खेती के लिए 16 घंटे और घरों के लिए 24 घंटे बिना कट बिजली की माँग कर रहे हैं।
साथ ही खराब ट्रांसफार्मरों को 24 घंटे में मुफ्त बदलने की शर्त भी रखी है। पंजाब में अगले साल यानी 2027 की शुरुआत में विधानसभा चुनाव होने हैं। चुनाव से ठीक पहले गहराया यह बिजली संकट और किसानों का गुस्सा मुख्यमंत्री भगवंत मान की सरकार के लिए बड़ी राजनीतिक मुसीबत बन सकता है।

