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‘तेल खरीदकर यूक्रेन के खिलाफ युद्ध भड़का रहा दिल्ली’: रूस-भारत के रिश्तों पर ट्रंप के सलाहकार ने उगला जहर, पीटर नवारो ने फाइनेंशियल टाइम्स में लेख लिखकर दी हिदायतें

अपने लेख में नवारो भारत को धमकी दी कि अमेरिका के रणनीतिक साझेदार बनने के लिए भारत को रूस और चीन से नजदीकी खत्म करनी होगी। पूरे लेख में नवारो ने भारत के लिए तमाम हिदायतें लिख डालीं लेकिन ये लिखना भूल गए कि अमेरिका को साझेदारी में समानता लाने के लिहाज से किन बातों का ध्यान रखने की जरूरत है।

भारत के रूस से तेल खरीदने को लेकर अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के व्यावसायिक सलाहकार पीटर नागौर ने सख्त आपत्ति जताई है। उन्होंने कहा है कि इससे रूस को यूक्रेन के साथ युद्ध जारी रखने के लिए आर्थिक मदद मिल रही है।

अमेरिका हमेशा से ही भारत और रूस के रिश्तों के खिलाफ रहा है। इसी को लेकर भारतीय सामानों पर ट्रंप ने हाल ही में भारत पर 50% टैरिफ भी लगाया है। अब सोमवार (18 अगस्त 2025) को पीटर नवारो ने सोमवार को फाइनेंशियल टाइम्स में एक लेख लिखा।

नवारो के लेख का शीर्षक था- “India’s oil lobby is funding Putin’s war machine – that has to stop” इसमें उन्होंने भारत पर सीधा निशाना साधा है। पीटर ने इसमें लिखा है कि भारत के रूस से तेल खरीदने के कारण ही यूक्रेन युद्ध के लिए रूस को फंडिंग मिल रही है।

नवारो ने लिखा, “भारत के आर्थिक समर्थन को कारण ही रूस लगातार यूक्रेन पर हमला कर रहा है। इसीलिए अमेरिका और यूरोपियन टैक्सपेयर्स को यूक्रेन की रक्षा करने के लिए कई अरब डॉलर्स खर्च करने पड़ रहे हैं। असल में भारत रूस से तेल लेकर वैश्विक स्तर पर ‘क्लियरिंग हाउस’ की तरह काम कर रहा है।”

नवारो ने आगे लिखा, “क्रूड ऑयल को अधिक टैरिफ वाले निर्यात में बदलकर भारत रूस को उसकी आवश्यकतानुसार वित्त देता है। इन कारणों के चलते ही भारत पर अधिक टैरिफ लग रहे हैं और ट्रेड बैरियर से भारत खुद अमेरिकी निर्यात के दरवाजे बंद करता जा रहा है।”

भारत के खिलाफ अमेरिका ने पहली बार जहर नहीं उगला है बल्कि भारतीय सामानों पर टैरिफ लगाकर ट्रंप ने इसे जाहिर भी किया है। साथ ही रूस के साथ रिश्तों को लेकर अमेरिका भारत को जब तब धमकी देता रहता है।

अपने लेख में नवारो भारत को धमकी देने से भी नहीं चूके। उन्होंने लिखा कि अमेरिका के रणनीतिक साझेदार बनने के लिए भारत को रूस और चीन से नजदीकी खत्म करनी होगी। पूरे लेख में नवारो ने भारत के लिए तमाम हिदायतें लिख डालीं लेकिन ये लिखना भूल गए कि अमेरिका को साझेदारी में समानता लाने के लिहाज से किन बातों का ध्यान रखने की जरूरत है।

भारत को ‘विलेन’ बनाने के चक्कर में अमेरिका को अपने व्यापार भी याद नहीं रहे। रूसी तेल का व्यापार भले ही अमेरिका ने कम कर दिया हो लेकिन ऊर्जा समेत कई अन्य सेक्टरों में अमेरिका अब भी रूस के साथ व्यापार कर रहा है।

इसे लेकर भारत के विदेश मंत्रालय ने भी अपने रुख अगस्त की शुरुआथ में स्पष्ट कर दिया था। 2022 में रूस-यूक्रेन युद्ध शुरू होने के बाद से भारत का यूरोपीय संघ को पेट्रोलियम उत्पादों का निर्यात 15 अरब डॉलर तक पहुँच गया है। विदेश मंत्रालय ने साफ लिखा कि भारत संकट से लाभ नहीं उठा रहा, बल्कि यह सुनिश्चित कर रहा है कि वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति बाधित न हो और देश की घरेलू जरूरतें भी पूरी हों।

विदेश मंत्रालय ने 4 अगस्त 2025 को साझा की अपनी जानकारी में अमेरिका की पोल भी खोल कर सबके सामने रख दी थी। जानकारी में मंत्रालय ने लिखा था कि नवरी 2022 से अमेरिका ने रूस से 24.5 अरब डॉलर से अधिक के सामान आयात किए हैं।

इस वर्ष अकेले, अमेरिका ने 1.27 अरब डॉलर के उर्वरक, 624 मिलियन डॉलर के यूरेनियम और प्लूटोनियम, और लगभग 878 मिलियन डॉलर के पैलेडियम खरीदे हैं। अकार्बनिक रसायनों का आयात 683 मिलियन डॉलर, बिजली उत्पादन मशीनरी 79 मिलियन डॉलर और कॉर्क व लकड़ी के उत्पाद लगभग 64 मिलियन डॉलर रहे। इस लिहाज से अमेरिका रूस के साथ लगभग 20 प्रतिशत व्यापार बढ़ाता है।

असल में अमेरिका की ये पूरी भड़ास इस लिहाज से भी देखी जा सकती है कि ट्रंप के भारत-पाकिस्तान के बीच युद्ध शांत करवाने की बात को भारत ने सिरे से खारिज कर दिया। इसी के साथ रूस से भी व्यापार करने की बात को नकार दिया।

अलग-अलग देशों के साथ अपने रिश्तों को लेकर भारत हमेशा से ही मुखर और स्पष्ट रहा। इसके अलावा ट्रेड डील में भी अमेरिका के डेयरी और कृषि उत्पादों को भारतीय बाजार से बाहर रहने का रास्ता दिखा दिया। ये सभी बिंदु अमेरिकी राष्ट्रपति को नागवार गुजरने में अपनी भूमिका काफी अच्छे से निभा सकते हैं।

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ऑपइंडिया स्टाफ़
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कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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