Friday, September 25, 2020
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लड़ाकू विमान उड़ाने और वॉरशिप पर पराक्रम दिखाने के बाद महिलाएँ अब ‘Defence Attache’ भी बन सकेंगी

बीते कुछ वर्षों में भारत की रक्षा और सुरक्षा व्यवस्था में हुए बड़े परिवर्तन के कारण डिफेंस अताशे पद पर तैनात हुए सैन्य अधिकारी की जिम्मेदारियाँ बढ़ गई हैं। रक्षा कूटनीति अब निश्चित रूप से प्रमुख देशों के साथ भारत की राजनयिक भागीदारी का एक अहम हिस्सा हैं।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत ने महिलाओं को लेकर नए आयाम स्थापित किए हैं। एक समय था जब महिला सशक्तिकरण के नाम पर औरतों को सिलाई मशीन थमा कर सीमित कर दिया जाता था। लेकिन अब परिस्थितियाँ बदल गई हैं। मोदी के नेतृत्व में इंदिरा गाँधी के बाद देश को निर्मला सीतारमन के रूप में पहली महिला पूर्णकालिक रक्षा मंत्री मिलीं जिन्होंने सशस्त्र सेनाओं के आधुनिकीकरण की प्रक्रिया तेज़ करने के साथ सैन्य क्षेत्र में महिलाओं की स्थिति को भी में संवारा।

प्रायः देखा गया है कि सैन्य सेवाओं को पुरुषों का अधिकारक्षेत्र माना जाता रहा है। पूर्व में भारतीय वायुसेना से रिटायर हुईं एयर मार्शल पी.बंदोपाध्याय (भारत की पहली एयर मार्शल) जैसी महिलाओं ने इस मिथक को तोड़ा है। इस वर्ष (2019) की शुरूआत में फैसला लिया गया कि भारत अपने विदेशी मिशनों में ‘डिफेंस अताशे’ के रूप में महिला अधिकारियों को भी तैनात करेगा। इस फैसले के बाद तीनों सेनाओं से उन महिलाओं की पहचान करने के लिए कहा गया जो इन पदों के साथ न्याय कर सकती हैं। इस दिशा में पहले डिफेंस अताशे के रूप में महिला सैन्य अधिकारियों को यूरोप और अमेरिका के मिशन पर तैनात करने की योजना है।

हालाँकि ये सच हैं कि भारत में अब तक कई प्रतिष्ठित महिलाएँ राजदूत, राजनयिक यहाँ तक ​​कि विदेशी सचिव भी रही हैं, लेकिन डिफेंस अताशे के रूप में पुरुष अधिकारियों को प्राथमिकता दी जाती थी। यह स्वयं रक्षा मंत्रालय ने स्वीकार किया है। लेकिन अब इन पदों के लिए चुनी गईं महिला ऑफिसर्स अपनी तैनाती पर जल्द ही जा सकती है। किसी देश के राजनयिक मिशन में डिफेंस अताशे का पद महत्वपूर्ण होता है। किसी अन्य देश में भारतीय दूतावास में तैनात डिफेंस अताशे सैन्य विशेषज्ञ के रूप में काम करते हैं। वे रक्षा खरीद संबंधित निर्णय लेने में भारत सरकार की सहायता करते हैं।

बीते कुछ वर्षों में भारत की रक्षा और सुरक्षा व्यवस्था में हुए बड़े परिवर्तन के कारण डिफेंस अताशे पद पर तैनात हुए सैन्य अधिकारी की जिम्मेदारियाँ बढ़ गई हैं। रक्षा कूटनीति अब निश्चित रूप से प्रमुख देशों के साथ भारत की राजनयिक भागीदारी का एक अहम हिस्सा हैं।

मोदी नेतृत्व में रक्षा क्षेत्र में महिलाओं की भागीदारी बढ़ी

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कुछ महीने पूर्व रक्षा मंत्रालय द्वारा इस बात की घोषणा की गई गई थी की भारतीय सेना की 10 शाखाओं में महिलाओं को स्थाई कमिशन मिलेगा। इनमें सिग्नल, इंजीनियर, आर्मी एविएशन, आर्मी एयर डिफेंस, इलेक्ट्रॉनिक्स और मैकेनिकल इंजीनियर, आर्मी सर्विस कोर, आर्मी ऑर्डनेंस कोर और इंटेलिजेंस भी शामिल होंगे।

अवनी के रूप में देश को पहली लड़ाकू विमान पायट मिली

इसके अलावा भारतीय वायुसेना की सभी शाखाएँ अब महिलाओं के लिए खुली हुई हैं, इस सूची में लड़ाकू विमान के पायलट का पद भी शामिल है। इस दिशा में याद दिला दें कि गत वर्ष फ्लाइंग ऑफिसर अवनी चतुर्वेदी लड़ाकू विमान को उड़ाने वाली पहली भारतीय महिला बनीं थी जिन्होंने मिग-21 उड़ाकर इतिहास रचा था। यहाँ अवनी के साथ मोहना सिंह और भावना कंठ को भी पहली बार लड़ाकू विमान उड़ाने की जिम्मेदारी सौंपी गई थी।

इन तीनों महिलाओं की नियुक्ति पूरे देश के लिए गर्व की बात थी, साथ ही मोदी सरकार की उपलब्धि भी। इसके अलावा मोदी सरकार द्वारा महिला सामर्थ्य पर दिखाया गया अटल विश्वास उस समय दिखा जब देश के 66 वें गणतंत्र दिवस के मौक़े पर तीनों सेनाओं के एक विशेष महिला दस्ते ने मार्च करते हुए अंतराष्ट्रीय स्तर पर भारत का गौरव बढ़ाया।

शुभांगी बनी पहली नेवी पायलट

नौसेना क्षेत्र में शुभांगी के रूप में जब पहली महिला पायलट मिली तो यह देश के लिए गर्व की बात थी। शुभांगी के साथ-साथ आस्था सहगल, रूपा ए. और शक्तिमाया को भी नेवी के आर्मामेंट इंस्पेक्शन ब्रांच में पहली बार नियुक्त किया गया है। पिछले साल नेवी चीफ एडमिरल सुनील लान्बा ने कहा था कि आज नहीं तो कल महिला नौसेना अधिकारियों को युद्धपोत पर तैनाती का अवसर दिया जाएगा।

महिलाओं को सैन्य सेवा में ‘कॉम्बैट रोल’

साल 2017 में थल सेना के प्रमुख जनरल बिपिन रावत ने कहा था कि जल्द ही महिलाओं को कॉम्बैट रोल (लड़ाकू भूमिका) देने की तैयारी है। अभी तक दुनिया में कुछ चुनिंदा देश ही ऐसा कर पाए हैं। रावत ने कहा था कि महिलाओं को कॉम्बैट रोल, जिसमें अभी तक केवल पुरुष ही होते हैं, देने की प्रकिया तेजी से बढ़ रही है। शुरुआत में महिलाओं को मिलिट्री पुलिस में शामिल किया जाएगा। लेकिन बाद में जनरल बिपिन रावत द्वारा इस फैसले पर स्वयं ही सवालिया निशान लगा दिए गए। जिनको कई लोगों द्वारा वाजिब भी बताया गया।

2018 में इस विषय पर जनरल बिपिन रावत के बयान ने उस समय तूल पकड़ा जब उन्होंने महिलाओं को कॉम्बैट रोल पर संशय जताया। न्यूज़ 18 को दिए इंटरव्यू में कहा भारत अभी महिलाओं को कॉम्बैट रोल में देखने के लिए तैयार नहीं है। रावत ने कहा था कि महिलाओं की ज़िम्मेदारी माँ के रूप में है और उनको छह महीने का मातृत्व अवकाश देना भी मुश्किल है। साथ ही जनरल बिपिन रावत ने महिलाओं की सुरक्षा और सहजता को आधार बताकर भी उन्हें कॉम्बैट रोल देने के लिए असमर्थ बताया। उन्होंने साक्षात्कार में कहा कि ऐसा नहीं है देश में बच्चों की माँ नहीं मरती हैं, लेकिन आतंकी ऑपरेशन में आतंकवादियों को मारने के दौरान जैसे हमारे जवानों का शरीर वीरगति प्राप्त करके घर लौटता है, उस तरह से महिलाओं को देखने के लिए अभी हमारा समाज तैयार नहीं हैं।

इसके अलावा बिपिन ने अपने साक्षात्कार में अपने 2017 के बयान को बदलने के पीछे एक वजह यह भी बताई कि हमारी सेना में अधिकतर जवान गाँव से आते हैं। जो अभी इन चीजों को एकदम से स्वीकारने के लिए तैयार नहीं हैं। उनके अनुसार बहुत से सैनिकों के बहुत से कार्य (कपड़े बदलना, जिम जाना आदि) ऐसे होते हैं जिन्हें सुरक्षा पर तैनात जवान एक साथ कर लेते हैं, लेकिन महिलाएँ उसमें सहज नहीं होंगी।

हालाँकि इस विचार के बाद इसपर काफ़ी विमर्श चल रहा है और महिलाओं को माँ के रूप में दर्शाकर कई अटकलें भी लग रही हैं। लेकिन यकीनन जिस तरह से सरकार द्वारा महिलाओं को रक्षा के क्षेत्र में तैनात करने की प्रक्रिया तेज हैं। उस दिशा में जल्द ही कॉम्बैट रोल को लेकर भी संकोच वाली स्थिति जल्दी समाप्त होगी। बता दें जिन सवालों से आज भारत गुज़र रहा है, उन्हीं दुविधाओं से साल 2013 में अमेरिका को भी जूझना पड़ा था जब वह अपनी सेना में महिलाओं को कॉम्बैट रोल देने पर विचार कर रही थी, लेकिन बाद में इसपर स्टडी हुई और आखिरकार अमेरिका में महिलाएँ कॉम्बैट रोल में शामिल हुईं। अमेरिका के अलावा डेनमार्क, एस्टोनिया, फिनलैंड, जर्मनी, फ्रांस, इज़रायल ने भी इस मामले से जुड़ी मुश्किलों को समाप्त किया। यकीनन भारत में भी इसपर काम होगा।

आज भारत में अनेकों लिहाज से महिलाओं की भूमिका को संवारा जा रहा है। फिर चाहे वो महिलाओं के निजी जीवन से संबंधित हो स्थिति हो या फिर देश में रक्षा के लिए तैनात होने को लेकर। हर रूप में और हर क्षेत्र में महिलाओं के सशक्तिकरण की प्रक्रिया चालू है। निर्माला सीतारमन के रूप में देश को एक सशक्त रक्षा मंत्री का मिलना, राजपथ पर महिलाओं के दस्ते द्वारा भारत का गौरव बढ़ाना, अवनी द्वारा लड़ाकू विमान उड़ाना और शुभांगी का नेवी पायलट बनकर पहचान बनाना, इसके साथ ही अब डिफेंस अताशे के रूप में महिला अधिकारियों की नियुक्ति होना नए भारत की नई तस्वीर है।

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