Homeविविध विषयअन्यFIFA World Cup: मेस्सी के चमत्कार से अर्जेंटीना ने मिस्र को हराकर क्वार्टर फाइनल...

FIFA World Cup: मेस्सी के चमत्कार से अर्जेंटीना ने मिस्र को हराकर क्वार्टर फाइनल में की एंट्री, स्विट्जरलैंड भी बढ़ा आगे; महसूस करें बीती रात का रोमांच

मैच के इंजरी टाइम (90+2वें मिनट) में लाउतारो मार्टिनेज के सटीक क्रॉस पर एंजो फर्नानदेज़ ने एक कड़क हेडर लगाकर गेंद को गोलपोस्ट में डाल दिया। इस 3-2 की जीत के साथ ही मेस्सी विश्व कप के इतिहास में 21 गोल और 10 'मैन ऑफ द मैच' अवॉर्ड्स के साथ सबसे सफल खिलाड़ी बन गए हैं।

एक मशहूर जापानी कहावत है – 七転び八起き, (Nana korobi ya oki). जिसका अंग्रेजी अनुवाद है – fall down seven times, stand up eight. यह कहावत हमें सिखाती है कि अक्सर सफलता असफलता को टालते रहने से नहीं अपितु हार ना मानने से मिलती है।

मंगलवार (7 जुलाई 2026) की रात हम सभी ने अर्जेंटीना की लातिन अमेरिकी टीम को मिस्र की जुझारू अफ्रीकी टीम के खिलाफ इस कहावत को सच करते देखा। कल जैसा खेल खेला गया, ऐसे मैच सालों में कभी-कभार देखने को मिलते हैं।

इस विश्व कप में पेराग्वे ने जर्मनी को मात दी थी। मोरक्को ने नीदरलैंड्स को परास्त किया था। हाल ही में नॉर्वे ने पाँच बार की विजेता ब्राजील का किला ढहा दिया था। यह कई यादगार मुकाबले रहे जहाँ गजब के उलटफेर देखने को मिले। फिर बेल्जियम ने 2-0 से पिछड़ने के बावजूद अंतिम क्षणों में सेनेगल को मात दे दी थी। ऐसे ही इस विश्व कप में कुल ग्यारह कमबैक अबतक देखने को मिले। हर दिन यहाँ कुछ नया और कुछ बीते दिन से ज्यादा रोचक होता जा रहा है। कल की रात भी अनूठी रही।

बीती रात फीफा विश्व कप के गत विजेता अपने खिताब की रक्षा करने अटलांटा स्टेडियम में अपने राउंड ऑफ 16 मुकाबले में मिस्र के फाराओज़ का सामना करने उतरे।

अल्बीसेलेस्त के कोच लियोनेल स्कालोनी ने 4-1-3-2 की फॉर्मेशन में अपनी टीम को मैदान में उतारा था। फॉरवर्ड लाइन में इस जंग में लियोनेल मेस्सी का साथ देने के लिए हूलियन अल्वारेज़ खड़े थे। उनके पीछे रॉड्रिगो दी पॉल, एंजो फर्नाडेज़ व एलेक्सिस मैकऐलिस्टर की तिकड़ी थी। रक्षापंक्ति में मोलीना, रोमेरो, लीसान्द्रो मार्टीनेज़ व ताग्लियाफीको थे और गोलपोस्ट की रक्षा करने एमिलियानो मार्टिनेज खड़े थे। गत विजेता अपने पिछले ही मुकाबले में काबो वर्दे के खिलाफ संघर्ष करते नजर आए थे। इस बार निश्चित ही उनपर जरूरत से ज्यादा दबाव था, यह साबित करने का कि आखिर क्यों वो पिछले संस्करण के विजेता हैं।

अर्जेंटीनी प्लेइंग इलेवन को मद्देनजर रखते हुए मिस्र के कोच होसाम हसन ने 4-2-3-1 की फॉर्मेशन में अपनी टीम को मैदान में उतारा था। उन्होंने मैच पूर्व यह जताया था कि उनका प्रयास होगा शुरुआती बढ़त लेकर अर्जेंटीना पर दबाव बनाने की। ऐसा नहीं है कि मिस्र कमजोर टीम है। उनके पास अर्जेंटीना को टक्कर देने हेतु अच्छे खिलाड़ियों का एक दल था जो मैच के अंतिम सेकेंड तक हार नहीं मानने वाला था। जो लोग सिर्फ विश्व कप के दौरान फुटबॉल देख रहे हैं वह मिस्र की टीम की मजबूती का अंदाजा इस बात से भी लगा सकते हैं कि इतने बड़े मैच में भी कोच होसाम हसन ओमार मारमूश जैसे खतरनाक स्ट्राइकर को बेंच पर रखने का साहस कर रहे थे।

रेफरी फ्रैंक्वा लेतेक्ज़िर की व्हिस्ल के साथ 67500+ दर्शकों से खचाखच भरे अटलांटा स्टेडियम में इस बहुप्रतीक्षित मुकाबले की शुरुआत हो जाती है।

मिस्र के खिलाड़ियों के पास खोने के लिए कुछ भी न था। सुन त्ज़ू ने ‘द आर्ट ऑफ वार’ में लिखा है ना कि अटैक इज़ द बेस्ट वे टू डिफेंड; कुछ ऐसा ही करते हुए कोच होसाम हसन के निर्देशानुसार उनकी टीम मैच के पहले मिनट से ही अटैकिंग फुटबॉल खेलते हुए दिखती है।

प्रयास था कि मैच के शुरुआती पलों में ही एक सरप्राइज एलिमेंट क्रिएट करते हुए गोल दाग कर अर्जेंटीनी टीम को बैकफुट पर ले आया जाए। और, उनको इस में जल्द ही सफलता भी मिल जाती है।

मैच के चौदहवें मिनट में मिस्र को एक कॉर्नर किक मिलती है। वह शॉर्ट कॉर्नर लेते हुए एक अटैकिंग मूव बनाने का प्रयास करते हैं। छोटे पासों से गेंद मैदान के दाईं छोर पर खड़े खिलाड़ी मारावां अत्तिया की ओर खिसका दी जाती है जो तुरंत अर्जेंटीनी बॉक्स में एक बेहद नपा तुला क्रॉस डालते हैं। वहाँ मिस्र के पाँच खिलाड़ी मौजूद थे। गेंद यासेर इब्राहिम की ओर जाती है, जो एक जोरदार हेडर से गेंद को गोलपोस्ट के भीतर भेज देते हैं। अर्जेंटीनी टीम को काटो तो खून नहीं।

लेकिन इस थ्रिलर में अभी और भी ट्विस्ट आने बाकी थे। एक अर्जेंटीनी खिलाड़ी को अटैकिंग पोजीशन में मिस्र के बॉक्स में फाउल कर दिया गया। नतीजतन मिस्र के गोल के सात-आठ मिनट के अंदर ही अर्जेंटीना को एक पेनाल्टी मिल जाती है। उनके पास इस नॉकआउट मैच में वापसी का सुनहरा मौका आ गया था। कप्तान लियोनेल मेस्सी आगे बढ़कर गेंद को हाथों में लेते हैं। अर्जेंटीनी समर्थक गोल की आस लिए उनकी ओर नजरें गड़ाए बैठे थे। स्टेडियम एक पल के लिए खामोश था।

रेफरी का इशारा मिलते ही मेस्सी गेंद की ओर दौड़ते हैं। वह गोलकीपर की बांई ओर एक किक लगाते हैं। मगर यह क्या हो गया था। उनकी पेनाल्टी मिस्र के बड़े फुटबॉल क्लब अल अहली के लिए खेलने वाले गोलकीपर मोस्तफा शोबिर द्वारा रोक ली गई थी। एक पल के लिए तो सारे स्टेडियम में सन्नाटा पसरा हुआ था।

मिस्र के कोच आगे बढ़कर दर्शकों की ओर बढ़ कर हाथ हवा में लहराते हैं। अपने गोलकीपर द्वारा किए इस बचाव का मोल वो जानते थे। ऐसे बड़े अहम समय में किया गया यह पेनाल्टी सेव किसी गोल से कम नहीं था। मिस्र लगातार हमले करने लगती है। अर्जेंटीना भी तुरंत कुछ जवाबी हमले करती है। मेस्सी विपक्षी गोलपोस्ट पर निशाना साधते हैं मगर गोलकीपर द्वारा बचाव कर लिया जाता है। हूलियन अल्वारेज़ भी एक शानदार शॉट लगाते हैं मगर वह भी गेंद को गोलपोस्ट के भीतर नहीं भेज पाते। हाफ टाइम की समाप्ति पर स्कोर 1-0 रहता है। सारी दुनिया को चौंकाते हुए मिस्र ने गत विजेता पर बढ़त बनाई हुई थी।

अगले हाफ का खेल शुरू होता है। लिएंद्रो पारेदेस गोलकीपर मोस्तफा शोबिर के पोस्ट पर हमला करते हैं, जिसे गोलकीपर द्वारा बचा लिया जाता है। मैच के साठवें मिनट में मिस्र फिर एक गोल जड़ देती है। मगर VAR द्वारा गोल रद्द कर दिया जाता है। मैच के छियासठवें मिनट में अर्जेंटीनी कोच लियोनेल स्कालोनी एक मिडफील्डर को बाहर कर स्ट्राइकर लाऊतारो मार्टीनेज़ को और एक डिफेंडर को बाहर कर एक मिडफील्डर को मैदान में उतारते हैं। मकसद साफ था – कैसे भी एक गोल दागा जाए और मैच में वापसी संभव करी जाए।

लेकिन कोच लियोनेल स्कालोनी को तब झटका लगता है जब इन सब्स्टीट्यूशन्स के दो मिनट बाद ही मिस्र की टीम बिजली की गति से काउंटर अटैक करती है और हासेम हसन से मिले बेहद शानदार पास को गोल में तब्दील करने में मोस्तफा ज़िको कोई ग़लती नहीं करते। संपूर्ण विश्व में फुटबॉल को चाहने वाले इसपर यकीन ही नहीं कर पा रहे थे। मिस्र की टीम ने गत चैंपियन के खिलाफ 2-0 से बढ़त बना ली थी। स्टेडियम में लाल रंग की जर्सी में बैठे मिस्र की टीम के तमाम चाहने वाले झूमने लगे थे। उनका बस एक मैच देखने अपने घरों से हजारों किलोमीटर दूर आना सार्थक हो गया था। वो खुशी से झूम रहे थे।

अर्जेंटीनी मैनेजमेंट कुछ समझ ही नहीं पाया था। मैदान के भीतर उनके तमाम खिलाड़ियों के माथे पर अब चिंता की लकीरें साफ साफ दिखने लगी थीं। सिवाय मेस्सी के, वह लगातार किसी उधेड़बुन में थे। जैसे जैसे खेल आगे बढ़ रहा था, सारी दुनिया में खेल समर्थकों को लगने लगा था कि शायद आज, नेमार की भांति, लियोनेल मेस्सी को भी वो एक अंतिम बार खेलते देख रहे हैं।

लिसांद्रो मार्टिनेज़ गोलपोस्ट पर एक जोरदार किक लगाते हैं। मगर स्कोर अब भी 2-0 ही था। खेल के दूसरे हाफ का हाइड्रेशन ब्रेक भी समाप्त हो जाता है। खेल जैसे आगे बढ़ता जा रहा था, अर्जेंटीनी डगआउट में सभी लोग उम्मीद खोते जा रहे थे। ऐसा लगने लगा था कि शायद आज एक और बड़ा उलटफेर होने जा रहा था।

ऐसा लग रहा था मैदान पर मौजूद कोई भी खिलाड़ी आज थक ही नहीं रहा था। वह पूरा ग्राउंड कवर कर रहे थे और अर्जेंटीना के खिलाड़ियों पर लगाम लगाए हुए थे। मगर मेस्सी किसी वन में मंडराते हिरन की भांति मिस्र की डिफेंसिव लाइन में बारम्बार सेंध लगाए जा रहे थे।

मैच का उन्यासीवाँ मिनट। अर्जेंटीनी टीम छोटे पासों के साथ हाफ लाइन से गेंद को आगे लेकर बढ़ती है। गेंद हूलियन अल्वारेज़ के पास आती है जिसे वो दाईं फ्लैंक पर खड़े मेस्सी की ओर बढ़ाते हैं। मेस्सी मिस्र के बॉक्स का मुआयना करते हैं और तुरंत एक बेहतरीन क्रॉस अंदर डालते हैं। अंदर कूटी रोमेरो अकेले खड़े थे। वह एक जोरदार हेडर लगाते हैं और गेंद जाल से लिपट जाती है। स्कोर 2-1 हो गया था।

चार मिनट बाद एक दफा फिर मैदान के दाईं छोर से ही लियोनेल मेस्सी गेंद को गोलपोस्ट की दिशा में भेजते हैं। अंदर चार अर्जेंटीनी खिलाड़ी मौके की तलाश में खड़े थे। गेंद छिटक कर गोंजालो मोंटील की ओर जाती है जो गेंद को लियोनेल मेस्सी की ओर सरका देते हैं। मेस्सी मौका मिलते ही एक जोरदार लेफ्ट फुटर लगाकर गेंद को गोलकीपर मोस्तफा शोबिर के गोलपोस्ट के भीतर पहुँचा देते हैं। चार मिनट में दो गोल दाग कर अर्जेंटीना ने इस मैच में वापसी कर ली थी।

यह इक चमत्कार सरीखा था। किसी ने भी सोचा नहीं था कि ऐसी स्थिति से भी अर्जेंटीना मैच में वापसी कर सकती थी। मगर नब्बे मिनट पूर्ण हो चले थे और स्कोर 2-2 हो गया था। सारा स्टेडियम एक बार फिर अर्जेंटीनी समर्थकों के शोर से गुंजायमान हो उठा था।

खेल आगे बढ़ता है। ऐसा प्रतीत होता दिख रहा था कि मैच अब एक्स्ट्रा-टाइम में जाएगा और अपने पिछले मैच के बाद एक बार दुबारा अर्जेंटीना को 120 मिनट की थका देने वाली फुटबॉल खेलनी होगी।

लेकिन आज इस मैच में हर पल एक नया मोड़ आते जा रहा था। खेल अभी समाप्त नहीं हुआ था। 90+2। अर्जेंटीना एक बार फिर काउंटर अटैक करने के इरादे से आगे बढ़ती है। नौ नंबर की जर्सी पहने हूलियन अल्वारेज़ गेंद को मैदान की दाईं दिशा में लंबा पास डालकर लाउतारो मार्टिनेज की ओर बढ़ाते हैं। लाउतारो एक सटीक क्रॉस गोलपोस्ट की ओर डालते हैं। वहाँ एंजो फर्नानदेज़ मौजूद थे, जो एक जबरदस्त हेडर लगा कर गेंद को तीसरी दफा मिस्र के गोलपोस्ट के भीतर भेज चुके थे। अर्जेंटीना ने अंतिम क्षणों में एक गोल दाग दिया था। अर्जेंटीना एक बेहद शानदार कमबैक को अंजाम दे चुका था।

दुनिया भर के तमाम फुटबॉल को चाहने वालों को यकीन ही नहीं हो रहा था कि आखिर उन्होंने यह क्या देख लिया था। यह रोमांच का चरमोत्कर्ष था। इस मैच में क्रिस्टोफर नोलान के सिनेमाई संसार से ज्यादा रौंगटे खड़े कर देने वाले लम्हें थे। अगर अर्जेंटीना यह मैच हार जाती, तो पेनाल्टी छोड़ने के चलते मेस्सी आज एक विलेन बना दिए जाते। दुनिया भर में हजारों रोनाल्डो समर्थक अपने अपने कीबोर्ड के समीप तैयार बैठे थे – उन्हें सूली पर चढ़ाने के लिए।

मगर मैच खत्म होने तक एक असिस्ट और एक शानदार गोल के साथ उन्होंने हमें एक ऐसे रोमांचक मैच का साक्षी बना दिया था जिसे वर्षों तक याद किया जाएगा। जब जब समाज में आतंक बढ़ता है, ऊपर बैठे भगवान को धरा पर उतरना पड़ता है। आज दुनिया भर के फुटबॉल प्रेमियों ने भगवान के साक्षात दर्शन कर लिए थे। इससे बढ़ कर अब और क्या ही लिखा जा सकता है।

मेस्सी विश्व कप के विभिन्न संस्करणों में अब कुल इक्कीस गोल कर चुके हैं। यह किसी भी खिलाड़ी द्वारा विश्व कप में लगाए गोलों में सर्वाधिक संख्या है। मेस्सी इस विश्व कप में आठ गोल दाग चुके हैं। यह किसी भी खिलाड़ी द्वारा इस विश्व कप में लगाए गोलों में सर्वाधिक संख्या है। वह विश्व कप के इतिहास में दस दफा मैं ऑफ द मैच के पुरुस्कार से नवाजे जा चुके हैं। वह विश्व कप के नॉकआउट चरण में लगातार छह मैचों में गोल लगाने वाले इकलौते खिलाड़ी भी बन गए हैं।

गौरतलब है कि सदैव इनकी तुलना में खुद को श्रेष्ठ बतलाने वाले क्रिस्टियानो रोनाल्डो ने 2006 विश्व कप से इस प्रतियोगिता का हिस्सा होते हुए भी विश्व कप के नॉकआउट चरण में मात्र एक गोल स्कोर किया है।

खैर गुजरी रात का अगला मैच वैंकूवर में खेला गया था। यहाँ स्विट्जरलैंड का सामना था इस टूर्नामेंट में कमाल का फुटबॉल खेल रही कोलंबिया की टीम से। एक ओर ग्रानित झाका, ब्रीद एम्बोलो व मेनुअल अकांजी की स्विस टीम थी, जो अब तक उम्मीदों से बढ़ कर प्रदर्शन कर रही थी। वहीं कोलंबिया ने भी अबतक अपने दो नायकों जेम्स रॉड्रिगुएज़ व लुइस डियाज़ के नेतृत्व में हर मुश्किल का डट कर सामना किया था। यह दो राष्ट्रों की जिद की टक्कर होने जा रही थी।

देखना यह था कि क्या जेम्स रॉड्रिगुएज़ व लुइस डियाज़ कोलंबिया के लिए गोल दाग उन्हें क्वार्टर फाइनल का टिकट दिल पाएँगे? या अल्जीरिया को हराकर यहाँ तक पहुँची स्विट्जरलैंड एक बार फिर एक कमाल कर दिखाएगी। दोनों ही टीमें अपने इस हसीन ख्वाब को टूटते हुए नहीं देखना चाहती थीं।

इस मैच में हालाँकि नब्बे मिनट का खेल खेले जाने तक दोनों ही टीमें गोल स्कोर करने में नाकाम रहती हैं। खेल एक्स्ट्रा-टाइम में जाता है। फिर भी 0-0 के स्कोर के साथ दोनों ही टीमें बराबरी पर रहती हैं। अब मैच का परिणाम पेनाल्टी शूटआउट से होना था। पेनाल्टी शूटआउट एक काफी क्रूर विधा है, जहां किसी भी दिन कुछ भी हो सकता है। आप नब्बे मिनट तक अच्छा खेल कर भी हारी हुई टीम कहला सकते हैं। खैर, रेफरी के इशारे पर पेनाल्टी शूटआउट की शुरुआत होती है। दोनों टीमों के खिलाड़ी हाफ-लाइन पर इकट्ठा हो जाते हैं व गोलकीपर गोलपोस्ट की ओर बढ़ते हैं। स्टेडियम में दोनों ही टीमों के समर्थकों में खलबली मची हुई थी। सब बेकरार थे यह जानने के लिए की कौन सी टीम अगले दौर में जगह बनाएगी।

स्विट्जरलैंड के लिए अनुभवी खिलाड़ी मैनुएल अकांजी अपनी पेनाल्टी को गोल में नहीं बदल पाते। वहीं, कोलंबिया के लिए दाविन्सन सान्चेज़ व कूचो हर्नान्देज़ अपनी अपनी पेनाल्टी को गोल में तब्दील करने से चूक जाते हैं। नतीजतन पेनाल्टी शूटआउट में स्विट्जरलैंड कोलंबिया को 4-3 से हरा देती है। हताश दाविन्सन सान्चेज़ की नजरें आसमान पर गढ़ गई थीं। उदासी की गहराइयों में उतर चुके कूचो हर्नान्देज़ को उनके साथी खिलाड़ी ढाँढस बंधा रहे थे।

स्टेडियम में मौजूद स्विस दर्शकों का जुनून देखते ही बनता था। कोलंबिया इस विश्व कप में अच्छा प्रदर्शन करने के बावजूद टूर्नामेंट से बाहर हो गई थी। वह वापस अपने वतन लौटेंगे और स्विट्जरलैंड क्वार्टर फाइनल में गत विजेता से भिड़ती नज़र आएगी। यह उनके संपूर्ण राष्ट्र को कितनी खुशी देगा इसका अंदाजा भी लगाना शायद हमारे लिए मुमकिन नहीं।

यही फुटबॉल का जादू है। अपने दिन में मिस्र या काबो वर्दे भी अर्जेंटीना को जीत दर्ज करने के लिए तरसा देती है। आप होंगे विश्व विजेता, मगर यहाँ हर किसी को हर दिन अपनी काबिलियत साबित करनी होती है। यह दुनिया शूरवीरों को सलाम करती है – उनकी वीरता के लिए। और, अगर आप कसौटी पर खरा उतरते हैं, तो आपकी जय-जयकार होनी निश्चित ही है।

अब आगे शुक्रवार से क्वार्टर फाइनल मुकाबले खेले जाएंगे। पहले ही क्वार्टर फाइनल में कल रात भारतीय समयानुसार डेढ़ बजे, बेहतरीन फॉर्म में चल रही मोरक्को की टीम पिछले संस्करण की उपविजेता फ्रांस से भिड़ेगी। मोरक्को के पास अंत तक हार न मानने का जज़्बा है। फ्रांस के पास एक बवंडर की भांति अटैक करने वाली टीम। यह निश्चित रूप से एक यादगार समर होगा। एटलस लायंस क्या लेस ब्ल्यूज़ का रथ रोक सकेंगे यह पता चलेगा कल बोस्टन में होने जा रहे इस मुकाबले के बाद।

बने रहिए साथ। वीवा ला फुटबॉल।

Join OpIndia's official WhatsApp channel

  सहयोग करें  

'द वायर' जैसे राष्ट्रवादी विचारधारा के विरोधी वेबसाइट्स को कभी पैसों की कमी नहीं होती। देश-विदेश से क्रांति के नाम पर ख़ूब फ़ंडिग मिलती है इन्हें। इनसे लड़ने के लिए हमारे हाथ मज़बूत करें। जितना बन सके, सहयोग करें

गौरव बडोला
गौरव बडोला
दिन में दिहाड़ी करता हूं, रात को कोरे कागज़ पर अपने ख्वाबों की दुनिया बुनता हूं। फुटबॉल और साहित्य को जीता हूं।

संबंधित ख़बरें

ख़ास ख़बरें

40 दिनों में 70 बार राम मंदिर चढ़ावे की चोरी, CCTV कैमरों में रिकॉर्ड: जानिए SIT ने अपनी रिपोर्ट में क्या क्या बताया, OpIndia...

अयोध्या राम मंदिर चढ़ावा मामले में SIT की रिपोर्ट में चोरी, लापरवाही और FIR की सिफारिश का खुलासा, जबकि दान गायब होने के दावे झूठे पाए गए।

इंडोनेशिया के प्रम्बानन मंदिर के संरक्षण में मदद करेगी भारत सरकार, कई देशों के हिंदू मंदिरों को देती रही है मदद: समझिए इन सभी...

इंडोनेशिया के प्रम्बानन से कंबोडिया, वियतनाम, लाओस, बांग्लादेश, श्रीलंका और बहरीन तक भारत हिंदू मंदिरों को सहेजने में अहम भूमिका निभा रहा है।
- विज्ञापन -