‘हिंदू बहनों’ पर हुए अत्याचार पर नारीवादी Pak मलाला चुप भी है और ब्लॉक भी कर रही – दोहरेपन की हद है यह

सोशल मीडिया पर यूजर्स मलाला की चुप्पी पर उनसे लगातार सवाल कर रहे हैं, साथ ही उन दोनों हिन्दू बहनों के ऊपर हुए अत्याचार पर आवाज़ उठाने की माँग भी कर रहे हैं।

विश्व के कोने-कोने में पहुँचकर महिलाओं के हक़ पर बात करने वाली नोबेल प्राइज विजेता मलाला यूसफ़जई आज न केवल पाकिस्तान में बल्कि समूचे विश्व में कई नारीवाद आंदोलनों का एक बड़ा चेहरा बन चुकी हैं। लेकिन जब उनके ख़ुद के मुल्क़ में दो हिंदू लड़कियों के अपहरण और जबरन धर्मांतरण की ख़बर आई, तो उन्होंने चुप्पी साध ली। आखिर क्यों?

मानवाधिकारों पर और विशेष तौर पर महिलाओं पर बात करने वाली मलाला की चुप्पी को देखकर लगता है कि उनके मुल्क़ में पसरी कट्टरपंथी उनको आवाज़ उठाने की इजाज़त नहीं दे रही हैं। जिसके कारण सोशल मीडिया पर यूजर्स उनकी इस चुप्पी पर उनसे लगातार सवाल कर रहे हैं। और साथ ही उन दोनों हिन्दू बहनों के ऊपर हुए अत्याचार पर आवाज़ उठाने की माँग कर रहे हैं।

कहा जाता है कि ‘नारीवाद’ की लड़ाई, नारी के साथ हो रहे अन्यायों के ख़िलाफ़ होती है, इसमें शायद किसी तय मज़हब, जाति और धर्म का कोई उल्लेख नहीं होता है। इसलिए ‘नारीवाद’ का बीड़ा उठाने वाले हर शख़्स का दायित्व होता है कि उसकी आवाज़ समाज में हर नारी के लिए बराबर उठे। मलाला का न्यूज़ीलैंड के मुद्दे पर दु:ख प्रकट करना और रवीना (13) और रीना (15) पर शांत हो जाना दिखाता है कि इंसान कितना ही प्रोगरेसिव क्यों न हो जाए, लेकिन उसके भीतर मज़हब और मज़हब का डर हमेशा ज़िंदा रहता है।

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आज इस घटना ने पूरे विश्व को पाकिस्तान में हिंदुओं की स्थिति पर सोचने के लिए मजबूर कर दिया है। लेकिन तब भी मलाला को इस संदर्भ में आवाज़ उठाना उचित नहीं लग रहा है। और इसलिए उन्होंने उन सभी यूजर्स को ब्लॉक करना शुरू कर दिया है, जो उनसे इन दोनों हिंदू बहनों के लिए इंसाफ़ की आवाज़ उठाने की माँग कर रहे हैं।

सोशल मीडिया पर कुछ लोग मलाला के इस दोहरेपने को ‘Biggest scam’ बता रहे हैं। और आरोप लगा रहे हैं कि वह विश्व के किसी भी मुद्दे पर बोलने को तैयार हैं, लेकिन अपनी मातृभूमि पर पनप रहे आतंकवाद और कट्टरता पर उनसे एक शब्द भी नहीं बोला जाता। ऐसे हालातों में मलाला पर सवालों का उठना लाज़िमी है क्योंकि जो नोबेल प्राइज विजेता दूर-दूर विश्व में मानवाधिकारों का पाठ लोगों को पढ़ाती-समझाती हो, वह अपने मुल्क़ में हिंदू बहनों पर हुए ऐसे अपराध पर क्यों शांत हैं?

मलाला की यह चुप्पी एक तरफ जहाँ पाकिस्तान की कट्टरता को दर्शाती है वहीं उनके दोहरे चेहरे को भी उजागर करती है, जिसमें या तो मज़हब के लिए डर है या मज़हब के लिए अथाह प्रेम जो न्यूज़ीलैंड पर जगता है लेकिन ऐसे मुद्दों पर कहीं दुबक जाता है।

ख़ैर, बताते चलें कि रवीना और रीना नामक नाबालिग हिंदू लड़कियों के पिता पुलिस स्टेशन के सामने रोए, गिड़गिड़ाए और विरोध भी किए। वायरल हुए वीडियो में पिता को यह कहते हुए सुना जा सकता है, “आप मुझे गोली मार सकते हैं, मैंने बहुत सब्र किया, लेकिन अब मैं अपनी बेटियों के वापस आने तक यहाँ से नहीं जाऊँगा”। सोचिए उनकी स्थिति!

इसी बीच, सिंध प्रांत के कई हिंदुओं ने कथित तौर पर अपहरणकर्ताओं के ख़िलाफ़ शिक़ायत दर्ज करने से इनकार करने के बाद पुलिस अधिकारियों के ख़िलाफ़ विरोध प्रदर्शन किया। पाकिस्तान में हिंदू देश के सबसे वंचित और सबसे ज्यादा सताए गए अल्पसंख्यकों में से एक हैं।

इस घटना के बाद मलाला जैसे लोग भले ही अपने मुल्क़ से इंसाफ़ की माँग करें न करें, लेकिन भारतीय विदेश मंत्री ने रविवार (मार्च 25, 2019) को पाकिस्तान के सिंध प्रांत में होली की पूर्व संध्या पर दो हिंदू लड़कियों के अपहरण पर विवरण मँगाया है। विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने पाकिस्तान में भारतीय उच्चायुक्त से घटना पर रिपोर्ट भेजने को कहा है।

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कमलेश तिवारी
कमलेश तिवारी की हत्या के बाद एक आम हिन्दू की तरह, आपकी तरह- मैं भी गुस्से में हूँ और व्यथित हूँ। समाधान तलाश रहा हूँ। मेरे 2 सुझाव हैं। अगर आप चाहते हैं कि इस गुस्से का हिन्दुओं के लिए कोई सकारात्मक नतीजा निकले, मेरे इन सुझावों को समझें।

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