रूस-यूक्रेन युद्ध को चलते-चलते 3 साल से ज्यादा हो चुके हैं। हर दिन मिसाइल हमले, मौत और तबाही की खबरें सामने आती हैं। इसी बीच यूक्रेन की संसद (वेरखोव्ना राडा) में एक ऐसे मुद्दे पर बहस और वोटिंग हुई जिसने दुनिया का ध्यान खींच लिया। मामला था कि क्या वयस्कों के बीच आपसी सहमति से बनाई गई पोर्न को अपराध की श्रेणी से बाहर किया जाए? सुनने में यह मुद्दा चौंकाने वाला लग सकता है लेकिन इसके पीछे तर्क यह है कि मौजूदा कानून का इस्तेमाल कई बार पुलिस द्वारा लोगों को परेशान करने और भ्रष्टाचार के लिए किया जा रहा है।
संसद से ‘पहली रीडिंग’ के लिए पास हुआ बिल
वेरखोव्ना राडा ने मंगलवार (14 जुलाई 2026) को एक बिल को पहली रीडिंग में पास (ड्राफ्ट लॉ नंबर 15294) किया है। यह बिल एकसाथ दो काम करता है। पहले तो ये बच्चों से जुड़ी अश्लील सामग्री के लिए सजा और सख्त करता है, दूसरी तरफ वयस्कों के बीच आपसी सहमति से बनी पोर्न सामग्री को अपराध की श्रेणी से बाहर कर देता है। यह प्रस्ताव 231 वोटों से पारित हुआ, 8 सांसदों ने इसका विरोध किया और 3 अनुपस्थित रहे।
‘पहली रीडिंग’ का मतलब क्या होता है?
यूक्रेनी संसदीय व्यवस्था में कोई भी बिल कानून बनने से पहले कई पड़ावों से गुजरता है। सबसे पहले उस पर पहली रीडिंग होती है, जिसमें सांसद यह तय करते हैं कि बिल का मूल प्रस्ताव आगे विचार करने लायक है या नहीं। इसका मतलब यह नहीं होता कि बिल कानून बन गया है। इस बिल के साथ भी ऐसा ही हुआ। पहली रीडिंग में इसे आगे बढ़ाने की मंजूरी मिली।
इसी दौरान अध्यक्ष रुसलान स्तेफानचुक ने सुझाव दिया कि दूसरी रीडिंग की प्रक्रिया जल्दी पूरी की जाए और इसकी समयसीमा आधी कर दी जाए। लेकिन इस प्रस्ताव के पक्ष में केवल 177 वोट पड़े, इसलिए यह मंजूर नहीं हो सका। अब बिल सामान्य प्रक्रिया के तहत दूसरी रीडिंग में जाएगा, जहाँ इसके हर प्रावधान पर अलग-अलग चर्चा और वोटिंग होगी। अगर वहाँ भी इसे मंजूरी मिलती है, तभी यह कानून बनने की दिशा में आगे बढ़ेगा।
कहानी शुरू कहाँ से हुई?
यह मुद्दा अचानक पैदा नहीं हुआ है। यूक्रेन में पोर्न बनाना और शेयर करना दशकों से क्रिमिनल कोड के आर्टिकल 301 के तहत अपराध रहा है। इसकी पहुँच इतनी व्यापक है कि निजी तौर पर किसी को भेजी गई अंतरंग तस्वीर तक इसके दायरे में आ जाती है। यूक्रेन में इसके लिए 3 से 5 साल की जेल हो सकती है। असली मोड़ 2025 में आया जब OnlyFans पर काम करने वाली मॉडल स्वित्लाना द्वोर्निकोवा ने एक ऑनलाइन याचिका शुरू की।
उनकी याचिका को 25,000 से ज्यादा हस्ताक्षर मिले और उनका तर्क था कि कानून-व्यवस्था को असली अपराधों पर ध्यान देना चाहिए। द्वोर्निकोवा ने बताया कि उन्होंने पिछले 5 सालों में करीब 9.6 लाख डॉलर टैक्स चुकाया है और फिर भी उन्हीं पर आपराधिक मुकदमा दर्ज कर दिया गया।
जब याचिका तय संख्या (25,000) तक पहुँची तो संविधान के तहत राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की को इस पर जवाब देना अनिवार्य हो गया। जेलेंस्की ने अपने जवाब में कहा कि यूक्रेन एक कानून के राज वाला देश है और यहाँ कानून में बदलाव करने का अधिकार सिर्फ संसद के पास है, राष्ट्रपति के पास नहीं। 2022 में भी एक ऐसी ही याचिका जरूरी हस्ताक्षर संख्या तक पहुँची थी लेकिन तब जेलेंस्की ने ‘सार्वजनिक नैतिकता की रक्षा’ वाले पुराने प्रावधानों का हवाला देकर बात टाल दी थी।
पहली कोशिश नाकाम रही
राष्ट्रपति के जवाब के बाद गेंद संसद के पाले में आ गई और वहाँ पहले से ही इसे लेकर एक बिल नंबर 12191 पड़ा हुआ था। लेकिन 28 मई 2026 को संसद ने इसे पहली रीडिंग में मंजूरी नहीं दी। इसे सिर्फ 207 वोट मिले जबकि पास होने के लिए 226 वोट चाहिए थे। यह बिल क्रिमिनल कोड के आर्टिकल 301 में संशोधन का प्रस्ताव करता था। कम वोटों के चलते यह गिर गया और यूक्रेन में पोर्न को लेकर पुराना कानून जस का तस बना रहा।
पुलिस के भीतर छिपे भ्रष्टाचार ने फिर खोली बिल की राह
पहला बिल गिरने से ठीक पहले, 20 मई 2026 को यूक्रेन की सुरक्षा सेवा (SBU) और देश के अभियोजक जनरल के दफ्तर ने इवानो-फ्रांकिवस्क, टेर्नोपिल और झिटोमिर तीन क्षेत्रों में पुलिस अफसरों द्वारा ‘पोर्न ऑफिसेज’ को संरक्षण देने की एक बड़ी योजना का पर्दाफाश किया। जाँच में सामने आया कि इन ‘पोर्न ऑफिसेज’ के मालिक पुलिस के वरिष्ठ अफसरों को हर महीने 20,000 डॉलर की रिश्वत देते थे ताकि पुलिस इंटरनेट प्लेटफॉर्म पर अश्लील सामग्री बनाने-शेयर करने के इन ठिकानों पर कोई कार्रवाई न करे।
इस मामले में गिरफ्तार होने वालों में इवानो-फ्रांकिवस्क के नेशनल पुलिस मुख्य निदेशालय का प्रमुख, उनका डिप्टी, टेर्नोपिल का डिप्टी हेड और झिटोमिर का डिप्टी हेड शामिल थे जबकि गृह मंत्रालय के एक उप-मंत्री का निजी ड्राइवर इस पूरे नेटवर्क में बिचौलिये की भूमिका निभा रहा था। तलाशी में लग्जरी गाड़ियाँ, स्विस घड़ियाँ, हथियार और लगभग 2.26 करोड़ रिव्निया नकदी बरामद की गई।
इस बिल के समर्थकों का कहना है कि मामला सिर्फ पोर्नोग्राफी का नहीं बल्कि भ्रष्टाचार और राष्ट्रीय सुरक्षा का भी है। उनका तर्क है कि जब कोई काम गैरकानूनी होता है, तो उससे जुड़े लोगों से कुछ भ्रष्ट पुलिसकर्मी रिश्वत वसूल सकते हैं। इससे पुलिस व्यवस्था में भ्रष्टाचार बढ़ता है और ऐसे अधिकारी खुद भी ब्लैकमेल का शिकार बन सकते हैं।
समर्थकों का कहना है कि अगर आपसी सहमति से वयस्कों के बीच बनाई गई पोर्नोग्राफी को कानूनी दायरे में लाया जाता है, तो पुलिस के पास रिश्वत वसूलने का यह जरिया खत्म हो जाएगा। क्योंकि जो काम कानून के तहत वैध होगा, उसके लिए किसी को पुलिस से ‘बचने’ के लिए घूस देने की जरूरत नहीं पड़ेगी। इन्हीं दलीलों के साथ यह विधेयक एक बार फिर संसद में पेश किया गया, ताकि उस पर आगे की प्रक्रिया पूरी की जा सके।
दूसरी कोशिश में मिली सफलता
पहला बिल पास नहीं हो सका लेकिन इसके कुछ ही दिन बाद 3 जून 2026 को यूक्रेन की संसद में बिल नंबर 15294 पेश किया गया। इसे सांसद यारोस्लाव झेलेज्न्याक लेकर आए।
झेलेज्न्याक ने बताया कि पिछला बिल गिरने के बाद उन्होंने अलग-अलग राजनीतिक दलों और सांसदों से बातचीत की। इसके बाद ऐसा मसौदा तैयार किया गया, जिस पर ज्यादा से ज्यादा दलों की सहमति बन सके।
इस नए बिल को संसद में अच्छा समर्थन मिला। इस पर विभिन्न संसदीय दलों के नेताओं और संसदीय समितियों के अध्यक्षों समेत कुल 45 सांसदों ने हस्ताक्षर किए। इसी व्यापक समर्थन का नतीजा रहा कि 14 जुलाई को यह बिल संसद की पहली रीडिंग में मंजूर हो गया और अब आगे की प्रक्रिया के लिए बढ़ गया।
कानून बनने पर क्या बदलेगा
अगर यह बिल कानून बन जाता है तो वयस्कों के बीच आपसी सहमति से पोर्न सामग्री बनाना, रखना, भेजना या साझा करना अपराध नहीं रहेगा। लेकिन किसी को जबरदस्ती पोर्न बनाने के लिए मजबूर करना, बिना सहमति के निजी तस्वीरें या वीडियो फैलाना और सेक्सुअल डीपफेक बनाना पहले की तरह अपराध ही रहेगा।
बच्चों से जुड़े मामलों में कानून और सख्त किया गया है। 14 से 18 साल के नाबालिगों में अश्लील सामग्री फैलाने पर भारी जुर्माना या 5 साल तक की जेल हो सकती है। 14 साल से कम उम्र के बच्चों के मामले में सजा सात साल तक हो सकती है। वहीं बच्चों से जुड़ी अश्लील सामग्री बनाने पर 10 से 15 साल तक की जेल और बच्चों को वेश्यावृत्ति या दलाली में धकेलने पर 10 से 15 साल तक की सजा का प्रावधान रखा गया है।
बच्चों से जुड़ी अश्लील सामग्री यूक्रेन में बड़ी चिंता की वजह है। आँकड़ों के अनुसार, 2025 की पहली छमाही में यूक्रेन में पोर्नोग्राफी से जुड़े 2,300 से ज्यादा आपराधिक मामले दर्ज हुए, जिनमें 957 मामले बच्चों से जुड़ी अश्लील सामग्री के थे।
लोगों की माँग के पीछे आर्थिक तर्क
इस पूरी बहस में एक व्यावहारिक, आर्थिक पहलू भी बार-बार उठाया गया है। द्वोर्निकोवा जैसे कंटेंट क्रिएटर्स का कहना है कि वे कानूनी तौर पर टैक्स चुकाकर देश की मदद कर रहे हैं, तो उन्हें अपराधी क्यों माना जाए। आँकड़ों के मुताबिक, OnlyFans हर साल यूक्रेनी खजाने में 10 लाख डॉलर से ज्यादा टैक्स जमा करता है और अकेले 2024 में 350 यूक्रेनी मॉडलों ने 30.54 करोड़ रिव्निया की आमदनी घोषित करके 5.9 करोड़ रिव्निया टैक्स चुकाया।
विरोध भी उतना ही मुखर रहा
इस बिल को लेकर यूक्रेन में शुरुआत से ही तीखा मतभेद देखने को मिला है। देश के रूढ़िवादी और धार्मिक समूह किसी भी रूप में पोर्नोग्राफी को कानूनी मान्यता देने के खिलाफ रहे हैं। उनका कहना है कि इससे सार्वजनिक नैतिकता कमजोर होगी, मानव तस्करी जैसी गतिविधियों को बढ़ावा मिल सकता है और युद्ध जैसे राष्ट्रीय संकट के दौर में इस तरह के कानून को प्राथमिकता देना उचित नहीं है।
हालाँकि, विरोध केवल रूढ़िवादी वर्ग तक सीमित नहीं रहा। यूक्रेनियन प्रावदा में प्रकाशित एक लेख में एक उदारवादी लेखिका ने भी विधेयक के मौजूदा स्वरूप पर आपत्ति जताई। उन्होंने स्पष्ट किया कि वह पोर्नोग्राफी पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने की पक्षधर नहीं हैं लेकिन उनका मानना है कि युद्ध, आर्थिक संकट और सामाजिक अस्थिरता के बीच पूरे पोर्न उद्योग को एक सामान्य व्यावसायिक गतिविधि के रूप में कानूनी मान्यता देना गंभीर सामाजिक प्रभाव डाल सकता है।
उनका सुझाव था कि जो वयस्क अपनी सहमति से निजी तौर पर ऐसी सामग्री बनाते हैं, उन्हें आपराधिक मामलों से राहत दी जा सकती है। लेकिन पूरे पोर्न उद्योग को एक सामान्य व्यवसाय के रूप में वैध बनाने के बजाय उसके लिए अलग और सीमित व्यवस्था बनाई जानी चाहिए।
फिलहाल यह विधेयक कानून बनने से अभी काफी दूर है। संसद ने केवल पहली रीडिंग में इसे आगे विचार के लिए मंजूरी दी है। अब दूसरी रीडिंग में इसके हर प्रावधान पर अलग-अलग चर्चा होगी, संशोधन पेश किए जाएंगे और फिर दोबारा मतदान होगा। इसी बीच संसद अध्यक्ष का प्रक्रिया को तेज करने का प्रस्ताव भी पर्याप्त समर्थन नहीं जुटा सका, जिससे साफ है कि सांसद इस मुद्दे पर जल्दबाजी के पक्ष में नहीं हैं।
तो जो देश हर रोज मोर्चे पर मौतें गिन रहा है, वहाँ संसद अगले कुछ हफ्तों-महीनों में यह भी तय करेगी कि निजता, नैतिकता और पुलिस के भ्रष्टाचार के बीच उलझा हुआ यह सवाल आखिर कैसे सुलझे।


