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AMU में छात्रों के ‘उपद्रव’ के बाद CAA विरोध के नाम पर शिक्षकों ने लगाए ‘आज़ादी के नारे’

जिस आज़ादी को दिल्ली के जेएनयू और जामिया में सीएए के खि़लाफ हुए विरोध प्रदर्शनों के दौरान हाथों में पोस्टर लेकर माँगा गया था। इन दौरान प्रदर्शनकारियों के हाथों में तिरंगा तो जरूर दिखाई दिए, लेकिन किसी ने भी 'भारत माता की जय' तक नहीं बोला। बोला भी तो क्या हमें चाहिए 'जिन्ना वाली आज़ादी।'

अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय (AMU) में CAA के ख़िलाफ शुरू हुआ विरोध-प्रदर्शन योगी-मोदी, अमित शाह और हिन्दुत्व की कब्र खोदने, पुलिस से आज़ादी, आरएसएस से आज़ादी की माँग करते हुए आज तिरंगे के नीचे एक दूसरी आज़ादी की माँग तक पहुँच गया है। इस माँग को अब तक एएमयू के छात्र उठा रहे थे, लेकिन अब इस आज़ादी की माँग को उन शिक्षकों ने दोहराया है, जिनके ऊपर विश्वविद्यालय के छात्रों को उज्ज्वल भविष्य की राह दिखाने की जिम्मेदारी है। अब इस आज़ादी के मायने क्या हैं? तो ज़रा आप भी जान लीजिए।

एएमयू में पिछले करीब एक महीने से विश्वविद्यालय के छात्र CAA के विरोध में धरना-प्रदर्शन कर रहे हैं। इसी क्रम में बाबे सैयद गेट पर 32वें दिन ज़ारी धरने के बीच गुरुवार दोपहर को विश्वविद्यालय के छात्र-छात्राओं ने एक विरोध मार्च निकाला, जिसमें छात्रों ने सीएए और बीजेपी के ख़िलाफ जमकर नारेबाजी की। साथ ही छात्रों ने एएमयू के वीसी तारिक मंसूर और रजिस्ट्रार को अपने निशाने पर रखा और उनके ख़िलाफ भी जमकर नारेबाजी करते हुए ऐलान किया कि जब तक वीसी अपना त्यागपत्र नहीं देंगे तब तक हम कक्षाओं का बहिष्कार करेंगे। इस दौरान छात्रों ने वीसी मुर्दाबाद के भी नारे लगाए।

यह विरोध यहीं खत्म नहीं हुआ। इस विरोध को अपना समर्थन देते हुए शिक्षकों ने भी एक मार्च निकालकर इस विरोध को आगे बढ़ाया। अलीगढ़ मुस्लिम टीचर्स एसोसिएशन के सचिव प्रोफेसर नजमुल इस्लाम की अनुवाई में एएमयू के शिक्षकों ने CAA के विरोध में एक तिरंगा यात्रा निकाली। इस यात्रा के दौरान शिक्षकों ने हाथों में तख्तियाँ लेकर नारेबाजी की और कहा कि जो देश पूर्वजों ने बनाया था, अब हम उस देश के वासी नहीं रहे। नया कानून हिन्दुओं और समुदाय विशेष को बाँटने वाला है। इतना ही नहीं शिक्षकों ने छात्रों की तरह ही रास्ते में तिरंगे के नीचे आज़ादी के नारे लगाए।

एएमयू में शिक्षकों ने लगाए आज़ादी के नारे। दैनिक जागरण में प्रकाशित ख़बर की कटिंग

अब आप जान लीजिए कि इस आज़ादी का मतलब एएमयू में खुलकर विरोध प्रदर्शन करने से नहीं बल्कि उस आज़ादी से है, जिस आज़ादी जिक्र अक्सर कश्मीर में होता है और वहाँ के प्रदर्शनों में अक्सर माँगी जाती है, जिस आज़ादी को दिल्ली के जेएनयू और जामिया में सीएए के खि़लाफ हुए विरोध प्रदर्शनों के दौरान हाथों में पोस्टर लेकर माँगा गया था। इन दौरान प्रदर्शनकारियों के हाथों में तिरंगा तो जरूर दिखाई दिए, लेकिन किसी ने भी ‘भारत माता की जय’ तक नहीं बोला। बोला भी तो क्या हमें चाहिए ‘जिन्ना वाली आज़ादी।’

इतनी ही नहीं इस दौरान एक नहीं बल्कि सैकड़ों हिन्दूघृणा से लबरेज पोस्टर प्रदर्शनकारियों के हाथों में देखे गए, जिनके माध्यम से हिंदुओं को कैलाश भैजने की बात कही गई, कहीं ख़िलाफ़त 2.0 को काली स्याही से दीवार पर लिख दिया गया। जोर-जोर से ‘ला इलाहा इल्लल्लाह’ के नारे लगे और पूरी दुनिया में ‘ऊँ’ के चिन्ह को अपमानित करते हुए पोस्टरों में ‘फक हिंदुत्व’ लिखा गया। इसके अलावा इन प्रदर्शनों में हिंदू राष्ट्र को रेपिस्ट कहा गया। साथ ही ‘फक हिंदू राष्ट्र’ जैसे नारे लड़कियों के गाल पर लिखे देखे गए। इन नारे और पोस्टरों के माध्यम से बहुसंख्यक हिंदू की भावनाओं को तो आहत किया ही गया बल्कि इन नारों ने इन प्रदर्शनकारियों की मंशाओं को उजागर कर दिया।

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ऑपइंडिया स्टाफ़
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कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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