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दावा- एक भी कोविड वैक्सीन की बर्बादी नहीं, हकीकत- 20% टीके हो रहे बेकार: केरल मॉडल की फिर खुली पोल

साल 2021 में कोरोना की दूसरी लहर के बाद कोविड वैक्सीन को प्राइवेट अस्पतालों ने भारी तादाद में खरीदा लेकिन ओनम के बाद केरल के वहाँ लोग वैक्सीन लगवाने गए ही नहीं। इससे उन अस्पतालों में न केवल वैक्सीन बर्बाद हुई बल्कि लाखों का नुकसान भी हुआ

कोविड वैक्सीनेशन अभियान के दौरान वैक्सीन की एक भी डोज बर्बाद न करने का दावा करके वाहवाही बटोरने वाला केरल राज्य अब वैक्सीन बर्बाद करने के लिए बदनाम हो रहा है। पहले जहाँ खबरें आई थीं कि राज्य में किसी वैक्सीन डोज को नहीं फेंका गया है वहीं अब पता चल रहा है कि केरल में भी 20 फीसद वैक्सीन डोज बेकार हो रही है। ये हाल ज्यादाकर प्राइवेट अस्पतालों में है।

इस संबंध में केरल प्राइवेट अस्पतालों के महासचिव डॉ अनवर एम अली ने बताया, “बहुत मेहनत के बाद भी कुछ अस्पताल फ्री वैक्सीन के लिए लोगों को अपने यहाँ इकट्ठा नहीं कर पाए। इसकी वजह से कुछ वैक्सीन स्टॉक फेंकना पड़ा। अस्पतालों को भी नुकसान हुआ और अब हमने निर्णय लिया है कि हम कोविड वैक्सीन में ज्यादा पैसा नहीं लगाएँगे। अब वैक्सीन की इतनी डिमांड भी नहीं है।”

क्वालिफाइड प्राइवेट मेडिकल प्रैक्टिशनर एसोसिएशन के सचिव डॉ अब्दुल वहाब ने कहा, “वैक्सीन की बर्बादी प्राइवेट अस्पतालों की सच्चाई है। हम सुनिश्चित करना चाहते हैं कि कोई बर्बादी न की जाए, लेकिन अब ये काम असंभव लग रहा है। जब लोग आसानी से सरकारी अस्पताल में जाकर उसे लगवा सकते हैं तो कोई क्यों चाहेगा कि वो जाएँ और पैसे देकर वैक्सीन लगवाएँ। या तो सरकार को वैक्सीन वापस खरीद लेनी चाहिए वरना वैक्सीन बनाने वालों को इसे वापस लेना चाहिए। नहीं तो, प्राइवेट अस्पतालों में इसकी बर्बादी चलती रहेगी।”

बता दें कि कोरोना की दूसरी लहर के दौरान जब वैक्सीन की माँग बढ़ी तो प्राइवेट अस्पतालों ने बड़ी तादाद में वैक्सीनें खरीदीं। ज्यादातर ने इसे बैंक से 5% के ब्याज पर लिया। 20 लाख रुपए से 1 करोड़ की वैक्सीन खरीदी गई। मगर 2021 में ओनम के बाद लोगों ने प्राइवेट अस्पतालों में वैक्सीन के लिए जाना बंद कर दिया जिसके कारण प्राइवेट अस्पतालों को नुकसान झेलना पड़ा। सबसे बुरा हाल थ्रिशूर और एर्नाकुलम में हैं।

टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट में सूत्रों के हवाले से बताया गया कि ज्यादातर अस्पताल में 10 फीसद से 20 फीसद वैक्सीन बर्बाद हुईं, वो भी तब जब सरकार ने एक्पायर होने वाली वैक्सीन को रिप्लेस करने की अपनी कोशिश की। एक स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी की ओर से जारी बयान में इस संबंध में कहा गया कि वैक्सीन बर्बादी का कारण यही है कि अगर सरकार उन एक्सपायर वैक्सीनों को रिप्लेस भी रही है तो हम उसका क्या करें। कोई वैक्सीन लेने वाला ही नहीं है। रिपोर्ट बताती है कि प्राइवेट अस्पतालों को एक तो कोविशील्ड स्टॉक के एक्सपायर होने से नुकसान हुआ है दूसरा वैक्सीन के दाम गिरने से भी फर्क पड़ा है।

केरल मॉडल के बाद कोविड वैक्सीन पर केरल ने कहा झूठ

बता दें कि जब पूरे देश में कोरोना का प्रकोप शुरू हुआ था, तभी से लिबरल गिरोह ने सोशल मीडिया पर ‘केरल मॉडल’ की तारीफें करनी शुरू कर दी थी। लेकिन बाद में कोरोना के बढ़ते मामलों ने लिबरलों की पोल खोल दी और एक समय ऐसा आया कि आँकड़ों से पता चला कि देश के कुल सक्रिय मामलों में से 60 फीसद सिर्फ केरल के थे। केरल मॉडल की तारीफों के बाद ही वैक्सीन डोज बर्बाद न करने को लेकर केरल की तारीफ हुई थी।

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ऑपइंडिया स्टाफ़
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कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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