छात्रों के नाम पर हिंसा के बीच केंद्र का बड़ा फैसला, दिल्ली पुलिस कमिश्नर को NSA के तहत मिली हिरासत में लेने की शक्ति: पुलिस ने बताया- रूटीन प्रक्रिया

दिल्ली पुलिस आयुक्त अनुराग कुमार को केंद्र सरकार ने राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (NSA) के तहत लोगों को हिरासत में लेने की शक्तियाँ दे दी हैं। यह फैसला ऐसे समय में लिया गया है, जब छात्रों के नाम पर शुरू हुआ ‘कॉकरोच जनता पार्टी‘ (CJP) का प्रदर्शन हिंसक और उग्र हो गया है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस संबंध में बुधवार (22 जुलाई 2026) को दिल्ली गजट (असाधारण) में आधिकारिक अधिसूचना जारी की गई। हालाँकि, इस अधिसूचना पर 15 जुलाई की तारीख दर्ज है। अनुराग कुमार की हाल ही में दिल्ली पुलिस आयुक्त के रूप में नियुक्ति हुई है।

राष्ट्रीय सुरक्षा कानून के तहत किसी व्यक्ति को बिना औपचारिक आरोप तय किए 12 दिन से लेकर 12 महीने तक हिरासत में रखा जा सकता है। नई अधिसूचना के अनुसार, 19 जुलाई से 18 अक्टूबर तक तीन महीने की अवधि के लिए यह निवारक हिरासत (Preventive Detention) की शक्ति लागू रहेगी। अधिसूचना में कहा गया है कि दिल्ली के उपराज्यपाल को यह यकीन है कि सार्वजनिक सुरक्षा के हित में हिरासत की यह शक्ति सौंपना आवश्यक है।

अधिसूचना में कहा गया है, “राष्ट्रीय सुरक्षा कानून की धारा 2(ई) के साथ पढ़ी जाने वाली धारा 3(3) के तहत प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए, दिल्ली के उपराज्यपाल ने निर्देश दिया है कि निर्धारित अवधि के दौरान दिल्ली पुलिस आयुक्त भी कानून की धारा 3(2) के तहत निरोधक प्राधिकारी (Detaining Authority) की शक्तियों का प्रयोग कर सकेंगे।”

राष्ट्रीय सुरक्षा कानून के अनुसार, इस अधिकार के तहत दिल्ली पुलिस आयुक्त उन लोगों के खिलाफ निवारक हिरासत का आदेश जारी कर सकते हैं जिनकी गतिविधियाँ सार्वजनिक व्यवस्था, राष्ट्रीय सुरक्षा या आवश्यक वस्तुओं और सेवाओं की आपूर्ति एवं रखरखाव के लिए हानिकारक मानी जाएँ। इस कानून के तहत सार्वजनिक व्यवस्था बनाए रखने के लिए संबंधित प्राधिकरण जिला मजिस्ट्रेट और पुलिस प्रमुखों को भी निरोधक प्राधिकारी नियुक्त कर सकता है।

गौरतलब है कि पिछले वर्ष 26 सितंबर को लेह के जिला मजिस्ट्रेट ने एक आदेश जारी किया था जिसके बाद सोनम वांगचुक को NSA के तहत हिरासत में लिया गया था। उनके आंदोलन के दौरान क्षेत्र में हुई घातक हिंसा के बाद यह कार्रवाई की गई थी। उन्हें 170 दिनों तक हिरासत में रखा गया था।

जंतर-मंतर पर नीट पेपर लीक के विरोध और शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की माँग के नाम पर शुरू हुआ प्रदर्शन अब हिंसक हो गया है। प्रदर्शन के दौरान पुलिस के साथ मारपीट की गई है और पत्थर-बोतलें भी फेंकी गईं। इससे पहले मानसून सत्र के पहले दिन CJP के सदस्य संसद तक मार्च करने के लिए बैरिकेड तोड़ने की कोशिश कर चुके थे जिसके बाद दिल्ली में झड़पें और तनाव की स्थिति पैदा हो गई थी।

सरकार के वरिष्ठ प्रतिनिधि पहले ही कह चुके हैं कि केंद्र सरकार ने न तो हुई गलती को कम करके दिखाया है और न ही जिम्मेदारी से बचने की कोशिश की है। उन्होंने यह भी कहा कि सरकार उनकी ‘राजनीतिक’ माँग मानने का कोई इरादा नहीं रखती। एक अधिकारी ने कहा, “समस्या हुई थी। हमने इसे रिकॉर्ड पर स्वीकार किया है और रिकॉर्ड पर ही इसकी जिम्मेदारी भी ली है। सरकार इससे भाग नहीं रही है।”

एक अन्य अधिकारी ने कहा, “हम यह नहीं कह रहे कि लोगों को विरोध नहीं करना चाहिए। लोकतंत्र में हर व्यक्ति को विरोध करने का पूरा अधिकार है। लेकिन मुद्दा कौन उठा रहा है, किस तरीके से उठा रहा है और उसके पीछे कौन लोग हैं, ये अलग सवाल हैं। क्या हमें राजनीतिक दबाव के आगे झुक जाना चाहिए?”

उन्होंने आगे कहा, “जिस व्यवस्था पर हमने भरोसा किया था, उसी के लोगों ने उसे कमजोर कर दिया। हम पेपर माफिया नहीं हैं। व्यवस्था के भीतर के लोगों ने हमें निराश किया, हमने उन पर भरोसा किया था। हमने पेपर लीक की घटना नहीं छिपाई। हमने इसकी जिम्मेदारी स्वीकार की और इसे ठीक करने की कोशिश की।”

दिल्ली पुलिस ने गुरुवार (23 जुलाई 2026) को आधिकारिक बयान जारी कर उन खबरों का खंडन किया, जिनमें दावा किया जा रहा था कि राष्ट्रीय राजधानी में चल रहे ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ (CJP) के प्रदर्शनों से निपटने के लिए दिल्ली पुलिस आयुक्त को राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (NSA), 1980 के तहत विशेष रूप से निवारक हिरासत (Preventive Detention) की शक्तियाँ दी गई हैं।

दिल्ली पुलिस ने स्पष्ट किया कि यह एक नियमित आदेश है जिसे हर तीन महीने में रीन्यू किया जाता है। पुलिस ने कहा कि इस आदेश का मौजूदा CJP प्रदर्शनों से कोई संबंध नहीं है। मौजूदा आदेश 7 जुलाई 2026 को जारी किया गया था, जो 19 जुलाई 2026 से 18 अक्टूबर 2026 तक की अवधि के लिए प्रभावी है।

(नोट इस खबर को दिल्ली पुलिस के बयान के बाद अपडेट किया गया है)