मुंबई में बीते दो हफ्तों में जोरदार बारिश हुई है। सड़कें नदियाँ बन गई हैं। कुछ इलाकों में तो पिछले तीन दिनों से बिजली-पानी व राशन आदि की आपूर्ति नहीं हो सकी है।
तमाम बड़े शहर ठप्प पड़ गए हैं। मगर कल से बारिश थोड़ा कम हुई है। हालाँकि स्कूलों की छुट्टी कर दी गई है; सो, बच्चे वापस मैदानों की ओर लौटने लगे हैं। मैं कुछ पल ठहरकर आजाद मैदान में बच्चों को खेलते हुए देख रहा हूँ। इन कुछ पलों में जिंदगी बिल्कुल ठहर सी गई है।
मैदानों में जलभराव है, मगर इसकी चिंता किए बगैर विभिन्न राष्ट्रीय टीमों की रंग-बिरंगी जर्सियां पहने नन्हें बच्चे खुशी-खुशी फुटबॉल खेल रहे हैं। जिधर भी गेंद जा रही है पच्चीस-तीस बच्चे उधर ही छप्प-छप्प करते हुए दौड़ रहे हैं। जो थोड़े बड़े बच्चे हैं, वह बेहतरीन तरीके से खेलते नजर आ रहे हैं। पास में ही फैशन स्ट्रीट की कई दुकानों में फुटबॉल की जर्सियाँ लटकी हुई हैं। अमूमन जिन राष्ट्रों का हमने नाम भी नहीं सुना, उनकी टीमों की जर्सियाँ भी धड़ल्ले से बिक रही हैं। कोलाबा का कॉस्वे मार्केट भी रंग-बिरंगी जर्सियों से सजा हुआ है। जो लड़के-लड़कियाँ फुटबॉल के दीवाने हैं, वह जानते होंगे कि किसी रोज बड़ा होकर पैसे जोड़ कर नाईकी, एडिडास या पूमा की ओरिजनल जर्सी ले पाना उन सभी का एक ख्वाब रहता है। तब तक, बाजारों में बिक रही ऐसी ही जर्सियाँ उनके दिलों को सुकून देती हैं।
कॉर्पॉरेट दफ्तरों में भी बड़े मैचों के दिन ‘जर्सी-डे’ घोषित कर दिया जा रहा है। लोग अपनी पसंदीदा टीम की जर्सी पहने दफ्तर पहुँच रहे हैं। फुटबॉल को पागलपन की हद तक चाहने वाले केरल से तो चंद रोज पहले अर्जेंटीना-ब्राजील आदि की जर्सी पहने नन्हें बच्चों का स्कूल बसों से उतरकर कतार बनाकर विद्यालय में घुसने का विडियो भी वायरल हुआ था। कुछ दिनों के लिए फुटबॉल ने सभी को अपने आगोश में ले लिया है।
क्या आपने इस विश्व कप में हुआ इंग्लैंड बनाम मेक्सिको का मुकाबला देखा था? क्या आपने सेनेगल बनाम बेल्जियम का मुकाबला देखा था? क्या आपने पेराग्वे को जर्मनी की टीम को हराते हुए देखा था? क्या आपने अर्लिंग हालांड को ब्राजील के खिलाफ दो गोल दागते हुए देखा था? क्या आपने काबो वर्दे को पहले स्पेन, उरुग्वे और फिर अर्जेंटीना के खिलाफ शानदार तरीके से अंतिम क्षणों तक बिना हार माने वीरता से लड़ते देखा था? क्या आपने गत विजेता अर्जेंटीना को मिस्र के खिलाफ मैच की अंतिम घड़ी तक संघर्ष करते हुए देखा था?
अगर आपने इस विश्व कप में खेले जा रहे एक से बढ़कर एक मुकाबले नहीं देखे तो आप मैदान पर काफी कुछ बेहतरीन घटित होता हुआ देखने से वंचित रह गए हैं।
फुटबॉल शायद मानवों द्वारा रचित सबसे रोचक बॉल-गेम है। जीवन की ही भाँति यहाँ अंत तक कुछ भी हो सकता है, बशर्ते हम हार न मानें। फुटबॉल 90 मिनट में इतना कुछ दे जाता है कि आप कल्पना भी नहीं कर सकते। शायद इस खेल जैसा एड्रिनलिन रश किसी दूसरे खेल में नहीं।
अब, जबकि राउंड ऑफ 16 के सभी मुकाबले खेले जा चुके हैं, आज देर रात से क्वार्टर फाइनल दौर के मुकाबले खेले जाने लगेंगे। अभी तक यह टूर्नामेंट बेहद रोचक रहा है। मेजबान राष्ट्रों द्वारा संपूर्ण विश्व से मेक्सिको, अमेरिका व कनाडा पहुंचे खेलप्रेमियों का गर्मजोशी से स्वागत, एक से एक शानदार मैच। काबो वर्दे, कुराकाओ, इक्वाडोर, पेराग्वे जैसे राष्ट्रों की हार न मानने की जिद, अफ्रीकी राष्ट्रों का वैश्विक मंच पर शानदार प्रदर्शन, युवा पीढ़ी के नवीन सितारों का उदय; क्या कुछ देखने को नहीं मिला भला अबतक हमें। इस विश्व कप को शायद इतने सारे कमबैक्स, सेटबैक्स व अंतिम मिनटों में दागे इक्वलाइज़र्स के लिए याद रखा जाएगा।
खैर, कहानी अभी खत्म नहीं हुई है। अभी तो मात्र इंटरवल भर हुआ है। टूर्नामेंट आज से और भी भयंकर होने जा रहा है। अब, आज रात, पहला क्वार्टर फाइनल मुकाबला खेला जाना है। विश्व कप की चमचमाती स्वर्णिम ट्रॉफी अब विजेता से मात्र तीन जीत दूर है।
पहले क्वार्टर फाइनल में आज देर रात भारतीय समयानुसार डेढ़ बजे, बेहतरीन फॉर्म में चल रही मोरक्को की टीम पिछले संस्करण की उपविजेता फ्रांस से भिड़ने जा रही है।
मोरक्को के पास अंत तक हार न मानने का जज्बा है। फ्रांस के पास एक बवंडर की भाँति अटैक करने वाली टीम। यह निश्चित रूप से एक ब्लॉकबस्टर मैच होगा। दो बार की विजेता फ्रांस, इस विश्व कप में, अबतक सबसे संतुलित टीम नजर आई है। वह जितना बेहतरीन अटैक करती है उतना ही शानदार उनका डिफेंस भी है। रक्षापंक्ति में विलियम सालीबा के नेतृत्व में जूल्स कूंदे, उपामेकानो, कोनाटे, हर्नान्देज़ बंधु व लूका डीने जैसे खिलाड़ियों की फौज मौजूद है।
इनके पास बेंच पर चेर्की, माटेटा, थुर्रम, देसिरे दोऊ जैसे अटैकर्स हैं जो बेंच से आकर भी कुछ पलों में मैच का रुख बदलने का माद्दा रखते हैं। यह उन्हें बेहद घातक बना देता है। ऐसा प्रतीत होता है कि यह टीम विश्व कप का खिताब जीतने के मकसद से ही इस टूर्नामेंट में आई है और इनके विजय-रथ को रोकने का दुस्साहस शायद ही कोई टीम कर सकेगी। अभी तक के इनके तमाम मैच तो यही दर्शाते हैं।
वहीं, मोरक्को के पास इस्माइल साइबारी व ब्राहीम डियाज के रूप में दो भाले हैं। मोरक्को ने नीदरलैंड्स को सिर्फ हराया भर नहीं था बल्कि चारों खाने चित्त कर दिया था। उन्होंने रोनाल्ड कोमान की नीदरलैंड्स पर मैच के अंत तक ऐसा शिकंजा कसा कि नीदरलैंड्स अपना नैसर्गिक खेल खेल ही नहीं सकी।
मोरक्को को अब मात्र एक और अफ्रीकी टीम भर मानना बड़ी ग़लती होगी। वह पिछले संस्करण में सेमीफाइनल खेल चुके हैं और इस दफा भी अपने सभी मैचों में बेहतरीन अंदाज में खेलते हुए दिखे हैं।
गौरतलब है कि यह दोनों ही टीमें कतर विश्व कप के सेमीफाइनल में आमने-सामने थीं। जहां फ्रांस ने 2-0 से जीत जरूर हासिल कर ली थी परन्तु मोरक्को ने उनको उस रोज़ अल-बाएत स्टेडियम के मैदान में नब्बे मिनट चले मुकाबले में नरक के दर्शन करा दिए थे। मोरक्को पिछली बार का बदला भी लेना चाहेगा।
मोरक्को एक ऐसी टीम है जिसे आप कमतर कर के नहीं आंक सकते। वो सदैव मैदान में अपना सर्वस्व न्योछावर कर देते हैं। अचरफ हाकीमी के नेतृत्व में बोनू, बाऊदादी, अज़्ज़ेदीन ऊनाही, अमराबात व माज़ारूई जैसे खिलाड़ियों से लैस मोरक्को जरूर आज रात बड़ा शिकार करने के लिए आतुर होगी। यह मैच वाकई काफी रोचक होने जा रहा है।
एटलस लायंस क्या लेस ब्ल्यूज़ का रथ रोक सकेंगे यह पता चलेगा आज देर रात बोस्टन में होने जा रहे इस मुकाबले के बाद।
फीफा विश्व कप का महासंग्राम जारी है।
फुटबॉल के खूबसूरत किस्से भी जारी रहेंगे।
बने रहिए साथ।
वीवा ला फुटबॉल।


