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इंग्लैंड का सपना टूटा, अर्जेंटीना का जुनून जीता: जानिए मेस्सी के दो असिस्ट और 7 मिनट में पलटे मैच की पूरी कहानी

मैच से पूर्व इंग्लिश लीजेंड जो कोल ने मीडिया को संबोधित करते हुए कहा था," मेस्सी पहली दफा इंग्लैंड से टकराने जा रहा है। हम उसे चिर निद्रा में सुला देंगे। निश्चित ही, हम उसे चिर निद्रा में सुला देंगे। सौ प्रतिशत।"

प्यारे लियो,

आज से सालों पहले जब तुम्हें बार्सिलोना की, तीस नंबरी, गहरी मरून व नीली धारियों वाली फुल बाजू की जर्सी पहने खेलते हुए देखना शुरू किया था तो पहली दफा यकीन हुआ था कि हां, सचमुच में जादू होता है।

तुम्हारा हर एक टैकल, हर एक गोल मुझे आज भी हूबहू याद है।

एक ही सीजन में छह खिताब।

तुमने क्या कुछ नहीं जीता था बार्सिलोना के साथ।

तुम जब जब भी मैदान में उतरते, विपक्षी कोच व खिलाड़ी कांपने लगते और स्टेडियम में मौजूद दर्शक खुशी से झूमने लगते। तुम खुशियों का पर्यायवाची शब्द ही तो हो गए थे। तुम जब भी खेलने मैदान पर उतरते, सब अपने अपने काम छोड़ बस तुम्हें ही खेलते हुए देखते रहते। जाने वो कैसा जादू था तुम्हारे खेल में। तुम्हें खेलते हुए देख कर हम, कुछ पलों के लिए ही सही, अपने तमाम दुख-दर्द भूल जाते थे।

लेकिन फिर, वो जर्मनी के खिलाफ 2014 विश्व कप के फाइनल में मिली हार। पूरे टूर्नामेंट में अकेले ही तुमने टीम की ज़िम्मेदारियों का बोझ ढोया था।

कितना नैराश्य, कितना दुख छा गया था उस एक हार के पश्चात।

लेकिन, अभी तो तुम्हें और भी तोड़ा जाना बाकी था। लगातार अर्जेंटीनी जर्सी पहने कोपा अमेरिका का कप हारते चले जाना। और, बार्सिलोना का वह काला अतीत। रोमा और ऐन्फील्ड की वो उदास रातें। एक ऐसा शख्स जो सब जीत चुका था, उससे सबकुछ छिनता चला जा रहा था।

तुम्हारी नैनों में अश्रु थे। लेकिन संपूर्ण जगत तुम पर हंसने लगा था। शायद यह कुछ ऐसा था कि खिसियानी बिल्ली खंभा नोचे।

मगर, कहते हैं ना कि हर रात के बाद सूर्य तो उदित होता ही है। सूर्य को उदित होना ही था।

पहले लगातार कोपा अमेरिका की जीतें।

और फिर, कतर विश्व कप का वह फाइनल मुकाबला। फ्रांस बनाम अर्जेंटीना।

आखिरकार, ऊपर बैठे फुटबॉल के खुदा ने जैसे, उस रात, अपनी सबसे बेहतरीन अधूरी कविता पूरी कर ली हो।

तुम विश्व विजेता बन गए थे लियो। तुमने जग जीत लिया था।

अब इससे आगे भला क्या ही होता।

मगर नहीं, बीती रात, तुमने अर्जेंटीना को एकबार फिर विश्व कप के फाइनल में पहुंचा दिया है।

आज भी, अकेले ही तुम खेल को नियंत्रित करते हो।

जब जब गेंद तुम्हारे कदमों को चूमती है, तो मानो कुछ जादुई घटित हो रहा होता है। लोग सब कामकाज छोड़कर बस तुम्हें खेलते हुए देखते रहते हैं।

कुछ भी तो नहीं बदला।

लेकिन, एक रोज ऐसा भी होगा कि वाकई तुम इस खेल को अलविदा कह दोगे। तब, सालों पहले, जो नैराश्य तुमने देखा था, वही कुछ हमारे दिलों पर बीतेगी। तुम जिस दिन मैदान छोड़ोगे, उस रोज़ करोड़ों दिलों को धक्का सा लगेगा। हम सभी हताश हो जाएंगे।

मगर, उससे पहले एक बात है जो तुमसे कहनी है लियो।

शुक्रिया, इस खेल को चुनने के लिए। गोल स्कोर करने वाले कई खिलाड़ी आगे भी आएंगे, मगर, फिर कभी कोई दूसरा लियोनेल आंद्रेस मेस्सी नहीं आएगा। तुम्हारे जाने के साथ तमाम रोशनियां धूमिल हो उठेंगी।

तुमने हमें खुशियां दी।

तुमने हमें सिखलाया – अंतिम क्षणों तक लड़ना।

तुम थे तो इस खेल में जादू था। तुम चले जाओगे तो शायद तुम्हारे साथ इस खेल का जादू भी चला जाएगा।

शुक्रिया लियो, हमारी आम ज़िंदगियों में जादू भरने के लिए।

बीती रात, अर्जेंटीना ने फीफा विश्व कप के दूसरे सेमीफाइनल मुकाबले में इंग्लैंड को 2-1 से हरा कर फाइनल में जगह बना ली। खबर बस इतनी सी है। मगर, इस एक जीत पर, आप एक पूरी थीसीस लिख सकते हैं।

कल रात हम सभी खेलप्रेमियों ने कुछ जादुई घटित होता देखा।

बीती रात, साढ़े बारह बजे से, अटलांटा स्टेडियम में फीफा विश्व कप का दूसरा सेमीफाइनल मुकाबला खेला जाना था। एक तरफ थी अर्जेंटीना, जो स्विट्जरलैंड को हराकर यहां पहुंची थी। वहीं दूसरी ओर थी, बेहतरीन फॉर्म में चल रही इंग्लैंड। अर्जेंटीना इस विश्व कप में अपना नैसर्गिक खेल खेलती नजर नहीं आई है। मगर, फिर भी, हमेशा अंत तक लड़ने का हौसला लिए वो यहां तक पहुंच चुकी थी। ‘थ्री लायन्स’ एक संतुलित टीम लेकर इस टूर्नामेंट में उतरे थे। निश्चित ही यह एक जोरदार मुकाबला रहने वाला था।

मैच से पूर्व इंग्लिश लीजेंड जो कोल ने मीडिया को संबोधित करते हुए कहा था,” मेस्सी पहली दफा इंग्लैंड से टकराने जा रहा है। हम उसे चिर निद्रा में सुला देंगे। निश्चित ही, हम उसे चिर निद्रा में सुला देंगे। सौ प्रतिशत।”

ट्रॉए डीनी ने कहा था,” हम उन्हें धो डालेंगे। हम बेहद आराम से कम से कम 2-0 से यह मैच जीत जाएंगे।”

इंग्लिश खिलाड़ी अपने जीवन का सबसे बड़ा मैच खेलने जा रहे थे। वो 2018 विश्व कप में भी सेमीफाइनल में थे जहां उन्हें क्रोएशियाई टीम से 2-1 से हार कर बाहर होना पड़ा था। वो, आज, एक नया इतिहास लिखना चाहते थे। अर्जेंटीना, पिछली दफा भी, इस चरण से गुजर चुकी थी। मगर, इतने बड़े मौके पर एक अलग ही दबाव होता है।

माहौल बन चुका था। मंच सज गया था।

अल्बीसेलेस्त के कोच लियोनेल स्कालोनी ने आज एक परिवर्तन करते हुए 4-1-3-2 के बजाए 4-4-2 की फॉर्मेशन में अपनी टीम को मैदान में उतारा था। फॉरवर्ड लाइन में इस बड़े मुकाबले में एक बार फिर लियोनेल मेस्सी का साथ देने के लिए हूलियन अल्वारेज़ खड़े थे। उनके पीछे लिआन्द्रो पारेदेस़, एंजो फर्नाडेज़, एलेक्सिस मैकऐलिस्टर व गुईलियानो सिमिओनी की सेना थी। ख़राब फॉर्म से गुजर रहे रॉड्रिगो दी पॉल आज बेंच पर थे। रक्षापंक्ति में एकबार फिर मोलीना, रोमेरो, लीसान्द्रो मार्टीनेज़ व ताग्लियाफीको थे और गोलपोस्ट की रक्षा करने एमिलियानो मार्टिनेज खड़े थे।

गत विजेता अपने पिछले नॉकआउट मुकाबलों में विरोधियों के खिलाफ संघर्ष करते नजर आए थे। आज निश्चित ही उनपर जरूरत से ज्यादा दबाव था, यह साबित करने का कि आखिर क्यों वो पिछले संस्करण के विजेता हैं।

इंग्लैंड के लिए सेंट्रल फॉरवर्ड हेरी केन का साथ देने, उनके ठीक पीछे मॉर्गन रॉजर्स, ज्यूड बेलिंघम व एंथोनी गोर्डन की तेज रफ्तार वाली तिकड़ी थी। डिफेंसिव मिडफील्डर के तौर पर अनुभवी डेक्लन राइस का साथ युवा एलियट एंडरसन दे रहे थे। और, रक्षण की जिम्मेदारी थी जॉन स्टोन्स, मार्क गुएही, रीस जेम्स व जे़ड स्पेन्स के कंधों पर।

रेफरी इस्माइल ऐल्फात व्हिस्ल बजाते हैं। 4-3-2-1 की फॉर्मेशन के साथ मैदान में उतरी इंग्लिश टीम खेल के शुरुआती क्षणों से ही अटैक शुरू कर देती है। अर्जेंटीना भी जरूरी कार्रवाई कर रही थी। दोनों ही टीमें आक्रामक अंदाज में फुटबॉल खेल रही थीं। हांलांकि, खेल काफी फिजिकल हो गया था। लगातार दोनों ही ओर से काफी फाउल्स भी किए जा रहे थे।

मैच के पहले हाफ की समाप्ति पर स्कोर 0-0 से बराबरी पर था। दोनों ही टीमें गोल स्कोर करने में नाकाम रही थीं।

दूसरे हाफ का खेल शुरू होता है। पचपनवें मिनट में कप्तान हैरी केन अपने ही हाफ से एक लॉन्ग बॉल बांई फ्लैंक पर खड़े साथी खिलाड़ी की ओर बढ़ाते हैं। बांई छोर से एक शानदार क्रॉस अर्जेंटीनी गोलपोस्ट की ओर भेजा जाता है। चार से पांच अर्जेंटीनी डिफेंडर बॉक्स के भीतर मौजूद थे। मगर एंथोनी गोर्डन शानदार तरीके से गेंद को गोलपोस्ट के भीतर भेज देते हैं। देर से ही सही, मगर इंग्लैंड ने इस हाई वोल्टेज मुकाबले में आखिरकार बढ़त ले ली थी। स्टेडियम में मौजूद तमाम अर्जेंटीनी समर्थक अथाह दुख के सागर में डूबे चुके थे।

मैच आगे बढ़ता जाता है। पैंसठ मिनट का खेल हो चुका था। बढ़त अब भी इंग्लैंड के पास थी। उनका एक कदम फाइनल में था। कोच थॉमस टुकेल अपने अटैकिंग प्लेयर्स को एक एक कर बाहर बुलाने लगे थे। और, उनकी जगह तीन एक्स्ट्रा डिफेंडर मैदान में उतार दिए गए थे। थॉमस टुकेल अर्जेंटीना के खिलाफ लगभग आधा घंटा डिफेंसिव खेल खेलते हुए 1-0 की बढ़त को बनाए रखना चाहते थे।

लेकिन, उनका यह फैसला अर्जेंटीना को अटैक करने की आजादी दे देता है। कोच लियोनेल स्कालोनी तुरंत नीको गोंजालेज को इंग्लिश डिफेंस को स्ट्रेच करने व लाउतारो मार्टिनेज को मैदान के सेंट्रल इलाके से खतरा पैदा करने उतार देते हैं। रॉड्रिगो डि पॉल भी अंदर आ चुके थे।

लियोनेल मेस्सी वापस मैदान के दाईं छोर पर आ गए थे। वह लगातार विपक्षी गोलपोस्ट की दिशा में क्रॉस डाले जा रहे थे। एक के बाद एक अर्जेंटीनी टीम ने कई हमले करने शुरू कर दिए थे। कभी ऐंजो फर्नानदेज़ बॉक्स के बाहर से किक लगाते कभी मैकएलिस्टर हेडर लगाते। जॉर्डन पिकफॉर्ड लगातार बेहतरीन बचाव किए जा रहे थे। उन्होंने इंग्लैंड को किसी तरह गेम में बनाए रखा था। अचानक ही अर्जेंटीना खतरनाक हमले करती दिख रही थी। इंग्लिश टीम बस रक्षण करती दिख रही थी।

इसका फायदा अल्बीसेलेस्त को मिलता है मैच के पिच्चासीवें मिनट में। कप्तान लियोनेल मेस्सी मैदान की दाईं ओर से ड्रिबल कर आगे बढ़ते हैं और ऐसा अहसास दिलाते हैं कि वह गेंद क्रॉस के जरिए इंग्लैंड के बॉक्स में भेजेंगे। मगर वह गेंद को बढ़ा देते हैं बॉक्स से काफी बाहर खड़े ऐंजो फर्नानदेज़ की दिशा में। ऐंजो फर्नानदेज़ इंग्लिश गोलपोस्ट से लगभग चालीस मीटर की दूरी से पोस्ट की ओर एक जोरदार रॉकेट दागते हैं। इस दफा, इस जानदार किक का, लगातार ही बेहद शानदार बचाव कर रहे जॉर्डन पिकफॉर्ड के पास कोई जवाब नहीं था। स्कोर बराबर हो चुके थे। अल्बीसेलेस्त समर्थकों की खुशी का ठिकाना नहीं था। सारा अटलांटा स्टेडियम उनकी चीख से गूंज उठा था।

नब्बे मिनट का खेल पूर्ण हो चला था। सात मिनट का इंजरी टाइम रेफरी द्वारा दिया गया था। ऐंजो फर्नानदेज़ के गोल के ठीक सात मिनट बाद मेस्सी एक बार फिर बहुत तेज गति से मैदान के दाईं छोर से गेंद लेकर आगे बढ़ते हैं। अपने आगे खड़े दो इंग्लिश खिलाड़ियों को चकमा देकर वह एक सटीक क्रॉस गोलपोस्ट की दिशा में डालते हैं। लाउतारो मार्टिनेज तेज गति से आगे बढ़ते हैं। वह जोरदार हेडर लगाते हैं। पिकफॉर्ड को एक दफा फिर हवा तक नहीं लगती। गेंद जाल में समा चुकी थी। अर्जेंटीना 2-1 से बढ़त ले चुकी थी।

किसी को भी यकीन नहीं हो रहा था कि यह क्या हो गया था। सात मिनट के भीतर दो गोल। लियोनेल मेस्सी के दो असिस्ट। यह वाकई कमाल हो गया था। इंग्लैंड के खिलाफ ऐसा कर पाना लगभग नामुमकिन था। मगर अर्जेंटीना ने आज नामुमकिन को मुमकिन कर दिया था। मैच 2-1 के स्कोर पर समाप्त हो जाता है।

आज अर्जेंटीनी टीम ने इंग्लैंड को हराकर एक दफा फिर विश्व कप के फाइनल में जगह बना ली थी। इस के लिए काफी हद तक इंग्लिश कोच थॉमस टुकेल की अति रक्षात्मक रणनीति भी जिम्मेदार थी। आप आधे घंटे तक अर्जेंटीना को गेंद नहीं सौंप सकते। यह एक हाराकिरी सरीखा था। एक आत्मघाती कदम जो सालों तक उन्हें रातों में सोने न देगा।

अर्जेंटीना के खिलाफ खेलने का पहला कायदा ही यही है कि आपको मेस्सी को आगबबूला नहीं करना है। ज्यूड बेलिंघम का फुटबॉल के सबसे बड़े खिलाड़ी से बद्तमीज़ी से पेश आना उन्हें भारी पड़ गया था। उनतालीस वर्षीय लियोनेल मेस्सी के दो असिस्ट ने सात मिनट के भीतर फाइनल में लगभग पहुंच ही चुकी इंग्लैंड को घर की राह दिखा दी थी। ज्यूड बेलिंघम को शायद समझ आ गया हो कि एक अच्छे और एक महान खिलाड़ी में क्या अंतर होता है।

इंग्लैंड, एकबार फिर, विश्व कप की ट्रॉफी के बेहद करीब आकर भी ट्राफी से बहुत दूर रह गई थी। इक्कीसवीं सदी में दो ही दफा ऐसा हुआ है कि किसी टीम ने सेमीफाइनल में पहला गोल दागते हुए भी फाइनल के लिए क्वालीफाई न किया हो। पहले, सन् 2018 में क्रोएशियाई टीम के खिलाफ इंग्लैंड और आज एक बार फिर इंग्लैंड ही। इंग्लिश खिलाड़ियों का दिल टूट चुका था। यह ऐसा जख्म था जो ताउम्र नहीं भरेगा।

अर्जेंटीना के खिलाड़ियों की आंखों में आंसू थे। एमिलियानो मार्तिनेज़ फफक-फफक कर रो रहे थे। मेस्सी की आंखों में अश्रु थे। जीत दिलाने वाला गोल दागने वाले लाउतारो मार्टिनेज की आंखों में नमी थी। वह रोते-रोते कह रहे थे,” बचपन में पहली बार जब मैंने फुटबॉल बूट्स पहने थे, तब से मैंने अपने राष्ट्र के लिए यह गोल लगाने का ख्वाब देखा है।” सब भावुक हो गए थे। स्टेडियम में मौजूद पचास हजार समर्थकों की आंखें भी नम थीं। अंत तक हार ना मानने का यकीन मन में लिए अर्जेंटीनी खिलाड़ियों ने फिर एक चमत्कार कर दिखाया था। अर्जेंटीना फिर फाइनल में जगह बना चुकी थी। तमाम खिलाड़ी आगे बढ़ कर अपने समर्थकों का अभिवादन स्वीकार कर रहे थे। सभी युवा खिलाड़ी अपने प्रेरणास्रोत, अपने आईडल लियोनेल मेस्सी को हवा में उछाल रहे थे। वह सभी बेहद खुश थे। यह बेहद भावुक करने वाला पल था।

अर्जेंटीना आज से ठीक दो दिन बाद स्पेन के खिलाफ न्यू जर्सी स्टेडियम में विश्व कप का फाइनल मुकाबला खेलने उतरेगी। स्पेन यूरोपीयन चैंपियन है तो अर्जेंटीना विश्व विजेता। यहां एक अप्रेंटिस का सामना अपने माएस्ट्रो से होगा। लामीन यमाल का सामना खुद भगवान से होगा। स्पेन का काव्यात्मक शैली का खेल अर्जेंटीनी दक्षिण अमेरिकी कठोर फुटबॉल से टकराएगा। जिस बार्सिलोना की जड़ों को लियोनेल मेस्सी ने अपनी मेहनत से सींचा उसके आठ खिलाड़ी स्पेन का हिस्सा हैं। यह फाइनल कहीं न कहीं ‘ला मासिया ‘ में पला पोसा है। यह टकराव ऐतिहासिक होगी।

इस मैच में हारे जीते कोई भी, जीत अंततः फुटबॉल की होगी।

यह मैच फुटबॉल जगत के सबसे ज्यादा जगमगाते सितारे का आखिरी मैच भी हो सकता है। हम खेत खलिहानों में बिना फुटबॉल बूट्स और बिना जर्सी पहने फुटबॉल खेलने वाले लड़कों ने वैश्विक मंच पर जिस जमात के खिलाड़ियों को खेलते देख इस खेल से इश्क किया था, उस जमात के अंतिम खिलाड़ी के संभवतः इस आखिरी मुकाबले को हमें तमाम मनमुटाव मिटा कर देखना चाहिए। हमें इस मैच को उनके एक अंतिम जश्न के तौर पर देखना चाहिए।

फाइनल मुकाबले से जुड़ी बातें आगे जारी रहेंगी। बने रहिएगा साथ।

अलविदा।

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गौरव बडोला
गौरव बडोला
दिन में दिहाड़ी करता हूं, रात को कोरे कागज़ पर अपने ख्वाबों की दुनिया बुनता हूं। फुटबॉल और साहित्य को जीता हूं।

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