दिल्ली के जंतर-मंतर पर छात्रों का प्रदर्शन जारी है। प्रदर्शन के दौरान सुरक्षा बहुत कड़ी कर दी गई है। पुलिस ने अपराधियों को पकड़ने के लिए आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल शुरू कर दिया है। दिल्ली पुलिस ने जंतर-मंतर पर खास कैमरे लगाए हैं।
इसे फेशियल रिकॉग्निशन सिस्टम कहा जाता है। 21 से 23 जुलाई के बीच इन कैमरों ने एक बड़ा खुलासा किया है। कैमरों की मदद से 2,500 से ज्यादा ऐसे लोगों की पहचान हुई है। इन लोगों का नाम पहले से पुलिस के क्रिमिनल रिकॉर्ड में दर्ज है। ये सभी लोग आदतन अपराधी बताए जा रहे हैं।
#BREAKING | Delhi Police detect over 2,500 people with criminal backgrounds using facial recognition at Jantar Mantar.
— Republic (@republic) July 25, 2026
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रियल टाइम निगरानी से संदिग्धों पर नजर, हथियारों से हमले का आरोप
पुलिस ने जंतर-मंतर के आने-जाने वाले रास्तों पर चार कैमरे लगाए हैं। ये कैमरे सीधे पुलिस के डेटाबेस से जुड़े हुए हैं। जैसे ही कोई पुराना अपराधी कैमरे के सामने आता है, पुलिस को तुरंत अलर्ट मिल जाता है। पुलिस का कहना है कि भीड़ में कुछ ऐसे लोग भी शामिल हैं जो सुरक्षा बलों को निशाना बना रहे हैं। ये लोग चाकू और धारदार हथियारों से हमला कर चुके हैं। इसी बड़े खतरे को देखते हुए निगरानी को और ज्यादा बढ़ा दिया गया है।
20 जुलाई को हुए संसद मार्च के दौरान भारी हिंसा हुई थी। इस मामले में पुलिस अब तक 15 FIR दर्ज कर चुकी है। पुलिस सुरक्षाकर्मियों पर हमले और सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुँचाने की जाँच कर रही है। शनिवार और रविवार को प्रदर्शन स्थल पर भीड़ बढ़ने की पूरी आशंका है।
इसे देखते हुए पुलिस प्रशासन ने बहुत पुख्ता इंतजाम किए हैं। जंतर-मंतर के आसपास लोहे के भारी बैरिकेड्स लगाए गए हैं। इन बैरिकेड्स को आपस में वेल्डिंग करके और मजबूत जंजीरों से बांध दिया गया है ताकि कोई इन्हें तोड़ न सके। इलाके में वज्र वाहन और अतिरिक्त पुलिस बल भी तैनात किया गया है।
क्या होता है फेशियल रिकग्निशन सिस्टम और कैसे करता है काम?
फेसियल रिकॉग्निशन सिस्टम (FRS) एक अत्याधुनिक पहचान तकनीक है, जो आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और मशीन लर्निंग (ML) की मदद से किसी भी व्यक्ति की पहचान उसके चेहरे के आधार पर करती है। इसमें किसी व्यक्ति को पहचानने के लिए केवल उसका चेहरा ही पर्याप्त होता है।
FRS की कार्यप्रणाली कई चरणों में पूरी होती है। सबसे पहले सिस्टम से जुड़े हाई-रिजॉल्यूशन कैमरे, CCTV, ड्रोन या विशेष निगरानी वाहन आसपास मौजूद लोगों के चेहरों को स्कैन करते हैं। कैमरा भीड़ में मौजूद प्रत्येक चेहरे को अलग-अलग पहचानकर उसकी तस्वीर कैप्चर करता है।
इसके बाद सिस्टम उस चेहरे का गहराई से विश्लेषण करता है और चेहरे का एक डिजिटल मॉडल तैयार करता है। इस दौरान आंखों के बीच की दूरी, नाक की लंबाई और चौड़ाई, गालों की हड्डियों का आकार, माथे की बनावट, होंठों की स्थिति और चेहरे के कई अन्य स्थायी बिंदुओं को मापा जाता है।
इन सभी विशेषताओं के आधार पर सिस्टम एक यूनिक डिजिटल प्रोफाइल तैयार करता है, जिसे तकनीकी भाषा में ‘फेशियल प्रिंट’ कहा जाता है। यह बिल्कुल उसी तरह होता है जैसे हर व्यक्ति के फिंगरप्रिंट अलग होते हैं। इसके बाद यह डिजिटल प्रोफाइल पुलिस या सुरक्षा एजेंसियों के डेटाबेस में पहले से मौजूद रिकॉर्ड से मिलाया जाता है। यदि किसी व्यक्ति का चेहरा किसी अपराधी, हिस्ट्रीशीटर या संदिग्ध के रिकॉर्ड से मेल खाता है, तो सिस्टम तुरंत कंट्रोल रूम और ड्यूटी पर मौजूद अधिकारियों को अलर्ट भेज देता है।

