संभल में अवैध तरीके से बनाए गए मस्जिद, मदरसे और मैरिज हॉल को प्रशासन ने अल्टीमेटम दिया है। इनका निर्माण सरकारी जमीनों पर किया गया है। यहाँ तक कि तालाब की जमीन पर मदरसे के मुतवल्ली ने अपना घर भी बना लिया है।
इसका जायजा लेने शनिवार (13 सितंबर 2025) को प्रशासनिक अधिकारी के साथ राजस्व विभाग की टीम पहुँची। जाँच में सरकारी जमीन पर पाए गए मस्जिद, मदरसे समेत कई इमारतों पर लाल निशान लगा दिया गया और हफ्ते भर में इसे खाली करने का अल्टीमेटम दिया गया।
नोटिस में सरकारी जमीन पर अवैध कब्जों को 20 सितंबर तक हटा लेने को कहा गया है, वरना इन्हें ध्वस्त करने की बात कही गई है। दरअसल इस इलाके में कई गाँवों में सरकारी जमीन पहले खाली पड़ी थी। इनपर धीरे-धीरे कब्जा किया गया। पहले कच्चा ढाँचा खड़ा किया गया और फिर पक्की इमारत बना ली गई। इसको देखते हुए अवैध कब्जे को हटाने की मुहिम चल रही है। कई जगहों पर अवैध कब्जे को हटा भी दिया गया है।
प्रशासनिक अधिकारियों ने किया चिन्हित
तहसीलदार धीरेन्द्र सिंह के नेतृत्व में टीम राया बुजुर्ग गाँव और सलेमपुर सलार गाँव का दौरा किया। तहसीलदार के मुताबिक, सलेमपुर सलार उर्फ हाजीपुर गाँव में सरकारी जमीन पर अवैध कब्जा किया गया है। इसको लेकर स्थानीय कोर्ट में धारा 67 के तहत केस दायर था।
कोर्ट ने 2 सितंबर 2025 को सरकारी जमीन से अवैध कब्जा हटाने का आदेश दिया था। लेकिन अभी तक इसे नहीं हटाया गया है। इसलिए ऐसे जमीन पर बनी इमारत पर लाल निशान लगाए गए हैं। गाँव राया बुजुर्ग में गड्ढों वाली सरकारी जमीन पर मस्जिद और तालाब की भूमि पर मदरसे और दो घर बनाए गये हैं। इस घर पर मस्जिद के मुतवल्ली का कब्जा है।
सलेमपुर सलार गाँव में सड़क किनारे की सरकारी जमीन को चारदिवारी से घेर लिया गया है। सामने 4-5 दुकानें हैं और अंदर जाने पर ग्राउंड फ्लोर पर 4 से 5 कमरे बने हैं। पहली मंजिल पर एक कमरा और बरामदा है। इमारत को देखकर ये नहीं लगता कि मदरसा या पढ़ाई-लिखाई का काम यहाँ होता होगा। यहाँ काफी गंदगी थी। इससे पता चलता है कि कोई व्यावसायिक काम यहाँ से किया जा रहा है।
गाँव के सरकारी बंजर भूमि पर एक मस्जिद का निर्माण कर दिया गया है। अब इन इमारतों को ध्वस्त करने के लिए एक हफ्ते का समय दिया गया है।
तालाब की जमीन पर बना बैक्वेट हॉल
राया बुजुर्ग गाँव में तालाब की जमीन पर अवैध कब्जा कर मदरसा निर्माण किए जाने की बात सामने आई थी। लेकिन जब जाँच करने के लिए प्रशासनिक टीम पहुँची तो उन्हें वहाँ एक बैक्वेट हॉल मिला। इसे भी हटाने का नोटिस थमा दिया गया है।
प्रशासनिक अधिकारियों ने जब गाँव में पैमाइश का काम शुरू किया, तो खलबली मच गई। वहाँ बड़ी संख्या में लोग जमा हो गए, लेकिन अधिकारियों ने सफलतापूर्व जमीन मापने का काम पूरा किया और अवैध इमारतों पर लाल निशान लगाए।
एक माफी के लिए कोई कितना इंतजार कर सकता है, 1 हफ्ते, 1 महीने या 1 साल? उत्तर प्रदेश की कुंडा विधानसभा सीट से बाहुबली विधायक रघुराज प्रताप सिंह उर्फ राजा भैया ने एक अदद माफी के लिए 27 वर्षों का इंतजार किया है। वो भी एक समाचार पत्रिका से।
क्या है मामला?
राजा भैया ने सोमवार (15 सिंतबर 2025) को X पर एक पोस्ट कर बताया कि उन्हें लेकर लिखी गई एक खबर के लिए ‘आउटलुक’ मैगजीन ने 27 वर्ष बाद माफी माँगी है। राजा भैया ने अपने पोस्ट में इस माफीनामे के पीछे की पूरी कहानी भी साझा की है।
उन्होंने लिखा, “27 वर्ष पहले, देश की एक बड़ी पत्रिका Outlook ने हमारा साक्षातकार लिया पर बहुत ही अभद्र भाषा में उसे छापा, लोग उसे पढ़के हतप्रभ थे कि इतनी बड़ी पत्रिका ऐसी भाषा का उपयोग कैसे कर सकती है।”
राजा भैया ने आगे बताया, “हमारे एक समर्थक से रहा नहीं गया और उन्होंने Outlook पर न्यायालय में मानहानि का मुकदमा कर दिया, न्यायचक्र चलता रहा और समय बीतता गया, अब फैसले का दिन निकट आ गया था।”
भैया ने लिखा, “उन्हें लगा कि निर्णय सत्य के पक्ष में होगा और उनके विपरीत जायेगा तो उन्होंने हमसे सम्पर्क किया, मुकदमा वापस लेने का अनुरोध किया और माफीनामा छापने पर सहमत हुए।”
उन्होंने लिखा, “उन्होंने उक्त माफीनामा छापा जो आपके सामने प्रस्तुत कर रहा हूं। यद्यपि 27 वर्ष बाद माफीनामा छापने से सार्वजनिक जीवन में हुई हानि की भरपाई नहीं की जा सकती है। मीडिया के लिए बहुत आसान है किसी को ‘हीरो’ या ‘खलनायक’ बना देना, खासकर मुझे लेकर बहुत ही अनर्गल बातें छप चुकी हैं, लेकिन कहते हैं ना कि साँच को आँच नहीं। सत्यमेव जयते।”
बात आज से 27 वर्ष पहले की है, देश की एक बड़ी पत्रिका Outlook ने हमारा साक्षातकार लिया पर बहुत ही अभद्र भाषा में उसे छापा, लोग उसे पढ़के हतप्रभ थे कि इतनी बड़ी पत्रिका ऐसी भाषा का उपयोग कैसे कर सकती है। किसी की नकारात्मक छवि बनाना मीडिया के लिए बड़ा आसान काम है।
जिस पूरी खबर को लेकर बवाल हुआ था उसकी जानकारी ‘आउटलुक’ ने अपने इस माफीनामे में दी है। आउटलुक ने लिखा है, “27 साल पहले, आउटलुक पत्रिका के 17 नवंबर 1997 के अंक में कुंवर रघुराज प्रताप सिंह ‘राजा भैया’ के बारे में ‘आज का मंत्री, कुंडा का गुंडा राजा’ शीर्षक से एक लेख प्रकाशित हुआ था।”
‘आउटलुक’ ने लिखा, “हमें खेद है कि इस लेख में ऐसे सुझाव और अभिव्यक्तियाँ शामिल थीं जिनसे पिछले कुछ वर्षों में उनकी प्रतिष्ठा को काफी नुकसान पहुँचा होगा। शीर्षक में ‘गुंडा’ शब्द का प्रयोग विशेष रूप से अनुचित था और इसने राजा भैया के बारे में झूठा नैरेटिव बनाया, इन्हें अब हम पूरी तरह से अनुचित मानते हैं।”
आउटलुक का माफीनामा
पत्रिका ने अपनी खबर में पेश की गई राय को वापस लेते हुए कहा, “राजा भैया को खबर के प्रकाशन के कारण हुई परेशानी, पीड़ा, चोट और प्रतिष्ठा को पहुँची क्षति के लिए गहरा और गंभीर खेद व्यक्त करती है।” आउटलुक की वेबसाइट पर भी इस लेख का लिंक अब उपलब्ध नहीं है।
आज के दौर में सोशल मीडिया और मीडिया के कुछ हिस्से ऐसे हो गए हैं, जहाँ राष्ट्र विरोधी तत्वों को खुला मैदान मिला हुआ है। इनमें से एक प्रमुख नाम है आरफा खानम शेरवानी का। खुद को अवॉर्ड-विनिंग जर्नलिस्ट बताने वाली यह महिला ‘द वायर’ नामक वामपंथी प्रोपेगैंडा पोर्टल की सीनियर एडिटर है। लेकिन असलियत में वह इस्लामी कट्टरपंथ और वामपंथी विचारधारा के मिश्रण से भारत को कमजोर करने का काम करती नजर आती है।
आरफा खानम शेरवानी की मिक्स्ड विचारधारा हमेशा से राष्ट्र विरोधी रही है, जो देश की एकता, हिंदू संस्कृति और राष्ट्रीय सुरक्षा को निशाना बनाती है। इसी तरह इसकी इस्लामी कट्टरपंथ भी भारत की संप्रभुता के खिलाफ काम करता है।
आरफा खानम शेरवानी इन दोनों का ऐसा कॉकटेल है, जो हर मौके पर भारत विरोधी ट्वीट्स से सुर्खियाँ बटोरती है। शेरवानी की प्रोफाइल से साफ दिखता है कि वह भारत सरकार, हिंदू समुदाय और राष्ट्रीय हितों के खिलाफ लगातार जहर उगलती रहती है।
आरफा खानम शेरवानी ने रविवार (14 सितंबर 2025) को एक्स पर लिखा, “ध्यान से सुनिए, उन दो गुजरातियों के लिए हर भावना, हर धर्म से बड़ा धंधा है। अब समझना और सहना आसान होगा।” यह ट्वीट भारत-पाकिस्तान क्रिकेट मैच के संदर्भ में है, जहाँ वह क्रिकेट प्रशासकों की आड़ में देश के शीर्ष नेताओं पर हमला बोल रही है।
पहले वह मैच न खेलने पर खेल भावना की दुहाई दे रही थीं, लेकिन मैच होने पर गुजरातियों को निशाना बनाया। कमेंट बॉक्स में उनके पुराने ट्वीट्स के स्क्रीनशॉट्स हैं, जो पाकिस्तान समर्थन और युद्ध विरोधी हैं। यह ट्वीट न सिर्फ भारत विरोधी है, बल्कि गुजराती समुदाय को टारगेट करके हिंदू विभाजन की कोशिश है।
ध्यान से सुनिये, उन दो गुजरातियों के लिए हर भावना, हर धर्म से बड़ा धंधा है। अब समझना और सहना आसान होगा।
आरफा की एक्स प्रोफाइल (@khanumarfa) को स्कैन करें तो दर्जनों ऐसे ट्वीट्स मिलते हैं, जो भारत सरकार और राष्ट्रीय हितों के खिलाफ हैं। ऐसा ही विवाद 24 अप्रैल 2021 का है, जब उसने सीधे ‘पाकिस्तान जिंदाबाद’ लिखा। यह ट्वीट भारत-पाकिस्तान तनाव के बीच आया, जब पूरा देश पाकिस्तान को दुश्मन मान रहा था। राष्ट्रवादी विचार से यह खुला तौर पर देशद्रोह है, क्योंकि पाकिस्तान ने हमेशा भारत पर आतंकी हमले करवाए हैं। आरफा का यह स्टैंड साफ करता है कि वह पाकिस्तान की तरफदारी करती हैं।
आरफा के ट्वीट का वायरल हो रहा स्क्रीनशॉट
फिर आया 2025 का ऑपरेशन सिंदूर। यह भारतीय सेना का एक सफल मिशन था, जिसमें जम्मू-कश्मीर के पहलगाम हमले का बदला लेते हुए पाकिस्तान में 9 आतंकी ठिकानों को तबाह किया गया। 28 निर्दोषों की मौत, जिनमें 24 हिंदू थे, का बदला लिया गया। लेकिन आरफा ने एक्स पर विलाप शुरू कर दिया: “Peace is Patriotism. War is destruction. Borders don’t bleed – people do. Stop the war. Deescalate Now.” यह ट्वीट पाकिस्तानी प्रोपेगैंडा का आईना है।
यही नहीं, एक पैनल डिस्कशन में आरफा ने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर के दौरान मारे गए लोग आतंकी नहीं, बल्कि आम नागरिक थे। उसने ऑपरेशन के नाम ‘सिंदूर’ पर भी उंगली उठाई, जो हिंदू परंपरा का प्रतीक है। पाकिस्तान के लोगों को ‘परेशान’ बताकर उसने दुश्मन देश का एजेंडा चलाया।
शिवलिंग को डस्टबिन बताने से गौमूत्र पर तंज तक, हिंदू विरोध से भरी है X टाइम लाइन
आरफा की प्रोफाइल में हिंदू विरोधी कंटेंट भरा पड़ा है। 1 अगस्त 2024 को उन्होंने ‘बाहुबली’ फिल्म का आइकॉनिक पोस्टर शेयर किया, जहां प्रभास शिवलिंग उठा रहा है, लेकिन उन्होंने शिवलिंग को डस्टबिन से रिप्लेस कर दिया। कैप्शन था ‘विजन 2047’। यह हिंदू धर्म का अपमान है, जिसके खिलाफ पुलिस में शिकायत दर्ज हुई। राष्ट्रवादी नजरिए से, यह हिंदुत्व को कुचलने की कोशिश है। पहले भी उन्होंने भगवान राम को दलितों पर अत्याचार करने वाला कार्टून शेयर किया। ‘गौमूत्र’ और ‘गोबर’ पर तंज कसते हुए ट्वीट्स किए, जो पुलवामा हमलावर आदिल डार के शब्दों से प्रेरित हैं।
ऑपइंडिया की एक रिपोर्ट के अनुसार, 9 जून 2024 को रियासी में 2 साल के हिंदू बच्चे टीटू की हत्या पर आरफा चुप रहीं। लेकिन 2015 में सीरिया के मुस्लिम बच्चे एलन कुर्दी और 2016 में रोहिंग्या बच्चे की मौत पर मातम मचाया। दो दिन बाद भी टीटू पर कोई ट्वीट नहीं, बल्कि उसने पूछा कि संसद में एक भी मुस्लिम सांसद या मंत्री क्यों नहीं? यह ‘मुस्लिम ब्रदरहुड’ की थ्योरी है, जहाँ हिंदू पीड़ितों की अनदेखी होती है।
इसने 2022 में PFI जैसे इस्लामी संगठनों के इवेंट्स में स्पीच दी, जहाँ हिंदुत्व को खतरा बताया। 2023 में सिद्दीक कप्पन की रिहाई पर मुस्लिम विक्टिम कार्ड खेला था।
इन सब से साफ है कि आरफा हिंदू संस्कृति को नीचा दिखाती हैं, जबकि इस्लामी कट्टरता को बचाती हैं। राष्ट्रवादी विचार से, यह हिंदू फोबिया है, जो देश की सांस्कृतिक एकता को तोड़ता है।
इस्लामी प्रोपेगैंडा की प्रोपेगेंडा मशीनरी का हिस्सा है आरफा
आरफा खानम शेरवानी का जन्म उत्तर प्रदेश के एक मुस्लिम परिवार में हुआ था। वह अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी (एएमयू) की पूर्व छात्रा हैं, जो खुद एक ऐसा संस्थान है जहाँ से कई बार कट्टरपंथी विचारधारा को बढ़ावा मिलता देखा गया है।
एएमयू के संस्थापक सर सैयद अहमद खान को याद करते हुए आरफा ने कई बार ट्वीट किया है कि मुस्लिम समुदाय को उनके जैसे लीडर की जरूरत है। लेकिन सर सैयद अहमद खान वही शख्स थे, जिसने ‘टू नेशन थ्योरी’ का विचार दिया था, जिसके चलते भारत का बँटवारा हुआ। आरफा का यह स्टैंड साफ दिखाता है कि वह भारत की एकता से ज्यादा इस्लामी अलगाववाद को महत्व देती हैं।
आरफा खानम शेरवानी की प्रोफाइल स्कैन करने पर साफ है कि वह मौका परस्त हैं। कभी पाकिस्तान जिंदाबाद, कभी ऑपरेशन सिंदूर पर शांति की दुहाई, कभी हिंदू प्रतीकों का अपमान।
ऑपइंडिया ने उसके कई प्रोपेगैंडा को एक्सपोज किया है, जो अभी भी जारी है। राष्ट्रवादी भारत को ऐसे तत्वों से सावधान रहना चाहिए। सरकार को ऐसे लोगों पर कार्रवाई करनी चाहिए, ताकि देश की एकता बनी रहे। आरफा जैसे लोग ‘पोस्टर गर्ल’ नहीं, बल्कि प्रोपेगैंडा मशीन हैं, जो वामपंथी विचारधारा और इस्लामी कट्टरपंथ के जरिए भारत को कमजोर करना चाहती हैं। समय है कि सच्चाई सामने आए और राष्ट्रहित सर्वोपरि हो।
अमेरिका में सोशल मीडिया टिकटॉक बैन है। इस पर बैन की समयसीमा 17 सितंबर 2025 को पूरी हो रही है। इसको लेकर राष्ट्रपति ट्रंप ने अहम बयान दिया है। न्यू जर्सी में पत्रकारों से बात करते हुए ट्रंप ने कहा कि उन्हें नहीं पता कि वह समझौते के लिए समयसीमा को फिर से बढ़ाएँगे या नहीं क्योंकि यह पूरी तरह चीन पर निर्भर करता है।
राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा, “हो भी सकता है और नहीं भी। हम अभी TikTok पर बातचीत कर रहे हैं। हम इसे खत्म होने दे सकते हैं, या नहीं… मुझे नहीं पता। यह चीन पर निर्भर करता है।”
3 बार बढ़ चुकी है टिकटॉक बैन की समयसीमा
टिकटॉक पर बैन की समयसीमा 17 सितंबर 2025 को खत्म हो रही है। इसे अगर आगे बढ़ाया जाता है, तो ये चौथी बार होगी। अमेरिका ने टिकटॉक की कंपनी बाइटडांस को जनवरी 2025 तक इस लोकप्रिय सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म को बेचने या बंद करने का समय दिया था।
अगस्त 2025 में राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा था कि उनके पास ऐप के लिए अमेरिकी खरीदार हैं। अगर चीन कंपनी को बेचने के लिए तैयार है, तो वह समय सीमा को और बढ़ा सकते हैं।
राष्ट्रपति ट्रंप ने TikTok की मूल कंपनी बाइटडांस को धमकी दी थी कि अगर टिकटॉक को अमेरिका के हाथों नहीं बेचा गया, तो वे अमेरिका में इसपर प्रतिबंध लगा देंगे। मोबाइल ऐप को हर जगह से हटवा देंगे और ऐप के पुराने वर्जन को अपडेट नहीं किया जाएगा।
अमेरिका को राष्ट्रीय सुरक्षा, जासूसी का है डर
राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा है कि वह ऐप को बचाना चाहते हैं, क्योंकि 2024 के राष्ट्रपति चुनाव में युवा मतदाताओं को आकर्षित करने में ऐप ने मदद की। दरअसल दुनियाभर के नौजवान टिकटॉक पर ज्यादा हैं। उन्हें डर है कि अगर चीन की ऐप को अमेरिका में इस्तेमाल की इजाजत दी जाती है, तो राष्ट्रीय सुरक्षा को खतरा हो सकता है। अमेरिका की जासूसी हो सकती है, नौजवानों का निजी जानकारी लीक हो सकती है
TikTok के ‘एल्गोरिदम’ को अमेरिकी खरीदार के साथ साझा करने से पहले कंपनी को चीन की मंजूरी लेनी होगी। इसलिए सौदा अभी तक अटका हुआ है। 2025 की शुरुआत में TikTok को खरीदने पर बात हो रही थी। इसका अधिकांश स्वामित्व अमेरिकी निवेशकों के पास होता और वे उसका संचालन करते। हालाँकि, ट्रम्प की टैरिफ की वजह से इसे चीन ने मंजूरी नहीं दी।
ट्रम्प ने 20 जनवरी को राष्ट्रपति के रूप में अपना दूसरा कार्यकाल शुरू किया और TikTok की अमेरिकी संपत्ति की बिक्री या उसे बंद करने संबंधी कानून को लागू नहीं करने का फैसला किया। उन्होंने पहले समय सीमा को अप्रैल की शुरुआत तक, फिर मई से जून तक और तीसरी बार सितंबर तक बढ़ाया।
युवाओं को रोजगार प्रदान करने की दिशा महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने दो दिवसीय कौशल महोत्सव का आयोजन किया है, जिसकी शुरुआत मंगलवार (16 सितंबर 2025) से होगी। दो दिवसीय महोत्सव लखनऊ स्थित कॉल्विन तालुकदार्स कॉलेज में होगा। इस महोत्सव से जुड़ने के लिए युवा ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन करवा सकते हैं।
कौशल महोत्सव में युवाओं की शैक्षिक योग्यता और साक्षात्कार के आधार पर ₹15000 से ₹25000 तक की सैलरी पर नौकरी मिलेगी। मंगलवार (16 सितंबर 2025) से शुरू हो रहे महोत्सव का उद्घाटन स्वयं मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और कौशल विकास विभाग और उद्यमशीलता राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) जयंत चौधरी करेंगे।
भारत सरकार के माननीय रक्षा मंत्री एवं लखनऊ के लोकप्रिय सांसद श्री राजनाथ सिंह जी की प्रेरणा से कौशल विकास एवं उद्यमशीलता मंत्रालय द्वारा 16-17 सितम्बर को भव्य लखनऊ कौशल महोत्सव 2025 का आयोजन किया जा रहा है, जो कॉल्विन तालुकदार्स कॉलेज ग्राउंड, आईटी चौराहा पर प्रातः 8 बजे से… pic.twitter.com/3mfakMtSQc
कौशल विकास विभाग और उद्यमशीलता मंत्रालय के सहयोग से आयोजित इस महोत्सव में लगभग 40 हजार युवाओं को रोजगार दिलाने की योजना है। इसमें 80 से अधिक कंपनियाँ भाग लेंगी, जो कि 30 से ज्यादा सेक्टर में नौकरी के अवसर देंगी। इनमें भी ऑटोमोबाइल, रिटेल, हेल्थकेयर, IT, बैंकिंग, इलेक्ट्रॉनिक्स, पर्यटन, कृषि समेत 11 सरकारी कंपनियाँ हैं, जो अप्रेंटिस के लिए भर्ती करेंगी।
कौशल विभाग के मुताबिक, साल 2025 का कौशल महोत्सव विशेष है क्योंकि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 75वें जन्मदिवस के अवसर पर युवाओं को 7500 से अधिक रोजगार के अवसर उपलब्ध कराए जा रहे हैं। कौशल विभाग के अनुसार, “यह केवल एक महोत्सव नहीं बल्कि युवाओं के उज्जवल भविष्य की ओर बढ़ाया गया सशक्त कदम है।”
पहलगाम आतंकी हमले के बाद पहली बार भारत और पाकिस्तान के बीच क्रिकेट का मुकाबला खेला गया। इस मैच में भारत ने पाकिस्तान को करारी हार दी। लेकिन मुकाबले की सबसे खास बात थी, भारतीय टीम का पाकिस्तान की टीम से हाथ ना मिलाना। अब इस No Handshake पर पाकिस्तानी क्रिकेटर और मुल्क की आवाम तिलमिला गई है।
पाकिस्तानी क्रिकेट बोर्ड (PCB) ने तो अपना रोना लेकर एशियन क्रिकेट काउंसिल (ACC) तक पहुँच गए, जिसके अध्यक्ष मोहसिन नकवी खुद पाकिस्तान से हैं। PCB ने एक बयान में कहा, “मैच रेफरी एंडी पाइक्रॉफ्ट ने टॉस के समय कप्तान सलमान अली आगा से भारतीय टीम के कप्तान से हाथ न मिलाने को कहा था। पाकिस्तानी टीम मैनेजमेंट ने इस व्यवहार को खेल भावना के विरुद्ध बताते हुए अधिकारिक विरोध दर्ज कराया है।”
भारतीय मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, पाकिस्तानी टीम से हाथ मिलाने से बचने का टीम इंडिया का फैसला प्रशंसकों के लिए भले ही एक नई बात हो लेकिन मैच रेफरी एंडी पाइक्रॉफ्ट को इसकी जानकारी पहले ही दे दी गई थी। मैच रेफरी ने भी पाकिस्तान को भारत के इरादे के बारे में पहले ही बता दिया था और सलमान अली आगा को भी सूर्यकुमार और अन्य भारतीय खिलाड़ियों से हाथ मिलाने से बचने की सलाह दी थी।
पाकिस्तानी क्रिकेट जगत में बौखलाहट
पाकिस्तानी के क्रिकेट जगत से भी भारतीय टीम के No Handshake पर खूब प्रतिक्रियाएँ सामने आईं। पूर्व पाकिस्तानी क्रिकेटर शोएब अख्तर जो भारत के खिलाफ जहर उगलते हैं, उनको यह घटना काफी दुखद लगी और उनका दिल पसीज गया।
शोएब अख्तर ने कहा, “यह निराशाजनक और अवाक है, यह दुखद है, पता नहीं क्या कहूँ। इस पर राजनीति मत करो। हमने तुम्हारे बारे में अच्छी बातें कही हैं, बस हाथ मिलाओ यार, क्रिकेट का खेल है। थोड़ी शालीनता दिखाओ। घर-घर में भी झगड़े होते हैं लेकिन हाथ न मिलाकर बात को आगे मत बढ़ाओ।”
वहीं, मैच के बाद सेरेमनी में शामिल न होने के पाकिस्तानी टीम के कप्तान सलमान आगा के फैसले को शोएब अख्तर ने सही बताया, “वो नहीं गए, ठीक किया। बहुत अच्छा।”
पाकिस्तानी क्रिकेट टीम के कोच माइक हेसन ने कहा, “हम हाथ मिलाने के लिए आगे बढ़े थे लेकिन तब तक वे ड्रेसिंग रूम जा चुके थे। यह मैच का निराशाजनक अंत था। हम अपने खेल से पहले ही निराश थे लेकिन हम हाथ मिलाने के लिए तैयार थे।”
पाकिस्तान के एक और पूर्व क्रिकेटर कामरान अकमल ने भी एक डिबेट के दौरान कहा, “हम इस काबिल नहीं हैं कि शीर्ष की पाँच छह टीमों के साथ खेल पाएँ। सबसे निचले पायदान पर रहने वाली टीमों जैसे बांग्लादेश के साथ खेलते हुए हम अच्छे लगते हैं।”
पाकिस्तान मीडिया ने बताया ‘छोटी हरकत’
भारतीय टीम के कैप्टन सूर्य कुमार ने मुकाबले की शुरुआत में टॉस के वक्त भी पाकिस्तान के कैप्टन सलमान से हाथ मिलाने से परहेज किया। इसके बाद मैच के अंत में भारत की जीत के बाद खिलाड़ी बिना हाथ मिलाए पाकिस्तान टीम के मुँह पर ड्रेसिंग रूम का दरवाजा बंद कर चले गए। उधर, पाकिस्तानी खिलाड़ी स्टेडियम में इंतजार करती रही।
अब भारतीय टीम की इस No Handshake मोमेंट पर पाकिस्तानी मीडिया विश्लेषण तैयार कर रही है। कुछ क्रिकेट एक्सपर्ट्स को डिबेट में बिठाकर भारतीय खिलाड़ियों को कम आँक रहे हैं। कुछ पाकिस्तानी एक्सपर्ट ने तो इसे भारतीय क्रिकेट टीम की ‘छोटी हरकत’ करार दिया।
ऐसे ही एक पाकिस्तानी एक्सपर्ट, जो भारत-पाकिस्तान मुकाबले का एनालिसिस करने बैठे थे, वो कहते हैं, “आप (भारतीय क्रिकेट टीम) हाथ नहीं मिलाएँगे तो क्या हीरो बन जाएँगे। जो क्रिकेट को जानता है वो कभी इसकी सराहना नहीं करेगा।”
No handshake by Team India ?? Pakistan stood there like rejected applicants waiting for sympathy… but our boys walked straight off, slammed the dressing room doors, and said: “No entry for losers.”
This is not cricket, this is belt treatment for Porkis both on the pitch and… pic.twitter.com/r1ZXqU4YPU
अन्य पाकिस्तानी क्रिकेट एक्सपर्ट तो यह तक बोलने लगे, “इससे क्रिकेट की बेकदरी हुई है। बेचारे प्लेयर्स की रेप्युटेशन खराब हो रही है। मैं इसे छोटी हरकत समझता हूँ। वो (भारतीय क्रिकेट टीम) बेचारे मजबूर हुए हैं ऐसा करने पर, उन पर दबाव था ये करने का।
सोशल मीडिया पर पाकिस्तान आवाम की प्रतिक्रिया
जहाँ पाकिस्तानी क्रिकेटर और मीडिया ने भारतीय टीम के No Handshake पर खूब रोना रोया। वहीं सोशल मीडिया पर पाकिस्तानी यूजर्स ने भारत-पाकिस्तान के बीच खराब रिश्ते को और बढ़ावा दिया। सोशल मीडिया पर एक तरफ पाकिस्तान टीम को दरियादिल दर्शाया गया और भारतीय टीम को दुश्मन बताया गया।
निर्बाज रमजान नाम की यूजर ने कहा, “मैच के बाद हाथ नहीं मिलाया। पाकिस्तान टीम इंडिया के हाथ मिलाने का इंतजार कर रही थी लेकिन वे नहीं आए।” इस रिएक्शन में पाकिस्तानी क्रिकेट टीम को ‘महान’ बनाकर पेश किया गया।
मर्यम नाम की यूजर ने एक्स पर लिखा, “भारतीय कप्तान ने टॉस और मैच के बाद हाथ मिलाने से इनकार कर दिया, जो पाकिस्तान का साफतौर पर अपमान है। फिर भी पंजाबी कहते हैं कि “भारत नहीं, अफगनिस्तान दुश्मन है” जबकि अफगान टीम ने हमारी टीम का गर्मजोशी से स्वागत किया। अजीब बात है कि हकीकत हर बार उन्हें गलत साबित करती है।”
Indian captain refused handshake at toss & post-match, clear insult to Pakistan. Yet Punjabis say ‘India isn’t enemy, Afghans are,’ while Afghan team welcomed ours warmly. Funny how reality proves them wrong every time.#PakVsIndpic.twitter.com/3qXP3kFQKz
सिम्बा नाम से एक्स यूजर ने कहा, “क्रिकेट को हमेशा से सज्जनों का खेल कहा जाता रहा है लेकिन आज भारत ने एक साधारण हाथ मिलाने से इनकार करके इसके इमोशन पर दाग लगा दिया, जो स्पोर्ट्समैनशिप के बिल्कुल खिलाफ है। इसके विपरीत, पाकिस्तान ने शालीनता से आगे बढ़कर साबित कर दिया कि असल में दिल किसका होता है। आगे बढ़ो, लड़कों, दिल जीतते रहो।”
Cricket has always been called the gentleman’s game, but today India stained its spirit by refusing a simple handshake which is against the sportsmanship btw . In contrast, Pakistan rose above with grace, proving who truly carries the bigger heart. You go boys keep winning hearts pic.twitter.com/7EpzIpPvtj
जहानजैब दुर्रानी नाम की यूजर ने कहा, “मैच के बाद हाथ मिलाने से इनकार करके और दरवाजा बंद करके, भारतीय टीम ने दिखा दिया कि वे कितने बेढंगे और तुच्छ हैं। छोटे दिल, छोटा दिमाग!!! ठीक यही वजह है कि जिन्ना ने कहा था कि हमारे बीच कुछ भी समान नहीं है। शुक्र है कि हमने अपनी आजादी ले ली और हमें उनके साथ नहीं रहना पड़ रहा। छोटे लोग हैं।”\
जहानजैब दुर्रानी के कमेंट का स्क्रीनशॉट
भारतीय खिलाड़ियों के No Handshake ने दर्शाया देशप्रेम
भारतीय टीम के हाथ ना मिलाने पर पाकिस्तान ने रोना शुरू कर दिया। इससे साफ नजर आता है कि पाकिस्तान अब भी भारत के सामने झुका हुआ है। भारतीय टीम का रवैया पाकिस्तान को ‘छोटी हरकत’ लगा, तो मुल्क का आतंकी को पनाह देना किस हद तक सही है। शायद पाकिस्तान भूल गया है कि भारत का यह रवैया देशप्रेम है, ये उन पीड़ितों का सम्मान है, जिन्होंने पहलगाम आतंकी हमले में अपनी जान गवा दी। वही हमला, जिसके बाद भारत ने ऑपरेशन सिंदूर से पाकिस्तान को शिकस्त दी।
भारतीय क्रिकेट टीम के कोच गौतम गंभीर ने भी इस हैंडशेक विवाद पर बात करते हुए कहा, “यह मैच हमारे लिए महत्वपूर्ण था क्योंकि हम पहलगाम हमले के पीड़ितों और उनके परिवारों के साथ एकजुटता दिखाना चाहते थे और उन्होंने जो कुछ भी सहा, उसके लिए भी। इससे भी महत्वपूर्ण बात यह है कि हम भारतीय सेना को उनके सफल ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के लिए उन्हें धन्यवाद देना चाहते हैं। हम अपने देश को गौरवान्वित और खुश करने की कोशिश करेंगे।”
टीम के कप्तान सूर्य कुमार यादव ने भी मैच के बाद दिए बयान में कहा, “पहलगाम आतंकी हमले के पीड़ित परिवारों के साथ खड़े हैं, हम अपनी एकजुटता व्यक्त करते हैं और इस जीत को आर्म्ड फोर्सेस को समर्पित करना चाहते हैं।
सूर्या ने पाकिस्तान के खिलाड़ियों संग हाथ ने मिलाने की वजह भी स्पष्ट की। उन्होंने कहा, “हमारी सरकार और BCCI पूरी तरह से एकमत थे। हमने फैसला लिया कि हम सिर्फ खेल खेलने आए हैं और पाकिस्तान को मुंहतोड़ जवाब दिया।
देशप्रेम में भारतीय खिलाड़ियों ने पाकिस्तानी टीम से हाथ नहीं मिलाया। इसके बावजदू अगर पाकिस्तान इसे ‘छोटी हरकत’ समझता है तो समझता रहे। लेकिन भारत द्वारा पाकिस्तान के किसी भी ‘शांतिप्रिय’ बयान को माना नहीं जाएगा। देशप्रेम में भारत अब पाकिस्तान को बॉयकॉट भी करना चाहे तो करेगा, चाहे वह क्रिकेट जैसे लोकप्रिय खेल में ही क्यों न हो। पाकिस्तान और भारत बहुत अलग हैं।
सोशल मीडिया इंफ्लुएंसर वन्नू डी ग्रेट ने इंस्टाग्राम पर वीडियो पोस्ट कर इंसाफ की गुहार लगाई है। उसका कहना है कि वह इंस्टाग्राम इंफ्लुएंसर और यूट्यूबर मनी मेराज के साथ काम करती थी। मनी मेराज ने उसे अपने प्यार में फँसाया। उसका शारीरिक शोषण किया। धर्म परिवर्तन करा कर निकाह किया। अब उसे धोखा देकर दूसरी बार निकाह करने जा रहा है।
पीड़िता ने अपने वीडियो में कहा है, “वह कहता था कि बीवी हो, तुम्हारे साथ जबरदस्ती नहीं करूँगा, तो किसके साथ करूँगा।” रोते हुए अब वह कह रही है कि उसके साथ धोखा हुआ है, क्योंकि मनी मेराज दूसरी बार निकाह करने जा रहा है। मनी मेराज का फोन भी स्विच ऑफ है।
मुस्लिम यूट्यूबर 9 सितंबर 2025 से फरार है। पीड़िता का कहना है कि जब उसने आरोपित के परिजनों से मिलने बिहार के मुजफ्फरपुर पहुँची और मिली, तो उसे डराया-धमकाया गया। यूट्यूबर के अब्बू ने कहा कि पुलिस और मुखिया उनकी तरफ है और वो वही करेंगे, जो उन्हें कहा जाएगा।
इंस्टाग्राम पर वन्नू डी ग्रेट ने कहा है, “जो आरोप लगाए हैं, उसके सारे साक्ष्य मेरे पास मौजूद हैं। उसे किस तरह से यूट्यूबर मनी मेराज ने अपने प्रेम में फँसाया और चुपके से निकाह किया। लेकिन अब उसे धोखा दे रहा है। ” इस्लाम कबूल करने को लेकर भी अब वह पछता रही है। उसका कहना है, “मैंने गलती की गलत इंसान पर विश्वास किया और इस्लाम कबूल करके निकाह कर लिया। मेरी सजा तो मुझे मिल गई है, लेकिन मनी मेराज की सजा अब आप लोग या कानून तय करेगा।”
वह खुद कह रही है कि एक मुस्लिम लड़के से निकाह करने से पहले कुछ हिंदुओं ने उसे जिहादियों से दूर रहने की सलाह दी थी, लेकिन वह नहीं समझी और अब उसे अपने किए का अंजाम भुगतना पड़ रहा है।
इंस्टाग्राम इंफ्लोएंसर मनी मेराज के 7.1 मिलियन फॉलोअर्स हैं। वह खुद को एक्टर, डांसर, कॉमिडियन और गायक कहता है। वह भोजपुरी फिल्मों में अपनी किस्मत आजमा रहा है। यूट्यूब पर उसके 10k फोलोअर्स हैं।
बिहार के रोहतास जिले के सासाराम में शिक्षण संस्थान में जबरन धर्मांतरण और रेप के मामले का खुलासा हुआ है। इंद्रपुरी के सिकरिया गाँव में स्थित जेम्स इंग्लिश स्कूल और उससे जुड़े जेम्स टेलरिंग इंस्टीट्यूट में धर्मांतरण और नाबालिग बच्चियों के यौन शोषण की घटना सामने आई है।
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, यह खुलासा रोहतास जिला बाल कल्याण समिति की जाँच में हुआ है। समिति ने हाल ही में स्कूल परिसर की जाँच की थी और अपनी रिपोर्ट में गंभीर आरोप लगाए हैं। रिपोर्ट भारत सरकार के गृह सचिव, डीएम समेत कई अधिकारियों को भेजी गई है और उच्चस्तरीय जाँच की सिफारिश की गई है।
रिपोर्ट्स के मुताबिक, जाँच के दौरान समिति को पता चला कि जेम्स टेलरिंग इंस्टीट्यूट में गरीब परिवार के बच्चों को झांसा देकर लाया जाता था और उनका धर्मांतरण करा दिया जाता था।
मामला कैसे आया सामने?
27 अगस्त 2025 को गया जिले की एक किशोरी लापता हो गई थी। उसकी माँ ने 30 अगस्त को इंद्रपुरी थाने में FIR दर्ज कराई। इसके बाद बाल कल्याण समिति ने 8 सितंबर 2025 को स्कूल परिसर में जाँच की। जाँच टीम में समिति के अध्यक्ष संतोष कुमार, सदस्य ददन पांडेय, गायत्री कुमारी, इंद्रपुरी की थानाध्यक्ष माधुरी कुमारी और प्रधान प्रोबेशन पदाधिकारी प्रशांत सिंह विष्ट शामिल थे।
जब समिति के लोग जेम्स टेलरिंग इंस्टीट्यूट पहुँचे तो वहाँ 7-8 बच्चियों को सिलाई सिखाई जा रही थी। जाँच के दौरान बच्चियों का नामांकन रजिस्टर, हाजिरी पंजी या अन्य कोई वैध दस्तावेज नहीं मिला। संस्था कब से चल रही है, किस आधार पर बच्चियों को रखा गया है इसका भी कोई संतोषजनक जवाब नहीं मिला।
इस दौरान टीम ने देखा कि एक लड़की जोर-जोर से रो रही थी और दो लोग उसे खींचकर ले जा रहे थे। पूछने पर कहा गया कि उसके पेट में दर्द है। बताया गया कि वह ऐसे ही करती रहती है। इंद्रपुरी थानाध्यक्ष व समिति सदस्य गायत्री कुमारी ऊपर गई। लड़की को चुप कराकर नीचे आ गईं।
इसके बाद लड़की को पीटा जाने लगा। टीम ने उसे रेस्क्यू कर गंभीर अवस्था में इलाज के लिए भेजा, लेकिन डॉक्टर ने इलाज करने से मना कर दिया। इसके बाद उसे समिति में लाया गया। महिला काउंसलर से बात करने पर लड़की ने बताया कि चार लोगों ने उसके साथ रेप किया था। मेडिकल जाँच के बाद उसे बालिका गृह भेजा गया।
आगे की कार्रवाई
9 सितंबर 2025 को समिति की सदस्य गायत्री कुमारी की निगरानी में जिला बाल संरक्षण इकाई, चाइल्ड हेल्पलाइन और इंद्रपुरी थाना अध्यक्ष की टीम ने वहाँ से कुल सात बच्चियों को मुक्त कराया। समिति ने बताया कि इन सभी बच्चियों को बालिका गृह में शिफ्ट कर दिया गया है।
टीम द्वारा दी गई रिपोर्ट में बच्चियों के बयान दर्ज हैं। उनमें से कई बच्चियों ने नामांकन फॉर्म में जो जानकारी दी थी, उससे यह संदेह हुआ कि वहाँ धर्मांतरण से जुड़ी गतिविधियाँ चल रही थीं। इस आधार पर समिति ने जिलाधिकारी से माँग की है कि एक उच्चस्तरीय जाँच समिति बनाई जाए और पूरे मामले की गहराई से जाँच की जाए।
सासाराम के एसपी रौशन कुमार ने भी कहा है कि डीएम स्तर से जाँच टीम का गठन किया जाएगा और रिपोर्ट आने के बाद जरूरी कार्रवाई की जाएगी।
छत्तीसगढ़ के बिलासपुर में धर्मांतरण को लेकर तनाव बना हुआ है। 13 सितंबर 2025 को प्रार्थना सभा में करीब 300 लोगों को ईसाई बनाने के लिए प्रार्थना सभा का आयोजन किया गया था। वहीं दुर्ग में भी धर्मांतरण के विरोध में हिन्दू संगठन सड़क पर आ गए।
बिलासपुर में प्रार्थना सभा में करीब 300 लोग मौजूद थे। इनलोगों का धर्मांतरण कराया जा रहा था। इस मामले में सीपत पुलिस ने 7 लोगों के खिलाफ केस दर्ज किया है। इसको लेकर ईसाईयों ने जमकर बवाल किया।
प्रार्थना सभा की आड़ में धर्मांतरण
हिन्दू संगठन ने भी धर्मांतरण के विरोध में करीब 10 घंटे तक प्रदर्शन किया। इस लोगों ने मसीही समाज के लोगों के खिलाफ कार्रवाई की माँग की है। हिन्दू संगठनों का कहना है कि लगातार प्रार्थना सभा की आड़ में हिन्दुओं को लालच और पैसे देकर धर्मांतरण कराया जा रहा है। इनलोगों ने ईसाईयत और पुलिस प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की।
हिन्दू संगठनों ने थाने के सामने हनुमान चालीसा का पाठ भी किया। पुलिस के मुताबिक, प्रार्थना सभा की आड़ में धर्मांतरण की सूचना मिली थी। इसके आधार पर पुलिस घटनास्थल पर पहुँची और 7 ईसाईयों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर वैधानिक कार्रवाई की जा रही है।
बिलासपुर में धर्मांतरण का ये कोई पहला मामला नहीं है। इससे पहले बीते 28 अगस्त 2025 को प्रार्थना सभा की आड़ में धर्मांतरण की कोशिश की जा रही थी। हिन्दू संगठनों को जानकारी मिलने पर वे मस्तूरी थाना क्षेत्र के पेंड्री पहुँचे। यहाँ एक बंद पड़े पोल्ट्री फॉर्म में 15-20 लोगों का धर्मांतरण किया जा रहा था। इसके लिए प्रार्थना सभा का आयोजन किया गया था। पुलिस ने इस मामले में पास्टर संजीव सूर्यवंशी समेत 8 लोगों को गिरफ्तार किया था।
दुर्ग में भी धर्मांतरण को लेकर तनाव
छत्तीसगढ़ के दुर्ग के पद्मनाभपुर में रविवार (14 सितंबर 2025) को चर्च में प्रार्थना सभा का आयोजन किया गया था। इसको लेकर आस पास के लोगों ने हिन्दू संगठनों को जानकारी दी कि यहाँ धर्मांतरण के लिए लोगों को जुटाया गया है। इसके बाद हिन्दू संगठन वहाँ पहुँच गए और चर्च के बाहर हंगामा किया। मौके पर पहुँची पुलिस ने प्रार्थना सभा में मौजूद लोगों के नाम और पता नोट किए। हिन्दू समुदाय ने इस दौरान चर्च के बाहर भजन-कीर्तन किया।
विवाद बढ़ने पर पुलिस ने दोनों पक्षों को थाने लेकर गई। हिन्दुओं का कहना है कि चर्च से जुड़े जॉन को धर्मांतरण के लिए बाहर से फंडिंग होती है। उसकी बैंक खातों की जाँच की जानी चाहिए। उसे जिला बदर किया जाना चाहिए। इनका कहना है कि जॉन ने अपने गुर्गों के साथ मिलकर मारपीट किया और गालियाँ दी।
इनलोगों ने बजरंग दल कार्यकर्ता निर्मित कौर को धक्का दिया। यहाँ तक की उसके कपड़े फाड़ दिए। इसके बाद जॉन को बजरंग दल के कार्यकर्ताओं ने पीटा। फिलहाल जॉन को नजदीक के अस्पताल में भर्ती कराया गया है।
उत्तर प्रदेश के देवरिया जिले में एक बड़े धर्मांतरण सिंडिकेट का खुलासा हुआ है, जिसकी तुलना छांगुर पीर के मामले से की जा रही है। इस सिंडिकेट का मुख्य सरगना उस्मान गनी बताया जा रहा है। वह SS मॉल और EG मार्ट का संचालक है।
SS मॉल का मालिक उस्मान गनी, उसकी बीवी तरन्नुम और साले गौहर अली पर उसी मॉल में काम करने वाली एक युवती ने धर्मांतरण और यौन शोषण के गंभीर आरोप लगाए थे। इस मामले में FIR दर्ज है, लेकिन अब तक कोई गिरफ्तारी नहीं हुई थी। वहीं, अब सामने आया है कि रविवार (14 सितंबर 2025) को उस्मान गनी और उसकी बीवी दोनों मॉल में ताला बंद कर फरार हो गए हैं।
फिलहाल पुलिस दोनों आरोपितों को गिरफ्तार करने के लिए जगह-जगह दबिश दे रही है। इसी बीच EG मार्ट का एक नया मामला सामने आया है। यहाँ काम करने वाले दाता त्रयनाथ मद्धेशिया नाम के कर्मचारी ने अपने पूरे परिवार के साथ इस्लाम धर्म कबूल कर लिया है। अब वह अब्दुल रहमान बन चुका हैं। इस बात की पुष्टि ग्राम प्रधान राम नारायण गुप्ता और एडवोकेट विजय तिवारी ने की है।
एक और खुलासे के तहत यह भी सामने आया है कि खुखुंदू थाना क्षेत्र के रहने वाले उमेश सिंह की बेटी लक्ष्मी सिंह को उस्मान गनी के साले गौहर अली ने बहलाकर निकाह किया और धर्म बदलवाकर उसका नाम सलमा रख दिया। इस मामले में गौहर अली को जेल भेज दिया गया है। लक्ष्मी के पिता का कहना है कि उनकी बेटी को गुमराह किया गया है और अब वह उसी का साथ दे रही है।
आरोप है कि ये लोग युवतियों को लग्जरी लाइफ का लालच देकर व्यापारियों को सप्लाई करते थे। वहीं अब पीड़ित परिवारों को धमकियाँ भी दी जा रही हैं। मामले में सदर विधायक शलभ मणि त्रिपाठी ने कहा है कि जिले में छांगुर पीर जैसे सिंडिकेट को पनपने नहीं दिया जाएगा।
उन्होंने जिला प्रशासन को सख्त कार्रवाई के आदेश दिए हैं और SS मॉल और EG मार्ट की जाँच की माँग की जा रही है। पिछले कुछ दिनों से लगातार खुलासों के बाद अब SS मॉल और EG मार्ट पर स्थानीय लोगों द्वारा भी जाँच की माँग उठाई जा रही है। विधायक के अनुसार, उस्मान गनी, उसकी बीवी और साले, सभी इस धर्मांतरण गिरोह में शामिल हैं और सुनियोजित तरीके से काम कर रहे हैं।