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लिपुलेख दर्रे के भारतीय क्षेत्र पर नेपाल ने ठोका दावा: क्या अमेरिकी डॉलर के दम पर आँखें दिखा रहा पड़ोसी देश, जानें विवाद का पूरा इतिहास

लिपुलेख दर्रे को लेकर विवाद एक बार फिर गरमा गया है। दिल्ली और बीजिंग लिपुलेख दर्रे के जरिए व्यापार को एक बार फिर शुरू करने पर सहमत हो गए हैं। इस पर नेपाल ने आपत्ति जताई है। नेपाल इसे ‘अपना क्षेत्र’ कह रहा है। लेकिन इसका न तो कोई ऐतिहासिक आधार है और न ही औचित्य।

दरअसल इसके पीछे अमेरिका है। नेपाल ने लिपुलेख विवाद को हाल ही में बढ़ाया है। अमेरिका ने हाल के वर्षों में उसे विदेशी सहायता उपलब्ध कराई है। नेपाल में उसका बोलबाला है।

क्या है लिपुलेख विवाद

लिपुलेख दर्रा एक त्रि-संधि क्षेत्र में स्थित है। यहाँ भारत, चीन और नेपाल की सीमा जुड़ी हैं। इस पर नेपाल और भारत दोनों अपना दावा करते हैं। नेपाल, लिपुलेख के साथ-साथ आस-पास के कालापानी और लिंपियाधुरा क्षेत्रों को अपने आधिकारिक मानचित्रों और संविधान में शामिल करता है और सुगौली संधि के अनुसार काली नदी को सीमांत क्षेत्र घोषित करता है।

2020 में, नेपाल ने एक राजनीतिक मानचित्र जारी करके कालापानी, लिंपियाधुरा और लिपुलेख को देश का हिस्सा दिखाया सीमा विवाद को पैदा किया था। भारत उस वक्त भी नेपाल के दावे का खंडन किया था और दावा किया था कि नदी का उद्गम नीचे की ओर है। इसलिए यह भूमि उत्तराखंड की है।

लिपुलेख को लेकर भारत और चीन के बीच ऐतिहासिक द्विपक्षीय समझौता है, जिसे हाल ही में नेपाल की आपत्तियों के बावजूद एक बार फिर सहमति बनी है। भारत का तर्क है कि नेपाल के दावों का कोई ऐतिहासिक और तथ्यात्मक आधार नहीं है। वह इस भूमि पर नियंत्रण बनाए रखते हुए बातचीत करना चाहता है।

यह समस्या अगस्त 2025 में फिर से शुरू हुई, क्योंकि भारत ने चीन के साथ लिपुलेख के माध्यम से व्यापार फिर से शुरू करने की घोषणा की। नेपाल ने उसी दिन आपत्ति जताई और इस क्षेत्र पर दावा किया।

भारत के तत्काल खंडन करते हुए इस बात पर जोर दिया कि ये दावे मनगढ़ंत और निराधार हैं। भारत और चीन को लिपुलेख मार्ग जोड़ता है, जो रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण है।

अमेरिकी आर्थिक मदद का नेपाल पर असर

लिपुलेख मुद्दे पर नेपाल के दावों के पीछे संयुक्त राज्य अमेरिका से जुड़े राजनयिक और वित्तीय सहायता को माना जा रहा है।

हालाँकि 2025 की शुरुआत में, संयुक्त राज्य अमेरिका ने नेपाल में USAID की मदद से चल रही प्रमुख विकास कार्यों को निलंबित कर दिया। इनमें करोड़ों डॉलर के स्वास्थ्य, कृषि और शिक्षा से जुड़े कार्यक्रम शामिल थे।

राष्ट्रपति ट्रम्प के पदभार ग्रहण करने के बाद इस सहायता राशि पर 90 दिनों के लिए रोक लगा दी थी, जिससे नेपाल में संचालित विभिन्न मानवीय कार्यक्रम और गैर-सरकारी संगठन प्रभावित हुए।

हालाँकि मिलेनियम चैलेंज कॉरपोरेशन (MCC) की करोड़ों डॉलर की परियोजनाएँ जारी रही। इस मदद को अमेरिका ने शर्तें लगा कर कूटनीतिक उपकरण की तरह इस्तेमाल किया और नेपाल को विवश किया।

लिपुलेख में तनाव बढ़ने के साथ ही, उसी महीने विकसित हो रहा रणनीतिक आर्थिक गठबंधन इन घटनाक्रमों पर भारी पड़ रहा था। हाल ही में अमेरिका की वित्तीय प्रौद्योगिकी कंपनी सुनो (Suno) ने नेपाल के सिद्धार्थ बैंक के साथ मिलकर बॉर्डरलेस बैंकिंग नामक एक अभिनव परियोजना की शुरुआत की है। इससे नेपाल-अमेरिका के आर्थिक रिश्ते और मजबूत हुए हैं।

अमेरिकी राजदूत डीन आर.थॉम्पसन भी इस मौके पर वहाँ मौजूद थे। इस परियोजना का फायदा अमेरिका में रहने वाले नेपालियों को भी होगा। अमेरिका में रहने वाले नेपाली बिना उड़ान भरे नेपाल में खाते खोल सकते हैं, और वे सुरक्षित और अधिक किफायती तरीके से पैसे भेज सकते हैं।

राजदूत थॉम्पसन के अनुसार, बॉर्डरलेस बैंकिंग कार्यक्रम से अमेरिका-नेपाल संबंध को मजबूती मिली है। साथ ही दुनिया भर में नेपाली समुदायों का फायदा हुआ है। वास्तव में ये डिजिटल बैंकिंग को “वास्तव में सीमा-रहित” बना रहा है। उन्होंने आशा व्यक्त की कि अमेरिकी फिनटेक कंपनियाँ और नेपाली बैंक साइबर सुरक्षा और फिनटेक के क्षेत्रों में और अधिक मजबूती से मिलकर काम कर सकते हैं, जिससे उनके द्विपक्षीय आर्थिक संबंध और मजबूत होंगे।

एनएमबी बैंक के साथ मिलकर, नेपाल ने अप्रैल 2025 में अमेरिका से संबद्ध संगठनों इंटरनेशनल फाइनेंस कॉरपोरेशन (आईएफसी), ब्रिटिश इंटरनेशनल इन्वेस्टमेंट (बीआईआई) और मेटलाइफ के साथ 60 मिलियन डॉलर का ऐतिहासिक ग्रीन बॉन्ड समझौता किया।

इस समझौते का उद्देश्य नेपाल में निजी क्षेत्र का विकास और निरंतर विकास पर केन्द्रित है। इससे रोजगार पैदा करने और ग्रीन टेक्नोलॉजी को बढ़ावा मिलेगा।

क्षेत्रीय कूटनीति के साथ समन्वय

नेपाल विदेश व्यापार संघ के एक प्रतिनिधिमंडल ने 28 अगस्त 2025 को द्विपक्षीय व्यापार और आर्थिक संबंधों को बेहतर बनाने के तरीकों पर चर्चा करने के लिए बांग्लादेश के दूत से मुलाकात की। यह मुलाकात नेपाल में बांग्लादेश के राजदूत द्वारा नेपाल के प्रमुख नीतिगत थिंक टैंक, नेपाल आर्थिक मंच के अध्यक्ष सुजीव शाक्य से मुलाकात के एक दिन बाद हुई थी। यह दक्षिण एशियाई आर्थिक माहौल में सीमा विवाद के बावजूद क्षेत्रीय संपर्क बढ़ाने के लिए काठमांडू की सक्रिय भूमिका को दर्शाता है।

इसके अलावा इसी समय पेकिंग विश्वविद्यालय के शैक्षणिक प्रतिनिधिमंडलों ने बेल्ट एंड रोड पहल पर सहयोग को बढ़ाने के लिए बांग्लादेश और नेपाल की यात्रा की। यह इस क्षेत्र में चीन के निरंतर रणनीतिक, सांस्कृतिक और आर्थिक प्रभाव को दर्शाता है, जो अमेरिका और भारत के संबंध में नेपाल के कार्यों को आंशिक रूप से प्रभावित करता है।

अमेरिका से प्रभावित है नेपाल की नीति

इन घटनाओं के क्रम और समय से ये समझा जा सकता है कि लिपुलेख के मुद्दे पर नेपाल का रुख अमेरिका से प्रभावित है। वाशिंगटन, यूएसएआईडी पहलों को रोकने और फिर से शुरू करने के दौरान बारगेन कर नेपाल के राजनीतिक और कूटनीतिक रुख को प्रभावित कर रहा है।

साथ ही, बांग्लादेश और चीन के साथ नेपाल के क्षेत्रीय कूटनीतिक जुड़ाव उसके रणनीतिक संबंधों में विविधता लाने के एक सुनियोजित प्रयास का संकेत देते हैं, जिसका उद्देश्य आंशिक रूप से भारत और चीन के क्षेत्रीय प्रभुत्व को संतुलित करना है।

ऐसा लगता है कि अमेरिका सामरिक रूप से अहम नेपाल में अपनी उपस्थिति को मजबूत कर रहा है और उसकी शह पर नेपाल लिपुलेख जैसी भारत से जुड़े विवाद पर आक्रामक रुख अपना रहा है।

नेपाल की बढ़ती बाहरी सहायता के विपरीत, जिसे संभवतः अमेरिकी कूटनीतिक और आर्थिक सहयोग से सुगम या प्रोत्साहित किया गया है, भारत द्विपक्षीय वार्ता के माध्यम से सीमा विवादों को सुलझाने पर जोर देता है।

नेपाल के लिपुलेख पर किए दावों को अमेरिका मजबूत कर रहा है, ताकि चीन, भारत और नेपाल से जुड़े इस सीमा क्षेत्र को विवादित बनाया जा सके और भारत-नेपाल संबंधों को तनावपूर्ण बनाया जा सके।

(यह लेख मूल रूप से अंग्रेजी में लिखा गया है। इसे पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करें)

‘द बंगाल फाइल्स’ विवाद में पल्लवी जोशी ने राष्ट्रपति को लिखा पत्र, फिल्म को रोकने के लिए TMC के राजनीतिक दबाव और धमकियों का किया जिक्र: डायरेक्टर विवेक अग्निहोत्री ने माँगी सुरक्षा

फिल्म ‘द बंगाल फाइल्स’ की निर्माता पल्लवी जोशी ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को पत्र लिखकर फिल्म की रिलीज और टीम की सुरक्षा की माँग की है। उन्होंने आरोप लगाया कि पश्चिम बंगाल में तृणमूल कॉन्ग्रेस (TMC) के राजनीतिक दबाव और धमकियों के कारण मल्टीप्लेक्स फिल्म दिखाने से डर रहे हैं। कई FIR दर्ज हुईं, ट्रेलर ब्लॉक किया गया और थिएटर मालिकों को धमकी मिल रही है।

The Bengal Files फिल्म के निर्देशक विवेक रंजन अग्निहोत्री ने गुरुवार (4 सितम्बर 2025) को अपने इंस्टाग्राम अकाउंट पर यह पत्र साझा किया। यह पोस्ट चर्चा का विषय बन गया है क्योंकि इसमें फिल्म की रिलीज को रोकने के पीछे राजनीतिक दबाव और धमकियों का मुद्दा उठाया गया है।

पत्र की शुरुआत में पल्लवी जोशी ने स्पष्ट किया कि यह पत्र किसी विशेष सुविधा के लिए नहीं, बल्कि केवल सुरक्षा और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के लिए लिखा गया है। उन्होंने लिखा कि द बंगाल फाइल्स भारत के इतिहास के एक दर्दनाक अध्याय हिंदू नरसंहार और विभाजन की त्रासदियों को सामने लाती है।

उनके अनुसार यह केवल एक फिल्म नहीं, बल्कि सच की आवाज है, जिसे जनता तक पहुँचाना जरूरी है। पल्लवी जोशी ने पत्र में आरोप लगाया कि पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ने पहले ही फिल्म का विरोध किया था और उसके बाद से इस पर राजनीतिक दबाव लगातार बढ़ रहा है।

कई पुलिस FIR दर्ज हो चुकी हैं, ट्रेलर ब्लॉक कर दिया गया है और थिएटर मालिकों को धमकियाँ दी जा रही हैं, जिससे वे फिल्म दिखाने से डर रहे हैं। उनका कहना है कि यह सब फिल्म की रिलीज रोकने की कोशिश का हिस्सा है।

उन्होंने आगे बताया कि उनका परिवार भी इन धमकियों से प्रभावित हो रहा है। इसलिए उन्होंने राष्ट्रपति से निवेदन किया है कि फिल्म और इससे जुड़े कलाकारों को सुरक्षा प्रदान की जाए ताकि सत्य की आवाज दब न सके।

पत्र में उन्होंने इस बात का भी उल्लेख किया कि पद्म भूषण से सम्मानित अभिनेता विक्टर बनर्जी समेत कई बंगाली संगठनों ने पहले ही राष्ट्रपति को पत्र लिखकर फिल्म का समर्थन किया है। इससे यह साबित होता है कि सच के पक्ष में खड़े लोग मौजूद हैं, लेकिन राजनीतिक दबाव अब भी सबसे बड़ी बाधा है।

विवेक अग्निहोत्री ने इस पत्र को साझा करते हुए इसे ‘तत्काल अपील’ बताया। अपने कैप्शन में उन्होंने राष्ट्रपति से मामले में हस्तक्षेप करने और संवैधानिक अधिकारों की रक्षा करने का आग्रह किया।

उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय गृह मंत्रालय, सूचना और प्रसारण मंत्रालय और केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव को भी टैग किया, ताकि यह मुद्दा जल्द सुलझाया जा सके और फिल्म बंगाल में रिलीज हो पाए।

हिन्दुओं नरसंहार था ‘डायरेक्ट एक्शन डे’

यह फिल्म 1946 में अविभाजित बंगाल में हुई हिन्दू नरसंहार को दर्शाती है। इसमें 1946 का डायरेक्ट एक्शन डे और 1946 का ही नोआखली दंगा शामिल है। ये नरसंहार 5 दिनों तक चला था। कोलकत्ता में ही सिर्फ 72 घंटों में करीब 6000 हिन्दू मार दिए गए थे।

इस मजहबी दंगे में करीब 20,000 से अधिक लोग गंभीर रूप से घायल हुए। 100000 लोगों को अपना सबकुछ छोड़कर पलायन करना पड़ा। हिंदुओं को चुन-चुन कर मारा गया, हिन्दू महिलाओं के साथ बलात्कार किया गया, हिंदुओं की संपत्तियों को जला दिया गया।

पूर्वी बंगाल के नोआखाली में हिन्दुओं का कत्लेआम इतिहास में काले अक्षरों में दर्ज है। ये कई महीनों तक चलता रहा। इस दौरान हजारों हिन्दुओं की हत्या कर दी गई।

एक अनुमान के मुताबिक करीब 75 हजार हिन्दुओं ने सिर्फ नोआखली में घर- बार छोड़ा जबकि टिप्परा से 20 हजार से ज्यादा लोग अपना सबकुछ छोड़ कर चले गए। फिल्ममेकर विवेक अग्निहोत्री ने बताया कि फिल्म हिन्दुओं के नरसंहार पर आधारित है और इसमें उस इतिहास को दिखाया गया है जिसको अब तक दबा कर रखा गया था।

बता दें कि 1946 में बंगाल में हुए ‘डायरेक्ट एक्शन डे’ के नाम से हिन्दुओं के नरसंहार को सामने लाने जा रही फिल्म के डायरेक्टर विवेक रंजन अग्निहोत्री हैं। बंगाल की टीएमसी सरकार इस फिल्म को रोकने का प्रयास कर रही है। इसके लिए पश्चिम बंगाल के कई शहरों में विवेक अग्निहोत्री के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई गई है। ये फिल्म 5 सिंतबर 2025 को रिलीज होने वाली है। इसे रोकने के लिए टीएमसी ने पूरा जोर लगा दिया है। पश्चिम बंगाल के मल्टीप्लेक्स ने इस फिल्म को दिखाने से मना कर दिया है।

हिंदुओं के देवी-देवता होते हैं नकली…उन्हें मानोगे तो नर्क में जाओगे: अलवर के मिशनरी हॉस्टल में 50+ गरीब बच्चों का हो रहा था ब्रेनवॉश, 2 गिरफ्तार

राजस्थान के अलवर जिले में एक ईसाई मिशनरी हॉस्टल पर धर्म परिवर्तन के आरोप में बुधवार (3 सितंबर 2025) की शाम को पुलिस ने छापा मारा। हॉस्टल के बच्चों ने बताया कि उनसे कहा जाता था, “अगर भगवान को मानोगे तो नर्क में जाओगे, आग में जलाए जाओगे।” इस मामले की शिकायत विश्व हिंदू परिषद और बजरंग दल की ओर से की गई थी।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, जब पुलिस मौके पर पहुँची तो हॉस्टल में भगदड़ मच गई। वहाँ मौजूद 50 से ज्यादा बच्चे डर के मारे 10 फीट ऊँची दीवार फाँदने लगे। पुलिसकर्मियों को बच्चों को नीचे उतारने और शांत करने में काफी मशक्कत करनी पड़ी। वे बच्चों को समझाते रहे, “डरो मत, हम तुम्हारे लिए आए हैं, नीचे आ जाओ।” कुछ बच्चे रोने लगे और डर के कारण चीखने भी लगे।

हॉस्टल के कर्मियों पर गंभीर आरोप

हॉस्टल में रह रहे 6 से 17 साल की उम्र के बच्चों ने पुलिस को बताया कि उन्हें भगवान को मानने से रोका जाता है। कहा जाता था, “अगर भगवान को मानोगे तो नर्क में जाओगे, आग में जलाए जाओगे।” केवल बाइबल पढ़ने के लिए मजबूर किया जाता था। हिंदू देवी-देवताओं को नकली बताया जाता था।

बच्चों ने कहा, “फादर मूर्ति और क्रॉस को पानी में डालकर अंतर दिखाते थे और कहते थे, देखो, तुम्हारा भगवान डूब गया, वो तुम्हें कैसे बचाएगा?” बच्चों ने बताया कि उन्हें पढ़ाई और रहने का खर्चा मुफ्त देने का लालच दिया गया। मौत और नर्क का डर दिखाकर ईसाई धर्म की बातें सिखाई जाती थी।

एक प्रत्यक्षदर्शी ने बताया कि सिल्वा चरण नामक शख्स यहाँ पर 16 वर्ष से ईसाई मिशनरी के रूप में काम कर रहा है और वो गरीब बच्चों का धर्मांतरण कराता है। धार्मिक शिक्षा के नाम पर सुबह और शाम हॉस्टल में बच्चों से हिंदू देवी-देवताओं की बुराई कर धर्म परिवर्तन की बात कही जाती है।

पुलिस की कार्रवाई

पुलिस ने मौके से अहमदाबाद निवासी अमृत और अलवर के सोनू रायसिख को गिरफ्तार किया है। हॉस्टल से ईसाई धर्म से जुड़ी किताबें और धार्मिक सामग्री भी जब्त की गई हैं।

हॉस्टल का संचालन ‘नया जीवन संस्था’ द्वारा किया जा रहा है, जिसका मुख्यालय तमिलनाडु में है। हॉस्टल में अलवर, हनुमानगढ़ और दिल्ली के बच्चे रहते हैं जो अलग-अलग स्कूलों में पढ़ते हैं।

बच्चों ने बताया कि उन्हें साल में 3000 रुपए देने होते हैं और बाकी सारा खर्च संस्था उठाती है। यह मामला धार्मिक स्वतंत्रता, बच्चों की मानसिक सुरक्षा और कानून व्यवस्था से जुड़ा बेहद संवेदनशील विषय बन गया है। पुलिस अब पूरे मामले की जाँच कर रही है और आगे की कानूनी कार्रवाई की तैयारी में है।

झूठे केस में कई साल बर्बाद, नौकरी गई, जमा-पूँजी खत्म… दिल्ली दंगा केस में जिन निर्दोष हिंदुओं को खानी पड़ी जेल की हवा, उन लोगों ने बताई आपबीती

2020 के दिल्ली दंगे में कई निर्दोष हिंदू नागरिकों को बिना सबूत और सही जाँच के दंगों में फँसाया गया। इन आरोपों के आधार पर पुलिस ने कई गिरफ्तारियाँ कीं, लेकिन बाद में अदालत ने यह स्पष्ट किया कि ये मामले झूठे थे और पुलिस ने बिना ठोस सबूत के आरोपितों को फँसाया।

कड़कड़डूमा कोर्ट ने इन लोगों को 25 अगस्त 2025 को बरी कर दिया, लेकिन इन निर्दोष हिंदू लोगों का जीवन हमेशा के लिए प्रभावित हो गया। किसी को ब्लैकलिस्ट कर दिया गया, किसी को एक के बजाय 4 केस में अपराधी बना दिया, तो किसी की जमा-पूँजी केस लड़ते-लड़ते खत्म हो गई।

नौकरी गई, लाखों खर्च हुए, जीवन बर्बाद हुआ

दैनिक भास्कर की रिपोर्ट के अनुसार, 29 वर्षीय ईशु गुप्ता एक प्राइवेट बैंक कर्मचारी थे, जो 2020 में दंगों से जुड़े मामले में गिरफ्तार हुए थे। उनकी गिरफ्तारी के बाद न केवल उनकी बैंक की नौकरी चली गई, ब्लैकलिस्ट हो गए और पूरा करियर भी बर्बाद हो गया। ईशु गुप्ता बताते हैं कि जेल में रहते हुए जिंदगी उलट-पुलट हो गई, कहीं नौकरी नहीं मिली। इस झूठे केस को लड़ते-लड़ते लाखों रुपए खर्च हो गए। ईशु गुप्ता ने बताया कि पुलिस उनके अलावा 10 और लोग चाहती है। पुलिस ने ईशु को धमकाते हुए कहा कि सभी केस में फँसा दूँगा।

इसके अलावा, 31 वर्षीय प्रेम प्रकाश भी इसी दंगे में निर्दोष पाए गए थे। प्रेम प्रकाश ने बताया कि उन्हें दंगों में शामिल होने का आरोप लगाकर 4 महीने तक जेल में बंद रखा। पुलिस ने बिना जाँच-परख कई केस बना दिए। लेकिन कोर्ट में कोई सबूत तक नहीं दे पाए। इस केस में उनके 3 लाख से ज्यादा खर्च हुए।

दिल्ली दंगे केस में एक अन्य निर्दोष हिंदू मनीष शर्मा है, जिन्हें कोर्ट ने बरी किया था। मनीष शर्मा ने बताया कि पुलिस ने बिना कुछ बताए गिरफ्तार किया। इसके बाद 1 साल तक वे जेल में बंद रहे। पुलिस ने दिल्ली दंगों को सही साबित करने के लिए झूठी कहानी गढ़ी थी।

वकीलों की राय: पुलिस की लापरवाही और जाँच प्रक्रिया में खामियाँ

वकील प्रवीण यादव और अशोक कुमार का मानना है कि दिल्ली पुलिस ने जानबूझकर गरीब और कमजोर लोगों को निशाना बनाया था। वकील ने बताया कि पुलिस को सब पता था कि इन लोगों के पास न तो पर्याप्त साधन हैं और न ही कोई ताकत, इसलिए इन्हें आसानी से फँसाया जा सकता था। अशोक कुमार ने भी कहा कि अगर पुलिस सही तरीके से जाँच करती तो इतने निर्दोष लोग सालों तक जेल में नहीं होते।

इसी मसले में पुलिस ने जितने गवाह और सबूत कोर्ट में पेश किए थे वो विरोधाभास पाए गए। कोर्ट ने हेड कॉन्स्टेबल विकास की गवाही को भी बेबुनाद बताया। कोर्ट ने कहा कि पुलिस की मदद करने के लिए आरोपितों को पहचानना सही नहीं है। कोर्ट ने पुलिस के खिलाफ कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा कि इस तरह की जाँच से कानून और न्याय व्यवस्था पर लोगों का विश्वास कमजोर होता है।

अलीगढ़ में SC-ST एक्ट का इस्तेमाल कर चंद्रावती एंड फैमिली ने वसूली ₹46 लाख की रकम, मुआवजे के लिए 10 साल में कराए 15 फर्जी केस: NCW ने की सख्त कार्रवाई की माँग

उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ से एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है। जिले के हस्तपुर गाँव की रहने वाली चंद्रावती देवी और उनके परिवार पर आरोप है कि उन्होंने अनुसूचित जाति (SC) के लिए बनाई गई सरकारी योजनाओं का गलत फायदा उठाकर करीब 46 लाख रुपए की रकम हड़प ली।

क्या है मामला?

दैनिक भास्कर की रिपोर्ट के अनुसार, पुलिस का कहना है कि पिछले 10 सालों में चंद्रावती देवी और उनके परिवार के खिलाफ 15 अलग-अलग केस दर्ज किए गए हैं। इनमें से कई मामले SC/ST (अत्याचार निवारण) एक्ट, 1989 के तहत दर्ज हुए हैं।

इस कानून के तहत, पीड़ितों को आर्थिक सहायता और कानूनी सुरक्षा दी जाती है। आरोप है कि चंद्रावती और उनका परिवार बार-बार झूठे केस दर्ज कर इन योजनाओं का लाभ उठाता रहा और अब तक करीब 46 लाख रुपए की रकम हासिल कर चुका है।

राष्ट्रीय महिला आयोग की सख्ती

राष्ट्रीय महिला आयोग (NCW) की सदस्य डॉ अर्चना मजूमदार ने इस पूरे मामले को गंभीर मानते हुए, राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग (NCSC) के अध्यक्ष किशोर मकवाना को पत्र लिखा है। उन्होंने इस मामले की गहन जाँच और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की माँग की है। आयोग ने सभी दस्तावेज और पुलिस रिपोर्ट्स भी NCSC को सौंप दी हैं।

जानिए क्या कहता है कानून?

SC/ST एक्ट का दुरुपयोग करने पर कड़ी सजा का प्रावधान है। यदि कोई व्यक्ति झूठा मुकदमा दर्ज कराता है या सरकारी मदद लेता है, तो उसे 6 महीने से 7 साल तक की जेल और जुर्माना हो सकता है। इसके अलावा, यदि वित्तीय धोखाधड़ी साबित होती है, तो उस पर भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 के तहत कार्रवाई हो सकती है, जिसमें 7 साल की सजा और संपत्ति जब्ती भी शामिल है।

इस घटना से स्थानीय लोगों में भी आक्रोश है। मामले में आगरा निवासी रामवीर सिंह ने कहा, “जो लोग झूठे मामलों के जरिए पैसा लेते हैं, वे असली गरीब और दलित परिवारों का हक छीनते हैं।” सामाजिक कार्यकर्ता राजेश कुमार ने बताया कि ये कोई पहला मामला नहीं है। 2018 में भी अलीगढ़ में ऐसा ही एक मामला सामने आया था, जहाँ एक दलित परिवार ने झूठे केस से 3 लाख रुपए मुआवजा लिया था।

NCSC अब इस मामले की जाँच करेगा। आयोग को सिविल कोर्ट जैसी शक्तियाँ प्राप्त हैं, जैसे किसी को बुलाना, दस्तावेज मँगवाना और शपथ पर पूछताछ करना। अध्यक्ष किशोर मकवाना पहले भी SC योजनाओं के दुरुपयोग पर सख्त रुख अपना चुके हैं।

यह मामला सिर्फ एक गाँव तक सीमित नहीं है, बल्कि यह पूरे देश में SC/ST योजनाओं के दुरुपयोग की गंभीरता को उजागर करता है। विशेषज्ञों और सामाजिक कार्यकर्ताओं का कहना है कि सरकार को योजनाओं की सख्त निगरानी और सत्यापन प्रक्रिया अपनानी चाहिए, ताकि वास्तव में जरूरतमंद लोगों तक मदद पहुँचे और धोखेबाजों पर लगाम लग सके।

झारखंड में कॉन्ग्रेस के पूर्व मंत्री ने दलित कॉन्स्टेबल को थप्पड़ जड़कर कहे जातिसूचक शब्द, SC-ST एक्ट में FIR दर्ज; जाम में गाड़ी फँसने से नाराज थे केएन त्रिपाठी

झारखंड के मंत्री रहे कॉन्ग्रेस नेता कृष्णानंद त्रिपाठी ने अपने दलित बॉडीगार्ड को थप्पड़ मारा और गालियाँ दी। बात सिर्फ इतनी थी कि लातेहार के जाम में पूर्व मंत्री और उनका काफिला फँस गया था और बॉडीगार्ड के रूप में कार्यरत कॉन्स्टेबल उनकी गाड़ी निकलवाने में असफल रहा। इससे नेताजी को गुस्सा आ गया और उन्होंने बॉडीगार्ड को थप्पड़ जड़ दिया और जातिसूचक शब्द कहे।

पीड़ित कॉन्स्टेबल रविन्द्र रिकियासन के मुताबिक, 3 सितंबर दोपहर करीब 1.30 बजे जब वह पूर्व मंत्री के साथ लातेहार से जा रहा था, तो रास्ते पर भारी भीड़ थी। उन्हें कार से उतर कर जाम हटाने के लिए कहा गया। ये जाम जनजातियों के महापर्व करमा के जुलूस की वजह से लगा था। इस पर्व में जनजातीय समुदाय के लोग ढोल- नगाड़ों के साथ सड़कों पर नाचते-गाते निकलते हैं। इसकी वजह से सड़क पर काफी भीड़ हो गई थी।

ट्रैफिक पुलिस पहले से ही इसे दुरुस्त करने में लगी हुई थी। लेकिन भीड़ नियंत्रित नहीं हो पा रही थी। इससे नाराज होकर पूर्व मंत्री के एन त्रिपाठी निकले और बॉर्डीगार्ड को थप्पड़ मार दिया। इतना ही नहीं कॉन्स्टेबल रिकियासन को ‘आदिवासी’ और ‘हरिजन’ जैसे जातिसूचक शब्द कह कर अपमानित किया।

आमतौर पर ऐसा होता है कि कोई नेता जब जाम में फँसते हैं, तो उनके बॉडीगार्ड समेत ट्रैफिक पुलिस जाम को हटाने में लग जाती है। यहाँ भी ऐसा हुआ, लेकिन भीड़ ज्यादा थी इसलिए इसमें वक्त लग रहा था।

घटना के खिलाफ कॉन्स्टेबल ने डालटेनगंज नगर थाना में एफआईआर दर्ज कराई है। थाना प्रभारी ज्योति लाल राजवार के मुताबिक, एफआईआर एससी/ एसटी एक्ट 1989 के तहत दर्ज की गई है।

हालाँकि पूर्व मंत्री त्रिपाठी ने इसे ‘बदले की भावना’ से की गई कार्रवाई कहा है। उनका दावा है कि उन्होंने किसी के साथ बदसलूकी नहीं की है, बल्कि गाड़ी से उतर कर खुद रास्ता खाली कराने में मदद की।

लातेहार पुलिस मेंस एसोसिएशन ने घटना की कड़ी निंदा की है और राज्य के पुलिस महानिदेशक को खत लिख कर कॉन्स्टेबल को न्याय देने की माँग की है। एसोसिएशन का कहना है कि ये वर्दीधारी पुलिस की गरिमा पर हमला है। पत्र में सीसीटीवी फुटेज के आधार पर साक्ष्य जुटाने और निष्पक्ष जाँच कर दोषी के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की माँग की गई है।

चीन से किम जोंग उन का जूठा गिलास ले गए अधिकारी, जिस कुर्सी पर बैठा था डिक्टेटर उसकी भी की सफाई: क्यों विदेश में अपना DNA नहीं छोड़ते हैं नेता

उत्तर कोरिया के तानाशाह किम जोंग उन की एक वीडियो इन दिनों काफी चर्चा में है, जिसमें उनकी टीम उनके इस्तेमाल किए हुए गिलास, कुर्सी और आसपास की हर चीज को बड़े एहतियात से साफ करती दिख रही है। यह सब चीन में उनकी पुतिन के साथ मुलाकात के बाद हुआ।

दरअसल, यह पहली बार नहीं है- किम हर विदेश यात्रा में अपने साथ पर्सनल टॉयलेट, सिगरेट बट कलेक्टर और क्लीनिंग स्टाफ लेकर चलते हैं ताकि उनका DNA या जैविक सबूत किसी और के हाथ न लग जाए। ऐसा ही कुछ रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की अलास्का यात्रा के दौरान भी देखा गया था। इस सबका मकसद है ‘DNA को हथियार बनने से रोकना।’

किम जोंग की ‘साफ-सफाई टीम’ की नई क्लिप

हाल ही में सामने आए एक वीडियो में साफ देखा गया कि बीजिंग में पुतिन से मुलाकात के बाद किम के स्टाफ ने कमरे की पूरी सफाई की। उनके पीने का गिलास एक ट्रे में ले जाया गया, कुर्सी की पीठ, आर्मरेस्ट और साइड टेबल को कपड़े से पोंछा गया।

रूसी रिपोर्टर अलेक्जेंडर युनाशेव ने बताया कि ‘किम के जाने के बाद उनकी टीम ने हर उस जगह को साफ किया, जहाँ उनके DNA का कोई अंश रह सकता था। दरअसल, ये एक सोची-समझी रणनीति है ताकि कोई भी देश उनके स्वास्थ्य से जुड़ी निजी जानकारी हासिल न कर पाए। यही वजह है कि जब वो किसी होटल में रुकते हैं तो उनके बाल, थूक या उंगलियों के निशान तक साफ किए जाते हैं।

हर दौरे में साथ होता है किम का टॉयलेट

किम अपने हर वाहन में एक निजी शौचालय रखते हैं और यहाँ तक कि जब वे किसी फैक्ट्री या सैन्य प्रतिष्ठान का दौरा करते हैं तो उनके लिए एक खास बाथरूम भी तैयार किया जाता है। इसके अलावा, उनकी टीम हर उस चीज को इकट्ठा कर लेती है, जिसे किम ने छुआ होता है। 2019 में जब वे हनोई गए थे, तो उनकी टीम ने सिगरेट के बचे हुए टुकड़ों और यहाँ तक कि इस्तेमाल की हुई माचिस की तीलियों को भी संभाल कर रखा था।

उनका मानना है कि इन चीजों में मौजूद लार या दूसरे जैविक पदार्थ से उनकी सेहत के बारे में पता लगाया जा सकता है। यहाँ तक कि वे दस्तावेज़ों पर दस्तखत करते समय भी अपनी ही कलम का इस्तेमाल करते हैं, ताकि उनके फिंगरप्रिंट न लिए जा सकें। जब वे किसी होटल में रुकते हैं, तो उनके सहायक उनके कमरे के हर सामान को साफ करते हैं, उनके बाल और लार जैसी हर चीज़ को हटा देते हैं ताकि कोई उनके DNA के नमूने न ले सके।

DNA से खतरा: सिर्फ बीमारी नहीं, ब्लैकमेलिंग का जरिया भी

आज के दौर में DNA से जुड़ी जानकारी बहुत शक्तिशाली साबित हो सकती है। हालाँकि, वैज्ञानिकों का मानना है कि DNA से किसी व्यक्ति को सीधे तौर पर नुकसान पहुँचाना या उस पर हमला करना अभी संभव नहीं है। लेकिन, DNA के ज़रिए किसी व्यक्ति के स्वास्थ्य से जुड़ी गोपनीय जानकारी जैसे – कोई आनुवंशिक बीमारी या कमजोरी का पता लगाया जा सकता है। यह जानकारी बाद में ब्लैकमेल या राजनयिक दबाव बनाने के लिए इस्तेमाल की जा सकती है।

यही वजह है कि दुनिया के बड़े नेता, जैसे जर्मन चांसलर फ्रेडरिक मेर्ज़ और फ्रांसीसी राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रॉन भी, जब रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से मिले तो उन्होंने रूस की तरफ से दिए गए कोरोना टेस्ट को करवाने से मना कर दिया था। ऐसा इसलिए किया गया ताकि उनके नाक के स्वैब के जरिए उनका DNA रूस के हाथ न लगे।

हालाँकि, इस बारे में कोई पुख्ता सबूत नहीं हैं कि रूस या कोई और देश DNA का इस्तेमाल जासूसी या ब्लैकमेलिंग के लिए करता है, लेकिन इस तरह की आशंकाएँ मौजूद हैं। जानकारों का कहना है कि यह सब राष्ट्रीय सुरक्षा के लिहाज से एक नया मैदान है, जहाँ जैविक जानकारी एक नया हथियार बन सकती है। यह सब दिखाता है कि आने वाले समय में DNA की सुरक्षा एक बड़ा मुद्दा बन सकता है।

पुतिन की सीक्रेट ‘पूप सूटकेस’ डिप्लोमेसी

इससे पहले 15 अगस्त 2025 को अलास्का में हुई बैठक के दौरान पुतिन ने अपना मल एक पूप सूटकेस में इकट्ठा करवाया, जिसे बाद में रूस वापस लाया गया। और 2017 में भी फ्रांस यात्रा के दौरान ऐसा ही किया गया था। उनके स्वास्थ्य के बारे में अफवाहें और विदेशी ताकतों के द्वारा स्वास्थ्य जानकारी लीक होने का डर, पुतिन को यह कदम उठाने के लिए मजबूर करता है।

यह सुरक्षा प्रोटोकॉल सालों से चल रहा है। 1999 में राष्ट्रपति बनने के बाद से पुतिन हर यात्रा में अपने मल को इकट्ठा कर रूस वापस ले जाते हैं, ताकि किसी भी विदेशी देश में उनका स्वास्थ्य सम्बंधित जानकारी न पहुँच सके। पुतिन का स्वास्थ्य कई बार चर्चा में रहा है और उनके बारे में थायराइड कैंसर, पार्किंसोन और दिल के दौरे जैसे कई कयास लगाए गए हैं।

500 से ज्यादा हिंदुओं का बदलवाया धर्म, विदेश से मिली फंडिंग: आगरा में धर्मांतरण रैकेट चला रहे पादरी का स्टिंग ऑपरेशन आया सामने, कहता था- ‘देवी-देवता शैतान, स्वर्ग का मालिक है ईसा मसीह’

उत्तर प्रदेश के आगरा के शाहगंज इलाके में ईसाई बनाने कराने वाले पादरी राजकुमार लालवानी समेत 8 लोगों को पुलिस ने मंगलवार (2 सितंबर 2025) को हिरासत में लिया था। पादरी और उसकी गैंग के कारनामों का खुलासा स्टिंग ऑपरेशन से हुआ है। उसके जो वीडियोज सामने आए हैं वो चौंकाने वाले हैं। वीडियो में वह महिलाओं से कह रहा है कि फायदा चाहिए तो वे सिंदूर लगाना छोड़ दें।

राजकुमार लालवानी हिंदू देवी-देवताओं का अपमान करता था और लोगों पर ईसाई धर्म अपनाने का दबाव डालता था। वह कहता था, “अपने घर से देवी-देवताओं की मूर्तियाँ हटा दो। तुम शैतानों की पूजा कर रहे हो। इस स्वर्ग का मालिक केवल ईसा मसीह हैं।” वह महिलाओं से कहता था, “अगर तुमको फायदा चाहिए तो बिछुए, मंगलसूत्र और सिंदूर छोड़ दो।”

कैसे हुआ खुलासा?

आरोपित पादरी राजकुमार लालवानी के घर के पास रहने वाले घनश्याम हेमलानी नामक व्यक्ति ने राजकुमार का स्टिंग ऑपरेशन किया। उनकी पत्नी राधा पेट दर्द से परेशान थी, जिसे कुछ महिलाएँ सत्संग के बहाने राजकुमार के घर ले गईं। वहाँ राजकुमार ने उससे हिंदू धर्म से जुड़ी चीजें छुड़वा दीं और कहा, “तुम्हारी परेशानी की वजह तुम्हारे देवी-देवता हैं। ईसा मसीह को मानोगी तो सब ठीक होगा।”

घनश्याम का कहना है, “इसके बाद उसने पत्नी का सिर पकड़कर उसने घुमाना शुरू कर दिया। पत्नी से पूछा कि किन-किन धार्मिक स्थलों पर होकर आई हो। उन्होंने बताया कि उज्जैन, वैष्णो माता होकर आए हैं। इसके बाद राजकुमार ने पत्नी के हाथ से कलावा और गले से मंगलसूत्र उतरवा दिया।”

घनश्याम हेमलानी ने बताया, “उसने पूछा कि तुम्हारे घर में किस-किस की पूजा होती है? पत्नी ने राजकुमार को बताया कि हम हिंदू देवी-देवताओं की पूजा करते हैं। इस पर उसने कहा कि अपने घर से देवी-देवताओं की मूर्तियाँ हटा देना। इन्हीं वजह से तुम परेशान हो।” राजकुमार ने घनश्याम की पत्नी से कहा कि प्रभु ईसा मसीह को माना करो और उनकी प्रार्थना किया करो।

घनश्याम की पत्नी ने इसकी जानकारी पति को दी। इसके बाद एक रविवार को वह भी राजकुमार लालवानी के घर के बाहर जा कर खड़ा हो गया। अंदर जाने से पहले उनकी तलाशी ली गई। घनश्याम ने कहा, “मेरे पास मोबाइल था, उन्होंने इसे घर पर रखकर आने के लिए कहा। थोड़ी देर बाद मैं फिर लौटकर आया। इस बार मैंने मोबाइल फोन छुपा लिया था। देखा तो अंदर धर्मांतरण के लिए लोगों पर दबाव बनाया जा रहा था।”

घनश्याम ने मोबाइल से चुपचाप कुछ तस्वीरें लीं। इसके बाद वह वहाँ से चले गए। कुछ दिन बाद उन्होंने यह तस्वीरें कैबिनेट मंत्री योगेंद्र उपाध्याय को दिखाईं तो उन्होंने इस मामले में और सबूत इकट्ठा करने के लिए कहा।

घनश्याम ने बताया “वे बोलते थे कि ये जो तुम कलावा बाँध रहे। टीका लगा रहे हो, ये सब शैतानों की पूजा है। घर से मूर्ति हटाओ, मंदिर हटाओ। इस स्वर्ग का मालिक ईसा मसीह है। ईसा मसीह को जो माने वह खुश रहेगा, उसे सारी सुविधाएँ मिलेंगी।”

पुलिस की कार्रवाई

घनश्याम ने ये सारे सबूत कैबिनेट मंत्री योगेंद्र उपाध्याय को दिखाए। इसके बाद पुलिस एक्टिव हुई। शाहगंज पुलिस ने एक महीने तक जाँच की और दो महिला पुलिसकर्मियों को सादे कपड़ों में धर्मसभा में भेजा, जहाँ उन पर भी धर्म बदलवाने का दबाव बनाया गया।

इसके बाद मंगलवार (2 सितंबर 2025) को पुलिस ने रेड मारकर 8 लोगों को गिरफ्तार कर लिया। गिरफ्तार लोगों में राजकुमार लालवानी, अनूप कुमार, कमल कुंडलानी, जयकुमार, अरुण और 3 महिलाएँ शामिल हैं।

खुलासे में पता चला कि राजकुमार को विदेश से फंडिंग मिल रही थी। उसने अब तक 500 से ज्यादा लोगों को हिंदू धर्म छोड़ने पर मजबूर किया था। उसने 5 साल पहले मुंबई के उल्लासनगर में ईसाई धर्म अपनाया था और वहाँ से लौटकर आगरा में यह काम शुरू किया।

यूँ ही नहीं बाढ़ से बेहाल हुआ पंजाब…जब करनी थी तैयारियाँ तब दिल्ली चुनाव में जुटी थी भगवंत मान सरकार, नजरअंदाज की मौसम विभाग की चेतावनी; अब केंद्र से माँग रहे पैसा

पंजाब इस वक्त बाढ़ की भीषण मार से जूझ रहा है। दावा किया जा रहा है कि यह पिछले 37 वर्षों की सबसे भयावह बाढ़ है। राज्य के सभी 23 जिले इस भीषण बाढ़ की चपेट में हैं। अब तक 37 लोगों की मौत हो चुकी है और 3.5 लाख से अधिक लोग इससे प्रभावित हैं।

बाढ़ की भयावहता का अंदाजा इस बात से भी लगाया जा सकता है कि 1,650 से ज्यादा गाँव पानी में डूब गए हैं। 1,75,286 हेक्टेयर फसल बाढ़ से प्रभावित है। घर-मकान ढहे जा रहे हैं और इलाके झील में बदल गए हैं। वहीं, हालातों से निपटने के लिए राज्य में NDRF की 22 टीमें तैनात की गई हैं और सेना भी मदद में जुटी हुई है।

पंजाब विधानसभा के स्पीकर कुलतार सिंह संधवां ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर इस बाढ़ को राष्ट्रीय आपदा घोषित करने और विशेष राहत पैकेज जारी करने की माँग की है। कुलतार सिंह ने केंद्र से 60,000 करोड़ रुपए का फंड तुरंत जारी करने की अपील की है। वहीं, मुख्यमंत्री भगवंत मान ने केंद्र से माँग की है कि फसल के नुकसान पर ₹50,000 प्रति एकड़ मुआवजा दिया जाना चाहिए।

AAP सरकार की नाकामी बनी आफत की वजह

पंजाब की बाढ़ लोगों पर आफत बनकर टूटी है लेकिन इसकी जितनी जिम्मेदार कुदरत है, उनकी ही सत्तारूढ AAP भी है। बीते फरवरी में जब बाढ़ की तैयारियों के लिए AAP पंजाब के नेताओं को बैठकें करनी थी तब वे दिल्ली के विधानसभा चुनावों में जुटे हुए थे।

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, पंजाब सरकार की लापरवाही के चलते बाढ़ की तैयारियों से जुड़ी पहली बैठक 5 जून को हुई और AAP सरकार को तैयारी के लिए केवल 17 दिनों का वक्त मिला। 22 जून को राज्य में मॉनसून ने दस्तक दे दी है।

एक वरिष्ठ अधिकारी ने इंडियन एक्सप्रेस को बताया कि 2,800 किलोमीटर धुसी बाँध की मरम्मत और नालों की सफाई के लिए सरकार ने 117 करोड़ रुपए जारी किए लेकिन यह टाइमलाइन व्यावहारिक नहीं थी। उन्होंने कहा, “30 जून की समय-सीमा अवास्तविक थी।”

इससे पहले बाढ़ की तैयारियों के लिए फरवरी और मार्च में बाढ़ नियंत्रण बैठकें आयोजित जाती थीं। अधिकारी ने कहा, “मौसम विभाग ने भारी बारिश की चेतावनी जारी की थी लेकिन सरकार ने उसे नजरअंदाज कर दिया। दो वर्ष पहले ही राज्य ने भीषण बाढ़ झेली थी।”

पूर्व मंत्रियों ने भी उठाए AAP पर सवाल

पूर्व सिंचाई मंत्री जनमेजा सिंह सेखों ने कहा, “प्रकाश सिंह बादल के कार्यकाल में, बैठकें अप्रैल या मई में होती थीं। जब भारी बारिश का अनुमान था, तो उन्होंने फ़रवरी में भी बैठकें बुलाईं। वित्तीय वर्ष की शुरुआत में ही धनराशि जारी कर दी जाती थी और सभी काम 30 जून तक पूरे करने होते थे।” सेखों ने दावा किया कि माधोपुर हेडवर्क्स में 28 में से केवल 4 गेट ही चालू थे क्योंकि उनकी मरम्मत नहीं हुई थी।

कॉन्ग्रेस के पूर्व जल संसाधन मंत्री सुखबिंदर सिंह सरकारिया ने कहा, “इससे पहले फरवरी में मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में सभी उपायुक्तों की उपस्थिति में बैठकें होती थीं। हमने 100 करोड़ रुपए जारी किए थे और यह पर्याप्त था। आज, वे 200 करोड़ रुपए खर्च होने का दावा करते हैं लेकिन मुझे कोई काम नजर नहीं आता।”

रिपोर्ट के मुताबिक, NHAI ने सड़क परियोजनाओं के लिए सरकार से गाद माँगी थी लेकिन उन्हें मना कर दिया गया। वहीं, एक पूर्व चीफ इंजीनियर अमरजीत सिंह दुल्लत ने माधोपुर हेडवर्क्स की गड़बड़ी को लेकर कहा कि अपने इंजीनियरों को भरोसा करने के बजाय निजी कंपनी को रिपोर्ट के लिए 23 लाख दिए गए। दुल्लत ने कहा, “117 करोड़ रुपए जारी किए होंगे लेकिन कोई काम नजर नहीं आया।”

हालाँकि, जल संसाधन मंत्री बरिंदर कुमार गोयल ने मरम्मत का काम पूरा किए जाने का दावा किया है। वहीं, एक इंजीनियर ने बाढ़ के लिए नदियों के अपना रास्ता बदलने को जिम्मेदार ठहराया है।

पंजाब में हालात खराब हैं और अब तमाम सरकारी एजेंसियाँ, NGO और लोग प्रभावितों को राहत पहुँचाने में जुटे हुए हैं। प्रधानमंत्री मोदी ने पंजाब के मुख्यमंत्री से बात की है। केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान भी जायजा लेने जा रहे हैं। अगर पंजाब सरकार ने वक्त रहते तैयारियाँ की होतीं, चुनाव में हार-जीत से पहले लोगों को महत्व दिया होता तो हालात आज ऐसे नहीं होते।

GST में अब 5% और 18% के स्लैब; लग्जरी और हानिकारक चीज़ों पर 40% कर, इंश्योरेंस पर टैक्स खत्म… पीएम मोदी ने जताई खुशी, कहा- आम लोगों का जीवन होगा बेहतर

हाल ही में हुई GST (वस्तु एवं सेवा कर) काउंसिल की 56वीं बैठक में कई बड़े और अहम फैसले लिए गए, जिनका सीधा फायदा आम लोगों को मिलेगा। पहले जीएसटी में चार प्रमुख स्लैब थे– 5%, 12%, 18% और 28%। अब इसे घटाकर दो मुख्य स्लैब कर दिए गए हैं– 5% और 18%। सिर्फ कुछ खास और महँगे सामानों पर ही 40% टैक्स लगेगा।

ये वो चीजें हैं जिन्हें ‘सिन गुड्स’ या ‘डेमेरिट गुड्स’ कहा जाता है, जैसे तंबाकू, पान मसाला, सिगरेट और बहुत महँगी गाड़ियाँ। सरकार का मकसद था कि आम आदमी पर टैक्स का बोझ कम हो और कारोबार करना आसान हो जाए।

क्या है ये 40% स्लैब?

इस नई व्यवस्था के बाद, अब जीएसटी में सिर्फ दो मुख्य स्लैब होंगे- 5% और 18%। इससे पहले 5%, 12%, 18% और 28% जैसे कई स्लैब थे, जिससे चीजों के दाम तय करने में काफी उलझन होती थी।

अब एक 40% का विशेष स्लैब भी बनाया गया है। 40% का स्लैब हर किसी पर नहीं लगेगा। ये सिर्फ उन चीजों के लिए है जो सेहत या समाज को नुकसान पहुँचा सकती हैं या फिर बेहद लग्ज़री हैं। जैसे – बड़ी गाड़ियाँ, शराब, तंबाकू प्रोडक्ट्स, पान मसाला। इसके अलावा सट्टेबाजी, कैसिनो, जुआ, घुड़दौड़, लॉटरी और ऑनलाइन गेमिंग पर भी 40% GST लागू होगा। सरकार चाहती है कि लोग इन चीजों का कम इस्तेमाल करें, इसलिए इन पर ज्यादा टैक्स लगाया गया है। हेलीकॉप्टर और नौकाएँ भी 40% की श्रेणी में आएँगी।

इन सारे फैसलों के पीछे सरकार का फोकस आम आदमी की जिंदगी आसान बनाना है। छोटे व्यापारियों को अब रजिस्ट्रेशन और रिफंड जैसी प्रक्रियाएँ आसान होंगी। स्वास्थ्य, खेती और छोटे उद्योगों को राहत देने के लिए खास ध्यान दिया गया है। सरकार को उम्मीद है कि इस फैसले से देश की अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी और महँगाई में राहत मिलेगी।

इंश्योरेंस पर अब जीएसटी नहीं, रोजमर्रा की चीजें भी सस्ती

GST काउंसिल ने एक और बड़ा फैसला लिया, जिससे हर परिवार को फायदा होगा। अब किसी भी तरह के लाइफ इंश्योरेंस या हेल्थ इंश्योरेंस पर जीएसटी नहीं लगेगा। चाहे टर्म प्लान हो, एंडोवमेंट पॉलिसी हो या हेल्थ इंश्योरेंस, सभी पर GST हटा दिया गया है। सीनियर सिटिजन और फैमिली फ्लोटर पॉलिसी पर भी अब कोई टैक्स नहीं लगेगा। इससे मिडिल क्लास, बुजुर्ग और युवाओं को सीधी राहत मिलेगी।

इसके साथ ही, रोजमर्रा की इस्तेमाल होने वाली कई चीजों पर भी GST घटा दिया गया है। जैसे– हेयर ऑयल, साबुन, शैम्पू, टूथपेस्ट, बर्तन, रसोई का सामान, साइकिल वगैरह पर अब सिर्फ 5% टैक्स लगेगा। वहीं, पनीर, छेना, दूध, रोटी, पिज्जा बेस, खाखरा जैसी चीजें अब टैक्स फ्री होंगी। AC, टीवी, वॉशिंग मशीन जैसे इलेक्ट्रॉनिक सामान पर टैक्स 28% से घटाकर 18% कर दिया गया है। छोटी गाड़ियाँ और 350cc से कम इंजन वाली बाइक्स पर भी अब 18% टैक्स लगेगा। ये सभी फैसले 22 सितंबर 2025 से लागू हो जाएँगे, जिससे महँगाई कुछ हद तक कम होने की उम्मीद है।

प्रधानमंत्री मोदी ने भी इन सुधारों पर खुशी जताई है, यह कहते हुए कि ये फैसले आम नागरिक, किसानों, छोटे और मध्यम उद्योगों और युवाओं के जीवन को बेहतर बनाएँगे। कुल मिलाकर, ये GST सुधार एक बड़ा कदम हैं, जो देश की अर्थव्यवस्था के लिए स्थिरता और विकास का रास्ता खोलेंगे।