राम मंदिर ट्रस्ट के रिकॉर्ड सार्वजनिक करने से लोगों की जान को खतरा: रिपोर्ट, गृह मंत्रालय ने CIC को बताया- केंद्र या UP सरकार का इस पर नियंत्रण नहीं

श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट को लेकर केंद्रीय गृह मंत्रालय ने केंद्रीय सूचना आयोग (CIC) के सामने अहम जवाब दिया है। मंत्रालय ने कहा कि यह ट्रस्ट एक स्वायत्त संस्था है और इस पर केंद्र सरकार या उत्तर प्रदेश सरकार का कोई वित्तीय, प्रशासनिक या अन्य तरह का हस्तक्षेप नहीं है। गृह मंत्रालय ने यह जवाब उस RTI अपील पर दिया जिसमें ट्रस्ट के गठन से जुड़े दस्तावेज और केंद्र द्वारा 5 फरवरी 2020 को मंजूर की गई योजना की प्रमाणित प्रतियाँ माँगी गई थीं।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, RTI आवेदक नीरज शर्मा ने ट्रस्ट के गठन से संबंधित सरकारी रिकॉर्ड भी माँगे थे। इस पर गृह मंत्रालय ने CIC से कहा कि माँगी गई जानकारी गोपनीय है और मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए इसे सार्वजनिक नहीं किया जा सकता। मंत्रालय ने RTI Act की धारा 8(1)(g) का हवाला देते हुए कहा कि ये रिकॉर्ड ‘गोपनीय और संवेदनशील प्रकृति‘ के हैं और इनके खुलासे से संबंधित व्यक्तियों की जान या शारीरिक सुरक्षा खतरे में पड़ सकती है।

CIC ने 2024 के अपने आदेश में गृह मंत्रालय के रुख को सही माना। तत्कालीन मुख्य सूचना आयुक्त हीरालाल सामरिया ने कहा कि जन सूचना अधिकारी की ओर से उचित जवाब दिया गया है और इस मामले में आगे किसी हस्तक्षेप की जरूरत नहीं है। इसके साथ ही मामला बंद कर दिया गया।

श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट का गठन सुप्रीम कोर्ट के 2019 के ऐतिहासिक अयोध्या फैसले के बाद हुआ था। उसी फैसले के पालन में केंद्र सरकार ने 5 फरवरी 2020 को यह ट्रस्ट बनाया था ताकि राम मंदिर के निर्माण और प्रबंधन की जिम्मेदारी संभाली जा सके। उस समय जारी सरकारी अधिसूचना में ट्रस्ट के कामकाज, ट्रस्टियों की शक्तियों, मंदिर निर्माण और अन्य संबंधित विषयों का प्रावधान था।

गृह मंत्रालय ने CIC को यह भी बताया कि सरकार की भूमिका सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के अनुसार केवल ट्रस्ट के सेटलर तक सीमित थी। आयोग ने माना कि ट्रस्ट न तो सरकार के स्वामित्व में है, न उसके नियंत्रण में है और न ही उसे सरकार से पर्याप्त वित्तीय मदद मिलती है।