ब्रिटेन में आठवाँ प्रधानमंत्री अपना पूरा कार्यकाल पूरा नहीं कर पाया है। प्रधानमंत्री कीर स्टारमर को 22 जून 2026 को अपने इस्तीफे की घोषणा करनी पड़ी। यह घोषणा लेबर पार्टी के भीतर बढ़ते दबाव की वजह से की गई। दरअसल उनके प्रतिद्वंद्वी एंडी बर्नहैम ने 18 जून को हुए मेकरफील्ड उपचुनाव में निर्णायक जीत हासिल की थी।
इस जीत के साथ ही बर्नहैम ने पार्टी नेतृत्वकर्ता के तौर पर खुद को स्थापित कर लिया और स्टारमर के लिए चुनौती बन गए। स्टारमर की घटती लोकप्रियता के कई कारण हैं, लेकिन पाकिस्तानी मुस्लिम बलात्कार गिरोहों के मुद्दे को जानबूझकर कर नजरअंदाज करना, उनकी लोकप्रियता में कमी की अहम वजह है।
Watch live: My statement. https://t.co/MX7ga3FRGq
— Keir Starmer (@Keir_Starmer) June 22, 2026
कीर स्टारमर जनता और लेबर पार्टी के समर्थकों में लगातार अलोकप्रिय होने जा रहे थे। उनकी एक के बाद एक ली गई नीतिगत फैसलों की आलोचना हो रही है। उन्होंने पीटर मैंडेलसन को अमेरिका में ब्रिटेन का राजदूत नियुक्त किया, जिसे सुरक्षा एजेंसियों ने क्लीन चिट नहीं दी गई थी। स्टारमर को पार्टी के भीतर विरोध का सामना करना पड़ रहा था, क्योंकि लेबर पार्टी को अंदेशा था कि अगले आम चुनाव में स्टारमर के फैसलों की वजह से उन्हें भारी नुकसान उठाना पड़ सकता है।
पार्टी ने ही कीर स्टारमर को पद छोड़ने और एंडी बर्नहैम के लिए रास्ता बनाने का आदेश दिया। दरअसल बर्नहैम की हालिया चुनावी जीत ने इस उम्मीद को जगाया है कि उनका नेतृत्व अगले चुनाव में लेबर पार्टी को करारी हार से बचा सकता है।
22 जून को अपने भाषण में कीर स्टारमर ने स्वीकार किया कि उनकी पार्टी आगामी चुनाव के लिए उन्हें विश्वस्त चेहरा नहीं मानती, जिसके दम पर चुनाव जीता जा सकता है।
दरअसल कीर स्टारमर लगातार राजनीतिक लाभ के लिए मुस्लिम तुष्टीकरण की नीति अपना रहे हैं। इससे ब्रिटिश जनता में भारी गुस्सा है। यह याद रखना आवश्यक है कि प्रधानमंत्री कीर स्टारमर ने जून 2025 में अपनी नीति में अचानक बदलाव किया और ऑडिट और सिफारिशों के बाद पाकिस्तानी मुस्लिम बलात्कारी ग्रुमिंग गैंग की जाँच कराने का वादा किया था।
हालाँकि जनवरी 2025 में स्टारमर ने यौन शोषण करने वाले गिरोहों की जाँच की माँग करने वालों को धुर दक्षिणपंथी विचारधारा का समर्थन करने वाला बताया था। दरअसल उस वक्त अमेरिकी अरबपति एलोन मस्क ने ब्रिटेन सरकार पर जोरदार हमला किया था। उन्होंने मुस्लिम बलात्कार गिरोहों के मुद्दे पर स्टारमर सरकार द्वारा कदम नहीं उठाने की बात कही थी और वर्षों से पाकिस्तानी मुस्लिम ग्रुमिंग गैंग द्वारा गैर-मुस्लिम लड़कियों के शोषण करने की बात कही थी।
पाकिस्तानी मुस्लिम बलात्कार गिरोहों की जाँच शुरू करने में भी कीर स्टारमर ने तत्परता नहीं दिखाई। जब उनपर दबाव बढ़ा तो उन्होंने जाँच शुरू की। इससे दोनों पक्षों के बीच वे अलोकप्रिय हुए।
लेबर पार्टी की मुस्लिम-समर्थक नीतियों के खिलाफ कंजर्वेटिव पार्टी के कड़े विरोध के बावजूद, लेबर सरकार ने ब्रिटेन के रुख में बदलाव करते हुए फिलिस्तीनी राज्य का समर्थन किया है और इजरायल को कुछ हथियारों के निर्यात पर प्रतिबंध लगा दिया है। यह बदलाव गाजा में मानवीय संकट को लेकर पार्टी नेतृत्व और कई क्षेत्रों में लेबर पार्टी के समर्थक मुसलमानों के दबाव के बीच हुआ है। इजरायल-फिलिस्तीन मुद्दे पर 2024 में मुस्लिम बहुल सीटों पर लेबर पार्टी का समर्थन कम होने के बाद यह नीतिगत बदलाव आया है।
स्टारमर को दोहरी नीति अपनाने के आरोपों का भी सामना करना पड़ा है। इफ्तार कार्यक्रमों की मेजबानी करने से लेकर मुसलमानों को ‘आधुनिक ब्रिटेन का चेहरा’ कहने और ‘इस्लामोफोबिया’ से निपटने के लिए आत्मघाती रूप से सहानुभूतिपूर्ण दृष्टिकोण अपनाने तक, स्टारमर ने अपनी पार्टी के मुस्लिम वोट बैंक को खुश रखने के लिए हद से ज्यादा प्रयास किए।
दरअसल दिसंबर 2025 में कीर स्टारमर के नेतृत्व वाली लेबर सरकार की प्रस्तावित ‘इस्लामोफोबिया’ (या ‘मुस्लिम विरोधी घृणा’) की परिभाषा पर ब्रिटिश हिंदू, सिख और मानवाधिकार समूहों ने गहरी आपत्ति जताई है | आलोचकों का मानना है कि इसमें मौजूद अस्पष्ट शब्दावली, जैसे- ‘नस्लीयकरण’ और ‘पूर्वाग्रही रूढ़िवादिता’, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को दबा सकती है और एक तरह से पिछले दरवाजे से ‘ईशनिंदा कानून’ (ब्लास्पहमी लॉ) की वापसी का मार्ग प्रशस्त कर सकती है। हिंदू और सिख समूहों ने चेतावनी दी है कि केवल मुस्लिम के लिए ऐसी अलग और अस्पष्ट परिभाषा बनाने से अन्य धर्मों के प्रति भेदभाव की भावना पैदा होगी।
क्राउन प्रॉसिक्यूशन सर्विस (सीपीएस) के प्रमुख, लोक अभियोजन निदेशक (डीपीपी) के रूप में अपने कार्यकाल के दौरान कीर स्टारमर को कुप्रबंधन के आरोपों का भी सामना करना पड़ा।
पाकिस्तानी मुस्लिम ग्रुमिंग गैंग और कीर स्टारमर की चुप्पी
1980 के दशक में टेलफोर्ड शहर में एक घटना ने पाकिस्तानी मुस्लिम रेपिस्ट गैंग की ओर लोगों का ध्यान खींचा। उस वक्त 11 साल की छोटी बच्ची को बहला-फुसलाकर अगवा किया गया, झूठी देखभाल का दिखावा किया गया और फिर नशीली दवाइयाँ देकर बलात्कार किया गया। उसे पीटा गया, बेचा गया और यहाँ तक कि ग्रुमिंग गिरोहों ने उसकी हत्या भी कर दी। इस दौरान देखा गया कि गोरी बच्चियों का रेप कर उसे बलात्कारी दूसरे बलात्कारी के हवाले कर देता था।
ऐसे रेपिस्ट ज्यादातर ब्रिटिश पाकिस्तानी मूल के थे। तीन लड़कियों की हत्या कर दी गई थी और दो त्रासदियों की वजह से मारी गईं। 170000 आबादी वाले शहर में लगभग 1000 लड़कियाँ पीड़ित हुईं। टेलफोर्ड में, ये पाकिस्तानी गिरोह ऐसा अड्डे चला रहे थे, जहाँ लड़कियों को प्रेमजाल में फँसा कर उन्हें गिफ्ट देकर अपने साथ लाते थे।
रोदरहम में भी इसी तरह का एक रैकेट चल रहा था। 226000 की आबादी वाले शहर में पाकिस्तानी मूल के पुरुषों ने करीब 1500 लड़कियों का रेप किया गया और उन्हें खरीदा-बेचा गया। कई पीड़ितों के साथ गैंगरेप किया गया और यह दुर्व्यवहार 1997 से 2013 तक बेरोकटोक जारी रहा। रोशडेल में यह सिलसिला 2002 में शुरू हुआ। कम से कम 47 युवतियों को दुर्व्यवहार का शिकार बनाया गया। प्रशासनिक और कानूनी अधिकारियों की प्रतिक्रिया इतनी निष्क्रिय रही है कि ये गिरोह “ग्रेट ब्रिटेन” की सड़कों पर आज भी खुलेआम घूम रहे हैं।
ब्रिटेन में हडर्सफ़ील्ड, रोदरहम, रोशडेल, ऑक्सफोर्ड, ब्रिस्टल, पीटरबरो और न्यूकैसल सहित कई स्थानों पर यौन शोषण के कारनामों का खुलासा हुआ। कई रिपोर्टों और जांचों के बावजूद, स्टोववुड और टूरवे जैसी जांच कार्रवाइयों के बावजूद, यौन शोषण करने वाले गिरोहों द्वारा किए गए यौन शोषण के वास्तविक पैमाने का पता नहीं लगाया जा सका।
ये ‘ग्रूमिंग’ अपराध यूनाइटेड किंगडम को लगातार परेशान कर रहे हैं, क्योंकि नेशनल सोसाइटी फॉर द प्रिवेंशन ऑफ क्रुएल्टी टू चिल्ड्रन (एनएसपीसीसी) ने 2023 में बताया कि पिछले पांच वर्षों में युवाओं के खिलाफ ऑनलाइन ग्रूमिंग अपराधों में 82% की वृद्धि हुई है।
पाकिस्तानी ग्रुमिंग गैंग ने गरीब श्वेत और गैर-मुस्लिम लड़कियों के साथ बलात्कार किया। यह मुद्दा सबसे पहले रोदरहम, रोशडेल और टेलफोर्ड जैसे शहरों में सामने आया। रोदरहम पर 2014 की रिपोर्ट के अनुसार, लगभग 1400 बच्चों का 16 वर्षों में यौन शोषण किया गया। इसके ज्यादातर अपराधी पाकिस्तानी मूल के पुरुष थे। हालाँकि कंजर्वेटिव पार्टी भी पूरी तरह निर्दोष नहीं है, लेकिन लेबर सरकार और कानून प्रवर्तन अधिकारियों ने जानबूझकर इस मामले को नजरअंदाज किया।
हाल ही में सांसद रूपक लो की अध्यक्षता में बनी कमेटी की रेप गैंग इंक्वायरी रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि ब्रिटिश सरकार और सीपीएस ने जातीयता और धर्म से संबंधित डेटा को किस प्रकार दबाया। रिपोर्ट में उल्लेख किया गया है कि लेबर पार्टी ने मुस्लिम वोट बैंक की नाराजगी से बचने के लिए जाँच में देरी की या फिर उसे रोक दिया। इसमें आगे कहा गया है कि बलात्कार के जिहादियों को हल्की सजा दी गईं और उन्हें देश से बाहर नहीं निकाला गया। स्टारमर के कार्यकाल में तो हद ही हो गया, सीपीएस ने हजारों बलात्कारी जिहादियों को केवल ‘चेतावनी’ देकर छोड़ दिया।
ओपइंडिया ने पहले भी रिपोर्ट किया था कि कैसे ब्रिटेन के राजनेता, विशेषकर लेबर पार्टी, जिहाद के मामलों को कम करके आँकते हैं। लेबर पार्टी की सांसद सारा चैंपियन को 2017 में द सन में प्रकाशित एक लेख के लिए माफी माँगनी पड़ी थी, जिसमें उन्होंने लिखा था कि ब्रिटेन की अहम समस्या ब्रिटिश पाकिस्तानी पुरुषों द्वारा श्वेत लड़कियों का बलात्कार और शोषण है”। चैंपियन को न केवल माफी माँगनी पड़ी, बल्कि अपने पद से इस्तीफा भी देना पड़ा।
2012 में, लेबर पार्टी के नेता और गृह मामलों की चयन समिति के अध्यक्ष कीथ वाज ने ग्रूमिंग जिहाद अपराधों को कम करके आँका। उन्होंने कहा कि पूरे समुदाय को ‘कलंकित’ नहीं किया जाना चाहिए।
दो दशकों से अधिक समय तक हजारों गैर-मुस्लिम नाबालिग और वयस्क लड़कियों को निशाना बनाने वाले मुस्लिम बलात्कार गिरोहों को पकड़ने में ब्रिटिश सरकारों और कानून प्रवर्तन अधिकारियों की सामूहिक विफलता का कारण ‘इस्लामोफोबिया’ से बचने की सोच है। लेबर पार्टी के नेताओं के साथ-साथ ब्रिटिश मीडिया भी इस मामले में पाकिस्तानी ग्रुमिंग गैंग या पाकिस्तानी मूल के ब्रिटिश मुस्लिम ग्रुमिंग गैंग कहने से बचता रहा। इसके बजाय ‘दक्षिण एशियाई ग्रूमिंग गैंग’ का इस्तेमाल किया।
रूढ़िवादी राजनेताओं, ब्रिटिश देशभक्तों और एलोन मस्क ने स्टारमर पर पाकिस्तानी बलात्कार गिरोह के अपराधों में मिलीभगत का आरोप लगाया। कई लोगों ने माँग की थी कि सीपीएस प्रमुख के रूप में अपने कार्यकाल और प्रधानमंत्री के रूप में अपने कार्यकाल के दौरान इन अपराधों के खिलाफ कार्रवाई न करने के लिए स्टारमर पर मुकदमा चलाया जाए।
कुल मिलाकर कीर स्टारमर ने पाकिस्तानी ग्रुमिंग गैंग पर एक्शन लेने से परहेज किया, वहीं ब्रिटेन के पूर्व प्रधानमंत्री और कंजर्वेटिव नेता ऋषि सुनक ने जोखिम उठाकर पाकिस्तानी मुस्लिम यौन शोषण गिरोहों के खिलाफ आवाज उठाया और उन्हें जिहादी करार दिया।
ऋषि सुनक ने उठाए थे कदम
ऋषि सुनक ब्रिटेन के एकमात्र ऐसे राष्ट्राध्यक्ष रहे, जिन्होंने न केवल मुस्लिम यौन शोषण गिरोहों की निंदा की, बल्कि इस बात पर भी जोर दिया कि कैसे राजनीतिक शुद्धता ने राजनेताओं को बलात्कार जिहाद के खिलाफ बोलने से रोका। साथ ही यह भी बताया कि वह ब्रिटेन में यौन शोषण गिरोहों की समस्या से कैसे निपटेंगे।
अक्टूबर 2025 में पदभार संभालने से कुछ महीने पहले दिए गए एक साक्षात्कार में, तत्कालीन प्रधानमंत्री ऋषि सुनक ने ग्रूमिंग या रेप जिहाद को ‘भयानक अपराध’ बताया था और प्रधानमंत्री बनने पर इस समस्या से प्राथमिकता के आधार पर निपटने का वादा किया था।
सुनक ने घोषणा की थी कि वे राष्ट्रीय अपराध एजेंसी में एक नया टास्क फोर्स बनाएँगे, जो यौन शोषण करने वाले गिरोहों की निगरानी करेगा। उन्होंने कहा था, “हम हर जगह पुलिस बलों के लिए इसे प्राथमिकता देना अनिवार्य करेंगे। मैं यह सुनिश्चित करना चाहता हूँ कि सभी पुलिस बल इसमें शामिल लोगों की पहचान दर्ज करें, जो वर्तमान में नहीं किया जाता क्योंकि लोग ऐसा नहीं करना चाहते। मैं यौन शोषण में शामिल लोगों के लिए आजीवन कारावास की सजा का प्रावधान करना चाहता हूँ, जिसमें पैरोल के बहुत सीमित विकल्प होंगे। एक कंजर्वेटिव सरकार को लोगों की सुरक्षा के आड़े राजनीतिक स्वार्थ को नहीं आने देना चाहिए । ”
सुनक ने अपना वादा निभाया और अप्रैल 2023 में देश में मुस्लिम यौन शोषण गिरोहों की जाँच में पुलिस की सहायता के लिए एक नए ‘ग्रूमिंग गैंग्स टास्क फोर्स’ बनाया । इस टास्क फोर्स में सुनक ने जाँच में सहायता के लिए विशेषज्ञ अधिकारियों की नियुक्ति की घोषणा की, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि यौन शोषण गिरोहों के पीछे के अपराधियों को न्याय के कटघरे में लाया जाए। उन्होंने यह भी वादा किया कि यौन शोषण गिरोह के सदस्यों और सरगनाओं को उनके अपराधों के लिए कड़ी से कड़ी सजा मिलेगी।
I will do whatever it takes to root out grooming gangs once and for all.
— Rishi Sunak (@RishiSunak) April 3, 2023
Here's how 👇 pic.twitter.com/ZOLoMxippH
सुनक ने यह भी घोषणा की थी कि उनकी सरकार ऐसा कानून लाएगी जिससे यौन शोषण करने वाले गिरोह के सरगना को सजा सुनाते समय एक वैधानिक कारक के रूप में शामिल किया जा सके, जो इन अपराधों के लिए सबसे कड़ी सजा सुनिश्चित करने के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाएगा।
ऋषि सुनक के पास पाकिस्तानी मुस्लिम यौन शोषण गिरोहों को जड़ से खत्म करने का एक दूरदर्शी दृष्टिकोण और बड़ी योजनाएँ थीं। हालाँकि, आम चुनाव में कंजर्वेटिव पार्टी की करारी हार ने ब्रिटेन की उन उम्मीदों पर पानी फेर दिया कि देश में यौन शोषण गिरोहों का अंत होगा और हजारों पीड़ितों को न्याय मिलेगा।
कंजर्वेटिव पार्टी का 14 साल का शासन अर्थव्यवस्था, महँगाई, आव्रजन और ब्रेक्जिट के बाद की चुनौतियों से निपटने के तरीके को लेकर जनता के असंतोष और पार्टी के आंतरिक मतभेदों के कारण चुनावी हार के साथ समाप्त हुआ। हालाँकि ऋषि सुनक जानते थे कि वे एक डूबते जहाज का नेतृत्व कर रहे हैं, फिर भी उन्होंने राजनीतिक लाभ हासिल करने की होड़ और राजनीतिक शुद्धता को पाकिस्तानी मुस्लिम बलात्कार गिरोहों से ब्रिटिश लड़कियों के लिए न्याय और सुरक्षा के अपने प्रयासों में बाधक न बनने देने का भरसक प्रयास किया।
कीर स्टारमर को ऋषि सुनक की तुलना में कहीं अधिक समय तक सत्ता में रहने और राजनीतिक स्थिरता मिली, फिर भी स्टारमर कई मोर्चों पर विफल रहे। पाकिस्तानी मुस्लिम यौन शोषण गिरोहों के पीड़ितों को न्याय दिलाने के मामले में स्टारमर के बार-बार बदलते रुख को प्रधानमंत्री के रूप में उनकी सबसे बड़ी असफलताओं में से एक माना जाएगा।
(यह लेख मूलरूप से अंग्रेजी में लिखा गया है, इसे पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करें)


