Homeराजनीति'मैं गोरखपुर से योगी आदित्यनाथ के खिलाफ चुनाव लड़ सकता हूँ': डॉक्टर कफील खान...

‘मैं गोरखपुर से योगी आदित्यनाथ के खिलाफ चुनाव लड़ सकता हूँ’: डॉक्टर कफील खान ने किया टिकट के लिए बातचीत का दावा, पार्टी का खुलासा नहीं

"अगर कोई पार्टी मुझे टिकट देती है तो मैं गोरखपुर से उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के खिलाफ चुनाव लड़ सकता हूँ।"

उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव से पहले बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. कफील खान (Kafeel Khan) एक बार फिर सुर्खियों में हैं। गोरखपुर (Gorakhpur) के बीआरडी मेडिकल कॉलेज (BRD Medical College) में ऑक्सीजन की कमी से कई बच्चों की मौत के बाद विवादों में आए कफील खान ने इस बार यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ (Yogi Adityanath) के खिलाफ गोरखपुर सीट (Gorakhpur Assembly Seat) से चुनाव लड़ने की इच्छा जताई है।

गोरखपुर में छठे चरण में 3 मार्च को मतदान होना है। उन्होंने मंगलवार (25 जनवरी 2022) को पीटीआई से बात करते हुए कहा, “अगर कोई पार्टी मुझे टिकट देती है तो मैं गोरखपुर से उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के खिलाफ चुनाव लड़ सकता हूँ।”

यह पूछे जाने पर कि क्या वह किसी पार्टी के संपर्क में हैं या फिर किसी ने उनसे संपर्क किया है। इस पर उन्होंने कहा, “हाँ, बातचीत चल रही है। अगर सब कुछ ठीक रहा तो मैं चुनाव लड़ूँगा।”

खान ने आगे कहा कि अगस्त 2017 में बीआरडी मेडिकल कॉलेज में हुए हादसे में उन्हें निशाना बनाया गया था, जिसमें 80 परिवारों के बच्चों की मौत हो गई थी। उन्होंने आरोप लगाया कि गोरखपुर में उनकी 70 वर्षीय माँ को पुलिस प्रताड़ित कर रही है। कफील की माँ गोरखपुर के बसंतपुर मोहल्ले में अपने भाई आदिल खान के परिवार के साथ रहती हैं।

डॉ. कफील खान ने बीते दिनों यह भी दावा किया कि इतने सालों के बाद भी मुझे प्रताड़ित किया जा रहा है। पिछली साल 17 दिसंबर को मेरी किताब का विमोचन होने के बाद पुलिस 20 दिसंबर और फिर 28 दिसंबर को मेरे घर पर पहुँची थी। उन्होंने कहा कि मैं गोरखपुर जिले के राजघाट थाने का हिस्ट्रीशीटर हूँ और विधानसभा चुनाव की वजह से ऐसे लोगों का सत्यापन किया जा रहा है।

बता दें कि योगी सरकार ने सीएए के खिलाफ प्रदर्शन के दौरान कफील खान के खिलाफ रासुका के तहत कार्रवाई की थी। बाद में हाई कोर्ट से राहत मिलने के बाद कफील जेल से बाहर आए थे। पिछले साल 9 नवंबर को उन्हें नौकरी से बर्खास्त कर दिया गया था।

Join OpIndia's official WhatsApp channel

  सहयोग करें  

'द वायर' जैसे राष्ट्रवादी विचारधारा के विरोधी वेबसाइट्स को कभी पैसों की कमी नहीं होती। देश-विदेश से क्रांति के नाम पर ख़ूब फ़ंडिग मिलती है इन्हें। इनसे लड़ने के लिए हमारे हाथ मज़बूत करें। जितना बन सके, सहयोग करें

ऑपइंडिया स्टाफ़
ऑपइंडिया स्टाफ़http://www.opindia.in
कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

संबंधित ख़बरें

ख़ास ख़बरें

केरल में एलोहिम ग्लोबल वर्शिप सेंटर के पादरी बिनु वझामुट्टोम पर नाबालिगों से मारपीट, बंधक बनाकर जबरदस्ती काम कराने के आरोप: ईसाई नेता के...

केरल के पथानामथिट्टा में BJP कार्यकर्ताओं ने प्रदर्शन करते हुए पादरी बिनू वझामुट्टोम के गिरफ्तारी की माँग की है।

महरंग बलोच पर मलाला का मौन… अफगान महिलाओं के लिए मंच-मंच भाषण, लेकिन पाकिस्तानी फौज के बलोचों के दमन पर नोबेल विजेता खामोश क्यों?

दुनिया के कोने-कोने से मानवाधिकार का झंडा उठाने वाली नोबेल शांति पुरस्कार विजेता मलाला पाकिस्तान में महरंग को उम्रकैद मिलने पर मौन बैठी है।
- विज्ञापन -