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बंगाल हिंसा की जाँच करने पहुँची फैक्ट फाइंडिंग कमेटी, पुलिस ने बीच में रोका: टीम ने पूछा- सरकार छिपाना क्या चाहती है?

पुलिस द्वारा रोके जाने पर कमेटी की सदस्य भावना बजाज ने कह, "हम लोगों को पुलिस ने रोक दिया है। सरकार क्या छुपाना चाहती है? हम पीड़ितों से सिर्फ मिलना चाहते हैं लेकिन हमको आगे जाने नहीं दिया जा रहा है। इस घटना को कितना समय हो गया है। क्या राज्य सरकार कानून-व्यवस्था बनाए रखने में सक्षम नहीं है?"

रामनवमी शोभायात्रा के दौरान पश्चिम बंगाल में हुई हिंसा को लेकर राष्ट्रीय मानवाधिकार उल्लंघन की फैक्ट फाइंडिंग कमेटी पीड़ितों से मिलना चाहती थी। लेकिन बंगाल पुलिस ने उन्हें मिलने से रोक दिया। इसको लेकर कमेटी ने ममता बनर्जी पर सवाल उठाते हुए कहा है कि आखिर सरकार क्या छुपाना चाहती है? पीड़ितों से अकेले मिलने जाने को भी धारा 144 के दायरे में लाया जा रहा है।

दरअसल, रामनवमी शोभायात्रा के दौरान हुगली जिले के रिसड़ा में सांप्रदायिक हिंसा भड़क उठी थी। इस हिंसा में कई लोग घायल हुए थे। मानवाधिकार उल्लंघन की फैक्ट फाइंडिंग कमेटी इस हिंसा के पीड़ितों से मिलने जा रही थी। इसको लेकर कमेटी की ओर से प्रेस विज्ञप्ति भी जारी की गई थी। इस विज्ञप्ति में कहा गया था कि कमेटी के सदस्य शनिवार (8 अप्रैल 2023) को रिसड़ा के बड़ी मस्जिद के सामने संध्या बाजार ऑड एसएसकेएम हॉस्पिटल का दौरा करेंगे।

एएनआई के अनुसार, इसको लेकर फैक्ट फाइंडिंग कमेटी के सदस्य रिसड़ा पहुँचे थे। जहाँ हिंसा पीड़ितों से मिलने जा रहे सदस्यों को पश्चिम बंगाल पुलिस ने रोक दिया। इसको लेकर कमेटी की सदस्य भावना बजाज ने कहा है, “हम लोगों को पुलिस ने रोक दिया है। सरकार क्या छुपाना चाहती है? हम पीड़ितों से सिर्फ मिलना चाहते हैं लेकिन हमको आगे जाने नहीं दिया जा रहा है। इस घटना को कितना समय हो गया है। क्या राज्य सरकार कानून-व्यवस्था बनाए रखने में सक्षम नहीं है? मैं पीड़ितों से अकेले मिलने जा रही हूँ तो मैं 144 के दायरे में कैसे आ रही?”

बता दें कि मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्री राम के जन्मोत्सव रामनवमी के अवसर पर पश्चिम बंगाल के कई हिस्सों में हिंसक झड़पें हुई थीं। इस हिंसा में दर्जनों लोग घायल हुए थे। वहीं, कुछ लोगों के मारे जाने की भी खबर सामने आई थी। इसी तरह हुगली जिले के रिसड़ा में हिंसा की शुरुआत 2 अप्रैल की शाम भाजपा रामनवमी शोभायात्रा में हुए पथराव के साथ हुई थी। इसके बाद सड़कों पर खड़ी गाड़ियाँ भी आग के हवाले कर दी गईं थीं। इस हिंसा में महिलाएँ और बच्चे घायल हुए थे।

इसके बाद 3 अप्रैल की रात को रिसड़ा रेलवे स्टेशन के गेट नंबर 4 पर एक पुलिस वैन में आग लगा दी गईं थी। इसके अलावा स्टेशन में पत्थरबाजी और बमबाजी की भी खबरें सामने आईं थीं। दंगाइयों ने ईंट, पत्थर और काँच की बोतल बरसाते हुए हिंसक घटनाओं को अंजाम दिया था। स्थिति से निपटने के लिए पुलिस को आँसू गैस के गोले भी छोड़ने पड़े थे।

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ऑपइंडिया स्टाफ़
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कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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