कॉन्ग्रेस नेता राहुल गाँधी वोटर लिस्ट रिवीजन (SIR) के खिलाफ ‘वोटर अधिकार यात्रा’ के तहत मंगलवार (19 अगस्त 2025) को गयाजी से नवादा पहुँचे। इस दौरान राहुल गाँधी की गाड़ी के नीचे सुरक्षा में तैनात एक पुलिसकर्मी आ गया।
जानकारी के मुताबिक, वहाँ मौजूद अन्य सुरक्षाकर्मियों ने खींचकर पुलिसकर्मी को बाहर निकाल लिया, जिससे उसकी जान बच पाई। राहुल गाँधी की इस यात्रा को लेकर पहले भी अनियमितताओं के आरोप लग चुके हैं।
इससे पहले स्वराज पोस्ट नामक चैनल के एडिटर इन चीफ और बिहार के पत्रकार कन्हैया भेलारी ने एक्स पर ट्वीट करते हुए तमाम लापरवाहियों का खुलासा किया था। सोमवार (18 अगस्त) को अपनी एक पोस्ट में उन्होंने बताया कि कैसे राहुल गाँधी की इस यात्रा में मीडियाकर्मियों तक के लिए कोई व्यवस्था नहीं है, उल्टे उन्हें भी अराजकता का सामना करना पड़ रहा है।
बीते कल सासाराम में वोटर अधिकार यात्रा के लिए चयनित स्थल पर बाहर से गए मीडियाकर्मियों को घोर कुब्यवस्था व आराजकता का सामना करना पड़ा. एक पत्रकार बेहोश होकर जमीन पर गिर पड़े. दिल्ली से आईं कुछ महिला पत्रकारों ने मारे से कहा कि अब वो कभी किसी खबर को क़वर करने बिहार नहीं आयेंगी.…
उन्होंने लिखा, “सासाराम में वोटर अधिकार यात्रा के लिए चयनित स्थल पर बाहर से गए मीडियाकर्मियों को घोर कुब्यवस्था व आराजकता का सामना करना पड़ा।”
उन्होंने आगे लिखा, “एक पत्रकार बेहोश होकर जमीन पर गिर पड़े। दिल्ली से आईं कुछ महिला पत्रकारों ने कहा कि अब वो कभी किसी खबर को कवर करने बिहार नहीं आयेंगी। उनके साथ बदतमीजी की गई है। दरअसल मीडिया की देखभाल की जिम्मेदारी कॉन्ग्रेस को दी गई थी जबकि बाकी सबकुछ आरजेडी के जिम्मे था।”
बता दें कि मीडियाकर्मियों के साथ अमानवीयता की एक और घटना का खुलासा लालू यादव के बड़े बेटे तेज प्रताप यादव ने भी किया था।
तेज प्रताप ने एक्स पर पोस्ट करते हुए लिखा था, “मुझे समझ नहीं आ रहा है कि राहुल गाँधी और तेजस्वी यादव लोकतंत्र बचाने के लिए निकले हैं या फिर लोकतंत्र को तार-तार करने निकले हैं। क्योंकि जिस प्रकार से नबीनगर विधानसभा से विधायक विजय कुमार सिंह उर्फ डब्लू सिंह के गाड़ी चालक को और उसके साथ एक मीडिया पत्रकार भाई को जयचंद द्वारा मारा-पीटा और गाली गलौज किया गया है, यह बेहद ही गलत और शर्मनाक है।”
मुझे समझ नहीं आ रहा है कि राहुल गांधी और तेजस्वी यादव लोकतंत्र बचाने के लिए निकले हैं या फिर लोकतंत्र को ताड़ ताड़ करने निकले हैं।
क्योंकि जिस प्रकार से नबीनगर विधानसभा से विधायक विजय कुमार सिंह उर्फ डब्लू सिंह के गाड़ी चालक को और उसके साथ एक मीडिया पत्रकार भाई को जयचंद द्वारा… pic.twitter.com/NepQhDHkgF
उन्होंने आगे लिखा, “मैं इसकी कड़ी आलोचना करता हूँ। मैं तेजस्वी को कहना चाहता हूँ अभी भी समय है। अपने आस पास के जयचंदो से सावधान हो जाओ नहीं तो चुनाव में बहुत बुरा परिणाम देखने को मिलेगा। अब आप कितने समझदार हैं यह चुनाव परिणाम तय कर देगा।”
गौरतलब है कि तेज प्रताप को उनके पिता लालू यादव घर और पार्टी दोनों से निकाल चुके हैं। उ
बता दें कि कॉन्ग्रेस नेता राहुल गाँधी बिहार में 16 दिनों की ‘वोटर अधिकार यात्रा’ कर रहे हैं। इसकी शुरुआत उन्होंने रविवार (17 अगस्त 2025) को सासाराम से की थी। सबसे बड़ी बात ये है कि सासाराम के लोगों ने ही इस यात्रा के मकसद पर सवाल उठाए थे।
कॉन्ग्रेस और RJD को लेकर सासाराम के लोगों ने कहा था कि वे रोहिंग्या और बांग्लादेशी घुसपैठियों को बचाने के लिए, यह ढोंग कर रहे हैं। जहाँ एक तरफ राहुल गाँधी SIR के खिलाफ यह यात्रा निकाल रहें हैं, वहीं दूसरी तरफ बिहार के लोगों का कहना है कि चुनाव आयोग ने SIR की प्रक्रिया के तहत जो कुछ भी किया है वो सही है।
यात्रा को लेकर एक व्यक्ति ने कहा, “नाम देश में किसी का नहीं कटा है। कॉन्ग्रेस दोमुँही बातें करती है। कर्नाटक के मुद्दे को लेकर इसने पूरे देश में हंगामा मचाया कि वोटर लिस्ट गलत है। वहाँ चुनाव जीती भी। लेकिन जब यहाँ SIR के तहत चुनाव आयोग पूरी तरह लगा कि मतदाता सूची को शुद्ध कर दिया जाए, तो कॉन्ग्रेस ने फिर ड्रामा शुरू कर दिया है।”
वहीं एक शख्स ने राहुल गाँधी के आरोपों पर कहा था, “जिसका खानदान ही चोर हो और अगर वो दूसरे को चोर बोले तो यह ठीक नहीं है। सरदार पटेल जी को प्रधानमंत्री बनना था लेकिन जवाहरलाल नेहरू बन गए और तभी से कॉन्ग्रेस वोट चोरी कर रही है।”
एक अन्य शख्स ने बातचीत के दौरान कहा, “कॉन्ग्रेस की वोट चोरी की परंपरा है। सबसे पहली वोट चोरी 1975 में हुई, जब इंदिरा गाँधी ने वोट चोरी कर चुनाव जीता, कोर्ट ने उनका चुनाव रद्द किया और देश को आपातकाल जैसा गंभीर परिणाम भुगतना पड़ा।”
लंबे समय तक आपसी तनातनी के बाद भारत और चीन ने अपने द्विपक्षीय संबंधों को बेहतर बनाने की दिशा में कोशिशें शुरू कर दी हैं। इसकी वजह अमेरिका द्वारा दोनों देशों पर लगाया गया नया टैरिफ यानी आयात शुल्क है। 31 अगस्त से 1 सितंबर 2025 के बीच चीन के तियानजिन में शंघाई सहयोग संगठन (SCO) शिखर सम्मेलन होने जा रहा है। इससे पहले तनाव कम करने के लिए दोनों देशों के विदेश मंत्री मिले।
#WATCH | Delhi: In his meeting with Chinese Foreign Minister Wang Yi, EAM Dr S Jaishankar says, "Having seen a difficult period in our relationship, our two nations now seek to move ahead. This requires a candid and constructive approach from both sides. In that endeavour, we… pic.twitter.com/LOmJNjSrVq
विदेश मंत्री एस. जयशंकर और चीनी विदेश मंत्री वांग यी ने सोमवार (18 अगस्त 2025) को दिल्ली में हुए इस मुलाकात के दौरान राजनयिक संबंधों को सुधारने के साथ-साथ व्यापार, बॉर्डर और आतंकवाद सहित कई मुद्दों पर चर्चा हुई।
इस मौके पर विदेश मंत्री जयशंकर ने द्विपक्षीय संबंधों को बेहतर बनाने के दोनों देशों के प्रयासों का स्वागत किया। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि दोनों देशों के बीच मतभेद विवाद नहीं बनने चाहिए। दोनों देशों के बीच संबंध आपसी सम्मान पर आधारित होने चाहिए।
हैदराबाद हाउस में हुई बैठक में विदेश मंत्री जयशंकर ने कहा, “हमारे संबंधों में एक कठिन दौर देखने के बाद, अब दोनों देश आगे बढ़ना चाहते हैं। इसके लिए दोनों पक्षों की ओर से एक स्पष्ट और रचनात्मक दृष्टिकोण की आवश्यकता है। इस प्रयास में, हमें तीन परस्पर सिद्धांतों – परस्पर सम्मान, परस्पर संवेदनशीलता और परस्पर हित का ध्यान रखना चाहिए। मतभेदों को विवाद या संघर्ष में नहीं बदलने देना चाहिए..”
चीनी विदेश मंत्री वांग यी ने बैठक में सीमा पर शांति बनाए रखने पर जोर दिया। उन्होंने कैलाश मानसरोवर यात्रा के लिए मार्ग खोलने को लेकर चीनी कोशिश का भी जिक्र किया। चीनी विदेश मंत्री राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल के निमंत्रण पर भारत की दो दिवसीय यात्रा पर आए हैं। उन्होंने कहा, “हमने सीमावर्ती क्षेत्रों में शांति और सौहार्द बनाए रखा है और तिब्बत स्वायत्त क्षेत्र में कैलाश पर्वत और कैलाश मानसरोवर की भारतीय तीर्थयात्रा फिर से शुरू की है।”
चीनी विदेश मंत्री यी ने कहा, “हमने हस्तक्षेप को दूर करने, सहयोग बढ़ाने और चीन-भारत संबंधों में सुधार के साथ- साथ विकास की गति को और मज़बूत करने पर विश्वास जताया। हम एक-दूसरे की सफलता में योगदान देने के अलावा एशिया और पूरी दुनिया को स्थायित्व प्रदान करने की दिशा में आगे बढ़ें…” यी मंगलवार (19 अगस्त) को प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल से मुलाकात करेंगे।
#WATCH | In his meeting with EAM Dr S Jaishankar, Chinese Foreign Minister Wang Yi says, "…We maintained peace and tranquillity in the border areas and resumed the Indian pilgrimage to Mount Kailash and Kailash Manasarovar in the Tibet Autonomous Region. We shared confidence to… pic.twitter.com/rorLRCmTeD
चीन करेगा भारत की रेयर खनिज, उर्वरक की चिंता का समाधान
रिपोर्टों के अनुसार, चीनी विदेश मंत्री वांग यी ने विदेश मंत्री जयशंकर को आश्वासन दिया कि चीन दुर्लभ खनिज, उर्वरक और सुरंग खोदने वाली मशीनों से संबंधित भारत की चिंताओं का समाधान कर रहा है। इस वर्ष अप्रैल में, चीन ने राष्ट्रीय सुरक्षा का हवाला देते हुए निर्यातकों के लिए लाइसेंस अनिवार्य कर दिया है। साथ ही दुर्लभ खनिजों के निर्यात पर प्रतिबंध लगा दिया था। रेयर खनिज इलेक्ट्रिक और पेट्रोल वाहनों, रक्षा उपकरणों और ऊर्जा से जुड़े उपकरणों में इस्तेमाल होता है।
ट्रंप का ‘टैरिफ बम’ ला रहा भारत-चीन को करीब
वार्ता के दौरान विदेश मंत्री जयशंकर ने यी का ध्यान गलवान घाटी में हुए गतिरोध की ओर भी आकर्षित किया। जयशंकर ने कहा, “हमारे संबंधों में सकारात्मकता का आधार सीमा पर संयुक्त रूप से शांति और सौहार्द बनाए रखने की क्षमता है। यह भी आवश्यक है कि तनाव कम करने की प्रक्रिया आगे बढ़े।”
China promises to address three key concerns of India. Foreign Minister Wang Yi assured EAM that China is addressing India’s needs of fertilisers, rare earths and tunnel boring machines: Sources https://t.co/liCzB57nz2
ये घटना अप्रैल-मई 2020 की है, जब गलवान घाटी में वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) पर दोनों देशों के जवानों के बीच हिंसक झड़प हुई थी। इस झड़प में कमांडिंग ऑफिसर समेत कम से कम 20 भारतीय सैनिक बलिदान हो गए। भारत सरकार के अनुमान के मुताबिक चीन के 43-45 सैनिक हताहत हुए।
हालाँकि रूस-यूक्रेन युद्ध और अमेरिकी टैरिफ से पैदा हुई राजनीतिक चुनौतियों का सामना करते हुए, दोनों देशों ने अपने द्विपक्षीय संबंधों को बेहतर बनाने और क्षेत्रीय स्थिरता सुनिश्चित करने के प्रयासों को पुनर्जीवित किया है।
मालेगाँव ब्लास्ट मामले में 17 साल बाद आए कोर्ट के फैसले ने ‘भगवा आतंकवाद’ की थ्योरी को पूरी तरह से खारिज किया। 31 जुलाई 2025 को स्पेशल NIA कोर्ट ने इस केस के सभी सात आरोपितों को बाइज्जत बरी किया, जिनमें पूर्व बीजेपी सांसद साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर, लेफ्टिनेंट कर्नल प्रसाद पुरोहित, रिटायर्ड मेजर रमेश उपाध्याय और समीर कुलकर्णी शामिल थे। मालेगाँव ब्लास्ट के सात आरोपितों में रमेश और समीर कुलकर्णी ने बताया कि कैसे उनकों ATS ने पहले झूठे केस में फँसाया और फिर कुछ हिंदू नेताओं के नाम लेने के लिए प्राइवेट पार्ट में करंट, जबरन मांस खिलाना, जनेऊ- धार्मिक ग्रंथों को पैरों से कुचलना और पत्नी-बेटी को नंगा करने और रेप की धमकी देकर प्रताड़ित किया गया।
मालेगाँव ब्लास्ट केस में आरोपित रहीं साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर को भी भयानक यातनाओं से गुजरना पड़ा। उन्होंने कई बार सार्वजनिक रूप से अपने दर्द को साझा किया है। उनके मुताबिक, हिरासत में उन्हें पुरुष कैदियों के साथ रखकर पोर्न वीडियो दिखाए जाते थे और भद्दे सवाल किए जाते थे। उन्हें चमड़े की बेल्ट से पीटा जाता था, जिससे उनकी रीढ़ की हड्डी में गंभीर समस्या आ गई थी। इन यातनाओं के कारण उन्हें कैंसर और न्यूरो संबंधी बीमारियाँ हो गईं और उनकी हालत ऐसी हो गई थी कि उन्हें वेंटिलेटर पर रखना पड़ा।
रमेश उपाध्याय और समीर कुलकर्णी की दर्दनाक कहानी
दैनिक भास्कर की रिपोर्ट के अनुसार, मालेगाँव ब्लास्ट के आरोपित रिटायर्ड मेजर रमेश उपाध्याय ने बताया कि कैसे उन्हें महाराष्ट्र ATS ने बिना किसी वजह के उठाया और गैरकानूनी हिरासत में रखा। उनके अनुसार, उन्हें बुरी तरह पीटा गया, प्राइवेट पार्ट्स पर बिजली के झटके दिए गए और उनके पैरों पर लकड़ी रखकर दो पुलिसवाले खड़े हो जाते थे। उन्हें मानसिक रूप से प्रताड़ित करने के लिए उनकी पत्नी को नंगा करने और बेटी के साथ रेप करने की धमकी दी गई। ATS उन पर दबाव डाल रही थी कि वे योगी आदित्यनाथ, प्रवीण तोगड़िया, इंद्रेश और श्री श्री रविशंकर जैसे हिंदू नेताओं का नाम लें और कहें कि इन्हीं लोगों ने उन्हें ब्लास्ट करने के लिए कहा था।
इस मामले में एक अन्य आरोपित समीर कुलकर्णी ने भी ऐसी ही आपबीती सुनाई। उन्होंने बताया कि पुलिसवाले उन्हें रोज 20-20 घंटे तक पीटते थे, जिससे उनके तीन दाँत टूट गए। शाकाहारी होने के बावजूद, उनके मुँह में जबरन माँस के टुकड़े ठूँसे गए। समीर ने बताया कि ATS अधिकारियों ने उनके धार्मिक ग्रंथ जैसे गीता और हनुमान चालीसा को उनके सामने फाड़ा और जनेऊ को उतरवाकर पैरों से कुचला। इन अत्याचारों का मकसद उनसे मनचाही गवाही उगलवाना था।
कॉन्ग्रेस और ‘हिंदू आतंकवाद’ की साजिश
यह स्पष्ट है कि यह पूरा मामला तत्कालीन कॉन्ग्रेस सरकार की एक सुनियोजित साजिश थी। ब्यूरोक्रेट आरवीएस मणि ने अपनी किताब ‘हिंदू टेरर’ में इसका खुलासा किया है। गवाहों और आरोपितों के बयान से यह बात सामने आई कि कॉन्ग्रेस की तत्कालीन सरकार के इशारे पर एजेंसियों ने हिंदू नेताओं को फँसाने के लिए लोगों पर दबाव बनाया।
कर्नल पुरोहित ने कोर्ट को बताया था कि कॉन्ग्रेस सरकार ने तत्कालीन सांसद योगी आदित्यनाथ और RSS प्रमुख मोहन भागवत को इस मामले में फँसाने की कोशिश की थी। यह सब जनता का ध्यान कॉमनवेल्थ गेम्स जैसे घोटालों से हटाने के लिए किया गया था।
कोर्ट का फैसला और निष्कर्ष
गौरतलब है कि मुंबई की स्पेशल NIA कोर्ट के जज एके लाहोटी ने अपने 500 से ज्यादा पेज के फैसले में साफ कहा कि अभियोजन पक्ष कोई ठोस सबूत पेश करने में नाकाम रहा। उन्होंने कहा, “आतंकवाद का कोई धर्म नहीं होता, लेकिन दोषसिद्धि नैतिक आधार पर नहीं, बल्कि ठोस सबूतों पर होनी चाहिए।” इस फैसले ने पिछले 17 वर्षों से चल रही ‘भगवा आतंकवाद’ की थ्योरी को पूरी तरह से नकार दिया।
कोर्ट ने विक्टिम्स के लिए मुआवजे का भी ऐलान किया। इस पूरे मामले से यह साबित होता है कि एक राजनीतिक साजिश के तहत निर्दोष लोगों को प्रताड़ित किया गया, जिनके जीवन के महत्वपूर्ण साल जेल में यातनाओं के बीच गुजरे। इस मामले ने भारतीय न्याय प्रणाली में एक नई मिसाल पेश की है, जहाँ सच्चाई और न्याय की जीत हुई है।
बांग्लादेश के चटगाँव जिले के सीताकुंडा में स्थित चंद्रनाथ मंदिर और चंद्रनाथ पहाड़ी एक बार फिर कब्जे और अपवित्र करने के खतरे का सामना कर रहे हैं। यह पवित्र स्थान हिंदू धर्म के 51 शक्तिपीठों में से एक है और यहाँ का चंद्रनाथ मंदिर भगवान शिव को समर्पित है। इस मंदिर का निर्माण 8वीं सदी में हिंदू शासक चंद्रसेन ने करवाया था।
अब, कुछ इस्लामी कट्टरपंथी इस तीर्थस्थल को जबरन ‘पर्यटन स्थल’ घोषित कराकर वहाँ मस्जिद और मुस्लिम प्रार्थना स्थल बनाने की कोशिश कर रहे हैं। यह अभियान दिसंबर 2023 से ही चल रहा है, लेकिन शनिवार (16 अगस्त 2025) को इसे एक नई गति दी गई। ‘SKM Shoe Shop’ के चेयरमैन और इस्लामी प्रचारक एम एम सैफुल इस्लाम ने 16 अगस्त को फेसबुक पर दावा किया कि चंद्रनाथ पहाड़ी पर मस्जिद का निर्माण ‘90% तय’ हो चुका है।
सैफुल ने यह भी लिखा कि उन्हें और उनके साथी को चोटी पर नमाज पढ़ने की इजाजत नहीं दी गई। उन्होंने दुःख जताते हुए लिखा, “93% मुस्लिम आबादी वाले देश में चंद्रनाथ पहाड़ी पर दो मंदिर हो सकते हैं, लेकिन एक मस्जिद नहीं? क्या हम मुस्लिम इस देश में किराएदार हैं?”
इसके बाद उन्होंने देवबंदी कट्टरपंथी हारून इजहार से मुलाकात की, जो पहले हिफाजत-ए-इस्लाम से जुड़ा रहा है। उन्होंने भी फेसबुक पर पोस्ट कर कहा, “चंद्रनाथ पहाड़ी पर मस्जिद बनाने की बातचीत चल रही है, सभी मुस्लिम भाई इस पोस्ट को शेयर करें ताकि सभी को इसके बारे में पता चले और वे मिशन की कामयाबी के लिए दुआ करें।”
सैफुल इस्लाम ने अपने पोस्ट में साफ तौर पर कहा, “मैं साफ-साफ कहना चाहता हूँ। चूँकि आपने मुझे और मेरे दोस्त को नमाज पढ़ने की इजाजत नहीं दी, इसलिए आज या कल, मैं सीताकुंड पहाड़ी पर नमाज के लिए एक अलग जगह जरूर बनवाऊँगा। इंशाअल्लाह।”
उसने हिंदू समुदाय को ‘मालौन’ (एक अपमानजनक शब्द) कहकर अपमानित किया, जिसके बाद उसका फेसबुक अकाउंट, जिस पर 52,000 फॉलोअर्स थे, सस्पेंड कर दिया गया।
हालाँकि उसने तुरंत एक दूसरा अकाउंट ‘Mufti Saiful Islam’ से फिर से पोस्ट करना शुरू कर दिया और हिंदुओं के खिलाफ जहर उगलता रहा।
नवंबर 2024 से बांग्लादेश में कुछ इस्लामी कट्टरपंथी ‘Total Malaun Death’ (TMD) नामक अभियान चला रहे हैं, जिसमें खुलेआम सनातन धर्मियों के सफाए की बात की जा रही है।
जुलाई 2025 में, एक चरमपंथी मोहम्मद अबीर ने हिंदू व्यापारी भजन कुमार गुहा की निर्मम हत्या कर दी और सोशल मीडिया पर उसे ‘मालौन’ कहकर हत्या को जायज ठहराया।
इस विवाद के बाद हारून इजहार, जिसे 2021 में गिरफ्तार किया गया था, उसने सफाई देते हुए चंद्रनाथ पहाड़ी को ‘कथित हिंदू तीर्थस्थल’ कहा और दावा किया कि मस्जिद का निर्माण मंदिर के पास नहीं, बल्कि वहाँ होगा जहाँ मुस्लिम ‘पर्यटक’ बनकर जाते हैं। यह बयान स्पष्ट रूप से हिंदू धार्मिक स्थलों की धार्मिक पहचान को नकारने की कोशिश है।
उसने कहा कि एक मुस्लिम होने के नाते ‘अवैध भूमि’ पर मस्जिदों और प्रार्थना स्थलों के निर्माण की वकालत करना उसका अधिकार है। देवबंदी चरमपंथी ने तब आरोप लगाया कि उन्होंने चटगाँव में हिंदुओं की भूमि को अतिक्रमण से मुक्त कराने में मदद की थी, ताकि उनके इस दावे को बल मिले कि मस्जिद निर्माण का उद्देश्य चंद्रनाथ पहाड़ी पर कब्जा करना नहीं है।
उसने आगे दावा किया कि यह पूरा विवाद भारत में हिंदू समुदाय के राजनीतिक आकाओं और ‘सांप्रदायिक ताकतों’ की साजिश है। यह उल्लेख करना आवश्यक है कि हारुन इजहार लालखान बाजार मदरसा में ग्रेनेड हमले सहित 11 मामलों में वांछित है, जिसे 2013 में हिफाजत-ए-इस्लाम बांग्लादेश द्वारा अंजाम दिया गया था।
2023 से ही चंद्रनाथ पहाड़ी पर कब्जा करने की फिराक में हैं इस्लामी कट्टरपंथी
हिंदू श्रद्धालुओं के लिए यह जगह धार्मिक आस्था का प्रतीक है, लेकिन अब इसे ट्रेकिंग स्पॉट और इस्लामी प्रचार स्थल में बदलने की कोशिशें हो रही हैं।
दिसंबर 2023 में रेहान रियाद नाम के एक इस्लामी कट्टरपंथी ने चंद्रनाथ मंदिर क्षेत्र में बीफ बारबेक्यू पार्टी आयोजित की, जिसे कई अन्य कट्टरपंथियों का समर्थन मिला। यह हिंदू धार्मिक स्थल का सीधा अपमान था। स्थानीय हिंदू समाज ने इस हरकत के खिलाफ पर्चे बाँटे और मंदिर की रक्षा की अपील की।
Bangladeshi extremists r chanting Allahu Akbar at the Hindu pilgrimage site Chandranath Temple.The Temple is famous among Hindus as Shakti Peeth.But the Jihadists r trying to build a mosque by occupying the land.We sought help from the Indian Embassy but got no response.@ihcdhakapic.twitter.com/GftvirEfsY
लेकिन जब उन्होंने विरोध किया, तो उन पर हमला कर दिया गया। मानवाधिकार कार्यकर्ता और निर्वासित बांग्लादेशी ब्लॉगर असद नूर के मुताबिक, मुस्लिम हमलावरों ने हिंदू देवी-देवताओं को पूजा करने वालों के पीछे धकेलने की धमकी दी।
जब हिंदुओं ने इसका विरोध किया, तो धारदार हथियारों से लैस उन्हीं चरमपंथियों के गुट ने उन पर हमला कर दिया। खबरों के मुताबिक, इस हमले में कुल 10 हिंदू गंभीर रूप से घायल हुए।
इसके बाद सोशल मीडिया पर वीडियो और तस्वीरें सामने आईं, जिनमें इस्लामी कट्टरपंथी चंद्रनाथ मंदिर क्षेत्र में अजान दे रहे थे। ‘टाइगर्स तामीम’ नाम का एक व्यक्ति मंदिर की दीवार पर पैर रखे बैठा दिखा। मोहम्मद शिब्बीर बिन नजीर नामक एक अन्य व्यक्ति ने फेसबुक पोस्ट में लिखा, “इंशाअल्लाह, यहाँ इस्लाम का झंडा जल्द लहराएगा।”
इनामुल हक नाम के एक और कट्टरपंथी ने लिखा, “मैं वहाँ दो बार गया हूँ, मस्जिद की कमी महसूस हुई। वहाँ अभी भी ‘शिर्क’ (मूर्तिपूजा) हो रही है।”
They want to occupy the site of Chandranath Temple and build Babri Masjid there. All of them are students of the Hathazari Madrasa, famous for producing Wahhabi Terrorist . pic.twitter.com/0V15XIyhiH
फरवरी 2024 में कुछ वीडियो सामने आए, जिनमें कई मुस्लिम पुरुष टोपी पहनकर मंदिर क्षेत्र में नारे लगाते और इधर-उधर घूमते नजर आए। बांग्लादेश हिंदू-बौद्ध-ईसाई एकता परिषद के एक अधिकारी ने स्वराज्य को बताया, “अप्रैल 2023 से कुछ मौलवियों ने हर शुक्रवार को मंदिर के पास नमाज का आयोजन शुरू कर दिया है और हमने सुना है कि पहाड़ी पर एक मस्जिद बनाने की योजना है। यह झूठी कहानी भी फैलाई जा रही है कि पहाड़ी के ऊपर एक मस्जिद थी और उसे हिंदुओं ने मंदिर बनाने के लिए तोड़ दिया।”
पिछले साल हिंदू समाज की ओर से चंद्रनाथ मंदिर के संरक्षण का आह्वान करने वाला एक पोस्टर सोशल मीडिया पर वायरल हुआ था। इसमें लिखा था, “सबधन, राहुर कोबोले चंद्रनाथ धाम” यानी सावधान, राहु के कब्जे में चंद्रनाथ धाम।” इससे साफ है कि हिंदू समाज मंदिर की सुरक्षा को लेकर चिंतित है।
यह मंदिर नागर शैली में बना है, जो भारतवर्ष के कई प्राचीन मंदिरों में पाई जाती है। इसमें एक शिखर (ऊँचा बुर्ज), आमलक (गोलाकार ढाँचा) और कलश होता है।
कट्टरपंथियों की यह मुहिम लगातार तेज हो रही है और ऐसा कहा जा रहा है कि मोहम्मद यूनुस की सरकार की नर्म नीति की वजह से इन्हें बढ़ावा मिल रहा है। इससे भविष्य में चंद्रनाथ मंदिर पर खतरा और भी बढ़ सकता है।
यह रिपोर्ट मूल रूप से अंग्रेजी में दिबाकर दत्ता ने लिखी है। मूल रिपोर्ट पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करें। इसका अनुवाद सौम्या सिंह ने किया है।
सीएसडीएस के संजय कुमार ने महाराष्ट्र चुनाव को लेकर शेयर किए फर्जी डाटा को डिलीट कर माफी माँगी है। इसी फर्जी डाटा के दम पर राहुल गाँधी के ‘वोट चोरी’ के कैंपेन को कॉन्ग्रेस आगे बढ़ा रही थी। संजय कुमार ने पहले कहा था कि चुनाव आयोग को राहुल गाँधी के आरोपों का जवाब देना चाहिए। बाद में जब मुख्य चुनाव आयुक्त ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर सभी आरोपों के सिलसिलेवार जवाब दिए तो संजय कुमार ने एक लेख में लिखा – चुनाव आयोग ने अपने पैर पर कुल्हाड़ी मार ली है।
संजय कुमार के फर्जी डाटा के आधार पर कॉन्ग्रेस प्रवक्ता पवन खेड़ा ने 18 अगस्त 2025 को X पर एक ग्राफिक शेयर कर चुनाव आयोग पर सवाल उठाए। उन्होंने दावा किया कि 2024 के लोकसभा और महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव के बीच छह महीनों में रामटेक और देओलाली जैसे क्षेत्रों से करीब 40% वोटर हटा दिए गए। वहीं, नासिक वेस्ट और हिंगना में करीब 45% वोटर बढ़ गए। चुनाव आयोग पर तंज कसते हुए उन्होंने लिखा, “अब ये कहेंगे कि 2 और 2 जोड़ने से 420 होता है।” इस डेटा का स्रोत लोकनीति-CSDS था।
पवन खेड़ा का ट्वीट
आज हम एक ऐसे घिनौने खेल की हर परत को उधेड़कर सामने लाने जा रहे हैं, जिसने भारत की लोकतांत्रिक व्यवस्था पर गहरा आघात किया है। सीएसडीएस (सेंटर फॉर द स्टडी ऑफ डेवलपिंग सोसाइटीज) के संजय कुमार ने अपनी चालाकी, फर्जी डेटा और साजिशों के जरिए न सिर्फ चुनाव आयोग को बदनाम करने की कोशिश की, बल्कि कॉन्ग्रेस के लिए एक सुनियोजित हिट जॉब भी अंजाम दिया।
संजय कुमार नाम का यह शख्स खुद को प्रोफेसर और रिसर्चर कहता है, असल में वो एक प्यादे की तरह काम कर रहा है, जो विदेशी फंडिंग और राजनीतिक एजेंडा के पीछे छिपा हुआ है। दरअसल, उसने फर्जी डाटा शेयर कर न सिर्फ आम लोगों में भ्रम फैलाया, बल्कि लगातार भारत की सर्वोच्च चुनावी संस्था चुनाव आयोग को भी निशाना बनाया और जब उसका खेल पकड़ में आ गया, तो चुपचाप अपने फर्जी डाटा को डिलीट कर माफी माँग ली। आइए, समझते हैं ये पूरा खेल…
संजय कुमार के फर्जीवाड़े का खेल
इस साजिश की शुरुआत 11 अगस्त 2025 को हुई, जब संजय कुमार ने ट्विटर पर एक भड़काऊ बयान फेंका। उसने दावा किया कि महाराष्ट्र चुनावों को लेकर चुनाव आयोग को सफाई देनी चाहिए, बिना किसी ठोस सबूत के सिर्फ आरोपों की बौछार कर दी। यह बस शुरुआत थी। इसके बाद उसने सीएनबीसी आवाज जैसे बड़े चैनल पर जाकर अपनी बात को और हवा दी। उसने कहा, “जो कुछ भी हो रहा है, वो बहुत दुर्भाग्यपूर्ण है… चुनाव आयोग और विपक्ष के बीच बातचीत की कड़ी भी टूट गई है… चुनाव आयोग को आगे आकर सफाई देने की कोशिश करनी चाहिए, लेकिन ऐसा हो नहीं रहा और माहौल बिगड़ता जा रहा है।”
जो कुछ भी हो रहा है वो बहुत दुर्भाग्यपूर्ण है… चुनाव आयोग और विपक्ष के बीच बातचीत की कड़ी भी टूट गई है… चुनाव आयोग को आगे आकर सफाई देने की कोशिश करनी चाहिए… लेकिन ऐसा हो नहीं रहा और माहौल बिगड़ता जा रहा है : संजय कुमार, प्रोफेसर, CSDS#AwaazAdda@vipinbhatt@sanjaycsds… pic.twitter.com/KNVxEbGduv
ये शब्द सुनकर ऐसा लगता है जैसे वो कोई निष्पक्ष विश्लेषक हो, लेकिन असलियत में वो कॉन्ग्रेस के एजेंडे को आगे बढ़ाने का काम कर रहा था। उसकी ये बातें सुनियोजित थीं, ताकि जनता के मन में शक पैदा हो और चुनाव आयोग की साख पर बट्टा लगे। उसने इस दौरान कई टीवी डिबेट्स में भी हिस्सा लिया, जहां उसने बार-बार यही रट लगाई कि चुनाव आयोग पारदर्शिता नहीं बरत रहा, लेकिन उसने कभी भी अपने दावों के पीछे पुख्ता सबूत नहीं दिए।
महाराष्ट्र चुनाव को लेकर जारी किया फर्जी डाटा
17 अगस्त 2025 को संजय कुमार ने ट्विटर पर एक नया हमला बोला। उसने एक स्क्रीनशॉट शेयर किया, जिसमें महाराष्ट्र के चुनावी डेटा का दावा पेश किया गया। इस डेटा में कहा गया कि नासिक वेस्ट में 2024 के लोकसभा चुनाव से विधानसभा चुनाव तक वोटरों की संख्या 47.38% बढ़ी, जबकि हिंगना में 43.08% की वृद्धि हुई।
संजय कुमार का ट्वीट, और विस्फोटक खुलासा करते कॉन्ग्रेसी इकोसिस्टम से जुड़े एक्स हैंडल
ये आँकड़े देखने में तो चौंकाने वाले थे, लेकिन इनकी सच्चाई कहीं और थी। इस फर्जी डेटा को शेयर करते ही सोशल मीडिया पर हंगामा मच गया। विपक्ष खासकर कॉन्ग्रेस ने इस मौके को दोनों हाथों से लपक लिया। कॉन्ग्रेसी नेताओं ने इसे ‘एटम बम’ तक कह डाला, मानो ये कोई बड़ा खुलासा हो। उसने दावा किया कि ये डेटा साबित करता है कि चुनावों में धाँधली हुई और बीजेपी ने सत्ता हथियाई।
लेकिन सच्चाई यह थी कि ये सारा डेटा झूठ का पुलिंदा था, जिसे संजय कुमार ने जानबूझकर गढ़ा था। बाद में पता चला कि उसकी टीम ने 2024 के लोकसभा और विधानसभा चुनावों के डेटा को गलत तरीके से पढ़ा और तुलना की, जिससे ये भ्रामक आँकड़े सामने आए।
ओपिनियन आर्टिकल लिखकर किया चुनाव आयोग पर हमला
संजय कुमार ने अपनी साजिश को और मजबूत करने के लिए नवभारत टाइम्स में एक ओपिनियन आर्टिकल लिखा, जो 18 अगस्त 2025 को प्रकाशित हुआ। लेख का शीर्षक था, “वोट चोरी पर जवाब… चुनाव आयोग खुद ही अपने पैर पर मार रहा कुल्हाड़ी”। इस लेख में उसने 2024 के महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव के बाद उठे विवाद को फिर से हवा दी। उसने राहुल गाँधी के उस दावे को दोहराया, जिसमें कहा गया था कि प्रमुख निर्वाचन क्षेत्रों में फर्जी वोटर जोड़े गए और वोट प्रतिशत बढ़ाकर धांधली की गई। विपक्ष का तर्क था कि मुख्यमंत्री के अपने क्षेत्र में पाँच महीनों में मतदाता सूची में 8% की वृद्धि हुई, और कुछ बूथों पर 20-50% तक की बढ़ोतरी देखी गई। संजय ने इसको आधार बनाकर चुनाव आयोग पर ऊँगली उठाई और उसे ‘असफल’ ठहराने की कोशिश की।
संजय ने लिखा कि चुनाव आयोग को दोनों चुनावों की मतदाता सूचियाँ सार्वजनिक करनी चाहिए थीं, लेकिन उसने ऐसा नहीं किया, जो उसकी नाकामी को दर्शाता है। लेकिन सच्चाई यह है कि चुनाव आयोग ने 24 दिसंबर 2024 को कॉन्ग्रेस को लिखित जवाब दे दिया था, जिसमें इन आरोपों को ‘निराधार’ और ‘बेतुका’ करार दिया गया था। आयोग ने अपनी वेबसाइट पर भी ये जवाब रखा, लेकिन संजय कुमार ने इसे नजरअंदाज कर दिया और अपना एजेंडा चलाया।
माफी का नाटक यानी सच्चाई छिपाने की कोशिश
जब इस फर्जी डेटा की पोल खुलने लगी, तो संजय कुमार को मजबूरी में पीछे हटना पड़ा। उसने अपने ट्वीट को डिलीट कर दिया और 18 अगस्त 2025 की रात एक माफी ट्वीट जारी किया। उसने लिखा, “मैं महाराष्ट्र चुनावों को लेकर किए गए ट्वीट्स के लिए दिल से माफी माँगता हूँ। 2024 के लोकसभा और विधानसभा चुनावों के डेटा की तुलना में गलती हो गई। हमारी डेटा टीम ने इसे गलत पढ़ लिया। ट्वीट हटा दिया गया है और मेरा इरादा किसी तरह की गलत जानकारी फैलाने का नहीं था।”
I sincerely apologize for the tweets posted regarding Maharashtra elections. Error occurred while comparing data of 2024 LS and 2024 AS. The data in row was misread by our Data team. The tweet has since been removed. I had no intention of dispersing any form of misinformation.
लेकिन क्या ये माफी सचमुच दिल से आई? बिल्कुल नहीं! ये तो बस कानूनी कार्रवाई से बचने का एक सस्ता नाटक था। सोशल मीडिया यूजर्स ने तुरंत इसकी आलोचना की और कहा कि ये माफी मजबूरी में दी गई है। कई लोगों का मानना है कि संजय ने जानबूझकर गलत डेटा फैलाया, ताकि कॉन्ग्रेस को फायदा हो और जब पकड़ा गया, तो उसने पीछे हटने का ढोंग किया।
बीजेपी के आईटी सेल प्रमुख अमित मालवीय ने संजय कुमार की इस करतूत पर तीखा प्रहार किया। उन्होंने 19 अगस्त 2025 की सुबह ट्वीट करके लिखा, “माफी माँग ली और संजय कुमार बाहर हो गया। योगेंद्र यादव का यह चेला आखिरी बार कब सही साबित हुआ? हर चुनाव से पहले वो भविष्यवाणी करता है कि बीजेपी हार रही है, लेकिन जब उलटा होता है, तो टीवी पर आकर जस्टिफाई करता है कि बीजेपी कैसे जीती। शर्मनाक!”
उन्होंने आगे लिखा, “इस बार भी ये कोई ईमानदार गलती नहीं थी। कॉन्ग्रेस के फर्जी नैरेटिव को हवा देने के चक्कर में सीएसडीएस ने बिना जाँच के डेटा डाल दिया। ये विश्लेषण नहीं, बल्कि कन्फर्मेशन बायस है। अब वक्त आ गया है कि संजय कुमार और योगेंद्र यादव जैसे लोगों की पवित्र-सी बातों को नमक के एक थैले के साथ लिया जाए।” मालवीय का ये बयान साफ करता है कि संजय कुमार का ट्रैक रिकॉर्ड पहले से ही संदिग्ध रहा है, और ये घटना उसकी पुरानी आदतों का हिस्सा है।
The apology is in, and Sanjay Kumar is out. Incidentally, when was the last time this protégé of Yogendra Yadav ever got anything right? In all his projections in the run-up to every single election, the BJP is supposedly losing—and when the reverse happens, he turns up on TV… https://t.co/QXJvUi6d3B
राहुल गाँधी ने संजय कुमार के फर्जी डेटा पर आँख मूँदकर भरोसा किया और अपनी सारी प्रतिष्ठा दाँव पर लगा दी। वैसे, राहुल की कितनी प्रतिष्ठा बची है, अब इसका अंदाजा भी कोई नहीं लगा पा रहा।
खैर, राहुल ने दावा किया कि ये डेटा साबित करता है कि चुनावों में धाँधली हुई और बीजेपी ने सत्ता हथियाई। लेकिन जब सीएसडीएस ने अपनी गलती मानी, तो राहुल और उसके विदेशी हैंडलर्स का सपना धराशायी हो गया।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि ये सारी साजिश कॉन्ग्रेस के विदेशी समर्थकों के इशारे पर रची गई थी, ताकि भारत की चुनावी प्रणाली को बदनाम किया जा सके। राहुल का ये कदम न सिर्फ उसकी अज्ञानता को दिखाता है, बल्कि उसकी टीम की लापरवाही और जल्दबाजी को भी उजागर करता है।
सीएसडीएस का गंदा खेल, विदेशी फंडिंग का एजेंडा
सीएसडीएस कोई साधारण शोध संस्थान नहीं है। यह एक ऐसी मशीन है, जो विदेशी फंडिंग और राजनीतिक एजेंडा के बल पर देश को अंदर से कमजोर करने का काम कर रही है। फोर्ड फाउंडेशन, गेट्स फाउंडेशन, आईडीआरसी (कनाडा), डीएफआईडी (यूके), नॉराड (नॉर्वे), ह्यूलेट फाउंडेशन और डच एजेंसियों जैसे संगठनों से मिलने वाला पैसा सीएसडीएस को हिंदू समाज को जाति के आधार पर बाँटने और गलत नैरेटिव बनाने में मदद करता है।
इसके लोकनीति प्रोग्राम के तहत हिंदुओं को ओबीसी, ईबीसी, दलित, और सवर्ण में बाँटकर वोटिंग पैटर्न पर डेटा जारी किया जाता है, जो द हिन्दू और इंडियन एक्सप्रेस जैसे अखबारों में बड़े-बड़े शीर्षकों के साथ छपता है। लेकिन मुसलमानों की अंदरूनी जातीय दरारों (जैसे दलित मुसलमान, अशरफ, अज्लाफ, अरज़ल) पर चुप्पी साध ली जाती है।
ये साफ है कि सीएसडीएस का मकसद हिंदू समाज को तोड़ना और कॉन्ग्रेस को फायदा पहुँचाना है। योगेंद्र यादव से लेकर संजय कुमार तक, ये लोग लगातार इस एजेंडे को आगे बढ़ा रहे हैं। ये कोई भूल नहीं, बल्कि एक सोची-समझी साजिश है, जिसका मकसद भारत की एकता को कमजोर करना है।
संजय कुमार की कायरता और कॉन्ग्रेस का पुराना ट्रिक
संजय कुमार ने जो किया, वो कॉन्ग्रेस के पुराने ट्रिक का हिस्सा है। पहले किसी बड़े संस्थान या अखबार से फर्जी खबर चलवाओ, फिर उसे वायरल करो, और जब पकड़े जाओ तो चुपके से माफी माँग लो। संजय ने पहले चुनाव आयोग को बदनाम करने की कोशिश की, फिर जनता को गुमराह किया, और आखिर में माफी मांगकर पल्ला झाड़ लिया। ये शख्स न सिर्फ लोकतंत्र के साथ खिलवाड़ किया, बल्कि देश की जनता के भरोसे को भी ठेस पहुँचाई।
कॉन्ग्रेस का ये पैटर्न पहले भी कई बार देखा गया है – चाहे वो 2019 के चुनावों में फर्जी सर्वे हों या 2024 में गलत दावे, हर बार ये लोग उसी रास्ते पर चलते हैं। संजय कुमार ने बिल्कुल वही कारनामा दोहराया, जो कॉन्ग्रेस के तमाम प्यादों ने पहले किया है।
चुनाव आयोग को उठाने होंगे गंभीर कदम
चुनाव आयोग ने अब तक इस मामले पर कोई सख्त कदम नहीं उठाया, जो हैरानी की बात है। अगर आयोग सचमुच फर्जी खबरों और गलत जानकारी से निपटने के लिए गंभीर है, तो उसे तुरंत संजय कुमार और सीएसडीएस के खिलाफ कार्रवाई करनी चाहिए। ये लोग लोकतंत्र के साथ खिलवाड़ कर रहे हैं और अगर इन्हें बक्शा गया, तो भविष्य में और भी बड़े घोटाले सामने आएँगे।
चुनाव आयोग को चाहिए कि वो इस मामले की गहन जाँच करे, सीएसडीएस के फंडिंग स्रोतों की पड़ताल करे और संजय कुमार पर कानूनी कार्रवाई शुरू करे। अगर आयोग चुप रहा, तो ये माना जाएगा कि वो इस तरह की साजिशों को बढ़ावा दे रहा है। जनता अब आयोग से जवाब माँग रही है – क्या वो सिर्फ कागजों पर ही मजबूत है, या असल में भी कार्रवाई कर सकता है?
बहरहाल, संजय कुमार जैसे लोगों की करतूतें अब छिपी नहीं रह सकतीं। उसने फर्जी डेटा फैलाकर, कॉन्ग्रेस के लिए हिट जॉब करके और चुनाव आयोग को बदनाम करने की कोशिश करके देश की जनता के साथ धोखा किया है। सीएसडीएस का विदेशी फंडिंग वाला एजेंडा और संजय की कायरता साफ दिख रही है। ऐसे में संजय कुमार और सीएसडीएस पर कड़ी कार्रवाई हो, ताकि भविष्य में कोई भी इस तरह की साजिश न कर सके। वरना, लोकतंत्र का मजाक और बनेगा… और फिर देश की जनता का भरोसा टूटेगा।
भारत के रूस से तेल खरीदने को लेकर अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के व्यावसायिक सलाहकार पीटर नागौर ने सख्त आपत्ति जताई है। उन्होंने कहा है कि इससे रूस को यूक्रेन के साथ युद्ध जारी रखने के लिए आर्थिक मदद मिल रही है।
अमेरिका हमेशा से ही भारत और रूस के रिश्तों के खिलाफ रहा है। इसी को लेकर भारतीय सामानों पर ट्रंप ने हाल ही में भारत पर 50% टैरिफ भी लगाया है। अब सोमवार (18 अगस्त 2025) को पीटर नवारो ने सोमवार को फाइनेंशियल टाइम्स में एक लेख लिखा।
नवारो के लेख का शीर्षक था- “India’s oil lobby is funding Putin’s war machine – that has to stop” इसमें उन्होंने भारत पर सीधा निशाना साधा है। पीटर ने इसमें लिखा है कि भारत के रूस से तेल खरीदने के कारण ही यूक्रेन युद्ध के लिए रूस को फंडिंग मिल रही है।
नवारो ने लिखा, “भारत के आर्थिक समर्थन को कारण ही रूस लगातार यूक्रेन पर हमला कर रहा है। इसीलिए अमेरिका और यूरोपियन टैक्सपेयर्स को यूक्रेन की रक्षा करने के लिए कई अरब डॉलर्स खर्च करने पड़ रहे हैं। असल में भारत रूस से तेल लेकर वैश्विक स्तर पर ‘क्लियरिंग हाउस’ की तरह काम कर रहा है।”
नवारो ने आगे लिखा, “क्रूड ऑयल को अधिक टैरिफ वाले निर्यात में बदलकर भारत रूस को उसकी आवश्यकतानुसार वित्त देता है। इन कारणों के चलते ही भारत पर अधिक टैरिफ लग रहे हैं और ट्रेड बैरियर से भारत खुद अमेरिकी निर्यात के दरवाजे बंद करता जा रहा है।”
भारत के खिलाफ अमेरिका ने पहली बार जहर नहीं उगला है बल्कि भारतीय सामानों पर टैरिफ लगाकर ट्रंप ने इसे जाहिर भी किया है। साथ ही रूस के साथ रिश्तों को लेकर अमेरिका भारत को जब तब धमकी देता रहता है।
अपने लेख में नवारो भारत को धमकी देने से भी नहीं चूके। उन्होंने लिखा कि अमेरिका के रणनीतिक साझेदार बनने के लिए भारत को रूस और चीन से नजदीकी खत्म करनी होगी। पूरे लेख में नवारो ने भारत के लिए तमाम हिदायतें लिख डालीं लेकिन ये लिखना भूल गए कि अमेरिका को साझेदारी में समानता लाने के लिहाज से किन बातों का ध्यान रखने की जरूरत है।
भारत को ‘विलेन’ बनाने के चक्कर में अमेरिका को अपने व्यापार भी याद नहीं रहे। रूसी तेल का व्यापार भले ही अमेरिका ने कम कर दिया हो लेकिन ऊर्जा समेत कई अन्य सेक्टरों में अमेरिका अब भी रूस के साथ व्यापार कर रहा है।
इसे लेकर भारत के विदेश मंत्रालय ने भी अपने रुख अगस्त की शुरुआथ में स्पष्ट कर दिया था। 2022 में रूस-यूक्रेन युद्ध शुरू होने के बाद से भारत का यूरोपीय संघ को पेट्रोलियम उत्पादों का निर्यात 15 अरब डॉलर तक पहुँच गया है। विदेश मंत्रालय ने साफ लिखा कि भारत संकट से लाभ नहीं उठा रहा, बल्कि यह सुनिश्चित कर रहा है कि वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति बाधित न हो और देश की घरेलू जरूरतें भी पूरी हों।
विदेश मंत्रालय ने 4 अगस्त 2025 को साझा की अपनी जानकारी में अमेरिका की पोल भी खोल कर सबके सामने रख दी थी। जानकारी में मंत्रालय ने लिखा था कि नवरी 2022 से अमेरिका ने रूस से 24.5 अरब डॉलर से अधिक के सामान आयात किए हैं।
इस वर्ष अकेले, अमेरिका ने 1.27 अरब डॉलर के उर्वरक, 624 मिलियन डॉलर के यूरेनियम और प्लूटोनियम, और लगभग 878 मिलियन डॉलर के पैलेडियम खरीदे हैं। अकार्बनिक रसायनों का आयात 683 मिलियन डॉलर, बिजली उत्पादन मशीनरी 79 मिलियन डॉलर और कॉर्क व लकड़ी के उत्पाद लगभग 64 मिलियन डॉलर रहे। इस लिहाज से अमेरिका रूस के साथ लगभग 20 प्रतिशत व्यापार बढ़ाता है।
असल में अमेरिका की ये पूरी भड़ास इस लिहाज से भी देखी जा सकती है कि ट्रंप के भारत-पाकिस्तान के बीच युद्ध शांत करवाने की बात को भारत ने सिरे से खारिज कर दिया। इसी के साथ रूस से भी व्यापार करने की बात को नकार दिया।
अलग-अलग देशों के साथ अपने रिश्तों को लेकर भारत हमेशा से ही मुखर और स्पष्ट रहा। इसके अलावा ट्रेड डील में भी अमेरिका के डेयरी और कृषि उत्पादों को भारतीय बाजार से बाहर रहने का रास्ता दिखा दिया। ये सभी बिंदु अमेरिकी राष्ट्रपति को नागवार गुजरने में अपनी भूमिका काफी अच्छे से निभा सकते हैं।
अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (ISS) के लिए एक्सिओम-4 अंतरिक्ष मिशन के पायलट ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला ने सोमवार (18 अगस्त 2025) को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात की। इस दौरान पीएम मोदी और उनके बीच कई विषयों पर विस्तृत बातचीत हुई। इस मुलाकात के अगले दिन यानी मंगलवार (19 अगस्त 2025) को पूरी मुलाकात और बातचीत की एक वीडियो पीएम ने अपने एक्स हैंडल से साझा किया।
मुलाकात के दौरान प्रधानमंत्री ने अंतरिक्ष यात्री शुक्ला से कहा, “स्पेश स्टेशन और गगनयान हमारे दो मिशन हैं, इसमें आपका अनुभव हमारे बहुत काम आएगा।” इस पर शुभांशु ने कहा, “यह हमारे लिए बहुत बड़ा मौका है। आपकी सरकार जिस तरह से तमाम असफलताओं के बाद भी लगातार बजट दे रही है यह पूरी दुनिया देख रही है। हम इस क्षेत्र में नेतृत्व कर सकते हैं।”
बातचीत में पीएम मोदी ने कहा कि हमारे पास 40-50 एस्ट्रोनॉट की एक टीम होनी चाहिए जो हमेशा तैयार हो। इसे लेकर शुभांशु ने प्रधानमंत्री से कहा कि भारत के गगनयान मिशन में दुनिया भर में काफी रुचि है। बातचीत के दौरान पीएम मोदी ने शुभांशु से उस होमवर्क के बारे में भी पूछा, जो उन्होंने पिछली बातचीत के दौरान ग्रुप कैप्टन को सौंपा था।
पीएम ने कहा, मैंने आपको कुछ होमवर्क दिया था उसका क्या प्रोग्रेस हुआ है? जवाब में शुभांशु शुक्ला ने कहा कि होमवर्क पर काफी अच्छा काम हुआ है। शुभांशु शुक्ला ने कहा, “लोग मुझे चिढ़ा भी रहे थे कि आपके प्रधानमंत्री ने आपको होमवर्क दिया है।”
इसके अलावा शुभांशु ने बताया, “अंतरिक्ष स्टेशन पर खाना एक बड़ी चुनौती है, जगह कम होती है और सामान महँगा होता है। आप हमेशा कम से कम जगह में ज्यादा से ज्यादा कैलोरी और पोषक तत्व पैक करने की कोशिश करते हैं। हर तरह से प्रयोग चल रहे हैं।”
उन्होंने कहा, “मैं जहाँ भी गया, जिससे भी मिला, सभी मुझसे मिलकर बहुत खुश हुए, बहुत उत्साहित हुए। सबसे बड़ी बात यह थी कि सभी को पता था कि भारत अंतरिक्ष के क्षेत्र में क्या कर रहा है। सभी को इस बारे में पता था और कई लोग ऐसे भी थे जो मुझसे भी ज्यादा गगनयान को लेकर उत्साहित थे, जो आकर मुझसे पूछ रहे थे कि आपका मिशन कब शुरू हो रहा है।”
इसके अलावा जब पीएम मोदी ने शुभांशु शुक्ला से पूछा कि भारतीयों को लेकर दुनिया के अन्य देशों के लोगों के मन मे क्या चलता है। इसका जवाब देते हुए शुभांशु शुक्ला ने कहा, “मेरा निजी अनुभव जो है पिछले एक साल में मैं जहाँ भी गया, जिससे भी मिला सभी लोग बहुत खुश हुए, मुझसे मिलकर, काफी एक्साइटेड थे, बात करने में आ-आकर मुझसे पूछने में कि आपलोग क्या कर रहे हैं, कैसे कर रहे हैं और सबसे बड़ी बात ये थी कि सबको इसके बारे में मालूम था कि भारत स्पेस के क्षेत्र में क्या कर रहा है, सबको इस बारे में जानकारी थी।”
इससे पहले पीएम मोदी ने शुभांशु के साथ की तस्वीरे एक्स पर साझा करते हुए लिखा था, “शुभांशु शुक्ला के साथ बहुत अच्छी बातचीत हुई।”
Had a great interaction with Shubhanshu Shukla. We discussed a wide range of subjects including his experiences in space, progress in science & technology as well as India's ambitious Gaganyaan mission. India is proud of his feat.@gagan_shuxpic.twitter.com/RO4pZmZkNJ
पीएम ने आगे लिखा, “हमने अंतरिक्ष में उनके अनुभवों, विज्ञान और प्रौद्योगिकी में प्रगति और भारत के महत्वाकांक्षी गगनयान मिशन सहित कई विषयों पर चर्चा की। भारत को उनकी इस उपलब्धि पर गर्व है।”
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने यूक्रेन के राष्ट्रपति जेलेंस्की से कहा कि अमेरिका यूक्रेन में रूस के साथ चल रहे युद्ध को खत्म कराने के साथ-साथ यूक्रेन की सुरक्षा सुनिश्चित करने में मदद करेगा। हालाँकि यह सहायता किस तरह की होगी और कितनी होगी, यह अभी स्पष्ट नहीं है।
ट्रंप ने व्हाइट हाउस में राष्ट्रपति जेलेंस्की और यूरोपीय नेताओं के एक ग्रुप के साथ वार्ता की। बैठक के बाद राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा कि वह रूस और यूक्रेन के बीच शांति की संभावना से बहुत खुश हैं। उन्हें इस बात की भी खुशी है कि जल्द ही रूस के राष्ट्रपति पुतिन और जेलेंस्की की मुलाकात होगी। उन्होंने कहा कि ये त्रिपक्षीय वार्ता होगी।
(साभार- ट्रूथ)
वहीं जेलेंस्की ने प्रस्तावित वार्ता को लेकर कहा है कि रूस और यूक्रेन को बिना शर्त बातचीत करनी चाहिए और युद्ध को खत्म करने के बारे में सोचना चाहिए।
This was a demonstrative and cynical Russian strike. They are aware that a meeting is taking place today in Washington that will address the end of the war.
We will have a discussion with President Trump about key issues. Along with Ukraine, the leaders of the United Kingdom,… pic.twitter.com/p62L8tAKx5
— Volodymyr Zelenskyy / Володимир Зеленський (@ZelenskyyUa) August 18, 2025
इससे पहले शुक्रवार (15 अगस्त 2025) को राष्ट्रपति ट्रंप ने अलास्का में रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से मुलाकात की थी। जेलेंस्की के साथ बैठक के बाद ट्रंप ने रूस के राष्ट्रपति से फोन पर बात की। उन्होंने कहा, ” मैनें उच्च स्तरीय बैठक खत्म होने के बाद पुतिन को फोन किया। राष्ट्रपति पुतिन और राष्ट्रपति जेलेंस्की के बीच बैठक को लेकर व्यवस्थाएँ की जा रही हैं। इस बैठक में मैं भी रहूँगा।”
यूरोपीय प्रतिनिधिमंडल के एक सूत्र के अनुसार, ट्रंप ने यूरोपीय नेताओं को बताया कि पुतिन ने ही ये सुझाव दिया था। हालाँकि मॉस्को ने सार्वजनिक रूप से अपनी सहमति अभी तक नहीं दी है। लेकिन अमेरिकी प्रशासन के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा है कि पुतिन-ज़ेलेंस्की की बैठक हंगरी में हो सकती है। जर्मन चांसलर फ्रेडरिक मर्ज़ के अनुसार, दोनों अगले दो हफ़्तों के भीतर मिलेंगे।
हालाँकि ट्रंप- जेलेंस्की वार्ता शुरू होने से ठीक पहले, रूस के विदेश मंत्रालय ने शांति समझौते को सुनिश्चित करने में मदद के लिए नाटो देशों के सैनिकों की उपस्थिति को खारिज कर दिया। उन्होंने कहा कि इसकी कोई जरूरत नहीं है। इससे ट्रंप की मुश्किलें थोड़ी बढ़ गई थी।
रूस और यूक्रेन के बीच आखिरी सीधी वार्ता जून में तुर्किए में हुई थी। पुतिन ने जेलेंस्की के वहाँ आमने-सामने बैठकर बातचीत करने के सार्वजनिक निमंत्रण को अस्वीकार कर दिया था। रूस ने अपना एक प्रतिनिधिमंडल वार्ता के लिए भेजा था।
इसको लेकर भी ट्रंप और पुतिन के बीच बात हुई थी। जानकारी के मुताबिक, ट्रंप-पुतिन सीधी वार्ता में भाग लेने वाले यूक्रेनी और रूसी पक्षों के प्रतिनिधियों के स्तर को बढ़ाने की संभावना पर चर्चा की गई।
इस बीच, जेलेंस्की का समर्थन करने अमेरिका गए यूरोपीय नेताओं ने ट्रंप से आग्रह किया कि वे पुतिन पर साढ़े तीन साल पुराने युद्ध में युद्धविराम के लिए सहमत होने का दबाव डालें, उसके बाद ही कोई भी बातचीत आगे बढ़े। ट्रंप ने पहले इस प्रस्ताव का समर्थन किया था, लेकिन रूस के राष्ट्रपति पुतिन से मुलाकात के बाद उन्होंने कहा है कि कोई भी शांति समझौता व्यापक होना चाहिए।
अमेरिका के भारत पर 50 प्रतिशत टैरिफ लगाने के बाद अब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 18 अगस्त 2025 को अर्थशास्त्रियों के साथ बैठक की। बैठक में अमेरिका की टैरिफ, GST सुधारों और निर्यात के लिए वैकल्पिक बाजारों पर चर्चा की गई।
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, बैठक सोमवार (18 अगस्त 2025) शाम 6.30 बजे आयोजित की गई। बैठक में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल, वित्त मंत्री नर्मला सीतारमण के साथ अन्य कैबिनेट मंत्री शामिल हुए। इसके साथ आर्थिक सलाहकार परिषद के सदस्य और नीति आयोग के अधिकारियों ने भी हिस्सा लिया।
बैठक अमेरिका द्वारा भारत के निर्यात पर लगाए गए 50 प्रतिशत टैरिफ पर केंद्रित रही। टैरिफ से भारत की अर्थव्यवस्था की मौजूदा स्थिति पर चर्चा की गई। पीएम मोदी ने अर्थशास्त्रियों से अमेरिका की टैरिफ पर कार्रवाई करने को लेकर सलाह ली।
साथ ही इस पहलू पर भी चर्चा की गई कि भारतीय अर्थव्यवस्था पर टैरिफ का क्या असर पड़ेगा। बता दें कि यह टैरिफ 27 अगस्त 2025 से लागू हो जाएगा।
गौरतलब है कि अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारत पर 1 अगस्त 2025 को 25 प्रतिशत टैरिफ लगाने का ऐलान किया। इसके बाद 06 अगस्त 2025 को भारत पर फिर से 25 टैरिफ लगाया। इससे भारत को अब अमेरिका से व्यापार करने के लिए 50 प्रतिशत टैरिफ देना होगा।
अमेरिका की टैरिफ पर अब तक भारत ने कोई भी जवाबी कार्रवाई नहीं की है। इसी संबंध में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अर्थशास्त्रियों के साथ बैठक की, जिसमें टैरिफ को लेकर प्रतिक्रिया पर चर्चा की गई।
असम के दीमा हसाओ क्षेत्र की जिस 3000 बीघा जमीन को एक निजी कंपनी को खनन के लिए सौंपने पर गुवाहाटी हाई कोर्ट ने आपत्ति जताई है। उस हाई कोर्ट के फैसले पर विपक्ष और कुछ मीडिया संस्थानों ने अडानी समूह के खिलाफ प्रोपेगेंडा शुरू कर दिया है। मामले में जिस कंपनी को जमीन बेची गई है, उसे अडानी समूह से जोड़कर पेश किया गया।
दरअसल, असम के दीमा हसाओ इलाके की 3000 बीघा जमीन को कंपनी को आवंटित किए जाने पर कोर्ट ने तीखा स्वर अपनाया था। कोर्ट ने कंपनी को फटकारते हुए कहा कि पूरा जिला एक कंपनी को सौंप दिया, यह कोई मजाक नहीं है। जस्टिस की इस टिप्पणी का वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है।
इस वायरल वीडियो पर कॉन्ग्रेस ने अडानी समूह के खिलाफ प्रोपेगेंडा शुरू कर दिया है। कॉन्ग्रेस ने अपने अधिकारिक एक्स अकाउंट पर वीडियो को शेयकर कर अडानी समूह और असम की हिमंता बिस्वा सरमा सरकार को घेरना शुरू कर दिया। हमेशा की तरह अडानी समूह के जरिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर निशाना साधा गया।
Assam CM Himanta Biswa Sarma handed over 3,000 bigha (81 million sqft) of tribal land to Adani for a cement factory.
A High Court judge expressed shock, questioning the rationality of the decision and stating, "Is this a joke? You are giving a whole district. Your need is not… pic.twitter.com/vFNGE0QzkA
कॉन्ग्रेस ने अपने एक्स पोस्ट में लिखा, “BJP सरकार की हरकतें घोर क्रोनी कैपिटलिज्म की गवाही देती हैं, क्योंकि वे बेशर्मी से देश के संसाधनों को मोदी के मित्र अडानी को सौंप रहे हैं, जबकि गरीबों को संघर्ष करने के लिए छोड़ दिया गया है। यह जनता के लिए शासन नहीं है; यह मित्र अडानी के लिए शासन है।”
इसी के साथ कॉन्ग्रेस के प्रवक्ता आलोक शर्मा ने जमीन खरीदने वाली कंपनी को अडानी का बताकर सोशल मीडिया पर प्रोपेगेंडा चलाया। आलोक शर्मा ने एक्स पर इस वायरल वीडियो को पोस्ट कर अडानी समूह को सीधे टारगेट किया।
हाईकोर्ट के जज भी अडानी को दी जा रही जमीन की बात सुन कर खुद शॉक्ड हो गए।
कॉन्ग्रेस प्रवक्ता ने वीडियो को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अडानी समूह से जोड़ा। इस वीडियो के कैप्शन में लिखा गया, “हाई कोर्ट के जज भी अडानी को दी जा रही जमीन की बात सुनकर खुद शॉक्ड हो गए।”
Assam’s corrupt CM Himanta gave Adani 3,000 bigha (81 million sqft) land for cement factory.
Even the High Court Judge was shocked – here’s what he asked & said?
कॉन्ग्रेस नेता सुप्रिया श्रीनाते ने भी गुवाहाटी हाई कोर्ट के इस वीडियो को अपने एक्स अकाउंट पर शेयर कर अडानी समूह पर निशाना साधा है। इसके अलावा कुछ मीडिया संस्थानों ने भी जस्टिस के बयान को अडानी से जोड़कर धड़ल्ले से खबरें चलाईं।
इन खबरों में भी जमीन खरीदने वाली कंपनी को अडानी की बताई गई है।
वीडियो की हकीकत जाने बिना विपक्ष और मीडिया ने सोशल मीडिया पर इसे शेयर किया और सरकार-अडानी समूह को घेरने का मौका नहीं छोड़ा। जबकि हकीकत यह है कि गुवाहाटी हाई कोर्ट ने जिस कंपनी को जमीन बेचे जाने की बात पर तीखे स्वर अपनाए हैं। वह असल में कोलकाता की ‘महाबल सीमेंट्स कंपनी’ है, जिसका अडानी समूह से कोई लेना-देना नहीं है।
लाइव लॉ की रिपोर्ट के अनुसार, जिन ग्रामीणों की याचिका पर गुवाहाटी हाई कोर्ट ने सुनवाई की है। उस याचिका में भी साफ है कि असम के दीमा हसाओ क्षेत्र की जमीन को खरीदने वाली कंपनी का नाम ‘महाबल सीमेंट्स’ है, जो कि कोलकाता की कंपनी है।
क्या है पूरा मामला ?
मामला असम के दीमा हसाओ क्षेत्र की 3000 बीघा जमीन को महाबल सीमेंट कंपनी को खनन के लिए आवंटन करने से संबंधित है। इस क्षेत्र में जनजातीय समाज के लोग रहते हैं। क्षेत्र की जमीन बंजर हालत में हैं, जिसके चलते जमीन को खनन के लिए आवंटित किया गया है।
ग्रामीणों ने इसके खिलाफ कोर्ट में याचिका दायर की, जिसकी सुनवाई 12 अगस्त 2025 को की गई। इस दौरान जस्टिस संजय कुमार मेधी ने कंपनी को जमीन सौंपने पर आपत्ति जताई थी। जस्टिस मेधा ने कहा कि दीमा हसाओ संविधान की छठी अनुसूची के तहत आता है, जहाँ जनजातीय अधिकारों को पहले रखा जाना चाहिए।
रिपोर्ट्स के अनुसार, सीमेंट कंपनी के वकील ने कोर्ट में दलील दी कि जमीन बंजर है और कंपनी को चलाने के लिए इसकी जरूरत थी। इस पर जस्टिस मेधा ने कहा, “यह आपकी जरूरत मुद्दा नहीं, जनहित मुद्दा है।”
जस्टिस मेधा ने आगे कहा, “3000 बीघा! यानी पूरा जिला? क्या हो रहा है? 3000 बीघा एक निजी कंपनी को आवंटित कर दिया गया? हम जानते हैं कि जमीन कितनी बंजर है…3000 बीघा? यह कैसा फैसला है? क्या यह कोई मजाक है या कुछ और?”
जस्टिस मेधा की इस टिप्पणी का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है।