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राजस्थान में महिला अधिकारी ने 2 दिन के भीतर खरीद लिए 26 फ्लैट, 15 अपने और 11 बेटे के नाम पर लिखवाई: बिना लोन ही करा ली सारी रजिस्ट्री

रिपोर्ट्स के मुताबिक, ज्योति भारद्वाज ने जिन 26 फ्लैट की रजिस्ट्री कराई है, उनमें से 15 फ्लैट उन्होंने खुद के नाम दर्ज कराया है। इसके अलावा 11 फ्लैट उनके बेटे रोशन वशिष्ठ के नाम पर दर्ज हुए हैं। इनकी कीमत 4 करोड़ 71 लाख है। ये रजिस्ट्री 4-5 मार्च 2022 यानी पिछले साल कराई गई है।

राजस्थान सचिवालय में तैनात महिला अधिकारी ज्योति भारद्वाज ने गजब ही कर डाला है। दो दिन के अंदर उन्होंने 26 फ्लैट की रजिस्ट्री करवाई। इन फ्लैटों की कीमत करीब 5 करोड़ रुपए बताई जा रही है।

महिला अधिकारी ने इनमें से 15 फ्लैट की रजिस्ट्री अपने और 11 फ्लैट की रजिस्ट्री अपने बेटे रोहन वशिष्ठ के नाम पर करवाई। इसके लिए 30 लाख रुपए से अधिक का स्टांप ड्यूटी चुकाया। इस भुगतान के लिए उन्होंने लोन तक लेने की जरूरत नहीं पड़ी।

मामला सामने आने के बाद राजस्थान सरकार ने उनके खिलाफ आय से अधिक धन के मामले में जाँच शुरू कर दी है। ज्योति भारद्वाज जयपुर सचिवालय में तैनात हैं। अभी राजस्थान सरकार में सचिव स्तर पर हैं और कार्मिक विभाग के स्टोर में सामान खरीदारी करने के मामलों की प्रभारी हैं। वे अलवर में लंबे समय तक जिला कोषाधिकारी और मत्स्य विश्वविद्यालय में वित्तीय नियंत्रक के पद पर भी तैनात रह चुकी हैं।

चेक से खरीदी गई प्रॉपर्टी, बिल्डर परेशान

खास बात ये है कि जिस बिल्डर से ये फ्लैट खरीदे गए हैं, अब वो खुद के साथ धोखाधड़ी का आरोप लगा रहा है। बिल्डर का कहना है कि उसके साथ खेल हो गया है। ज्योति भारद्वाज ने करीब 1-1.5 साल में ये सभी प्रॉपर्टी ‘बनी बिल्डटेक’ नाम की कंपनी से खरीदी है। इस कंपनी का ऑफिस जयपुर के मनसरोवर लिंक रोड पर स्थित जेडीए मार्केट में है। कंपनी के डायरेक्टर का कहना है कि ये प्रॉपर्टी चेक से खरीदी गई, लेकिन डेढ़ सालों से कोई भी चेक कैश नहीं हो पाया है। इस मामले में उन्होंने कोर्ट में केस किया है।

कुल 15 फ्लैट अपने नाम, बेटे के नाम किया 11 फ्लैट

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, ज्योति भारद्वाज ने जिन 26 फ्लैट की रजिस्ट्री कराई है, उनमें से 15 फ्लैट उन्होंने खुद के नाम दर्ज कराया है। इसके अलावा 11 फ्लैट उनके बेटे रोशन वशिष्ठ के नाम पर दर्ज हुए हैं। इनकी कीमत 4 करोड़ 71 लाख है। ये रजिस्ट्री 4-5 मार्च 2022 यानी पिछले साल कराई गई है। हालाँकि ज्योति भारद्वाज का कहना है कि उनके पति अनुराग और बिल्डर के साथ लेन-देन चल रहा था। उसी लेन-देन का हिस्सा ये प्रॉपर्टी हैं। इस बारे में सही जानकारी उनके पति ही दे पाएँगे।

अधिकारियों द्वारा घोषित की जाने वाली प्रॉपर्टी में नहीं जिक्र

बता दें कि सरकारी कर्मचारियों को हर साल अपनी प्रॉपर्टी की जानकारी सरकार को देनी होती है। लेकिन इस मामले में ज्योति भारद्वाज ने सिर्फ तीन फ्लैट्स की जानकारी सरकार को दी है। उनमें से दो को उन्होंने अपने नाम पर दिखाया है। एक पति अरविंद के नाम से दिखाया है जिसका लोन लिया गया है। अब राजस्थान सरकार ने इस मामले की जाँच शुरू कर दी है।

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ऑपइंडिया स्टाफ़
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कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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