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शादी से पहले – ‘धर्म नहीं आएगा आड़े’, शादी के बाद – ‘इस्लाम कबूल करो’: मुस्लिम पत्नी के खिलाफ सिख व्यक्ति पहुँचा कोर्ट

पत्नी जन्म से मुस्लिम, पति जन्म से सिख। शादी से पहले "धर्म कभी आड़े नहीं आएगा" पर एकमत लेकिन अब पति के साथ-साथ अपने बेटे पर भी जबरन धर्म परिवर्तन कर इस्लाम कबूल करने का दबाव।

पंजाब के चंडीगढ़ से इस्लामिक धर्मान्तरण कराने की कोशिश का मामला प्रकाश में आया है। यहाँ 36 वर्षीय एक सिख व्यक्ति ने अपनी मुस्लिम पत्नी और अपने ससुरालियों के खिलाफ कोर्ट में याचिका दायर कर उसे और उसके बेटे पर जबरन धर्म परिवर्तन कर इस्लाम कबूल करने के लिए दवाब बनाने का आरोप लगाया है। याचिका में पीड़ित युवक ने रसलीन कौर की जिला अदालत से जबरन मतांतरण को रोकने के लिए निर्देश देने की माँग की है।

मामले में अदालत ने आरोपितों को नोटिस जारी कर 20 जुलाई 2021 तक जवाब देने को कहा है। याचिकाकर्ता का कहना है कि वो जन्म से ही सिख है और उसकी पत्नी जन्म से ही मुस्लिम है। शुरुआत में तो सब ठीक था, लेकिन उसके ससुराल वाले और पत्नी उस पर धर्म परिवर्तन करने का दवाब बना रहे हैं।

पीड़ित व्यक्ति के मुताबिक, अगस्त 2012 में जब उसकी पत्नी ने बच्चे को जन्म दिया था, तभी वो उसका इस्लामीकरण करना चाहती थी, लेकिन उसने उसे ऐसा नहीं करने दिया। हालाँकि, अब हालात बदल गए हैं। पत्नी का जीजा और उसके मायके वाले याचिकाकर्ता की निजी जिंदगी में बहुत ज्यादा दखल दे रहे हैं।

पहले कहा था धर्म नहीं आएगा आड़े

सिख व्यक्ति के वकील दीक्षित अरोड़ा ने कोर्ट को बताया है कि वर्ष 2008 में सिख व्यक्ति चंडीगढ़ के एक स्टोर में इंचार्ज था और मुस्लिम लड़की वहीं पर सेल्स गर्ल थी। इसी दौरान दोनों के बीच नजदीकियाँ बढ़ीं और प्यार पनपा। इसके बाद साल 2008 में ही नवंबर के महीने में दोनों ने गुरुद्वारे में शादी कर ली। इस दौरान दोनों के बीच इस बात को लेकर एक राय बनी थी कि उनकी जिंदगी में उनका धर्म कभी भी आड़े नहीं आएगा। अब सिख व्यक्ति ने आऱोप लगाया है कि विवाह के पहले दिन से पत्नी समेत बाकी ससुराल वाले उस पर धर्म परिवर्तन करने का दवाब बना रहे हैं।

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ऑपइंडिया स्टाफ़
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कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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