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चलाता था बच्चियों से रेप करने वाला ‘ग्रूमिंग गैंग’, सजा पूरी होने से पहले ही छोड़ा: जानिए कौन है ‘डैडी’ शब्बीर अहमद, ब्रिटेन में क्यों मचा है बवाल?

शबीर अहमद को नाबालिग लड़कियों से रेप और यौन अपराधों के 30 मामलों में दोषी पाते हुए 22 साल की जेल की सजा सुनाई गई थी। अदालत की कार्यवाही के दौरान यह सामने आया था कि शबीर अहमद और उसका गैंग बेहद शातिर था। वे मासूम लड़कियों को मुफ्त खाना, सिगरेट और शराब का लालच देकर अपने जाल में फँसाते थे।

ब्रिटेन में बच्चों के यौन शोषण के सबसे चर्चित मामलों का दोषी शबीर अहमद 14 साल जेल में रहने के बाद रिहा हो गया है। उसकी रिहाई के बाद पूरे ब्रिटेन में विरोध शुरू हो गया है। लोग उसे पाकिस्तान भेजने की माँग कर रहे हैं।

लेकिन ब्रिटेन के पुराने कानून और पाकिस्तान के रुख की वजह से यह मामला उलझ गया है। इस स्थिति के चलते ब्रिटेन की सड़कों पर तनाव है और पीड़ितों में गहरा खौफ बना हुआ है। जानते हैं कि शबीर अहमद कौन है और उसकी रिहाई पर इतना विवाद क्यों हो रहा है।

कौन है रेपिस्ट शबीर अहमद और क्या थे उस पर आरोप?

शबीर अहमद मूल रूप से पाकिस्तान में जन्मा एक अपराधी है। वह कई दशक पहले ब्रिटेन आया था और वहाँ रहने लगा था। साल 2012 में ब्रिटिश अदालत ने उसे रोशडेल शहर में नाबालिग और बेसहारा लड़कियों के साथ दरिंदगी करने वाले 9 लोगों के एक गिरोह का मुख्य सरगना (रिंगलीडर) घोषित किया था।

शबीर अहमद को लड़कियों से रेप और गंभीर यौन अपराधों के 30 मामलों में दोषी पाते हुए 22 साल की जेल की सजा सुनाई गई थी। अदालत की कार्यवाही के दौरान यह सामने आया था कि शबीर अहमद और उसका गैंग बेहद शातिर था। वे मासूम लड़कियों को मुफ्त खाना, सिगरेट और शराब का लालच देकर अपने जाल में फँसाते थे।

इसके बाद उनका बार-बार शारीरिक और मानसिक शोषण किया जाता था। लड़कियाँ इस आरोपित से इस कदर डरती थीं कि उसे ‘डैडी’ कहकर बुलाने पर मजबूर थीं। इस मामले को आधुनिक ब्रिटिश इतिहास के सबसे घिनौने और काले अध्यायों में से एक माना जाता है, जिसने ब्रिटेन के पुलिस सिस्टम की कमियों को उजागर किया था।

जेल से रिहाई के बाद पीड़ितों में खौफ और सड़कों पर गुस्सा

शबीर अहमद को हाल ही में एक ‘अर्ली रिलीज स्कीम’ (जल्दी रिहाई योजना) के तहत 14 साल जेल में बिताने के बाद छोड़ दिया गया। हालाँकि, जेल से बाहर आने के बाद भी उस पर चौबीस घंटे कड़ी नजर रखी जा रही है। अधिकारियों ने उसके पैर में एक GPS इलेक्ट्रॉनिक टैग लगा दिया है, जिससे उसकी हर हरकत ट्रैक हो रही है।

शबीर अहमद को रोशडेल और ओल्डहैम जैसे इलाकों में जाने की पूरी तरह मनाही है, ताकि वह पीड़ितों के आसपास न फटक सके। इसके बावजूद, इस दरिंदे की रिहाई की खबर मिलते ही पीड़ितों के जख्म फिर हरे हो गए हैं। एक पीड़िता ने मीडिया को बताया कि वह अपने और अपने बच्चों की सुरक्षा को लेकर डरी हुई है।

पीड़िता ने आगे कहा कि वे लोग डर के मारे घर से बाहर नहीं कदम रख पा रहे है। वहीं दूसरी तरफ, रोशडेल के स्थानीय युवाओं और प्रदर्शनकारियों ने पीड़ितों की सुरक्षा के लिए खुद ही सड़कों पर उतरकर रात में गश्त (विजिलेंटे पेट्रोलिंग) शुरू कर दी है। जनता का मानना है कि ऐसे समाज के दुश्मन को खुले में रहने का कोई हक नहीं है।

इमिग्रेशन एक्ट 1971 का वो पेंच, जो बना अहमद का ढाल

शबीर अहमद को दोषी ठहराए जाने के बाद ब्रिटिश सरकार ने उसकी ब्रिटिश नागरिकता को रद्द कर दिया था। इस फैसले के बाद वह कानूनी रूप से सिर्फ एक पाकिस्तानी नागरिक रह गया है। इसके बावजूद, ब्रिटिश सरकार चाहकर भी उसे तत्काल प्रभाव से पाकिस्तान डिपोर्ट यानी देश से बाहर नहीं निकाल पा रही है।

इसके पीछे ब्रिटेन का 55 साल पुराना एक कानून आड़े आ रहा है, जिसने सरकार के हाथ बांध दिए हैं। दरअसल, ब्रिटिश इमिग्रेशन एक्ट 1971 के तहत कॉमनवेल्थ (राष्ट्रमंडल) देशों के उन नागरिकों को डिपोर्ट करने से सुरक्षा मिली हुई है, जो साल 1973 से पहले ब्रिटेन आए थे।

इस नियम के अनुसार, यदि कोई व्यक्ति 1973 से पहले आया और कम से कम 5 साल तक वहाँ कानूनी रूप से रहा, तो उसे वापस नहीं भेजा जा सकता। चूंकि पाकिस्तान उस दौर में कॉमनवेल्थ का हिस्सा था और अहमद 1960 के दशक के आखिरी सालों में ब्रिटेन आ गया था, इसलिए वह इस कानूनी खामी का फायदा उठाकर ब्रिटेन में ही टिका हुआ है।

पाकिस्तान का अड़ंगा और ब्रिटिश सरकार की अगली रणनीति

ब्रिटिश सरकार इस समय इस मामले को लेकर चौतरफा दबाव में है। देश के बड़े राजनीतिक नेताओं का कहना है कि यह कानून गंभीर अपराधियों को बचाने के लिए नहीं बनाया गया था। प्रधानमंत्री की ओर से गृह मंत्रालय को इस मामले की समीक्षा करने के आदेश दिए गए हैं।

ब्रिटिश संसद में चल रहे नए इमिग्रेशन बिल के जरिए इस पुराने कानून को बदलने या इसमें संशोधन करने की कोशिशें तेज कर दी गई हैं ताकि कानूनी रास्ता साफ हो सके। हालाँकि, कानून बदल जाने के बाद भी सरकार के सामने एक बड़ी कूटनीतिक चुनौती खड़ी है।

ब्रिटिश अधिकारियों ने इस मुद्दे पर पाकिस्तान सरकार से बातचीत शुरू की है, लेकिन पाकिस्तान अपने ऐसे अपराधियों को वापस लेने में हमेशा आनाकानी करता रहा है। इससे पहले भी रोशडेल गैंग के 2 अन्य अपराधियों की नागरिकता छीनी गई थी, लेकिन पाकिस्तान ने उन्हें अपने देश में एंट्री देने से साफ मना कर दिया था।

अब ब्रिटेन के कुछ नेताओं का कहना है कि अगर पाकिस्तान इस बार भी अहमद को स्वीकार नहीं करता है, तो ब्रिटेन को उसे दी जाने वाली विदेशी मदद में कटौती कर देनी चाहिए।

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विशेषता
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मीडिया में 7+ वर्षों का सफर। ETV भारत, इंडिया न्यूज़, सुदर्शन न्यूज़, MH1 और दैनिक जागरण जैसे प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में कार्य किया। डेस्क, ग्राउंड रिपोर्टिंग, एंकरिंग और सोशल मीडिया, हर प्लेटफॉर्म पर सक्रिय भूमिका निभाई। वर्तमान में ऑपइंडिया के साथ जुड़ी हूँ।

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