ऑस्ट्रेलिया की एक बहुत बड़ी कंपनी है। इसका नाम ‘ऑस्ट्रेलियनसुपर’ है। यह कंपनी वहाँ के लोगों के बुढ़ापे का पैसा यानी पेंशन संभालती है। यह ऑस्ट्रेलिया का सबसे बड़ा पेंशन फंड है। इस कंपनी ने भारत को लेकर एक बहुत बड़ा फैसला किया है। वह भारत सरकार के कामकाज और नीतियों से बहुत खुश है। इसी वजह से कंपनी ने भारत में और ज्यादा पैसा लगाने का एलान किया है।
यह कंपनी भारत की एक खास सरकारी स्कीम में पैसा लगा रही है। इस स्कीम का नाम ‘नेशनल इन्वेस्टमेंट एंड इंफ्रास्ट्रक्चर फंड’ (NIIF) है। इस बार कंपनी भारत में ₹2,800 करोड़ का नया निवेश करने जा रही है। भारत के लिए यह बहुत बड़ी बात है। इस नए निवेश को मिलाकर कंपनी अब तक भारत में बहुत सारा पैसा लगा चुकी है। अब भारत के अलग-अलग बाजारों में इस कंपनी का कुल निवेश ₹18,600 करोड़ से भी ज्यादा हो गया है। इससे साफ पता चलता है कि दुनिया का भारत पर भरोसा लगातार बढ़ रहा है।
India welcomes the AU$500 million investment from AustralianSuper, announced by their Chief Executive, Mr. Paul Schroder this morning in Melbourne. This is yet another glimpse of the global confidence in India’s growth and reform trajectory. It also reflects the immense…
— Narendra Modi (@narendramodi) July 9, 2026
भारत की स्कीम से मिला रिकॉर्ड तोड़ मुनाफा
यह पूरी कहानी भारत की तरक्की को दिखाती है। इस ऑस्ट्रेलियाई कंपनी ने भारत में पहली बार निवेश नहीं किया है। इससे पहले साल 2019 में भी कंपनी ने भारत की इसी एनआईआईएफ (NIIF) स्कीम पर भरोसा जताया था। तब कंपनी ने भारत में ₹1,350 करोड़ का निवेश किया था। कंपनी के मुख्य निवेश अधिकारी शॉन मैनुएल हैं। उन्होंने खुद इस निवेश को लेकर एक बड़ी बात बताई है।
शॉन मैनुएल ने कहा कि साल 2019 में किया गया वह निवेश उनके लिए वरदान साबित हुआ। वह निवेश उनकी कंपनी के इतिहास में सबसे ज्यादा मुनाफा देने वाले प्रोजेक्ट्स में से एक रहा। इस भारतीय स्कीम से कंपनी को उम्मीद से कहीं ज्यादा फायदा मिला। उन्हें यहाँ बहुत तगड़ा रिटर्न मिला। इसी शानदार मुनाफे और अच्छे अनुभव को देखकर कंपनी के लोग गदगद हो गए। यही वजह है कि वे भारत में दोबारा पैसा लगाने के लिए खुद आगे आए हैं।
ऑस्ट्रेलिया के बुजुर्गों की पेंशन बढ़ाएगा भारत
भारत और ऑस्ट्रेलिया में पेंशन का सिस्टम बिल्कुल अलग है। हमारे भारत में नौकरी करने वालों के लिए एक सरकारी व्यवस्था है। इसे हम ईपीएफओ (EPFO) कहते हैं। यहाँ हर महीने सैलरी से कटने वाला PF का पैसा एक ही सरकारी जगह जमा होता है। लेकिन ऑस्ट्रेलिया में ऐसा कोई एक बड़ा सरकारी सिस्टम नहीं है। वहाँ का नियम अलग है।
ऑस्ट्रेलिया में ऑस्ट्रेलियनसुपर जैसी बड़ी प्राइवेट कंपनियाँ यह काम करती हैं। ये कंपनियाँ लोगों की नौकरी के दौरान उनका पैसा जमा करती हैं। फिर बुढ़ापे में उन्हें पेंशन देती हैं। इसे वहाँ रिटायरमेंट फंड भी कहते हैं। अब ऑस्ट्रेलिया के आम लोग भारत पर बहुत बड़ा भरोसा कर रहे हैं। वे अपने बुढ़ापे की गाढ़ी कमाई को सुरक्षित रखना चाहते हैं।
साथ ही वे उस पैसे पर ज्यादा से ज्यादा मुनाफा भी कमाना चाहते हैं। इसके लिए उन्हें भारत सबसे सुरक्षित और अच्छा देश लग रहा है। ऑस्ट्रेलियनसुपर कोई छोटी-मोटी कंपनी नहीं है। इस अकेली कंपनी के पास ऑस्ट्रेलिया के 36 लाख से ज्यादा लोगों का पैसा जमा है। अगर इस पूरे पैसे को भारतीय रुपए में देखें, तो यह करीब ₹23,12,000 करोड़ से भी ज्यादा बनता है। यह बहुत बड़ी रकम होती है।
अब इस विशाल फंड का एक बड़ा हिस्सा भारत में आने जा रहा है। कंपनी इस पैसे को भारत के विकास से जुड़े कामों में लगाएगी। इस निवेश से दोनों देशों को बहुत बड़ा फायदा होगा। पहला फायदा ऑस्ट्रेलिया के बुजुर्गों को मिलेगा।
जब भारत की सरकारी स्कीम से कंपनी को बढ़िया मुनाफा होगा, तो वहाँ के बुजुर्गों की पेंशन की रकम बढ़ जाएगी। दूसरा बड़ा फायदा हमारे अपने देश भारत को होगा। इस विदेशी पैसे से भारत में बड़े-बड़े हाईवे, पुल, बिजली और पानी जैसे जरूरी प्रोजेक्ट्स तैयार होंगे। इससे हमारे देश का इंफ्रास्ट्रक्चर बहुत मजबूत हो जाएगा।
भारत की तारीफ में पढ़े कसीदे
ऑस्ट्रेलिया की इस बड़ी कंपनी के बड़े अधिकारियों ने भारत सरकार की खुलकर तारीफ की है। उन्होंने भारत के काम करने के तरीके को बहुत सराहा है। अधिकारियों ने बताया कि वे भारत में पैसा क्यों लगा रहे हैं। इसकी सबसे बड़ी वजह भारत में हो रही तेज तरक्की है। भारत की अर्थव्यवस्था बहुत मजबूती से आगे बढ़ रही है। यहाँ का मध्यम वर्ग यानि मिडिल क्लास भी बहुत तेजी से बड़ा हो रहा है।
इसके पास सामान खरीदने और खर्च करने के लिए अच्छा पैसा है। बाजार में इस रौनक को देखकर विदेशी कंपनियाँ भारत की तरफ आकर्षित हो रही हैं। इसके अलावा एक और सबसे बड़ी बात है। वह बात है भारत सरकार के नियम और कानून। अधिकारियों ने कहा कि भारत सरकार की नीतियाँ हमेशा एक जैसी रहती हैं। यहाँ बार-बार नियम बदलते नहीं हैं। इससे विदेशी कंपनियों का काम करना आसान हो जाता है। वे सरकार पर पूरा भरोसा कर पाती हैं।
भारत सरकार ने बाहर के देशों से आने वाले पैसे के लिए अपने दरवाजे खोल दिए हैं। अब विदेशियों के लिए भारत में पैसा लगाना और बिजनेस शुरू करना बहुत आसान हो चुका है। कागजी काम भी अब ज्यादा पेचीदा नहीं रहा। भारत सरकार की इसी ईमानदारी और अच्छे माहौल को देखकर कंपनी का भरोसा मजबूत हुआ है। इसी पक्के भरोसे के कारण ऑस्ट्रेलियनसुपर ने भारत में अपना निवेश इतना ज्यादा बढ़ाने का बड़ा फैसला लिया है।
क्या है यह एनआईआईएफ (NIIF) स्कीम?
एनआईआईएफ (NIIF) स्कीम का पूरा नाम ‘नेशनल इन्वेस्टमेंट एंड इंफ्रास्ट्रक्चर फंड’ है। भारत सरकार ने इस स्कीम को साल 2015 में शुरू किया था। इसे आप सरकार का एक बहुत बड़ा गुल्लक कह सकते हैं। सरकार ने यह गुल्लक क्यों बनाया? इसका एक बहुत बड़ा कारण था। सरकार चाहती थी कि दुनिया भर के अमीर और बड़े निवेशक भारत में अपना पैसा लगाएँ। वे भारत के विकास में भागीदार बनें। इसी सोच के साथ इस खास फंड की शुरुआत की गई थी।
अब समझते हैं कि इस स्कीम में काम कैसे होता है। जब विदेशी कंपनियाँ या बड़े बैंक इस फंड में अपना पैसा डालते हैं, तो भारत सरकार उस पैसे को देश के विकास में लगाती है। इस पैसे से हमारे देश में बड़े-बड़े काम होते हैं। जैसे आलीशान और चौड़े हाईवे बनाए जाते हैं। नदियों पर मजबूत पुल तैयार होते हैं। बड़े-बड़े समुद्री बंदरगाह और नए एयरपोर्ट बनाए जाते हैं। इसके अलावा बिजली, पानी और अन्य जरूरी सुविधाएँ भी इसी पैसे से सुधारी जाती हैं। यानी विदेशियों के पैसे से हमारे देश का ढांचा मजबूत होता है।
इस स्कीम की सबसे अच्छी बात इसका सुरक्षित होना है। जब विदेशी कंपनियाँ इस सरकारी स्कीम में पैसा लगाती हैं, तो उन्हें डूबने का कोई डर नहीं रहता। मोदी सरकार उन्हें पूरी सुरक्षा देती है। साथ ही उन्हें इस पैसे पर बहुत अच्छा और तय मुनाफा भी मिलता है। दुनिया के बाकी देशों के मुकाबले भारत में निवेश करना बहुत फायदेमंद साबित हो रहा है। जब विदेशी कंपनियों को दिखता है कि उनका पैसा यहाँ पूरी तरह सुरक्षित है और कमाई भी तगड़ी हो रही है, तो वे खुद-ब-खुद भारत की तरफ खींची चली आती हैं। यही वजह है कि आज दुनिया भर के बड़े निवेशक भारत पर आँख मूंदकर भरोसा कर रहे हैं।
मेलबर्न में जुटे दोनों देशों के प्रधानमंत्री और बड़े-बड़े बिजनेसमैन
इस बहुत बड़े और ऐतिहासिक निवेश का एलान मेलबर्न शहर में किया गया। वहाँ ‘ऑस्ट्रेलिया-इंडिया सीईओ फोरम‘ नाम की एक बहुत बड़ी बैठक चल रही थी। इसी बैठक के दौरान इस निवेश की घोषणा हुई। यह मौका दोनों देशों के लिए बेहद खास था। इस बड़े कार्यक्रम में भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी खुद मौजूद थे। उनके साथ ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री एंथनी अल्बनीज भी वहाँ बैठे थे। दोनों देशों के राष्ट्रध्यक्षों का एक साथ आना इस बात का सबूत है कि यह डील कितनी बड़ी है।
इस बैठक में सिर्फ दोनों देशों के प्रधानमंत्री ही नहीं थे। उनके अलावा वहाँ दुनिया भर के दिग्गज लोग जुटे थे। बैठक में दोनों देशों के 200 से भी ज्यादा बड़े-बड़े बिजनेस लीडर्स और बिजनेसमैन शामिल हुए थे। इसके साथ ही दोनों देशों की बड़ी-बड़ी यूनिवर्सिटी के चांसलर और वाइस-चांसलर भी वहाँ आए हुए थे।
इस महा-सम्मेलन में ऑस्ट्रेलियनसुपर कंपनी के सबसे बड़े अधिकारी पॉल श्रोडर ने भी हिस्सा लिया था। उन्होंने भारत के साथ काम करने और इस नई साझेदारी को लेकर अपनी खुशी जाहिर की। उन्होंने माना कि भारत के साथ मिलकर काम करना उनके लिए फायदे का सौदा है।
मोदी के भारत में हर तरफ हैं निवेश के बड़े मौके
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस बड़ी बैठक में विदेशी निवेशकों का बहुत गर्मजोशी से स्वागत किया। उन्होंने दुनिया के सामने नए भारत की असली ताकत और खूबियों को रखा। आज का भारत बहुत तेजी से बदल रहा है। यहाँ डिजिटल क्रांति आ चुकी है और हर काम मोबाइल-इंटरनेट से चुटकियों में हो जाता है। सरकार लगातार नए और अच्छे आर्थिक सुधार कर रही है, जिससे भारत में व्यापार करना बहुत आसान और तेज हो गया है।
PM मोदी ने ऑस्ट्रेलिया की कंपनियों को भारत आने का खुला न्योता दिया। उन्होंने कंपनियों से यहाँ अपनी फैक्ट्रियाँ लगाने, प्रदूषण मुक्त बिजली बनाने और मोबाइल-कंप्यूटर की चिप (सेमीकंडक्टर) तैयार करने को कहा। आजकल भारत में इलेक्ट्रिक गाड़ियाँ (EV), ऑनलाइन बिजनेस और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) बहुत लोकप्रिय हो रहे हैं, जहाँ विदेशी कंपनियों के लिए कमाई के बहुत बड़े मौके हैं।
इस महा-बैठक में दोनों देशों के बीच रक्षा यानी देश की सुरक्षा को लेकर भी कई ऐतिहासिक फैसले हुए हैं। भारत और ऑस्ट्रेलिया मिलकर सेना से जुड़े आधुनिक सामान बनाने के लिए एक ‘डिफेंस इनोवेशन कॉरिडोर’ तैयार करेंगे। दोनों देशों ने मिलकर आतंकवाद को जड़ से खत्म करने पर बहुत जोर दिया है। एक संयुक्त रक्षा घोषणा के जरिए दोनों देशों की सेनाओं के बीच आपसी तालमेल को और मजबूत किया जाएगा, जिससे वे एक-दूसरे से नई तकनीक और हुनर सीखेंगी। इसके साथ ही समुद्री सीमाओं की सुरक्षा और निगरानी को बेहतर बनाने के लिए ‘मैरीटाइम सिक्योरिटी रोडमैप’ पर काम तेज होगा। इस दोस्ती और भरोसे को और बढ़ाने के लिए भारतीय सेना के एक अधिकारी को ऑस्ट्रेलिया के डिफेंस कॉलेज में तैनात भी किया जाएगा।
बिजली और ऊर्जा के मामले में भी दोनों देशों ने एक नया इतिहास रच दिया है। भारत में बिजली की जरूरतों को पूरा करने और इसकी कमी को दूर करने के लिए दोनों देशों के बीच यूरेनियम को लेकर एक बहुत बड़ा समझौता हुआ है। इसके तहत ऑस्ट्रेलिया अब भारत को यूरेनियम की सुरक्षित सप्लाई करेगा, जो भारत के परमाणु बिजली घरों के काम आएगा। इससे हमारे देश में बिना किसी प्रदूषण के भारी मात्रा में बिजली बनाई जा सकेगी। इतना ही नहीं, भारत ने अपनी रणनीति बदलते हुए ऑस्ट्रेलिया से एलएनजी (LNG) गैस, कोयला और डीजल जैसी चीजें भी ज्यादा मात्रा में मँगाने का फैसला किया है। इससे भारत के उद्योगों और गाड़ियों के लिए भविष्य में कभी भी ईंधन की कमी नहीं होगी।
आने वाले समय की आधुनिक तकनीक को ध्यान में रखते हुए दोनों देशों ने एक और बड़ा कदम उठाया है। दोनों देश मिलकर ‘क्रिटिकल मिनरल कॉरिडोर’ यानी जरूरी खनिजों के लिए एक खास रास्ता बनाएँगे। मोबाइल, इलेक्ट्रॉनिक गाड़ियों की बैटरी और कंप्यूटर चिप्स बनाने के लिए कुछ खास खनिजों की जरूरत होती है, जो इस समझौते के बाद भारत को बहुत आसानी से मिल सकेंगे। इसके साथ ही दोनों देशों के बीच इंटरनेट पर होने वाले फ्रॉड और हैकिंग को रोकने के लिए एक खास ‘PACTS’ साइबर सुरक्षा समझौता हुआ है। प्रधानमंत्री मोदी ने साफ कहा कि भारत का बड़ा बाजार और ऑस्ट्रेलिया की बेहतरीन तकनीक मिलकर दोनों देशों के लिए बहुत फायदे का सौदा है। यह पूरा समझौता दिखाता है कि भारत अब वैश्विक मंच पर एक बहुत बड़ी महाशक्ति बनकर उभर रहा है।


