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मानसिक तनाव से लेकर कम नंबर आने तक: आत्महत्या करने वाले उन छात्रों की कहानियाँ, जिनकी तस्वीरें दिखा राहुल गाँधी ने NEET पेपर लीक पर की राजनीति

जरूरत इस बात की है कि राजनीतिक दल ऐसी व्यवस्था बनाएँ, जहाँ पेपर लीक होना लगभग असंभव हो जाए। दोषियों को सख्त सजा मिले, परीक्षा प्रणाली पूरी तरह पारदर्शी बने और मेहनत करने वाले छात्रों का भरोसा वापस लौटे। क्योंकि छात्रों का भविष्य किसी भी राजनीति से बड़ा है और इस मुद्दे पर राजनीति नहीं बल्कि स्थायी समाधान सबसे पहली प्राथमिकता होनी चाहिए।

उत्तराखंड के देहरादून में शुक्रवार (17 जुलाई 2026) को लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गाँधी ने पेपर लीक पर भ्रम फैलाकर वोट बैंक को साधने की भरपूर कोशिश की। राहुल गाँधी के ‘छात्रों की गूँज’ को एक संवेदनशील राजनीतिक कार्यक्रम की जगह एक इवेंट की तरह से ऑर्गेनाइज किया गया था। कॉन्ग्रेस की गंभीरता का अंदाजा इस बात से लगाइए कि जिस स्थल पर कार्यक्रम से ठीक पहले पार्टी के एक कार्यकर्ता की जान चली गई हो वहाँ पर हो रहे कार्यक्रम में रैपर गा रहे थे और कार्यकर्ता डाँस कर रहे थे।

हम सब यह मानते हैं कि आत्महत्या जैसे संवेदनशील विषय का इस्तेमाल राजनीतिक हितों को साधने के लिए नहीं होना चाहिए। ऐसे में जब छात्रों की आत्महत्याओं को एक चुनावी मुद्दे की तरह उठाया जाता है और उसके बहाने लोगों को बरगलाने की कोशिश की जाती है तो सवाल तो उठते ही हैं।

राहुल गाँधी जब मंच से ‘NEET पेपर लीक सिंड्रोम’ की वजह से छात्रों की आत्महत्या की बात कर रहे थे तो उनकी प्रेजेंटेशन में ऐसे 25 छात्र/छात्राओं का जिक्र था जिन्होंने पिछले कुछ समय में आत्महत्या कर ली थी। राहुल गाँधी ने दावा किया इन छात्रों को आत्महत्या के लिए मजबूर कर दिया गया। यानी यह संदेश देने की साफ कोशिश की गई कि पेपर लीक के तनाव की वजह से छात्रों ने आत्महत्या की है।

राहुल गाँधी के कार्यक्रम की प्रेजेंटेशन (साभार: YouTube/INC India)

राहुल गाँधी ने जिन छात्रों की तस्वीरें अपनी प्रेजेंटेशन में दिखाई वो NEET के अभ्यर्थी थे इसमें कोई दो मत नहीं है लेकिन क्या उन्होंने केवल NEET पेपर लीक के चलते ही अपनी जान दे दी, जैसे कि राहुल गाँधी और विपक्ष के द्वारा माहौल बनाए जाने की कोशिश हो रही है। ये इन छात्रों में से ही कुछ के उदाहरण द्वारा समझने की कोशिश करते हैं।

राहुल गाँधी की इस प्रेजेंटेशन में तीसरा नाम रितिक मिश्रा का है। लखीमपुर खीरी के 22 साल के NEET अभ्यर्थी रितिक मिश्रा ने 14 मई 2026 को आत्महत्या कर ली थी। राहुल गाँधी ने तब भी इसे हत्या बताया था। दैनिक भास्कर की एक रिपोर्ट बताती है कि पुलिस जाँच में सामने आया कि जान देने से पहले छात्र ने 2 मोबाइल नंबरों पर लंबी बात की थी और इसमें परीक्षा के तनाव जैसी कोई बात सामने नहीं आई थी। एसडीएम अश्विनी सिंह और सिटी मजिस्ट्रेट विवेक तिवारी ने लोगों से यह अपील तक कर दी थी कि इसे लेकर भ्रामक खबर ना फैलाई जाए।

आत्महत्या जाहिर तौर पर दुखद है और किसी के चले जाने से बड़ा दुख शायद की कोई दूसरा होता हो लेकिन जब राजनीतिक मंचों पर इस तरह तस्वीरें लगाकर उसका राजनीतिक इस्तेमाल किया जाता है तो फिर यह देखना भी हमारी ही जिम्मेदारी बनती है कि क्या इन आत्महत्याओं की आड़ में कोई अपने लिए राजनीतिक मंच तो नहीं तैयार कर रहा है। इस लिस्ट में रितिक मिश्रा का नाम ऐसा इकलौता नाम नहीं है।

राहुल गाँधी की लिस्ट में कर्नाटक की भाग्यश्री का भी नाम था। NEET परीक्षा देने वाली भाग्यश्री कुछ दिनों बाद ही फंदे से लटकी मिली था। खबर यही चली की NEET पेपर लीक के तनाव के चलते आत्महत्या कर ली है लेकिन यह खबर अधूरी थी। दरअसल, भाग्यश्री ने अपने परिवार से झूठ बोला था कि उसके 12वीं कक्षा में 92% नंबर आए थे।

असल में भाग्यश्री 12वीं क्लास में वो फेल हो गई थी। फिजिक्स में भाग्यश्री को 45 मार्क्स मिले थे जिसमें 30 इंटरनल मार्क्स थे। मैथ्स में उसे कुल 24 मार्क्स मिले थे जिसमें 20 इंटरनल मार्क्स थे। पुलिस को इस मामले में कोई सुसाइड नोट तक नहीं मिला था। अब भाग्यश्री के नाम का इस्तेमाल पेपर लीक से जोड़कर हो रहा है।

राहुल गाँधी के मंच पर एक तस्वीर तमिलनाडु की 19 वर्षीय छात्रा आर रोशनी की थी। रोशनी NEET की तैयारी कर रही थी और री एग्जाम के ठीक पहले उसने आत्महत्या कर ली। New Indian Express की रिपोर्ट में बताया गया है। NEET के दबाव में आत्महत्या किए जाने की खबरों पर पुलिस ने कहा, “हम अभी यह कन्फर्म नहीं कर सकते कि उसकी मौत एग्जाम के प्रेशर की वजह से हुई या नहीं। यह सच है कि उसे धर्मपुरी के एक सेंटर पर NEET की परीक्षा देनी थी। हम जांच कर रहे हैं।”

ऐसी ही कहानी काहन पटेल की भी है। राहुल गाँधी के मंच पर लगी तस्वीरों में एक नाम काहन का भी था। काहन NEET की तैयारी कर रेह थे और इन 17 साल के युवक ने गुजरात के अहमदाबाद में एक रेजिडेंशियल अपार्टमेंट की छठी मंजिल से कूदकर आत्महत्या कर ली थी। घटनास्थल पर कोई सुसाइड नोट नहीं मिला और आज तक पुलिस नहीं पता कर पाई है कि उसकी मौत क्यों हुई। ऑपइंडिया ने जब साबरमती पुलिस स्टेशन से इस मामले की जानकारी चाही तो पुलिस आज भी जाँच कर रही है कि काहन ने जान क्यों दी।

उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद में 22 साल के छात्र जतिन कुमार ने 18 जून 2026 की रात आत्महत्या कर ली थी। जतिन ने NEET का एग्जाम दिया था और यह उसकी पाँचवी कोशिश थी। दैनिक भास्कर की एक रिपोर्ट के मुताबिक, छात्र के मोबाइल फोन से करीब एक मिनट का एक वीडियो मिला। इस वीडियो में जतिन ने कहा कि वह यह कदम किसी के दबाव में नहीं उठा रहा है बल्कि अपनी मर्जी से ऐसा कर रहा है। वीडियो में जतिन ने यह भी कहा कि उसका सभी चीजों से मोह खत्म हो गया है। जाहिर है कि वो केवल NEET की तैयारी कर रहा था और इसके कारण उसका नाम भी इस राजनीति में घसीट लिया गया।

तमिलनाडु की गोपिका और हैदराबाद की शेख सना की बात करें तो उन्होंने भी पिछले दिनों आत्महत्या कर ली है। दोनों NEET की अभ्यर्थी थीं लेकिन लंबे वक्त से तनाव से गुजर रही थीं और इसी तनाव को वे सहन नहीं कर पाईं। शेख सना को लेकर इंडिया टुडे की एक रिपोर्ट बताती है, “पुलिस को शक है कि पढ़ाई का दबाव, परिवार की उम्मीदें और पिछली नाकामियों की वजह से हुई बेचैनी उसके तनाव का कारण हो सकती हैं।” वहीं, गोपिका को लेकर एक New Indian Express की रिपोर्ट कहती है, “गोपिका ने पहले अपने पिता को बताया था कि परीक्षा की तैयारी में बढ़ती कठिनाई के कारण वह काफी तनाव में थी।”

तमिलनाडु के कृष्णागिरी में 20 जून 2026 को NEET के री-एग्जाम से एक दिन पहले 20 वर्ष के वेत्रियानंथम ने अपनी जान दे दी। टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट बताती है कि वेत्रियानंथम लगातार तीन साल से NEET परीक्षा की तैयारी कर रहा था। पिछली कोशिशों में मिली नाकामियों की वजह से वह भारी दबाव में था और उसे डर था कि आज होने वाली परीक्षा में भी वह फेल हो जाएगा।

उसके पास से पुलिस को एक सुसाइड नोट भी मिला। उसमें लिखा था, “NEET परीक्षा के डर से मैं पिछले एक महीने से ठीक से सो नहीं पाया हूँ। इस डर से कि मैं इस बार भी फेल हो जाऊँगा, मैं यह बड़ा कदम उठा रहा हूँ। अम्मा, अप्पा, अन्ना… मुझे माफ कर देना।”

राहुल की लिस्ट में एक नाम गोवा के छात्र सिद्धार्थ हेगड़े का भी था। 17 साल के सिद्धार्थ ने आत्महत्या कर ली थी और उसके पास से एक सुसाइड नोट भी मिला था। वन इंडिया की एक रिपोर्ट बताती है, “वह पिछले दो साल से लगातार पढ़ाई और भविष्य को लेकर तनाव में था।”

इस रिपोर्ट में आगे लिखा गया है, “छात्र ने नोट में लिखा कि वह पिछले दो साल से पढ़ाई के दबाव से जूझ रहा था। उसने यह भी बताया कि पढ़ाई और हॉकी के बीच संतुलन बनाना उसके लिए मुश्किल होता जा रहा था। सिद्धार्थ हॉकी को गंभीरता से खेलता था और साथ ही मेडिकल परीक्षा की तैयारी भी कर रहा था। नोट में उसने कथित तौर पर यह भी लिखा कि अब वह किसी भी प्रतियोगी परीक्षा में शामिल नहीं होना चाहता।”

राहुल गाँधी की प्रेजेंटेशन में आखिरी नाम दान्विता का था। हरियाणा के फरीदाबाद में 18 साल की NEET कैंडिडेट दान्विता ने गुरुवार (16 जुलाई 2026) को रेजिडेंशियल सोसाइटी की 16वीं मंजिल से कूदकर आत्महत्या कर ली है। मीडिया रिपोर्ट में बताया गया है कि दान्विता ने NTA द्वारा जारी की गई आंसर-की से अपने संभावित स्कोर का पता लगाया था। पुलिस के मुताबिक, जब दानविता ने आंसर-की से अपने संभावित स्कोर का पता लगाया तो वह परेशान हो गई क्योंकि उसे जो स्कोर मिला वह उसकी उम्मीदों से कम था।

पेपर लीक का समाधान राजनीतिक नहीं हो सकता

जब हम एक समाज के तौर पर, व्यवस्था के तौर पर पिछड़ जाते हैं तो छात्र की आत्महत्या जैसे केस सामने आते हैं। जब कोई युवा अपने सपनों, संघर्षों और उम्मीदों के बीच हार मान लेता है तो यह हम सभी के लिए आत्ममंथन का विषय होता है।

यह भी सच है कि परीक्षाओं में पेपर लीक के मामलों ने लाखों युवाओं के तनाव को बढ़ाया होगा। पेपर लीक जैसी घटनाएँ छात्रों के मानसिक दबाव को बढ़ाती हैं और इस समस्या को हल्के में नहीं लिया जा सकता। लेकिन एक दूसरा पक्ष भी उतना ही गंभीर है। इसे राजनीतिक तौर पर इस्तेमाल करना किसी भी तरह से उचित नहीं है।

इसका इस्तेमाल केवल सरकार को घेरने या राजनीतिक लाभ लेने के लिए किया जाए तो इससे वास्तविक समस्या का समाधान नहीं निकलता है। इससे समाज में भावनाएँ तो भड़क सकती हैं लेकिन व्यवस्था में सुधार नहीं आ पाता है, जो सबसे अधिक जरूरी है। हो सकता है कि इस मुद्दे के जरिए राहुल गाँधी जनता की भावनाओं को ही भड़काने की कोशिश कर रहे हों।

पेपर लीक कोई नई समस्या नहीं है और न ही यह किसी एक सरकार या किसी एक राजनीतिक दल तक सीमित रही है। विभिन्न राज्यों में अलग-अलग सरकारों के दौरान ऐसे मामले सामने आते रहे हैं। राजस्थान में अशोक गहलोत के कार्यकाल में कॉन्ग्रेस की सरकार भर्ती परीक्षाओं के पेपर लीक के लिए किस कदर बदनाम थी यह किसी से छिपा नहीं है। अन्य राज्यों में भी चाहे BJP की सरकार हो, कॉन्ग्रेस की हो या अन्य दलों की भी हों, पेपर लीक के मामले सामने आते ही रहे हैं।

पेपर लीक की समस्या का समाधान निकालना ही होगा लेकिन उसका समाधान राजनीति नहीं हो सकता। यह समस्या किसी एक सरकार या किसी एक दल की नहीं है, इसलिए इसका हल भी आरोप-प्रत्यारोप से नहीं निकलेगा। हर बार कोई घटना होने पर सिर्फ राजनीतिक बयान देने से छात्रों का भविष्य सुरक्षित नहीं होगा।

जरूरत इस बात की है कि राजनीतिक दल ऐसी व्यवस्था बनाएँ, जहाँ पेपर लीक होना लगभग असंभव हो जाए। दोषियों को सख्त सजा मिले, परीक्षा प्रणाली पूरी तरह पारदर्शी बने और मेहनत करने वाले छात्रों का भरोसा वापस लौटे। क्योंकि छात्रों का भविष्य किसी भी राजनीति से बड़ा है और इस मुद्दे पर राजनीति नहीं बल्कि स्थायी समाधान सबसे पहली प्राथमिकता होनी चाहिए। ये आरोप लगाकर, छात्रों के नाम पर वोट लेकर तो इन मसलों का स्थाई हल निकले से रहा।

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शिव
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