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प्रो. रसाल सिंह

प्रोफेसर और अध्यक्ष के रूप में हिंदी एवं अन्य भारतीय भाषा विभाग, जम्मू केंद्रीय विश्वविद्यालय में कार्यरत हैं। साथ ही, विश्वविद्यालय के अधिष्ठाता, छात्र कल्याण का भी दायित्व निर्वहन कर रहे हैं। इससे पहले दिल्ली विश्वविद्यालय के किरोड़ीमल कॉलेज में पढ़ाते थे। दो कार्यावधि के लिए दिल्ली विश्वविद्यालय की अकादमिक परिषद के निर्वाचित सदस्य रहे हैं। विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में सामाजिक-राजनीतिक और साहित्यिक विषयों पर नियमित लेखन करते हैं। संपर्क-8800886847

अंग्रेजी के आतंक का ‘देवनागरी लिपि’ बन सकती है समाधान, हिंदी से जुड़ कर इस तरह देना होगा साथ

अंग्रेजी वर्चस्ववाद से निपटने के लिए भारतीय भाषाओं को एक-दूसरे के निकट आने की आवश्यकता है। आपसी अपरिचय और अलगाव को मिटाने की आवश्यकता है।

वोटर कार्ड को आधार से जोड़ना, मतदाता सूची का एकीकरण: चुनाव सुधार की दिशा में मोदी सरकार के महत्वपूर्ण फैसले, ‘एक देश एक चुनाव’...

मोदी सरकार द्वारा चुनाव सुधार की दिशा में उठाया गए कदम से लोकतंत्र और मजबूत होगा। इससे फर्जी वोटरों पर रोक लगेगी।

JEE, NEET की तरह होगी केंद्रीय विश्वविद्यालयों की स्नातक व स्नातकोत्तर प्रवेश परीक्षा: विद्यार्थियों को झंझट से मिलेगी मुक्ति

आरपी तिवारी समिति ने अपनी रिपोर्ट में य़ूजीसी से प्रवेश प्रक्रिया को आसान बनाने के लिए सामान्य प्रवेश परीक्षा लागू करने की माँग की है।

इंदिरा का कानून, चिदंबरम ने लाया था विधेयक: BSF का अधिकार क्षेत्र बढ़ने से कॉन्ग्रेस बेचैन क्यों? तस्करी-घुसपैठ को नेताओं का संरक्षण

म्यांमार -बांग्लादेश से भारी तादात में घुसपैठ की घटनाएँ होती हैं। तस्करी और घुसपैठ को अनेक राजनेताओं और कई राज्य सरकारों का संरक्षण मिलता है।

यूपी में नेता, नीति, संगठन और कार्यकर्ता विहीन कॉन्ग्रेस, इसलिए प्रियंका खेल रही हैं ‘घोषणाबाजी’ का सियासी जुआ

प्रियंका गाँधी ने महिलाओं को 40 फीसदी पार्टी टिकट देने का जो दाँव खेला है, उससे न तो महिलाओं का भला होने वाला है और न ही कॉन्ग्रेस का।

दिल्ली विश्वविद्यालय में ‘मार्क्स जिहाद’: JNU के ढहते किले से सहमे वामपंथी, नया ‘गढ़’ बनाने की साजिश

केरल राज्य बोर्ड द्वारा छात्रों को बड़ी संख्या में 100 फीसदी मार्क्स देने की प्रवृत्ति की ओर इशारा करते हुए इसे 'मार्क्सवादी विचारधारा के प्रचार-प्रसार की सुचिंतित और सुनियोजित साजिश' बताया गया है।

बुलेट का जवाब बैलेट से: जम्मू-कश्मीर में भारत, भारतीयों और लोकतंत्र की जीत, भाजपा का उदय है बड़ा संदेश

सन 2021 की ‘पूर्वसंध्या’ में आए ये चुनाव परिणाम बहुत कुछ कहते हैं और आगामी विधानसभा चुनावों की पूर्वपीठिका निर्मित करते हैं।

जम्मू-कश्मीर में लोकतंत्र की नई सुबहः पहली बार शरणार्थी, गोरखा, वाल्मीकि समुदाय के लोग भी डालेंगे वोट

इतिहास में पहली बार पश्चिमी पाकिस्तान के शरणार्थी, गोरखा और वाल्मीकि समुदाय के लोग भी मतदान कर सकेंगे। अभी तक ये अभागे और उपेक्षित समुदाय राज्य के चुनावों में मतदान के अपने लोकतान्त्रिक अधिकार से वंचित रहे हैं।