दुनिया की पहली महिलाएँ हैं, जिन्होंने छोटी-सी नौका से पूरी दुनिया के चक्कर लगाए। इनके उत्साह, लगन, मेहनत की तारीफ करते हुए पीएम मोदी ने ‘मन की बात’ के माध्यम से दोनों महिलाओं के साथ संवाद किया। इस दौरान दोनों नेवी की अधिकारियों ने अपने अद्भुत यात्रा का अनुभव साझा किया।
मैं ‘मन की बात’ के श्रोताओं को इन दो जांबाज़ officers से मिलवाना चाहता हूँ। एक हैं Lieutenant commander दिलना और दूसरी हैं Lieutenant commander रूपा। ये दोनों officers हमारे साथ फोन लाइन पर जुड़ी हुई हैं।
— आकाशवाणी समाचार (@AIRNewsHindi) September 28, 2025
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लेफ्टिनेंट कमांडर दिलना कौन है
नौसेना में लेफ्टिनेंट कमांडर दिलना (logistics) लोजिस्टिक्स कैडर से हैं। 2014 में वह इंडियन नेवी में अफसर बनीं थी। केरल की कोझिकोड की रहने वाली दिलना के पिता देवदासन भी आर्मी में जवान थे। लेफ्टिनेंट कमांडर दिलना को सेना में जाने की प्रेरणा उन्हीं से मिली। उनकी माता कुशल गृहणी हैं और पति इंडियन नेवी में ही अधिकारी हैं। यहाँ तक कि एनसीसी से जुड़ी हुई हैं।
लेफ्टिनेंट कमांडर रूपा को जानिए
लेफ्टिनेंट कमांडर रूपा इंडियन नेवी से 2017 में जुड़ी। उन्होंने नौसेना आयुध निरीक्षण (armament inspection) कैडर ज्वाइंन किया। रूपा के पिता अलागिरीसामी जीपी तमिलनाडु के हैं, जबकि माँ पुद्दुचेरी की हैं। पिता एयरफोर्स में थे, वहीं से डिफेंस में आने की प्रेरणा मिली। जबकि माँ कुशल गृहणी हैं।
दुनिया की परिक्रमा करने वाली दिलना और रूपा का कहना है कि जिंदगी में ऐसा मौका सिर्फ एक बार मिलता है, जो जिंदगी बदल देती है। (circimnavigation) पूरे संसार की जल से यात्रा एक ऐसा अवसर था, जो इंडियन नेवी और भारत सरकार ने दिया।
जल यात्रा से पहले की तैयारियाँ
लेफ्टिनेंट कमांडर रूपा और लेफ्टिनेंट कमांडर दिलना ने पूरे संसार की जलयात्रा करने के दौरान 47500 किलोमीटर समुद्र में यात्रा की। 2 अक्टूबर 2024 को गोवा से दोनों निकलीं और 29 मई 2025 को वापस आई। यानी पूरे 238 दिन लगे। उस नौका में सिर्फ ये दोनों थीं। इस यात्रा की तैयारी दोनों ने 3 साल पहले शुरू कर दी थी। इसके लिए मार्गदर्शन से लेकर कम्यूनिकेशन डिवाइस को कैसे ओपरेट करना है, गोताखोरी कैसे करते हैं और बोट में कुछ भी इमरजेंसी हो, जैसे मेडिकल इमरजेंसी तो कैसे मैनेज करना है, इन सबकी ट्रेनिंग इंडियन नेवी से ली थी।
नौका में सिर्फ दोनों थीं और दोनों को एक साथ मेहनत करना पड़ता था। वहाँ बोट रिपेयर से इंजन मेकेनिक तक के काम मिल कर करती थीं। वो नौका में आई तकनीकी खराबी से लेकर मेडिकल एसिस्टेंट, कुक, क्लिनर, ड्राइवर, मार्गदर्शक और सबकुछ वही एक दूसरे के लिए थीं। इसके लिए इंडियन नेवी ने ट्रेनिंग में सबकुछ सिखाया था।
‘प्वांइट निमो’ पर फहराया तिरंगा
लेफ्टिनेंट कमांडर दिलना और लेफ्टिनेंट कमांडर रूपा प्वाइंट निमो (point Nemo) तक गईं और भारत का झंडा फहराया। ‘प्वाइंट निमो’ दुनिया की सबसे दूरतम जगह (remolest location) है जो दक्षिण प्रशांत महासागर में स्थित है। इस जगह के सबसे नजदीक कोई इंसान है तो वह इंटरनेशनल स्पेस सेंटर में है। वहाँ से नजदीक अगर कोई जमीन है, तो वह करीब 2,688 किलोमीटर दूर है। इसका नाम लैटिन शब्द “निमो” से बना है, जिसका अर्थ होता है ‘कोई नहीं’। एक पाल नौका से इस प्वाइंट तक पहुँचने वाला पहला भारतीय, पहला एशियन और दुनिया का पहला इंसान बनने का मौका भारत की इन दो नेवी की महिला अधिकारियों को मिला।
समुद्री यात्रा के दौरान चुनौतियाँ
लेफ्टिनेंट कमांडर दिलना और लेफ्टिनेंट कमांडर रूपा पिछले 5 सालों से एक-दूसरे को अच्छी तरह जानती हैं। तीन सालों तक साथ में ट्रेनिंग लीं है। जब यात्रा शुरू हुई तो छोटे से नौका में दोनों गोवा से समुद्र की लंबाई मापने निकलीं और वह भी 17 मीटर लंबी और 5 मीटर चौड़ी अपनी छोटी सी पाल नौका ‘आईएनएसवी तारिणी’ से।
कभी- कभी कुछ लहरें तीन मंजिला मकान जितनी ऊँची आती थी, तो कभी हवा रुक जाती और नौका नीचे चली जाती। कभी बहुत ज्यादा गर्मी और कभी बहुत ज्यादा सर्दी, हर तरह की परिस्थितियों का इनदोनों ने मिलकर सामना किया। दोनों एक-दूसरे के सहारे थे, कभी हँस कर एक दूसरे को मोटिवेट करते तो कभी एक-दूसरे का संबल बनते। एक दूसरे की मजबूती और कमजोरियों से दोनों वाकिफ थीं, इसलिए कोई भी दिक्कत आ जाए, टीम वर्क कभी फेल नहीं हुआ।
घने अंधेरे में मशीन ने दिया धोखा
एक बार घने अंधेरे में जीपीएस, ऑटोपायलट और हवा की दिशा बताने वाला नेविगेशनल पैनल अचानक काम करना बंद कर दिया। प्रशांत महासागर के बीचो बीच इन्हें लगा जैसे ये समुद्र में खो गए। मदद की उम्मीद करना बेकार था, क्योंकि कोई भी मदद 4-5 दिनों से पहले नहीं मिल सकती थी। दोनों ने मिलकर अपने सिस्टम को 3 घंटे की कड़े मेहनत के बाद ठीक किया और आगे बढ़ीं
समुद्र के माउंट एवरेस्ट यानी केप हॉर्न को पार किया
यात्रा के दौरान पहली रात में केप हॉर्न को पार किया। ये समुद्र का माउंट एवरेस्ट कहलाता है। यहाँ मौसम कभी भी खराब हो सकता है। समुद्र में काफी उथल-पुथल मचा रहता था। बड़ी बड़ी लहरें इससे टकराती है। पूरा समुद्र सफेद झाग से भरा रहता है। इस दौरान कई बार पॉल की रॉड पानी से टकरा गई और नौका एक तरफ झुक गई। ट्रेनिंग इस वक्त काफी काम आया और दोनों ने इसे पार किया। समुद्र का ऐसा रौद्र रूप उन्होंने पहले कभी नहीं देखा था। ऐसा लग रहा था कि पहाड़ों पर नौका चल रही है और फिर घाटियों में उतर रही है।
खराब मौसम और शरीर पड़ा सुन्न
यात्रा में बहुत सारी विपरीत परिस्थितियाँ थी। खास कर दक्षिणी सागर में हमेशा मौसम खराब रहता हैं। इस दौरान तीन तूफानों का सामना करना पड़ा।
57 डिग्री दक्षिण की ओर जाने पर तापमान 2 डिग्री तक पहुँच गई। शरीर सुन्न पड़ गए। इस दौरान नौका में एक छेद हो गया, जिससे पानी अंदर आने लगा। इससे कई इलेक्ट्रिकल उपकरण खराब हो गया और शॉर्ट सर्किट हो गया। इसे ठीक करने में काफी वक्त लगा।
अंटार्कटिका में नौकायन के दौरान 1 डिग्री तापमान और 90 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से आ रही हवा, दोनों का सामान एक साथ करना पड़ा। इससे बचने के लिए 7 लेयर वाली कपड़े पहने थे। पूरे दक्षिणी सागर में नौकायन के दौरान इसे पहनना पड़ा। कभी-कभी गैस स्टोव को लेकर हाथ गरम करना पड़ा।
कभी कभी ऐसी परिस्थिति भी आई थी जब हवा बिल्कुल भी नहीं चलता था। नौका पूरी तरह नीचे करके drift होता रहता था। इस वक्त सब्र की काफी जरूरत होती है।
सबसे यादगार पल रहा Comet A3 देखना
दोनों कमांडर कहती हैं कि दुर्लभ धुमकेतु Comet A3 देखना उनके लिए सबसे अद्भुत पल था। ये करीब 80000 साल बाद आता है। इसे दोनों ने एक हफ्ते तक आसमान में इसे चमकते देखा और मोबाइल के कैमरे में कैद किया। इसको लेकर दोनों काफी उत्साहित दिखीं। समुद्र से दिख रहा नीला आसमान और उसमें अद्भुत खगोलीय नजारा देखने का मौका मिलने पर ये ईश्वर को भी धन्यवाद कर रही हैं।
यात्रा में 4 जगहों पर रुकी नौका
पूरे 8 महीने में 4 जगहों पर नौका रूकी थी। ये जगह हैं- ऑस्ट्रेलिया, न्यूजीलैंड, दक्षिण अफ्रीका और पोर्ट स्टेनली। हर एक जगह पर 14 दिनों तक ये रुकी थीं। इस दौरान पूरी दुनिया में इनलोगों ने भारतीय को देखा। लेफ्टिनेंट कमांडर दिलना का कहना है कि भारतीय हर जगह बहुत एक्टिव और आत्मविश्वास से भरे मिले। भारत का नाम रौशन कर रहे हैं। हमारी जो सफलता है वो उसे अपनी सफलता मानते हैं।
लेफ्टिनेंट कमांडर रूपा का कहना है कि हर जगह उन्हें अलग-अलग अनुभव मिला। जैसे ऑस्ट्रेलिया में, वेस्टर्न ऑस्ट्रेलिया पार्लियामेंट के स्पीकर ने मुलाकात की। उन्होंने काफी मोटिवेट किया। वहीं न्यूजीलैंड में माउरी लोगों ने स्वागत किया। उनके मन में भारतीय संस्कृति को लेकर काफी इज्जत था।
पोर्ट स्टेनले एक रिमोट आइसलैंड है, जो दक्षिण अमेरिका के पास है। वहाँ पर जनसंख्या मात्र 3500 है। लेकिन वहाँ हमने एक मिनी इंडिया देखा। वहाँ 45 भारतीय थे। उन्होंने अपने जैसा समझा और वहाँ घर जैसा महसूस हुआ।
देश का नाम रौशन करें बेटियाँ- लेफ्टिनेंट रूपा
पीएम मोदी ने जब पूछा कि देश के बेटियों के लिए क्या कहना चाहेंगी, तो लेफ्टिनेंट कमांडर रूपा ने कहा कि अगर दिल लगाकर मेहनत किया जाए, तो इस दुनिया में कुछ भी असंभव नहीं है। वहीं लेफ्टिनेंट कमांडर दिलना का कहना है कि आप कहाँ से हैं, कहाँ पैदा हुए, इससे कोई फर्क नहीं पड़ता। हम चाहते हैं कि भारत के युवा और महिलाएँ बड़े-बड़े सपने देखें और भविष्य में महिलाएँ बड़ी संख्या में डिफेंस ज्वाइंन करें। स्पोर्ट्स और एडवेंचर में शामिल हों और देश का नाम रौशन करें।
पीएम मोदी ने देश की इन दो बेटियों से कहा कि निश्चित तौर पर आप दोनों की मेहनत, सफलता और एचिवमेंट देश के युवाओं और युवतियों को प्रेरित करेगी। देश का झंडा तिरंगा इसी तरह लहराते रहिए।


