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FIFA World Cup: मिकेल मेरीनो का गोल, नैनीताल की बारिश और फुटबॉल का उत्सव

सेमीफाइनल में स्पेन का सामना गत उपविजेता व टूर्नामेंट में सभी की फेवरेट फ्रेंच टीम से होना है। कोच लुई डे ला फुएन्ते ने मैच पश्चात साक्षात्कार में कहा कि यह दो जाएंट्स की क्लैश होने जा रही है।

एक-एक कर हम स्कूली ट्रक से उतरे; नीली कमीज, काली निकर और चेहरों पर उतना ही आत्मविश्वास, जितना किसी छोटे कस्बे के लड़के पहली बार किसी बड़े युद्धक्षेत्र में लेकर आते हैं। सामने फैला था पत्थरों से अटा विशाल मैदान, जहाँ कुछ ही देर में हमारा सामना सेंट जौसेफ की टीम से होना था।

मैदान की चारदीवारी के इर्द-गिर्द उनका पूरा कुनबा जमा था, घुटनों तक स्कर्ट पहने अंग्रेजीदां तरुणियाँ और ऐसे लड़के, जिनके चेहरे बता रहे थे कि वे हमें हराने से पहले हमारा मजाक उड़ाने आए हैं। उनकी आवाजें लगातार अंग्रेजी में गूँज रही थीं। वे अपनी टीम के लिए नारे लगा रहे थे या हमारा उपहास कर रहे थे, इसका फैसला हम नहीं कर सकते थे; अंग्रेजी हमारे लिए तब तक बस एक ऐसी भाषा थी, जिसमें डाँट भी कविता जैसी लगती थी। एक पल को तो सचमुच लगा कि शायद हमारे स्वागत में कोई सामूहिक गीत गाया जा रहा है।

मैच शुरू होने में अब बस कुछ ही मिनट बाकी थे। उधर कोच साहब पूरी गंभीरता से रणनीति समझा रहे थे; किसे कहाँ दौड़ना है, किसे किसे मार्क करना है। मगर हमारी निगाहें फुटबॉल पर कम और स्टैंड्स में बैठे उस अनजान संसार पर ज्यादा थीं, जहाँ अंग्रेजी बोलना भी किसी अलग ही खेल का हिस्सा लगता था।

पथरीले मैदान के ठीक सामने एक बेहद खूबसूरत झील थी जिसने बादलों की नर्म ऊनी मफलर ओढ़ रखी थी। उस झील के एक तरफ थी मॉल रोड और दूसरी ओर, ठंडी सड़क की तरफ, नैना मंदिर से लगकर था भूटिया बाजार; जहाँ के गर्म थुक्पा-मोमो की खुश्बू हमें अपनी ओर बुला रही थी। झील में रंगबिरंगी पालों वाली कई नन्हीं नावें दिख रही थीं। परसों ही यहाँ खूब बर्फबारी हुई थी। झील के दोनों ओर किसी बुजुर्ग की भांति झील का हाथ थामे खड़े पहाड़ों पर थोड़ी बहुत बर्फ अब भी दिख रही थी।

टिफिन टॉप की दिशा से आती सूरज की मद्धम किरणों से सारी मॉल रोड जगमगाने लगी थी। यह सारा दृश्य किसी फिल्म का सीन सा लग रहा था। एकाएक लगा कि नीली कमीज व काली शॉर्ट्स पहने हम पंद्रह बच्चे किसी फिल्मी सेट पर पहुँच गए हैं। सब इतना खूबसूरत था कि आज भी शब्दों में नहीं बांधा जा सकता।

खैर, हमारा मैच बस शुरू ही होने को था। एकाएक बारिश होने लगी थी। घनघोर बारिश के बावजूद तमाम भूटिया व कुमाऊंनी समाज के लोग मूंगफली लिए झील किनारे स्थित मैदान में होने जा रहे हमारे मैच को देखने पहुँच चुके थे। मैदान के चारों ओर से वह अपनी पसंदीदा टीम के नारे लगा रहे थे। अथाह शोर के मध्य मैच शुरू हो जाता है।

यहाँ थकने पर भी तुम रुक नहीं सकते थे। क्यूंकि बाहर खड़े तुम्हारे समर्थकों द्वारा तुम्हें ऐसे ऐसे अपशब्द सुनने पड़ते की हालत पतली हो जाती। मगर यही भीड़, अपने नायक पर, अपार स्नेह भी लुटाती थी। जैसे ही कोई नन्हां खिलाड़ी इनकी पसंदीदा टीम के लिए गोल दागता या अहम बचाव करता, यह भीड़ उस खिलाड़ी को कंधों पर उठा लेती। जीतने वाली टीम को कोई मोमोज खिला रहा होता तो कोई थुक्पा परोस रहा होता। हारने वाली टीम को भी लोग पूरा सम्मान दिया करते। फुटबॉल, सदैव, यहाँ किसी उत्सव सा रहा है। जिसे लोग पूरी जिंदादिली से मनाते हैं।

यह नैनीताल से हमारा पहला राब्ता था। तब कहाँ मालूम था कि यह जादूई शहर जिंदगी भर के लिए हमारी खुशियों का खजाना बन जाएगा। आज फिर नैनीताल में बारिश हो रही है। जुलाई की इन सुबहों में नैनीताल और वहाँ होने वाले फुटबॉल टूर्नामेंट बड़े याद आते हैं।

खैर, अब बात करते हैं फीफा विश्व कप के क्वार्टर फाइनल मुकाबलों की।

बीती रात बेहतरीन फॉर्म में चल रही बेल्जियम की टीम की टक्कर 2010 विश्व कप की विजेता स्पेन से थी। इस मुकाबले का विजेता पिछले संस्करण की उपविजेता व इस विश्व कप में अबतक सबसे घातक लग रही फ्रांस की टीम के खिलाफ सेमीफाइनल में जगह पक्की कर लेता।

लॉस एंजेलिस स्टेडियम में होने जा रहे इस मैच में एक ओर बेल्जियम थी जो, धीमी शुरुआत के बाद, अपने पिछले तीन मैचों में बारह गोल दाग चुकी थी। चार्ल्स डि किटिलीरी, कप्तान यूरी टीलमान्स व लियान्द्रो ट्रोसार्ड अबतक दो दो गोल दाग चुके थे। वहीं, लुकाकू बेंच से आने के बावजूद अबतक तीन गोल स्कोर कर चुके थे। चार्ल्स डि किटिलीरी खासकर एक युवा खिलाड़ी हैं जिन्होंने इस टूर्नामेंट में बेल्जियम के लिए अबतक काफी बेहतर खेल दिखाया है।

वहीं, दूसरी ओर थी स्पेन की टीम जिन्होंने अबतक इस विश्व कप के अपने पांच मैचों में विरोधी टीमों को अपने खिलाफ एक भी गोल नहीं दागने दिया है। स्पेन के कोच लुई डे ला फुएन्ते के लिए चिंता का विषय यह होने जा रहा था कि उनकी फॉरवर्ड लाइन के खिलाड़ी टीम के लिए गोल स्कोर करने में असमर्थ रहे हैं। वहीं, रेड डेविल्स की खासियत यह है कि उनके बेंच पर बैठे खिलाड़ी भी मैदान पर आकर गोल दागने की काबिलियत रखते हैं।

आज एक बेहतरीन डिफेंस का सामना एक घातक अटैकिंग टीम से होने वाला था। यह निश्चित रूप से एक बेहतरीन मैच होने जा रहा था।

दोनों ही टीमें 4-2-3-1 की फॉर्मेशन के संग मैदान पर उतरती हैं। मैच की शुरुआत होती है। स्पेन के लिए आज पेड्री को बेंच पर बैठाया गया था। उनकी जगह फाबियान रुइज़ मैदान पर उतारे गए थे।

स्पेन मैच के शुरू होते ही गजब अंदाज में खेलती नजर आती है। गेंद ज्यादातर समय उनके खिलाड़ियों के ही पास रहती दिख रही थी। बेल्जियम को गेंद पाने के लिए काफी संघर्ष करना पड़ रहा था। खासकर अटैकिंग मिडफील्डर दानी ओल्मो लगातार बेल्जियम के लिए खतरे पैदा करते जा रहे थे। युवा सनसनी लामीन यमाल को सदैव दो से तीन बेल्जियम के खिलाड़ी घेरे हुए थे। फिर भी वो मौका मिलते ही दाईं छोर से अटैक किए जा रहे थे।

शुरुआती बीस मिनट में ही स्पेनिश टीम विपक्षी गोलपोस्ट पर कई हमले कर चुकी थी। मगर फिलहाल गोल स्कोर करने में उन्हें सफलता नहीं मिल सकी थी। स्कोर था 0-0।

पहला हाइड्रेशन ब्रेक होता है। उसके पश्चात खेल फिर आगे बढ़ता है। मैच के तीसवें मिनट में स्पेन बांई छोर से अटैक करती है। एक बेहतरीन क्रॉस बेल्जियम के बॉक्स में डाला जाता है। शानदार खेल दिखा रहे दानी ओल्मो अपने लिए खाली स्थान बनाते हुए जोर से गोलपोस्ट की ओर शॉट लगाते हैं। गेंद गोलकीपर थिब्वा कुर्त्वा से छिटक जाती है। स्पेनिश मिडफील्डर फाबियान रुइज़ तुरंत वहां पहुंच कर गेंद को गोलपोस्ट के भीतर भेज देते हैं। स्पेन इस गोल के साथ मैच में अहम बढ़त ले लेता है।

विशालकाय लॉस एंजेलिस स्टेडियम में आज साढ़े चौहत्तर हजार दर्शक मौजूद थे। इनमें ज्यादातर दर्शकों का समर्थन स्पेन को प्राप्त था। फाबियान रुइज़ के इस गोल ने अपने इन तमाम समर्थकों को खुशी से झूमने का मौका दे दिया था।

मगर, उनकी यह खुशी ज्यादा देर टिक नहीं सकी। राइट बैक टिमोथी कास्ताग्ने स्पेनिश बॉक्स के बाहर से, मैदान की दाईं ओर से, एक सटीक क्रॉस अंदर डालते हैं। चार्ल्स डि किटिलीरी उन्हें मार्क कर रहे डिफेंडर को चकमा देकर एक शानदार हेडर लगाते हैं। गेंद स्पेनिश गोलकीपर ऊनाई सिमॉन को पीछे छोड़ गोलपोस्ट के भीतर जा चुकी थी। मात्र ग्यारह मिनट के भीतर ही बेल्जियम मैच में वापसी कर लेती है। स्कोर 1-1 से बराबर हो चुका था।

दूसरे हाफ का खेल शुरू होता है। स्पेन फिर लगातार आक्रमण का सिलसिला जारी रखती है। बेल्जियम भी जानती थी कि अगर वो कैसे भी एक गोल दाग दे तो स्पेन को दबाव में ला सकती है। दोनों ही टीमें प्रयास करती रहती हैं कि एक गोल दाग कर अहम बढ़त हासिल कर ली जाए। मगर कोई भी टीम इस मकसद में सफल नहीं हो पा रही थी।

मैच के इकहत्तरवें मिनट में बेल्जियम की टीम को तब सदमा लगता है जब उनके स्टार गोलकीपर थिब्वा कुर्त्वा हैमस्ट्रिंग में खिंचाव महसूस करते हैं। यूं चोटिल होने के चलते नम आंखों के साथ उन्हें मैदान छोड़ना पड़ता है। मैनचेस्टर यूनाइटेड के लिए खेलने वाले युवा गोलकीपर लामेन्स मैदान में थिब्वा कुर्त्वा का स्थान लेते हैं। खेल आगे बढ़ता है।

पिचहतर मिनट का खेल हो चुका था। दोनों ही टीमें कई आक्रामक परिवर्तन करती हैं। खेल जैसे जैसे आगे बढ़ रहा था, लग रहा था शायद मैच का फैसला एक्स्ट्रा टाइम में होगा। दर्शकों को भी इंतजार था एक गोल का। दोनों ही टीमों के समर्थकों ने अपनी अपनी टीम की हौसला-अफजाई में कोई कसर नहीं छोड़ी थी। दोनों ही टीमें एक गोल मारने के लिए प्रयासरत रहती हैं मगर दोनों ही तरफ से अच्छा रक्षण भी देखने को मिलता है। स्पेनिश गोलकीपर ऊनाई सिमॉन आज कई बेजा गलतियां करते दिखे। कई दफा अपनी ग़लती के चलते वह बेल्जियम की अटैकिंग लाइन को गोल मारने का मौका प्रदान कर दे रहे थे। भला हो उनकी रक्षापंक्ति का जिसने दो बार गोल लाइन क्लियरैंस कर के, स्पेन को मैच में बनाए रखा था।

छियासीवें मिनट में स्पेनिश कोच लुई डे ला फुएन्ते अपना सबसे घातक हथियार निकालते हैं। वह मिडफील्ड में बेहद शानदार प्रदर्शन कर रहे दानी ओल्मो के स्थान पर मिकेल मेरीनो को मैदान में भेजते हैं। यह फैसला इसलिए भी लिया गया क्योंकि कोच जानते थे कि अगर यह मैच एक्स्ट्रा-टाइम में जाता है तो मैच काफी कश्मकश भरा रहेगा और लगातार काफी तनाव भी बना रहेगा।

मिकेल राउंड ऑफ 16 में पुर्तगाल के खिलाफ अंतिम क्षणों में गोल दागते हुए स्पेन को टूर्नामेंट में जिंदा रखे हुए थे। यह उनका ही गोल था जिसके चलते इकतालीस वर्षीय क्रिस्टियानो रोनाल्डो बिना विश्व कप का खिताब जीते घर लौटने के लिए मजबूर हो गए थे।

अठ्ठासीवें मिनट में गोलपोस्ट से यही कोई 35 मीटर की दूरी से मौका मिलते ही उन्नीस वर्षीय स्टार स्पेनिश डिफेंडर पाउ कुबार्सी गोल की दिशा में, अपने दाएं पांव से, भीषण टंकार करते हुए एक बेहद जोरदार किक लगाते हैं। गोलकीपर लामेन्स गेंद को अपने कब्जे में लेने के लिए आगे बढ़ते हैं। पाउ कुबार्सी का प्रहार इतना तीव्र था कि गेंद गोलकीपर लामेन्स से छिटक जाती है। हमेशा की भांति एक बार फिर सही वक्त पर सही जगह पर मिकेल मेरीनो आ धमकते हैं। मिकेल गेंद को बिना कोई ग़लती किए बेहतरीन तरीके से जाल के भीतर पहुंचा देते हैं। एक बार फिर, मिकेल मेरीनो के गोल के चलते, स्पेन बिल्कुल अंतिम क्षणों में मैच में बढ़त बना चुकी थी।

अंतिम क्षणों में स्पेन उनके इस गोल के दम पर करो या मरो वाले इस मैच में बेल्जियम की मजबूत टीम के विरुद्ध अहम बढ़त ले लेती है। नब्बे मिनट का खेल पूर्ण होने पर सात मिनट का इंजरी टाइम मिलता है। बेल्जियम गोल करने हेतु जद्दोजहद करती रहती है परन्तु उन्हें सफलता नहीं मिलती।

कुछ ही पलों में मैच समाप्त हो जाता है। स्पेन 2-1 से यह मुकाबला जीत कर सेमीफाइनल में जगह बना लेती है। केविन डि ब्रुएना का विश्व कप जीतने का ख्वाब टूट जाता है। पूरा स्टेडियम लाल रंग के लहराते झंडों से पट जाता है। एस्पाना-एस्पाना के नारे लगाते स्पेनिश समर्थकों की खुशी में सारा लॉस एंजेलिस स्टेडियम डूब गया था। मिकेल मेरीनो द्वारा अंतिम क्षणों में दागा गया यह गोल एकदफा फिर उन्हें स्पेन का संकटमोचक साबित कर चुका था।

एक मिडफील्डर होने के बावजूद मिकेल मेरीनो ने यूरो कप व यूएफा नेशन्स लीग के सेमीफाइनल मुकाबलों में भी स्पेन के लिए गोल स्कोर किए थे। और, आज तो उनके इस खास गोल के चलते ही ला रोजा बेल्जियम को घर की राह दिखा कर सेमीफाइनल में अपनी जगह पक्की कर चुकी थी। वह हमेशा ही एक बेहद क्लच खिलाड़ी रहे हैं जो बेंच से आकर भी स्पेन के लिए मैच बदल देते हैं।

सेमीफाइनल में स्पेन का सामना गत उपविजेता व टूर्नामेंट में सभी की फेवरेट फ्रेंच टीम से होना है। कोच लुई डे ला फुएन्ते ने मैच पश्चात साक्षात्कार में कहा कि यह दो जाएंट्स की क्लैश होने जा रही है। स्पेनिश रक्षापंक्ति ने अबतक के अपने सफर में मात्र एक गोल खाया है। वहीं, दूसरी ओर फ्रांस होगी, जो किसी बवंडर के भांति तबाही करती नजर आती है।

खैर, अब, आगे, देर रात ढाई बजे, टूर्नामेंट के तीसरे क्वार्टर फाइनल मुकाबले में, नॉर्वे के वाइकिंग्स इंग्लैंड की टीम के विरुद्ध मैदान में उतरेंगे। अर्लिंग हालांड के नेतृत्व में नॉर्वे एक बड़ा उलटफेर करने के इरादे से मैदान में उतरेगी। वहीं, कप्तान हैरी केन व साथी खिलाड़ियों के शानदार फॉर्म के दम पर इंग्लैंड इस मैच को जीत कर विश्व कप जीतने के ख्वाब को सच करने की दिशा में बड़ा कदम लेना चाहेंगे।

थ्री लाएंस, जो कि मेक्सिको के खिलाफ हुए एक हाई वोल्टेज मुकाबले में जीत दर्ज कर चुकी है, इस मैच में कोई भी कोताही नहीं बरतना चाहेगी। वहीं, नॉर्वे हर जीत के साथ अपने देश के लिए नया इतिहास लिखते जा रहे हैं। वह ब्राजील के खिलाफ किए शानदार प्रदर्शन को दुबारा दोहराना चाहेंगे।

इसके पश्चात, कल सुबह साढ़े छह बजे, कन्सास सिटी स्टेडियम में कतर विश्व कप के विजेता, अर्जेंटीना, के समक्ष स्विट्जरलैंड के लड़ाके खड़े होंगे। अर्जेंटीना ने पिछले मैच में अंतिम बारह मिनटों में करिश्माई खेल दिखाते हुए, मैच में 2-0 से पिछड़ने के बावजूद, 3-2 से मिस्र के खिलाफ अपना मैच जीता था। वहीं, स्विट्जरलैंड की टीम अपना पिछला मैच जीतने के बाद से ही इस मुकाबले के लिए जोरदार तैयारी में लगी हुई है।

खबरें हैं कि गोलकीपर कोबेल नित्य गोलकीपिंग कोच के साथ दो-तीन घंटे पेनाल्टी सेव्स की तैयारी कर रहे हैं व संपूर्ण टीम नौ/आठ खिलाड़ी बनाम ग्यारह खिलाड़ी की ट्रेनिंग ड्रिल्स कर रही है। चौंकिएगा नहीं अगर वह कल सुबह कुछ बड़ा कर दिखाएँ।

हालाँकि, जब तक 39 लियोनेल मेस्सी एक बीस वर्षीय मेस्सी के जज्बे के साथ खेलते रहेंगे, अर्जेंटीना को हराना एक टेढ़ी खीर होगा। अल्बीसेलेस्त के कोच लियोनेल स्कालोनी जरूर काफी चिंताओं से घिरे हुए हैं। उनकी परेशानी का कारण है कि वह अपने अनुभवी खिलाड़ियों के साथ आगे बढ़ें या फिर बेंच पर मौजूद खुद को साबित करने के लिए भूखे युवा खिलाड़ियों जैसे वैलेंटीन बार्को, नीको पाज़ व सीमिओनी को मैदान पर उतारें।

दोनों ही मैचों में नॉर्वे व स्विट्जरलैंड के रूप में एक-एक अंडरडॉग है जो बड़े शिकार के लिए लालायित है। दोनों ही मुकाबले मजेदार रहने वाले हैं। आप को यह मैच जरूर देखने चाहिए।

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गौरव बडोला
गौरव बडोला
दिन में दिहाड़ी करता हूं, रात को कोरे कागज़ पर अपने ख्वाबों की दुनिया बुनता हूं। फुटबॉल और साहित्य को जीता हूं।

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