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जयन्ती मिश्रा

राहुल जी, रुमाल एक बार और फेर दीजिए न, लोगों में सही मैसेज जाएगा: घायल पत्रकार और राहुल का PR

वैसे तो 2014 के बाद से वो टुकड़े-टुकड़े गैंग के समर्थन में भी खड़े दिखाई दिए थे लेकिन अब वो मानवता का प्रत्यक्ष चेहरा बनकर उभर रहे हैं।

Tik-Tok पर बाल यौन शोषण और अश्लीलता: बैन लगे न लगे, ‘डंडा’ पड़ना जरूरी

अमेरिका में बच्चों को साइबर क्राइम का शिकार होने से बचाने के लिए चिल्ड्रेन्स ऑनलाइन प्राइवेसी प्रोटेक्शन एक्ट के तहत एक कानून है। कोर्ट ने केंद्र सरकार से ऐसे ही कानून बनाने पर राय माँगी है। मीडिया को भी टिक-टॉक पर बने वीडियो का प्रसारण रोकने को कहा गया।

‘हेट पॉलिटिक्स’ के नाम पर जिन्होंने साधा BJP पर निशाना, वो केरल में बढ़ते अपराधों पर हमेशा क्यों चुप रहे?

केरल जैसे राज्य में जहाँ इसी विचारधारा के लोगों का शासन है, वहाँ आए दिन भाजपा/ आरएसएस के कार्यकर्ताओं की निर्मम हत्याओं की खबरें आती हैं। तब वहाँ हेट पॉलिटिक्स पर लेक्चर देना किसी से भी संभव नहीं हो पाता और न ही कोई अपील हो पाती है। 2012 में राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो की रिपोर्ट बताती है कि केरल में सर्वाधिक 455.8 संज्ञेय अपराध दर्ज किए गए हैं। लेकिन फिर भी इनके लिए भाजपा ही हेट पॉलिटिक्स का पर्याय है।

धूर्त और मौकापरस्त हैं आलिया भट्ट की मम्मी… पाकिस्तान जाना चाहती हैं क्योंकि वहाँ का खाना अच्छा है

पाकिस्तान में सुकून-चैन और अच्छा खाना ढूँढने वाली सोनी राज़दान का यह बयान दर्शाता है कि उन्हें देश में क्या हो रहा है और देश में कैसी स्थितियाँ हैं, इससे कोई फर्क़ नहीं पड़ता। अपने पति महेश भट्ट की तरह उनका ज़हन भी पाक की नुमाइंदगी ही करता है।

लड़ाकू विमान उड़ाने और वॉरशिप पर पराक्रम दिखाने के बाद महिलाएँ अब ‘Defence Attache’ भी बन सकेंगी

मोदी सरकार द्वारा महिला सामर्थ्य पर दिखाया गया अटल विश्वास उस समय दिखा जब देश के 66 वें गणतंत्र दिवस के मौक़े पर तीनों सेनाओं के एक विशेष महिला दस्ते ने मार्च करते हुए अंतराष्ट्रीय स्तर पर भारत का गौरव बढ़ाया।

विरोध प्रदर्शन की आड़ में JNU के नक्सलियों द्वारा कुलपति की पत्नी पर हमला कहाँ तक उचित है?

आज देश की बड़ी-बड़ी परीक्षाएँ कम्प्यूटर के माध्यम से होती हैं। ऐसे में इस कदम का विरोध करना केवल मूर्खता को दर्शाता है। लेकिन अगर इसके बावजूद किसी पढ़े- लिखे समुदाय की ‘भीड़’ को इससे शिक्षा व्यवस्था में खतरा नज़र आता है, तो हर विरोध प्रदर्शन का एक तरीका होता है।

‘हिंदू बहनों’ पर हुए अत्याचार पर नारीवादी Pak मलाला चुप भी है और ब्लॉक भी कर रही – दोहरेपन की हद है यह

मलाला का न्यूज़ीलैंड के मुद्दे पर दुख प्रकट करना और रवीना और रीना पर शांत हो जाना दिखाता है कि इंसान कितना ही प्रोग्रेसिव क्यों न हो जाए, लेकिन उसके भीतर मज़हब, और मज़हब का डर हमेशा जिंदा रहता है।

बॉलीवुड के ‘पाक’ कलाकार: संवेदना मौत से नहीं, ‘मस्जिद में मौत’ पर जागती है

हम उनके न्यूजीलैंड हमले पर दुख जाहिर करने पर सवाल नहीं उठा रहे। उठाएँगे भी क्यों? हम तो जानना चाहते हैं कि पुलवामा पर उनके चुप रहने के क्या कारण हैं? 'कर्मभूमि' की रक्षा पर तैनात सैनिकों पर हुए हमले से जिनका दिल नहीं पसीज़ा वो न्यूजीलैंड हमले पर एकदम से भावुक हो उठे! कैसे?